[संगीत] महा गंगापुत्र इतनी रात गए दास राज को गुरु पुत्र देवव्रत का प्रणाम दास राज के घर में यह जो आपकी कृपा का चांद निकला तो इस घर की रात दिन में बदल गई परंतु युवराज ने सूर्योदय की प्रतीक्षा क्यों नहीं की मैं हस्तिनापुर राज्य के सूर्य की ओर से चिति होकर आपकी सेवा में आया हूं दाश राज आप मुझे यह बताएंगे कि यहां और हमारे पड़ाव के बीच पिता महाराज कहां खो गए आप फिर आए तो यह बैठने का समय नहीं है दाश राज कृपया आप मुझे पिता महाराज के विषय में कुछ बताएं वे मेरी पुत्री सत्यवती से विवाह करना चाहती तो फिर रुकावट क्या है क्या पिता महाराज का हृदय और हस्तिनापुर का राजमहल आपको देवी सत्यवती के लिए छोटा दिखाई दे रहा है यह आपने क्या कह दिया पुत्र तो फिर बस एक रुकावट है गंगापुत्र और व रुकावट है क्या सत्यवती की भाग्य रेखा कहती है कि उसका पुत्र राज करेगा और यही एक वचन महाराज ने नहीं दिया यह वचन दे ही नहीं सकते थे दसराज मैं समझा नहीं कुमार उन्हे तो यह वचन देने का अधिकार ही नहीं था दसराज राजा को वचन देने का अधिकार नहीं उसके बाद राजा कौन होगा अधिकार है परंतु पिता महाराज उस अधिकार का प्रयोग कर चुके हैं कोई राजा एक ही वस्तु या पदवी को दो व्यक्तियों को तो नहीं दे सकता ना दास राज आपने पिता महाराज के धर्म संकट को समझने का प्रयत्न ही नहीं किया तो आप समझा दीजिए हस्तिनापुर का राज सिंहासन व मुझे दे चुके हैं व राज सिंहासन उनके बाद मेरा होने वाला है और मेरे रहते हुए वे राज सिंहासन किसी और को दे दे यह तो असंभव होगा ना दाश राज यह तो घोर अन्याय हो जाएगा हां मैं यदि चाहूं तो व राज सिंहासन किसी को दे सकता हूं इसलिए मैं आपको यह वचन देता हूं कि हस्तिनापुर का राज सिंहासन देवी सत्यवती और पिता महाराज के ज्येष्ठ पुत्र को ही मिलेगा आप धन्य है गंगापुत्र और आपके चरणों की धूली पाकर मेरा घर भी धन्य हो गया धन्य है वो देश जिसमें आप जैसा महापुरुष और आदर्श पुत्र जन्मा अपने पिता की प्रसन्नता का दाम अपने भाग्य से चुकाना हर व्यक्ति के बस की बात नहीं नहीं दास राज नहीं जो हो रहा है वह भाग्य रेखा के अनुसार ही हो रहा है यदि हस्तिनापुर की राजगद्दी मेरे भाग्य में होती तो देवी सत्यवती की भाग्य रेखा उसका विरोध क्यों करती भाग्य रेखाए कभी एक दूसरे को नहीं काटती दाश राज इसलिए मैं देवी सत्यवती की भाग्य रेखा को प्रणाम करता हूं और अब यदि आप आज्ञा दे तो मैं उन्हें अपने साथ ले जाऊ परंतु गंगापुत्र अब ये कौन सा परंतु है दाश जिसने सर्प के समान का लिया जिस प्रकार महाराज को आपकी ओर से कोई वचन देने का अधिकार नहीं था उसी प्रकार आपको भी अपने वंशज की ओर से कोई वचन देने का अधिकार नहीं है यदि आपकी संतान ने हस्तिनापुर के राज सिंहासन पर अधिकार का प्रश्न उठाया तो उसका परिणाम क्या होगा गंगा पुत्र आपकी यह आशंका आधार ही नहीं इसलिए मैं इस अजगर का मुंह भी कील देता हूं हां मैं अपनी संतान की ओर से कोई वचन देने का अधिकारी नहीं परंतु मैं संतान हीन रहने का अधिकारी तो हूं दाश राज इसलिए मैं गंगापुत्र देवव्रत चारों दिशाओं धरती और आकाश को साक्षी मानकर आज यह प्रतिज्ञा करता हूं कि आजीवन ब्रह्मचारी रहूंगा जीवन भर विवाह नहीं करूंगा वंश हीन ही जिऊंगा और वंश हीन ही मरूंगा यह मेरी अखंड प्रतिज्ञा है [संगीत] चंद्र े सूरज तरे डिगे अडिग हिमवंत देव व्रत का भीष्म व्रत रहे अखंड अनंत हस्तिनापुर नरेश की जय हो मैं न्याय मांगने आई हूं महाराज तुम्हें न्याय अवश्य मिलेगा राजकुमारी महाराज गंगापुत्र भीष्म ने सारे राजाओं महाराजाओं और राजकुमारों को हराकर मुझे जीत लिया था परंतु मैं शर्व नरेश को पहले ही अपना पति स्वीकार कर चुकी थी इसीलिए आपकी आज्ञा के अनुसार मुझे शाल नरेश के पास भेज दिया गया परंतु शाल नरेश ने दान में मिली हुई अंबा को स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया हस्तिनापुर की सेनाएं राजकुमारी के अपमान का बदला लेने के लिए शीघ्र ही शाल की ओर प्रस्थान करेंगी पर शाल नरेश ने क्या किया है महाराज जो हस्तिनापुर की सेना उधर प्रस्थान करेंगी मैं अपमानित हुई हूं गंगापुत्र भीष्म के कारण य आप क्या कह रही है राजकुमारी राधा भीष्म तो किसी का अपमान कर ही नहीं सकते मैं किसी और के विषय में बात नहीं कर रही हूं महाराज मैं अपने विषय में बात कर रही हूं अपमान मेरा हुआ है इसलिए मैं ही बता सकती हूं कि मेरा अपमान किसने किया है मेरा अपमान किया है गंगापुत्र भीष्म ने य मुझे शाल नरेश के पास भेजते और ना ही मेरा इतना बड़ा अपमान होता इसलिए गंगापुत्र भीष्म को आदेश हो कि अपने क्षत्रीय धर्म का पालन करते हुए मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें की जय हो परंतु मैं प्रतिज्ञाबद्ध हूं महाराज मैं विवाह कर ही नहीं सकता विवाह नहीं कर सकते तो काशी से य लाए क्यों मैंने तो काशी दरबार में यह घोषणा कर दी थी कि मैं केवल हस्तिनापुर का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं मेरा हरण ऐसे समय में किया गया था महाराज जब मेरे हाथ में वरमाला थी मेरी बहनों ने आपको स्वीकार किया परंतु मैं आपको स्वीकार नहीं करती अब मैं वो माला गंगापुत्र भीष्म के गले में डालना चाहती हूं यह संभव नहीं है देवी क्यों संभव नहीं है क्योंकि मैंने ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की है घायल नागिन घायल शेरनी और अपमानित स्त्री से डरना सीखो गंगा पुत्र तुम वचन बद्ध हो इसलिए मेरे अपमान के घाव पर मान का फाया नहीं लगा सकते तो आज इसी गुरु राज दरबार में हस्तिनापुर नरेश को साक्षी मानते हुए मैं भी प्रतिज्ञाबद्ध होती हूं गंगापुत्र भीष्म मैं तुम्हें अपने अपमान के लिए कभी क्षमा नहीं करूंगी चाहे इसके लिए मुझे जन पर जन् क्यों ना लेने पड़े तुम्हारी मृत्यु का कारण बनकर मैं अपने इस अपमान का बदला अवश्य [संगीत] लूंगी क्र सर पणी बन गई सुंदर उपवन बेल दोष किसी का क्या भला भाग्य खिलाए खेल ऐसा ना कहिए पिता श्री परंपरा अनुसार वरमाला मेरे हाथों में है यह निर्णय लेना मेरा अधिकार है कि मेरा विवाह किससे होगा क्या आप मुझसे मेरा वह अधिकार भी छीन लेना चाहते हैं गंधारी मैं अपने पिता गंधार नरेश अपने भाई राजकुमार शकुनी तात श्री भीष्म और शंकर भगवान को साक्षी मानकर राजकुमार धृत राष्ट्र को अपना वर चुनती हूं गांधारी पुत्री अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है पिताश्री गुरु राजकुमार धृत राष्ट्र को अपना पति मानना गौरव की बात है सौभाग्य की बात है सौभाग्य की बात इसलिए है कि यदि मेरा सौंदर्य चला भी जाए तब भी मेरे लिए वैवाहिक जीवन में कोई उथल पुथल नहीं होगी क्योंकि गुरु राजकुमार धृतराष्ट्र मुझे मेरे शारीरिक सौंदर्य के आधार पर स्वीकार नहीं कर रहे हैं [संगीत] ताजी यह क्यों गांधारी यह आवश्यक है ता श्री मुझे आशीर्वाद दीजिए परंतु गांधारी क्या पत्नी का यह करते हुए नहीं कि वह अपने पति के दुख को समझे मैंने आज से अपने जीवन को उसी अंधकार में लपेट लिया है जिस अंधकार में कुरु राजकुमार धृतराष्ट्र का जीवन लिपटा हुआ है मैं इस प्रकाश को इस जीते जागते पृथ्वी लोक को क्यों देखूं जिसका वे अनुभव नहीं कर सकते पत्नी की भाग्य रेखा को तो पति की भाग्य रेखा से ही निकलना चाहिए ना ता धन्य हो सौभाग्यवती भवा चत पुत्रवती भव परंतु यह प्रतिज्ञा भी भीष्म है गांधारी हर वरदान हर आशीर्वाद से बड़ी इसलिए केवल सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दे रहा हूं यदि तुम्हारी यही इच्छा है पुत्री तो मेरा आशीर्वाद भी लेती जाओ भगवान सदैव तुम्हें सुखी रखे गंगापुत्र आप चलकर विवाह की तैयारियां की गांधारी अपने भाई शकुनी के साथ हस्तिनापुर पहुंच जाएगी [संगीत] धन्यवाद इस संसार के सारे क्षत्रिय सुने वो क्षत्रिय भी सुने जो अ इस संसार में नहीं है और वो क्षत्रिय भी सुने जो इस संसार में आने वाले हैं मैं जो कहने जा रहा हूं ना मुझसे पहले किसी ने ऐसा कहा है ना कोई मेरे पश्चात ऐसा कहेगा मैं पांडु पुत्र भीम यह घोषणा करता हूं कि जब तक रणभूमि में इस दुशासन की छाती चीन कर इसके लह नहीं पी लूंगा अपने पूर्वजों को अपना मुह नहीं [संगीत] दिखाऊंगा तुम नहीं तुम नहीं सिंधु नरेश तुम मेरे पुत्र के शव को हाथ नहीं लगाओगे प्रिय अनुज तुम मैं अपने वीर पुत्र के शव का अपमान नहीं सन कर सकता बताश आप इस व्यक्ति को पहचान नहीं रहे हैं यह हमारा तास चत्र है जिसे आपने एक दिन मुक्ति दान दिया था और आज यह मेरे पुत्र की हत्या का कारण बना महादेव की सौगंध यदि सूर्यास्त नहीं हो चुका होता तो मैं इस कायर को यही मार डालता जयद्रथ तुम कल का सूर्यास्त नहीं देखोगे और यदि तुमने कल सूर्यास्त देखा तो मैं अग्नि समाधि ले लूंगा महाभारत महा भारत महाभारत [संगीत] महाभारत महाभारत
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