Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने मनसा देवी को वरदान दिया Ishita Hitanshu Vighnaharta Ganesh Ep 791 Pen Bhakti

यह कैसी शर्त रखते श्वर मेरी शर्तें स्वीकार करने पर ही यह विवाह संभव [संगीत] होगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] भ्राता बासुकी जी उन्होंने कहा था ना कि वो मुझसे आकर्षित नहीं है वो केवल मेरे भक्ति भाव से प्र फिर भी पिता श्री ने फिर से मेरा विवाह प्रस्ताव लेकर उनके पास क्यों भेजा जो आपकी भक्ति से प्रभावित हुए हैं वह आपका साथ पाकर आपसे भी प्रभावित हो जाएंगे तो क्या आप इस बार भी निराश होक लौटे क्या उन्होंने इस बार [संगीत] भी अस्वीकार [संगीत] किया तो फिर आपके मुख पर यह चिंता का कारण क्या हुआ भ्राता श्री स्पष्ट रूप से [संगीत] कहिए इस विवाह को लेकर कुछ है आपके लिए यह ज्ञात होना आवश्यक है हां भ्राता कहीं ना संकोच किए भीना कहिए उन्होंने तीन शर्तें रखी तीन शर्त रखी तीन शर्त [संगीत] रखी शर्त कैसी शर्त मेरी पहली शर्त मैं उसी स्त्री से विवाह करूंगा जिसका नाम चरत कारू होगा दूसरी शर्त मैं अपनी पत्नी के भरण पोषण के उत्तरदायित्व से नहीं बंधा रहूंगा किंतु उन्हें मेरा प्रत्येक आदेश मानना होगा मेरी सेवा में कोई चूक नहीं करनी होगी तीसरी और अंतिम शर्त यदि उनसे कहीं भी कोई भूल हुई तो मैं उसी क्षण उनका त्याग करने के लिए मुक्त हो जाऊंगा और तब मुझे कोई भी रुकने के लिए विवश नहीं करेगा मैं उसी स्त्री से विवाह करूंगा मैं अपनी के भरण पोषण के उत्तरदायित्व से नहीं बधा रहू मेरा प्रत्येक आदेश मानना हो तो मैं उसी क्षण तो मैं उनका त्याग करने के लिए मुक्त हो जाऊंगा उन्होंने पहले मुझे स्वीकार नहीं किया और उसके पश्चात ऐसी शर्त रख दी जो संसार में कोई भी स्त्री स्वीकार नहीं करेगी और आप कह रहे हैं मैं उनसे विवाह कर लू माता ऋषिवर ने यह कैसी शर्त रख दी थी विवाह तो जन्म जन्मांतर का संबंध है और धर्म उचित मर्यादा तो यह है कि विवाह में पति-पत्नी दोनों के एक दूसरे के प्रति समान दायित्व होते हैं फिर ऐसे धर्म परायण गुणी ज्ञानी ऋषिवर ने ऐसा क्यों कहा अपने पित्रों को कष्ट से उबारने के लिए उन्होंने विवाह प्रस्ताव तो स्वीकार कर लि याया था किंतु उनका मन तो प्रभु की भक्ति में ही रमा हुआ था वह उनसे नहीं भटकना चाहते थे इसलिए उन्होंने विवाह के लिए ऐसी शर्त रखी तो फिर दीदी मनसा ने क्या किया माता जन्मों के बंधन को जो आरंभ होने से पूर्व ही भांग करना चाहते हैं आप उसके साथ मेरा पानी ग्रहण कराना चाहते हैं विवाह की मी प्रेम आपसी समझ और सम्मान पर रखी जाती ऐसी अनर्गल शर्तों पर नहीं नहीं नागराज बासुकी जी मैं यह विवाह कदा भी नहीं करूंगी किसी प्रकार से तो ऋषि जरत का ने अपनी सहमति दी थी विवाह के लिए तो अब बहन मंसा ने नकार दिया एक और दुविधा खड़ी हो गई प्रभु बड़ी दुविधा में हूं बहन मंसा के ना का कारण भली भाति समझता हूं किंतु संपूर्ण नागवंश की रक्षा की न्यू है यह विवाह मां ऋषि जरत कारू को समझाया मैंने कि आपकी शर्तें मान्य नहीं हो सकती किंतु वह मान्य नहीं अब आप ही बहन मनसा को समझा सकती हैं अन्यथा संपूर्ण नागवंश समाप्त हो जाएगा मा मैं समझाऊ उसे उस विवाह के लिए जिसमें त्याग भी है और अपमान भी वो भी उस पुत्री को जिसने जन्म से केवल त्याग ही देखा है जब अपने माता-पिता का सुख पाने के लिए कैलाश वापस आई तो मैंने उस पर प्रहार कर दिया फिर उसने वो त्याग किया जो अन्य किसी के लिए संभव नहीं था अपने प्राणों की चिंता किए बिना अपने पिता का कष्ट हरने के लिए उसने हलाहल के विषैले प्रभाव को ग्रहण किया किंतु उसके बाद भी उसे अपने माता-पिता के स्नेह का सुख नहीं प्राप्त हुआ उसे कैलाश का त्याग कर हमसे दूर जाना पड़ा जिसे जीवन के आरंभ में भी कोई सुख प्राप्त नहीं हुआ मैं उससे यह कैसे कह दूं कि उसे विवाह में भी समझौता करना होगा नहीं नागराज इसके लिए तो स्वयं आपको ही उसे मनाना [संगीत] होगा क्या हुआ भ्राता बासु [संगीत] की ऋषिवर कश्यप माथा कदरू आप सब इस प्रकार यहां हम आपकी ही प्रतीक्षा कर रहे हैं बहन विवश है हम आपसे पुनः निवेदन करने आए हैं ऋषि जरत का की शर्तें मान लीजिए और उनसे विवाह संपन्न कीजिए यह भली भाति जानते हुए भी कि उनके शर्तें क्या है हां पुत्री इसके सिवाय हमारे पास और कोई उपाय नहीं क्रोध वश मैंने अपने नाग पुत्रों को भयंकर श्राप दे डाला मैं ऐसा ना करती तो आज हम तुमसे यह निवेदन नहीं कर रहे होते उतरी मंसा नागों की रक्षा तुम्हारे ही हाथों में है जो तुम्हारे जीवन का एक उद्देश्य भी है यदि तुम्हारा विवाह ऋषि जरत कारु के साथ ना हुआ तो महाराज जन्म जय के प्रबल यज्ञ में सभी नाग भस्म हो जाएंगे सभी नाग भस्म हो जाए यदि ऐसा हुआ तो ना तो महादेव के आभूषण वासुकी रहेंगे और ना नारायण के सैया के लिए मैं शेष नाग शेष [संगीत] रहूंगा [संगीत] मैं अपने निजी स्वार्थ के लिए आप सभी का अहित नहीं होने दूंगी मैं इस विवाह के लिए तैयार ह विवाह के लिए तैयार हवाह के लिए तयार लिए [संगीत] ऋषिवर कश्य आप इतने दुखी क्यों है आप हीने कहा था ना मेरे जन्म के उपरांत ही मेरे जीवन के अनेक उद्देश्य और इसी कारण वश तो पिता श्री महादेव ने मुझे कैलाश से दूर किया था किंतु मैं फिर भी अपना कर्तव्य निभाऊंगी मैं ऋषि जरत तीनों शर्त पूर्ण [संगीत] करूंगी ऋषिवर कश्यप मेरा जन्म तो आप ही के यज्ञ से हुआ था तो इस नाते आप और माता कदरू मेरे भी माता पिता हुए इसीलिए मेरा कन्यादान भी आप दोनों को ही करना [संगीत] चाहिए आशीष दीजिए [संगीत] मुझे मैं प्रभु श्री कृष्ण की तपस्या कर जरत कारु नाम प्राप्त कर सक कल्याण हो [संगीत] पुत्री सेवा और त्याग से ही कल्याण संभव है कितना विशाल है पुत्री मंसा का हृदय फिर वह दूसरों का कष्ट हरने के लिए स्वयं त्याग करने के लिए प्रस्तुत हो गई और जरद कारू नाम पाने के लिए स्वयं श्री कृष्ण की घोर तपस्या करने लगी ॐ श्रीम ह्रीम क्लीम कृष्णाय नमः ओ [संगीत] श्री मन ससिया में लीन रहने लगी जिसके कारण उसका कोमल शरीर जैसे मुर्झा गया जीन हो गया ॐ श्रीम कमम कृष्णाय नमः ओ ओ श्रीम क्लीम ह्रीम कृष्णाय [संगीत] [संगीत] नमः शांताकारम पमना सु अपने नेत्र खोलो पुत्री मंसा [संगीत] े विष्णु भव हरम सरु ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम ओम नमो भगते वासुदेवाय [संगीत] नम प्रभु तुम्हारे मन में क्या है ये मुझे ज्ञात है और तुम्हारे जीर्ण शरीर को देखकर मैं तुम्हें वरदान देता हूं आज से तुम्हारा नाम जरत का होगा जर [संगीत] [संगीत] होगा मैं तुम्हारे तब से प्रसन्न हूं जाओ पुत्री अपना जीवन सार्थक करो और मैं तुम्हें यह भी वरदान देता हूं भविष्य में तुम पूज नहीं है [संगीत] बनो धन्यवाद और इसी प्रकार पुत्री मंसा ने प्रभु श्री कृष्ण से जरद गू नाम पाकर अपने भावी वर ऋषि जरत कारू की प्रथम शर्त पूर्ण की और उन दोनों का विवाह सुनिश्चित [संगीत] हुआ विवाह संपन्न होने से पूर्व मैं स्वयं देवी जरत का के मुख से सुनना चाहता हूं कि क्या उन्हें मेरी शेष दो शर्त स्वीकार [संगीत] है देवी आपको मेरी शर्त तर्क संगत नहीं लग रही होंगी फिर भी आपने मेरी प्रथम शर्त पूर्ण की है किंतु अब मैं यह जानना चाहता हूं कि आपको मेरी शेष दो शर्त स्वीकार है [संगीत] मैं आपका भरण पोषण नहीं करूंगा किंतु आपको मेरे प्रत्येक आदेश का पालन करना होगा मेरी सेवा करनी होगी और यदि आपसे कोई भी भूल हुई तो मैं वहां एक पल भी नहीं रुकूंगा और ऐसा करने के लिए मुझे कोई विवश नहीं करेगा कहिए दे क्या आपको यह स्वीकार है मुझे स्वीकार है मुझे स्वीकार है [संगीत] स [संगीत] [संगीत] [संगीत] अद्भुत है पुत्री मंसा का त्याग त्याग तो व्यक्ति को महान बनाता है प्रिय पुत्री मंसा तो सदा परहित के लिए समर्पित रहती है आप दोनों का शुभ विवाह आपको आपके कर्तव्य समझने में सहायक बनकर आपके उद्देश्य में सफलता की ओर ले [संगीत] जाए [संगीत] जिस जीवन साथी को जन्म जन्मांतर का साथ निभाना चाहिए उसे विवाह के आरंभ में भी साथ चलना स्वीकार नहीं ज्ञात नहीं बहन मंसा के साथ ऋषि और आश्रम में कैसा व्यवहार करेंगे परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखना ही प्रसन्नता की और विवाह में सफलता की कुंजी होती है मुझे विश्वास है पुत्री मंसा अपने जीवन को परिस्थितियों के अनुसार ढाल [संगीत] लेगी विवाह तो सुखमय होना चाहिए किंतु दीदी मंसा के साथ विवाह के दिन ऐसा अन्याय होना तो सर्वथा अनुचित था माता नियती ने उसके लिए यही एक कष्ट निर्धारित नहीं किए थे अभी तो उसे और भी कष्ट सहने थे हम आश्रम पहुंच गए स्वामी का इतना रुखा व्यवहार मेरी पति [संगीत] ओ जितना कठोर वह दिखना चाहते हैं वास्तव में वो नहीं है मेरे स्वागत के लिए पुष्प लाए हैं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नहीं यह पुष्प मेरे लिए नहीं प्रभु के लिए थे मुझ प नहीं उन्हें तो बस अपनी भक्ति में ही आ सकती है देवी जरत कारू वहां मत खड़े रहिए अनेकों कार्य हैं कुटिया स्वच्छ कीजिए गौ माता को भोजन दीजिए गोबर के उपले बनाइए और मेरे लिए भोजन एक क्षण भी नहीं है व्यर्थ करने के लिए स्वागत का और स्नेह का एक शब्द नहीं आदेश इतने सारे दे दिए स्वामी ने मेरी यह कठोरता देवी जरत का को असंतुष्ट भी करेगी और उन्हें भूल करने के लिए विवश भी फिर इनकी त्रुटि को कारण बनाकर मैं इस वैवाहिक जीवन से मुक्ति पाऊंगा और सारा ध्यान अपनी साधना पर केंद्रित [संगीत] करूंगा चिंता मत कीजिए स्वामी मेरा पूरा ध्यान आप ही की सेवा पर होगा आप जो भी आदेश देंगे मैं वो [संगीत] करूंगी ओ नमः शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय [संगीत] स्वामी भोजन तैयार [संगीत] है [संगीत] देवी जरत कारू आपको विश्राम की अनुमति नहीं जाइए मेरी संध्या पूजा की तैयारी कर मेरे सोने की व्यवस्था कीजिए जाइए [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ओम नमः शिवाय ओम ओम नमः [संगीत] शिवाय स्वामी आइए स्वामी आपकी शैया मैं यहां नहीं बाहर विश्राम करता हूं बाहर आहते में मेरे विश्राम की व्यवस्था होनी चाहिए [संगीत] अवश्य एक क्षण के विश्राम की अनुमति नहीं दे रहा हूं मैं इन् निरंतर कोई ना कोई कार्य सौंप रहा हूं किंतु इनके मुख पर असंतोष का एक भाव भी नहीं मुझे और कठोर बनना होगा अन्यथा यह कोई भूल ही नहीं [संगीत] करेंगी स्वामी आपकी शैया तैयार है तेरे नद त ना तेरे नद [संगीत] त नहीं आप यहां नहीं भीतर विश्राम करेंगी अब यदि इन्होंने मेरा विरोध किया तो यह विवाह की तीसरी शर्त तोड़ दी और मैं इस विवाह से मुक्त हो जाऊंगा [संगीत] [प्रशंसा] आ स्वामी का अंग [संगीत] [संगीत] वस्त्र सहनशीलता की भी एक सीमा होती है आज नहीं तो कल देवी जरत कारू से कोई ना कोई त्रुटी तो अवश्य होगी स्वामी मैं कोई त्रुटी होने ही नहीं दूंगी आप कितने भी प्रयास कर ले मैं यह कदापि नहीं होने [संगीत] [संगीत] [संगीत] दूंगी [संगीत] अर्थात ऋषिवर समझ गए कि दीदी मंसा इतनी सरलता से कोई त्रुटि नहीं करने वाली थी हां पुत्र इसलिए वह मंसा के लिए और भी कठिनाइया बंद करते चले गए ओम नमः शिवाय गौ चारा खा रही है बिखरी हुई कुटिया भी संभर गई है एक नारी ही मकान को घर बनाना जानती है नहीं नहीं मुझे कोमल नहीं होना है अभी तो और भी कठोर होना पड़ेगा तभी देवी मंसा के मन में मेरे प्रति कहीं रोश जागेगा [संगीत] स्वामी वो जल में अभी लेकर आई थी शिवलिंग की अभिषेक के [संगीत] लिए कोई बात नहीं इसी कारण वृक्ष को जल प्राप्त हो गया जा शिवलिंग के अभिषेक के लिए जल लेकर आइए और हां शीघ्र लेकर आइएगा प्रहर पूर्ण होने से पूर्व मुझे अपनी पूजा आरंभ करनी होगी किंतु स्वामी मैंने कहा ना आपको [संगीत] जाइए अभी असहमत है शीघ्र ही आप क्रोधित भी होंगी देवी मंसा आपके भीतर जो हलाहल विष है बस उसे क्रियान्वित करना ही शेष [संगीत] है ख लीजिए स्वामी प्रभु के अभिषेक के लिए ज किंतु यह जल तो दूषित हो गया इसमें सूखा पत्र जो गिर [संगीत] गया जाइए और जल लेकर आइए इस प्रहर के अंत के मुझे जलाभिषेक करना है शीघ्रता कीजिए [संगीत] अवश्य मैं यह देखकर दुखी भी थी और ऋषि जरत कारु से क्रोधित भी किंतु मंसा अपने कर्तव्य निभाती चली गई क्रोध को अपने निकट भी नहीं आने दिया किंतु नागों की रक्षा के लिए इस विवाह से संतान होना आवश्यक था जिसमें ऋषिवर को कोई रुचि ना थी वो तो बस पुत्री मंसा से कोई भूल करवाना चाहते थे इतने कम समय में देवी मंसा जल भर करर नहीं ला सकती बस कुछ क्षण और अब उनके कार्य में त्रुटि होना अवश्य भावी है उसके पश्चात मैं अपनी साधना के लिए स्वतंत्र हो जाऊंगा देवी मंसा से पृथक होने का उचित कारण मिल जाएगा मुझे अपनी भलाई के लिए तो सभी कष्ट सहते हैं किंतु वे वंदनीय होते हैं जो दूसरों की भलाई के लिए कष्ट सहते हैं

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