Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने भक्त पुंडलिक को क्षमा कर दिया Hitanshu Vighnaharta Ganesh Episode 884 Pen Bhakti

[संगीत] स्वामी भूल तो हम दोनों से ही हुई है ना अपने साथ मुझे भी मेरे भूल को सुधारने का पुरा चित करने का अवसर दीजिए मैं आपकी अर्धांग नहीं हूं कम से कम इस अधिकार से तो मुझे वंचित मत कीजिए आप कुछ उत्तर क्यों नहीं देते स्वामी मैं आपकी इच्छा के विरुद्ध कुछ नहीं करूं अगर आप कहेंगे तो मैं यहां से चली [संगीत] जाऊंगी पिताजी माताजी मैं स्वामी के इच्छा के विरुद्ध यहां नहीं रह सकती और वह नहीं चाहते कि मैं यहां रहू संभव हो तो मुझे क्षमा कर देना [संगीत] रुको पुत्री किस अधिकार से रुकू मैं पिताजी जब मेरे स्वामी मेरी और देखना तो दूर मेरी बात तक नहीं सुन रहे हैं वह तुम्हें देख और सुन नहीं पा रहा है पुत्री क्योंकि व स्वयं यहां उपस्थित नहीं उसकी ना कहीं और एकाग्र [संगीत] है ध्यान से देखो पुत्री उसका तन यहां है आत्मा नहीं वह तो अपने प्रभु गोविंद के पास है कुंडलिक को अपने गोविंद के दिव्य दर्शन प्राप्त हो रहे [संगीत] हैं हे प्रभु हे गोविंद मेरा कण कण आप में समाया है यह समझता हूं मैं पर फिर भी मैंने आपकी अलना कैसे की यह अपराध कैसे हुआ मुझसे प्रभु यह भूल मैंने कैसे कर दी प्रभु मुझे क्षमा कर दीजिए तुम ही नहीं ब मेरे सभी सच्चे भक्त मुझ में समाहित है भक्त है तो भगवान है मेरे सभी भक्त मेरे हृदय के निकट रहते [संगीत] हैं तुम्हारी भूलों के लिए तो मैंने तुम्हें क्षमा कर दिया पंडित किंतु अटूट विश्वास ही भक्ति की नीद को मजबूत करता है एक दूसरे को पूर्णता प्रदान करने वाले दीपक और बाती के समान विश्वास ही भक्त और भगवान के संबंध का आधार है तुम्हें अभी पुनः मेरा विश्वास पाना शेष है तुम्हें अ भी पुन मेरा विश्वास पाना शेष है तुम्हें अब भी पुन मेरा विश्वास पाना शेष है भाव की एकाग्रता का उदाहरण कहीं नहीं मिलेगा अद्भुत है उनकी प्रभु [संगीत] भक्ति हे प्रभु प्रभ हे गोविंद मुझे आशीष दीजिए ताकि मैं आपका विश्वास पुन पा सकू मुझे अवसर दीजिए प्रभु वो अवसर तो तुम्ह मिल चुका है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] बस क्षमा कर दिया आई पिताजी प्रभु ने मुझे मुझे क्षमा कर [संगीत] दिया [संगीत] इनको धक्के मार के घर से बाहर निकाल दूंगा मालती मेरी अर्धांगिनी मैं मैं अपने सभी दुर्व्यवहार के लिए तुमसे क्षमा मांगता हूं मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है [संगीत] मैं ना तो योग्य योग्य पुत्र बन पाया और ना योग्य [संगीत] पति मुझे मुझे क्षमा कर दो मालती नहीं स्वामी क्षमा तो मुझे मांगनी चाहिए जो माता-पिता का अपमान कर घोर अपराध किया आपका व्यवहार तो उसी बात का दंड था किंतु अब मुझे समझ में आ मैं जान गई माता-पिता के आशीर्वाद को जो टकराता है उसे कोई नहीं अपनाता संसार के सभी आनंद उसके जीवन से लुप्त हो जाता है माता-पिता को दुखी करने वाले के जीवन में कभी सुख नहीं आता माता-पिता के चरणों में ही समृद्धि का स्रोत है और इनकी भक्ति में वास्तविक आनंद इसलिए मैं आपके साथ इनकी भक्ति करना चाहती हूं स्वामी मालती तुम मेरी अर्धांगिनी हो मेरे जीवन के प्रत्येक अनुष्ठान में तुम तुम समान रूप से भागीदार हो मैं तुम्हें साक्षात प्रभु की पूजा करने से कैसे रोक सकता हूं [संगीत] अपरम बार है प्रभु की लीला उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन से दो भटकी हुई आत्माओं को भक्ति का पद फिर से मिल [संगीत] गया [संगीत] [संगीत] यह तो योगी महात्मा का स्वर्ग आपको भजन गाने से मना किया तो इन ढोंगी साधुओं को यहां प बुला दिया किंतु मैंने कितना अपमान किया थाका चिंता मत करो महात्मा जी अंतर्यामी प्रभु की विशेष कृपा है और जब स्वयं प्रभु ने तुम्ह क्षमा कर दिया है तो महात्मा जी भी तुह क्षमादान देंगे चलो बाहर चलकर उनका स्वागत करते [संगीत] हैं [संगीत] प्रणाम जी आपका स्वागत है आइए हमारे घर को पवित्र कर दीजिए आसन ग्रहण [संगीत] कीजिए [संगीत] मेरी प्रार्थना है महात्मा जी मेरी भूल को भूलो का प्रायश्चित कर ले उसे क्षमा मांगने की आवश्यकता नहीं है तुम पर तो ईश्वर की कृपा है फ तुम्हें लेकर मेरे मन में कोई दुर्व कैसे हो सकता है प्रणाम महात्मा जी और माता पिता की करने वाले भक्तो से तो ईश्वर स्वयं प्रसन्न रहते ऐसे भक्तों को वो कोई कष्ट नहीं होने दे सत्य है महात्मा जी आपने पहले भी कहा था मैं अपने माता पिता के पास लौट कर आऊंगा उनकी सेवा के लिए तड़पू मत भूलो मैंने यह भी कहा भविष्य में तुम अपनी माता पिता की सेवा के लिए जगत में जाने भी जाओ और प्रभु श्री कृष्ण की कृपा से यह शीघ्र होगा महात्मा जी मुझसे इतनी भूल हुई सभी ने मुझे संभालने का बहुत प्रयास किया पर मेरे पांव फिर भी डग मगाते रहे सभी का विश्वास खो दिया मैंने उसे वापस पाना इतना आसान नहीं होगा काम क्रोध मोह लोभ चारों भावों से परे लाभ हानि दंड पुरस्कार पीड़ा या सुख की चिंता किए बिना तुम जिस प्रकार अभी अपने माता पिता की भक्ति में लीन हो वैसे ही एकाग्रता से उनकी भक्ति करते रहो तुम्हें स्वयं मार्ग मिल [संगीत] जाएगा अर्थात माता-पिता भ्राता और और पत्नी से क्षमा पाने के बाद पुंडलिक को प्रभु गोविंद से भी आशीर्वाद मिल गया नहीं भक्त प्रभु की भक्ति से तभी जुड़ सकता है जब स्वयं प्रभु उसकी भक्ति स्वीकार करना चाहे और वह क्षमा के बिना संभव नहीं था किंतु ईश्वर का आशीर्वाद पाना इतना सरल नहीं है कई परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है और अभी तो पुंडलिक को अपने माता-पिता के प्रति अपनी निष्ठा और भक्ति को प्रमाणित करने के लिए एक बड़ी परीक्षा देनी थी कि भविष्य में कुछ भी हो माता-पिता के प्रति उसका सेवा भाव सच्चा था स्थिर था उसमें अब कोई बदलाव नहीं आने वाला [संगीत] था पिताजी यह लीजिए आपकी [संगीत] शैया मां लाइए मैं आपके पांव दबा [संगीत] [प्रशंसा] दू तूफान की आहट से प्रकृति किसी संकट का संकेत दे रही है तूफान का अर्थ सदा संकट नहीं होता पुत्र दिवाकर ऐसा ही समय था वातावरण ने तब भी ऐसा ही विकराल रूप लिया था जब प्रभु गोपाला का जन्म हुआ था और उसके साथ गोकुल में समृद्धि और धर्म के युग का आरंभ हुआ था इसीलिए किसी भी आंधी तूफान और संकट के संकेत में भी कोई ना कोई अच्छाई छिपा होता है प्रभु की लीला बड़ी रहस्यम होती है पुत्र उसे समझना सरल नहीं पुत्र कुंडलिक तुम भी जाकर विश्राम करो पहले आपको निद्रा आ जाए उसके बाद जाकर मैं विश्राम [संगीत] करूंगा [संगीत] मां पिताजी की निद्रा में बाधा पड़ रही है तकिया चाहिए [संगीत] उन्हें यहां तो कुछ भी नहीं है उन्हें देने के लिए [संगीत] आई पिताजी मेरी गोद में सर रखकर सो जाइए अच्छी निंद्रा आ जाएगी नहीं पुत्री तुम्हें भी तो विश्राम करना है ना नहीं नहीं आई आपकी विश्राम से मुझे विश्राम का सुख मिल जाएगा आप मुझे अनुमति दीजिए नहीं तो आपको कष्ट में देखकर मुझे निद्रा कहां आएगी [संगीत] आप निश्चिंत होकर सो जाइए जब मुझे निद्रा आएगी तो मैं आपकी निद्रा भंग किए बिना सो जाऊंगा [संगीत] आप क्या देख रहे हैं क्या लगता है आपको मैं उड़ जाऊंगा नहीं प्रभु जब तक इनकी नित्रा पूरी नहीं होती मैं यहां से तनिक भी नहीं [संगीत] लूंगा धन जो मुझे मां पिताजी की ऐसी सेवा का अवसर मिल रहा है [संगीत] ठंड बढ़ रही है मैं स्वयं को अंग वस्त्र से और ठक लेता हूं [संगीत] [संगीत] चलो अच्छा है इसने मार्ग बदल [संगीत] दिया अंग अस्त्र तो दूर चला गया किंतु कोई बात नहीं वहां पिताजी तो सो रहे हैं ओ अब यह दुष्ट पिताजी की ओर बढ़ रहा [संगीत] है इनकी निद्रा भंग हो रही है मैं हिल नहीं सकता इस कीट को तो रोकना [संगीत] [संगीत] होगा मैं तनिक भी हिला तो मां पिताजी की निद्रा भंग होगी जी मेरी पीड़ा से अधिक महत्त्वपूर्ण है मेरे माता-पिता की मित्रा तुम्हारी भूलों के लिए तो मैंने तुम्हें क्षमा कर दिया पुंडलिक किंतु अटूट विश्वास ही भक्ति की नींद को मजबूत करता है एक दूसरे को पूर्णता प्रदान करने वाले दीपक और बाती के समान विश्वास ही भक्त और भगवान के संबंध का आधार है तुम्हें अभी पुनः मेरा विश्वास पाना शेष है काम क्रोध मोह लोभ चारों भावों से परे लाभ हानि दंड पुरस्कार पीड़ा या सुख की चिंता किए बिना तुम जिस प्रकार अभी अपने माता-पिता की भक्ति में लीन हो वैसे ही एकाग्रता से उनकी भक्ति करते रहो तुम्हें स्वयं मार्ग मिल जाएगा नहीं यह पीड़ा सगा मैं अपना पांव नहीं [संगीत] हटाऊ ये कीट पुंडलिक का निश्चय नहीं तोड़ सकेगा और माता पिता की भक्ति करने वाले भक्तो से तो ईश्वर स्वयं प्रसन्न रहते हैं ऐसे भक्तो को वो कोई कष्ट नहीं सोने [संगीत] दे [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] पुंडलिक पुंडलिक पुंडलिक [संगीत] पुंडलिक आज तुम्हारे प्रभु तुम्हें दर्शन देने स्वयं तुम्हारे द्वार पधारे मैं वहां नहीं तुम्हारे द्वार खड़ा [संगीत] ू मेरे प्रभु को [संगीत] हां कुंडलिक बाहर आओ आज भगवान अपने भक्त से भेंट करने आया है मुझसे भेंट नहीं [प्रशंसा] करोगे पहले आपको निद्रा आ जाए उसके बाद जाकर मैं विश्राम [संगीत] करूंगा मेरे प्रभु हमारे द्वार अहो भाग्य है हमारा किंतु क्षमा प्रभु अभी तो मैं माता पिता की सेवा में चाह कर भी आपके स्वागत के लिए नहीं आ सकता इन्ह छोड़ बाहर आया तो इनकी निद्रा भंग हो जाएगी क्या तुम्हे इसकी चिंता है कि अपने माता पिता को दिया वचन भंग कर दोगे तो मेरी परीक्षा में असफल हो जाओगे मेरा विश्वास नहीं पा सकोगे [संगीत] हा प्रभु अभी तो मेरा एक ही कर्तव्य और एक ही चिंता है मेरे माता पिता के विश्राम में कोई बाधा ना आए तो क्या अपने प्रभु की ओर एक बार मुड़कर देखोगी भी नहीं प्रभु अपने भक्त को दुविधा में मत डालिए एक बार मुड़ा तो अपने प्रभु के मुख से अपनी दृष्टि हटा नहीं पाऊंगा फिर कैसे रोकूंगा अपने आपको को किंतु जब तक मां पिता की निद्रा पूर्ण ना हो जाए मैं यहां से नहीं उठ सकता तो क्या तब भी नहीं मुड़ो जब स्वयं तुम्हारे गोपाला ऐसी तूफानी रात्री में तुम्हारे घर के बाहर खड़े आप तो प्रभु है मेरे हृदय की दशा जाते आपके दर्शन के लिए व्याकुल हो किंतु यह भक्त आपके दर्शन सुख पाने के लिए अपने माता पिता के सुख को खंडित नहीं कर [संगीत] सकता आप भगवान है मेने तो इस भक्त की प्रार्थना पर थोड़ी प्रतीक्षा कर लीजिए प्रभु अच्छा मुझे प्रतीक्षा करवाना चाहते हो तो क्या मुझे एक आसन नहीं दोगे जग शयम पदमनाभम सुरेशम विश्वाम गन सदम वर्णम [संगीत] सुम और तो कुछ नहीं दे सकता कि त इस ट इस ईट को ही आसन रूप में स्वीकार कीजिए और मुझे क्षमा कीजिए आप अपने भक्त पर कृपा कर मुझे दर्शन देने आए हैं और मैं आपका स्वागत करने में भी अक्षम मुझे क्षमा करना प्रभु [संगीत] और इस प्रकार पुंडलिक ने अपने माता-पिता की सेवा के प्रति एकाग्र रहकर और उनकी सेवा को अपनी पीड़ा और अपने गोविंद के स्वागत से अधिक महत्व देकर प्रमाणित कर दिया कि माता-पिता के प्रति उसकी सेवा उसकी भक्ति सच्ची श्रद्धा से भरी है इस प्रकार वह अपनी अंतिम परीक्षा में भी सफल हुआ [संगीत] मेरा भक्त पुंडलिक अब मेरे महतम भक्तों की श्रेणी में अग्रणी अर्थात भक्त शिरोमणि हो गया [संगीत] है [संगीत] [संगीत] प्रणाम भाई प्रणाम पिताजी हे प्रभु हे गोविंद वो जाग गए मैं आ रहा हूं [संगीत] [संगीत] प्रभु [संगीत] प्रभु कीट के काटे की पीड़ा कुछ भी नहीं यदि आपके साक्षात दर्शन ना होते तो आपका यह भक्त यह पीड़ा सहन नहीं कर पाता किंतु आपने अपने भक्त पर कृपा की आप सदैव इस रूप में मेरे साथ रहेंगे आइए प्रभु स्वागत है [संगीत] [संगीत] आपका [संगीत] [संगीत] व्यक्ति स्वार्थ और मोह को त्याग कर यदि सच्चे हृदय से क्षमा मांगता है तो ईश्वर भी उसे क्षमा दान देना नहीं भूलते

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