[संगीत] महाभारत क्षमा चाती [संगीत] हूं ओ भैया आप वहां क्यों खड़े हैं [संगीत] यह दासी कब आई एक वर्ष हो गया खिया रही है बेचारी महारानी द्रौपदी की प्रसाद का थी चलो द्रौपदी को नहीं देखा तो उसकी प्रसाद का को ही देख लिया इसके सौंदर्य में तो अग्नि की लपट है बहन निकट से गई तो एक आंच सी लगी भैया मैं सच कह रहा हूं सुना यह अग्नि तो बुझानी पड़ेगी उसकी की शालीनता देखी दासिया ऐसे नहीं चलती यह तो देवियों के चलने की शैली है तुमने इसे दासी बनाकर इसके साथ बड़ा अन्याय किया है इससे कहो कि आकर मेरा भवन संभाले मेरे रोकने से तो आप रुकने वाले हैं [संगीत] नहीं और सरंद तुम यहां क्या बैठी हो इस वाटिका में खिले हुए यह सारे फूल तो तुम्हारे नूतन सौंदर्य से चल रहे होंगे सुदेशना भला तुम्हारे सौंदर्य को क्या मान सम्मान दे सकती है तुम्हारे इस मुखड़े के दर्शन कर ले ने के उपरांत अब मैं पूर्णमासी के चंद्रमा की ओर कभी नहीं देखूंगा उसने निसंदेह तुम्हारे इस उज्जवल मुखड़े से भिक्षा में चांदनी पाई होगी तुम सर्री तो नहीं हो सकती हां तुम कमल पर बैठी हुई श्री अवश्य हो सकती हो तुम प्रेम की देवी रति अवश्य हो सकती हो अर्जुन और कण जैसे धनर धर भी तुम्हारे नैनों के बाणों का सामना नहीं कर सकते ये वाण उनकी छाती भी छेद कर उनके हृदय में उतर जाएंगे कामदेव के बाणों से घायल इस योद्धा पर दया करो मेरी कामना की तपती भूमि पर सावन बनकर परस जाओ सुंदरी तुम स्त्री नहीं हो तुम तो सौंदर्य का हस्ताक्षर हो तुम्हारे लिए मैं सारी पत्नियों को त्याग दूंगा उन्हें तुम्हारी दासिया बना दूंगा हे महारथी मैं तो केवल एक सरेंद्र हूं एक साधारण से प्रसाद का मैं सम्मान के योग्य नहीं मनीषी वही है हे महायोधा जो अपने वैवाहिक जीवन की खींची हुई लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन ना करे धर्मानुसार दूसरों की पत्नी का आदर करना चाहिए और मां और बहनों की भाति उनकी रक्षा की ओर ध्यान देना चाहिए मैं भी एक बहाता हूं मेरे सर पर मर्यादा की ओड़नी है और सेनापति होने के नाते उस ओनी की रक्षा करना आपका कर्तव्य है मैं यह सब जानता हूं किंतु तुम्हे पाने के लिए मैं अपने धर्म को त्याग सकता हूं और तुम्हें तुम्हारे धर्म के हाथों से छीन सकता हूं मुझे अस्वीकार करके तुमने अच्छा नहीं किया सर्री मैं यहां का राजा नहीं हूं परंतु इस राज्य की राजनीति की नदी मेरी भुजाओ से निकलती है आप स्वयं अपने जीवन के शत्रु क्यों बन रहे सेनापति कीचक मैं सर्री अवश्य हूं परंतु असहाय नहीं हूं अनाथ नहीं हूं पांच शूरवीर मेरे मान सम्मान और मेरे शरीर के रक्षक है मैं पांच गंधर्व महावीर की पत्नी हो और यदि उन्हे इसकी भनक भी मिल गई कि आपने इस वाटिका में रोककर मेरा यु अपमान क्या है तो मेरी महारानी को आपके शफ पर रोना पड़ेगा मेरा निवेदन सुनिए अपनी मृत्यु को आमंत्रित ना कीजिए मैंने आपकी बहन का नमक खाया है मैं उनके भाई की मृत्यु का कारण नहीं बनना चाहती मेरी प्रतिष्ठा मेरा सतीत्व एक पर्वत है और यदि आप इससे टकराएंगे तो उस पर्वत का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा किंतु आप कर्ण कर्ण होकर बिगड़ जाएंगे [संगीत] [संगीत] भैया प्रिय बहन सुदेशना यदि तुम यह चाहती हो कि मैं जीवित रहूं तो अपनी सर्री को समझाओ कि वह मुझे स्वीकार कर ले क्योंकि यदि उसने ऐसा नहीं किया तो मैं आत्महत्या कर लूंगा हे बीरन वह मेरी शरण में है सररी के विषय में ऐसा सोचकर मुझे लज्जित ना करो यदि तुम्हें अपने जीवन से और अपनी बहन से प्रेम है तो अपने हृदय से इस भावना को यूं निकाल फेंको जैसे किसी मिथ्या चारी दास को घर से निकाल दिया जाता है तुम्हारी इस भूल का परिणाम सारे परिवार को भुगतना पड़ेगा तो यह है अपने भाई लिए तुम्हारा स्नेह मैं पाप और पुण्य धर्म और अधर्म का अंतर जानती हूं भैया परंतु तुम मेरे भाई हो मैं तुम्हें त्याग भी नहीं सकती नरक के इस मार्ग पर मैं तुम्हारे साथ चलूंगी ठीक है मैं अपने भवन में उसकी प्रतीक्षा करूंगा [संगीत] महारानी की जय हो मैं तुम्हें ही बुलवाने वाली थी आदेश कीजिए तनिक मेरे भैया के भवन तक चली जाओ वो महाराज के लिए कोई अच्छी मदिरा लाए हैं वो ले आओ वे मेरे भ्राता हैं सर्री मुझे याद है महारानी परंतु कदाचित आप यह भूल गई हैं कि मैं एक पत्नी हूं मदीना लाने के लिए किसी और दासी को भेज दीजिए मैं तुम्ही को भेजना चाहती हूं जो आज्ञा किंतु परिणाम के उत्तरदाई आप [संगीत] होंगे जब मन बे बस हो करे कोई अनुचित काम तब उसको ना दिखता क्या होगा [संगीत] परिणाम इस प्रकार चैन से सोने वाले सर्वश्रेष्ठ कथा धर धन्य हो तुम जिस शूरवीर की पत्नी का अपमान हुआ हो उसे इसी प्रकार सोना शोभा देता यदि तुम स्वयं अपना शव नहीं हो तो उठो यदि जेष्ठ भ्राता ने ना रोक दिया होता तो मैं वही उस राज सभा में उसको यूं चीर डालता जैसे आरी लकड़ी को चीर डालती है तुम्हारे बड़े भैया तो रोक देने में निपुण है वे तो केवल पाजा फेंकने वाले अपने हाथ को नहीं रोक पाते मैं तुमसे केवल यह पूछने आई हूं कि तुम लोग कब तक मेरे इस अपमान के दृश्य को यूंही चुपचाप देखते रहोगे और सन करते रहोगे हे कुति पुत्र मुझे एक कारण तो बता कि मैं क्यों जीवित र और यदि तुम चाहते हो कि मैं जीवित रहू तो एक विशाल हाथी की भाति उस कीड़े को कुचल दो जिसका नाम है कीचक और जिसके हाथों ने तुम्हारी पत्नी के वस्त्र तक पहुंचने का साहस किया है यदि उसने कल का सूर्योदय देख लिया तो तुम्हारी पांचाली कल का सूर्यास्त नहीं देखेगी [संगीत] मेरा दुख समझो कुंती पुत्र भीम यह महारथी महावीर पांडवों की पटरानी द्रौपदी का दुख है मेरे उन महावीर पतियों की दशा तो देखो उनकी गर्दन में भारी पत्थरों से कहीं अधिक भारी धर्मराज युधिष्ठिर के पासों का बोझ है और वो अपमान के गहरे समुद्रों में डूबे पड़े हैं पांचाली पांचाली मेरी बात सुनो नहीं आज तुम मेरी बात सुनो मैं वो अभागिन हूं जिसके पांच पतियों ने अग्नि को साक्षी मानकर उसकी रक्षा की प्रतिज्ञा की थी कहां है वह प्रतिज्ञा धिक्कार है मेरे बाहुबल पर धिक्कार है अर्जुन के गांधी पर किंतु दुर्योधन की जंगा तोड़ने और तुम्हारे केशों के लिए दुशासन की छाती का लहू लाने के लिए हमारे अज्ञातवास का सफल होना आवश्यक है यही कारण है कि बड़े भैया ने राजसभा में मुझे रोक दिया तो क्या तुम यह कहना चाहते हो कि मेरे इस अपमान का विष तुम चुपचाप पी जाओगे यदि तुम चाहती हो कि वो कल का सूर्योदय होता नहीं देखे तो कीचक कल का सूर्य उदय होता नहीं देखेगा तुम कीचक से कहो कि तुम उस पर मोहित हो गई हो किंतु अपने गंधर्व पतियों से डरती हो इसलिए वह आज रात तुमसे नृत्यशाला में मिलने आए मैं वही उसका मृत्यु से परिचय करवा दूंगा इसलिए अब तुम जाओ तुम्हें कोई मेरे साथ देख ना [संगीत] ले [संगीत] रे सरे मा पा हमारे [संगीत] ने [संगीत] सा नैनों के दर्पण में छवि मनोहर सावरिया [संगीत] की नैनों के दर्पण में छवि मनोहर सांवरिया की नैनों के दर्पण में छवि [संगीत] मनोहर सांवरिया की सांवरिया की सांवरिया की सावरिया की मोरे पिया की और [संगीत] दर्पण में छवि [संगीत] मनोहर दर्पण में छवि मन मनोहर सावरिया [संगीत] की रुक क्यों गई सर्री गाओ तुम तो गायन में भी निपुण हो हे महारथी आप इस असहाय के जीवन के शत्रु क्यों बने हुए हैं मेरे गंधर्व पति आपका तो कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे परंतु मुझे जीता नहीं छोड़ेंगे यही तो कारण है कि मैं आपको देखकर अपने होठों तक आते हुए मुस्कान को भी पीछे धकेल देती हूं पता नहीं यहां भी कौन उनका गुप्तचर हो और जाकर लगा दे तुम उनसे बिल्कुल ना डरो मैं उनका वद कर दूंगा मेरे मन की बात सुनो हम लोग छिप के मिला करेंगे किसी को कानो कान पता भी ना चले हमारे प्रेम का यदि आप यह मान ले तो मैं आपकी हो जाऊंगी तुम्हें अपना बनाने के लिए मैं कुछ भी मान सकता हूं तो फिर आज रात नृत्यशाला में आइए मैं आपकी प्रतीक्षा करूंगी [संगीत] यह अंधेरा उड़े हुए सन्नाटा कितना भावुक है हां किंतु अभी क्षण भर में हमारे मिलन का प्रकाश फैल जाएगा और उस प्रकाश में तुम्हें मेरा एक और ही रूप दिखाई देगा [संगीत] [संगीत] मेरी बाहे तुम्हारे गले में पड़ने के लिए व्याकुल हो रही है सर्री तो तुम्हारी बाहों को रोक कौन रहा है बस इसी क्षण की तो प्रतीक्षा थी मुझे इसी क्षण के लिए तो मैं व्याकुल हो रहा था [संगीत] बाहे तो मेरी तेरे गले में पड़ने के लिए व्याकुला की चिक [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] आ आ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ [संगीत] मैंने तुम्हारी बात रख ली पंचाली यह कल का सूर्य उदय होता नहीं देखेगा चाहा छूना आग को गई की चक की जान द्रौपदी के अश्रु को मिला आत्म [संगीत] समान मिला आत्म समान आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment