Thursday, 1 January 2026

महाभारत को धर्मयुद्ध क्यों कहा गया था Mahabharat (महाभारत) Scene B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत आप जो भी कहेंगे मैं सर झुका करर मान लूंगा आप दादाश्री होने के अतिरिक्त मेरे मार्गदर्शक भी हैं और शास्त्रों के अनुसार मार्गदर्शक ही पहला गुरु होता है फिर तो तुम्हें गुरु दक्षिणा देनी होगी वत्स कहिए तो अपने प्राण निकालकर आपके चरणों में रख दूं मैं वचन देता हूं गुरु दक्षिणा में आप जो भी मांगेंगे मैं आपको दूंगा नहीं बर्बरिक नहीं वचन नहीं देना पुत्र वचन नहीं देना वो तो मैं दे भी चुका हूं दादा श्री तुम तुम इस वचन का अर्थ नहीं जानते हो पुत्र दादा श्री वचन का अर्थ बस एक ही होता है जो एक बार दे दिया उसे निभाना धर्म है जिस तरह धनुष से निकला हुआ वाण मुख से निकला हुआ शब्द वापस नहीं लिया जा सकता उसी तरह वचन देकर वापस नहीं लिया जा सकता दादा श्री मैं आपकी गुरु दशना देने के लिए व्याकुल हूं हमें नहीं केशव नहीं नहीं कहिए श्री आप कुछ कहने जा रहे थे आप चुप क्यों हो [संगीत] गए व्स और तुम्हारा सर चाहिए [संगीत] लो [संगीत] पत्र अपने धर्म का पालन [संगीत] करो [संगीत] आज से तुम महावीर बरबरी नहीं महात्मा बरबरी कहलाओगे तुमने अपना सर देकर अपने वंश का मस्तक ऊंचा कर [संगीत] दिया मजले भैया इन्हे कुरुक्षेत्र के समीप किसी ऊंची पहाड़ी पर रखने की व्यवस्था की [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] जाए [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ह [संगीत] ह [संगीत] [संगीत] महाभारत महाभारत महाभारत महा महा रा

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