Thursday, 1 January 2026

महायुद्ध के पश्चात की कहानी क्या थी Mahabharat Scene B R Chopra Pen Bhakti

महा [संगीत] भारत प्रणाम महर्षि व्यास आयुष्मान भावा प्रणाम दादा श्री युधिष्ठिर आयुष्मान भव प्रणाम दादा श्री भीम आयुष्मान भव प्रणाम दादा श्री अर्जुन आयुमान भव प्रणाम ददा श्री नकुल प्रणाम प्रणाम दद श्री सहदेव बड़ा सौभाग्यशाली है आज का दिन जब मेरा समस्त परिवार मेरे सामने खड़ा है मुझे गर्व है इस बात का कि मैंने ऐसे कुल में जन्म लिया है जिसने इस युग में सत्य धर्म और परम वरता की पताका थाम रखी है मेरे अ भाग्य कि आप सब महापुरुषों के एक साथ दर्शन महात्मा बरबरी हम सब एक विशेष उद्देश्य से आपकी सेवा में आए हैं मैं इस अवस्था में भी यदि आपकी कोई सेवा कर सका तो स्वयं को धन्य समझूंगा केवल आप ही हैं जिन्होंने हर घटना को अपनी आंखों से देखा है कृपया हमें यह बताइए इस युद्ध में किसका क्या योगदान रहा और कौन है जिसे हम इस युद्ध का नायक कहे युद्ध में हर उस व्यक्ति का योगदान होता है जो युद्ध में भाग लेता है किसी का योगदान प्राण लेना होता है और किसी का योगदान प्राण देना होता है और नायक नायक तो हर योद्धा होता है चाहे वह साधारण सैनिक हो या सेनापति फिर भी यदि आपसे पूछा जाए आपने क्या देखा तो आप क्या कहेंगे मैं वही कहूंगा जो मैंने देखा और आपने क्या देखा मुझे तो सारे युद्ध में रणभूमि में चारों ओर वासुदेव ही वासुदेव दिखाई दिए हर योद्धा के पीछे मुझे श्री कृष्ण दिखाई दिए जिनका सुदर्शन चक्र यूं काटता चीरता चल रहा था जैसे प्रकाश अंधकार को सत्य मिथ्या को और ज्ञान अज्ञान को चीरता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है मैं तेरी छाती का लहू पिऊंगा [संगीत] दुशासन लो पांचाली मैं तुम्हारे इन अपमान केशों के लिए दुशासन की छाती का लहू लाया हूं महर्षि मुझे एक और दृश्य दिखाई दिया व दृश्य आपने क्या देखा महात्मा बरबरी मैंने देखा कि माता द्रौपदी शत्रुओं का रक्त पी रही हैं मुझे पहले तो अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ किंतु जब मैंने ध्यान से देखा तो मुझे लगा कि य माता द्रौपदी नहीं यह संसार की वह अनगिनत नारिया है जिन्होंने मानव जाति को अपना दूध पिलाकर पाला था पर मानव जाति ने का तिरस्कार किया इनका अपमान किया वो नारिया जिनका समाज ने निरादर किया जिनका चीरहरण हुआ जिन्होंने इस अपमान से इन्हें बचाने के लिए एक एक को पुकारा पर किसी ने इनकी सहायता नहीं की वो नारियां वो नारिया जो किसी की माएं थी बहने थी बेटियां थी किसी की पत्नियां थी जो माता द्रौपदी के रग रग रूप थी लेकिन लेकिन जिन्ने केवल विलास की समग्री समझा गया मुझे लगा मानव जाति को दूध पिलाकर पालने वाली नारी के अपमान का यही दंड है बस इसके अतिरिक्त मुझे और कुछ दिखाई नहीं दिया प्रणाम [संगीत] पुत्र हे बंसीधर क्या मेरा पुत्र सदैव इसी अवस्था में रहेगा कदापि नहीं अब अपनी शक्ति का उपयोग तो हर प्राणी करता है तुम्हारा पुत्र ऐसा पराक्रमी है जिसने असीम शक्ति रखते हुए भी उस पर अंकुश लगा दिया महान है तुम्हारा पुत्र जिसने युद्ध में भाग ना लेकर सत्य और धर्म को विजय बनाया उसका यह त्याग तो हम सब पर ऋण है और इस ऋण को ना चुकाना तो मानवता का अपमान होगा वासुदेव श्री कृष्ण आपने हमें याद किया देवी महात्मा बरबरी का धड़ लाया जाए जो [संगीत] आज्ञा [संगीत] बरबरी हम सब तुम्हारे आभारी हैं अब अपनी पूर्व अवस्था में आ जाओ पुत्र मेरे लाल बर बरीक मेरा जीवन तेरे बिना अधूरा था पुत्र चल घर चल चल नहीं माता श्री मैं अब घर नहीं जाऊंगा यह तुम क्या कह रहे हो ऐसा क्यों माता श्री इस युद्ध को देख लेने के बाद अब कुछ भी देखने की इच्छा नहीं है मैं अपना शेष जीवन तपस्या में बिताऊ और भगवान से प्रार्थना करूंगा किसी भी युग में किसी भी पीढ़ी में किसी को भी ऐसा युद्ध ना देखना पड़े जिस युद्ध में एक ही परिवार के सदस्य एक दूसरे के रक्त में स्नान कर रहे हो माता श्री आप घर जाइए मेरा मार्ग आपसे अलग हो चुका है ऐसा मत कहो पुत्र ऐसा मत कहो इसे मत रो को कुल वधु मोरवी इसने जो भी कहा उसका एक एक शब्द दर्पण के समान है इसे आशीर्वाद दो कि इसकी तपस्या सफल हो और भविष्य में कभी कोई कोई ऐसा युद्ध ना हो जिसमें भाई को भाई का गला काटने पर विवश होना पड़े अनुज मेघवाल मेरे पास आओ जाओ पुत्र प्रणाम भ्राता श्री आयुष्मान भव अनुज तुम्हारे कंधे अभी बहुत छोटे हैं किंतु इन कंधों पर अभी तुम्हें दोरा भार संभालना होगा एक तो माता श्री के प्रति मेरे स्नेह का भार और अपने स्नेह का भार भी अनुज मुझे वचन दो कि माता श्री को कोई कष्ट ना होने पाएगा मैं वचन देता हूं भ्राता श्री मैं माता श्री को को कोई भी कष्ट नहीं होने दूंगा दादी श्री आपने मुझे धनु विद्या सिखाई इसके लिए मैं आपका आभारी हूं मैं आपकी सेवा ना कर सका इसके लिए मुझे क्षमा कर दीजिएगा मैंने एक बार आपको भी कष्ट पहुंचाया था किंतु वह तो संभवतः भाग्य का लेख था यदि वह घटना ना होती तो मुझे अपनी शक्ति का उचित उपयोग करने का मार्ग ही ना मिलता दादा श्री मुझे क्षमा कर दीजिएगा क्षमा कैसी पौत्र तुम्हारे त्याग ही ने तो आज यह दिन दिखाया है कि हमारी वंश का नाम सारे संसार में जगमगा रहा है मुझे गर्व है अपने महान पौत्र बर्बरीक पर और पुत्र गोत कच पर जिनके जीवन दान और त्याग ने मेरा सर गर्भ से ऊंचा कर दिया है आयुष्यमान भाव पौत्र सर्व श्री पिता म जनों मैं आप सबका आशीर्वाद लेकर जा रहा हूं किंतु जाने से पहले एक विनती करना चाहता हूं विनीति नहीं आप आदेश भी दे सकते हैं आप तो महात्मा है कहिए क्या आदेश है महात्मा बरबरी पितामह जनों युद्ध हो चुका है रक्तपात हो चुका है विनाश हो चुका है अब आप सबको मिलकर राज्य और जन समुदाय को वो देना है जो इन्ह अब तक नहीं मिला निर्माण की चेतना और शांति का वरदान आप पांच है आप पांच के विचारों में तो मतभेद हो सकता है लेकिन विचारों के मतभेद से घबराइए नहीं आप पांचों के लक्ष्य में मतभेद कदापि नहीं होना चाहिए आप पांचों का लक्ष्य एक होना चाहिए राज्य और प्रजा को न्याय देना आर्थिक न्याय राजनैतिक न्याय और सामाजिक न्याय आप सब भाग्यशाली हैं आप सबके बीच में दादा श्री वासुदेव जैसे मार्गदर्शक हैं इनके मार्गदर्शन से कभी मुंह ना मोड़िए का महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महा भार

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