[संगीत] अर्थात ऋषि दुर्वासा के क्रोध को जागृत करने के लिए दिवस के मध्यान तक सप्त द्वीप की मिट्टी के साथ उस मर्कट हनुमान का सुमेरू लौटना असंभव बनाना हो हो किंतु उसे रोक सके वो बल किसम है नहीं दशानन बल से नहीं छल से रोकना होगा उसे उस मर्कट के स्वभाव में नित दया करुणा और ममता का लाभ उठाकर उसे चलेंगे हम विस्तार से बताइए महाराज अतम [संगीत] बली किसी दुखी लाचार प्राणी की पुकार सुनकर वह मर्कट स्वयं को रोक नहीं पाएगा अपने स्वभाव वश व उसकी सहायता करने के लिए अवश्य ही उसके समीप जाने के लिए विवश हो जाएगा अर्थात भ्रमित होकर वह वानर बालक अपने लक्ष्य से भटक जाए और ऋषी दुर्वासा का आदेश पूर्ण नहीं कर [संगीत] पाएगा आपके कुटिल बुद्धि से उपजी यह योजना को मेरी राक्षसी कंप का सफल करेगी कंप का जी हां महाराज बाली मेरी राक्षसी कम का दुखियारी वृद्धा मां का रूप धर के वह अपने रुदन से बालकों को अपनी ओर आकर्षित करती है हे पुत्र वही छवि वही मुख आकृति तुम्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मेरा अमृत पुत्र ही मेरे समक्ष खड़ा है पुत्र सुख से वंचित इस मां का अनुरोध सुन लो पुत्र वो जो माला सामने पड़ी है उसे उसे तेरी मां को अर्पित कर दे पुत्र और और मेरा बनाया भोजन खा लो इसे ग्रहण कर लो तुम मुझे ऐसा प्रति दत होगा कि मैंने कि मैंने अपने पुत्र को ही भोजन खिलाया है पुत्र इसे ग्रहण कर लो पुत्र इसे ग्रहण कर लो [प्रशंसा] पुत्र सर्वप्रथम वो भोले बाले बालकों को भावुक करके ममता के नाटक से उनके हदय को अपने वश में कर लेती रा पुत्र प्रतिदिन भोजन से पूर्व ऐसे ही देवी माता का पूजन किया करता था हा हा पुत्र विलम मत करो विलम ना करो चढ़ा दो चढ़ा दो माला देवी मां के चरणों में पुत्र विलम ना करो पुत्र बचाओ बचाओ बचाओ ये क्या हो रहा है बज बचाओ ये क्या हो रहा है बचा बचा बचाओ मुझे ये क्या हो रहा है जाने दो मुझे बचाओ बचाओ कोई तो बचाओ बचाओ मुझे यहां से जाने दो ये क्या हो रहा मैंने नहीं ब रहा मेरे लावे में जो आया उसने मुझसे पार ना पाया अब तुम मेरा भोजन बनोगे पुत्र राक्षसी कंपिननशिप जाएगा जो मां की ममता सदैव उसकी शक्ति बनी है आज वही ममता उसकी दुर्बलता [संगीत] बनेगी ये है तृतीय द्वीप अब यहां से शीघ्र ही मिट्टी लेकर वापस जाऊंगा व हनुमान मैं एक हवन का आयोजन करना चाहता हूं परंतु उसके लिए मुझे सप्त दीप की मिट्टी चाहिए आज दिवस के मध्यान तक यह कार्य संपन्न हो जाना चाहिए हनुमान हे पृथ्वी माता प्रणाम मुझे आपसे मिट्टी लेने की अनुमति [संगीत] दीजिए [संगीत] मेरा प्रणाम पृथ्वी माता अब चार द्वीप और शेष है जहां से मुझे मिट्टी एकत्रित करनी [संगीत] है द्वितीय प्रहार अभी शेष है फिर भी मैं विलंब नहीं [संगीत] करूंगा [संगीत] य कैसी ध्वनी [संगीत] है यह तो किसी वृद्ध मां की करुण पुकार सुनाई दे रही है [संगीत] मुझे उस कुटिया से आ रही है ध्वनि कहीं वह वृद्ध माता किसी कष्ट में तो नहीं है मैं किसी असहाय को अकेले छोड़कर नहीं जा सकता आज चलिए है यहां सूर्य की रोशनी क्यों नहीं है आ गया वोह वानर बालक जिसका रद करने के लिए मुझे लंकेश ने आदेश दिया था माता क्या दुख है आपको क्यों विलाप कर रही है आप हाय मेरा पुत्र उसी के लिए विलाप कर रही हो आज आज मेरे पुत्र का जन्मदिन है कुछ दिन पूर्व एक युद्ध में उसकी मृत्यु हो गई यह तो बड़े ही दुख की बात है मैं सुमेरू का युवराज हनुमान हूं यदि मैं किसी प्रकार से आपका दुख दूर कर सकूं तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो पुत्र मेरा पुत्र अपने जन्मदिन पर अपनी रुचि की खीर और पकवान मुझसे बनवाया करता था यदि आज वो यहां होता शांत हो जाइए माता शांत हो जाइए वो यहां होता तो इस समय मैं उसके लिए बड़े प्रेम से भोजन बना रही होती हाय मेरे लाल तू कहां चला गया अपनी मां को छोड़कर मैं किससे खीर खिलाऊंगी किसे अपना भोजन खिलाऊंगी माता आप मुझे खिला दीजिए मुझे अपना पुत्र मानकर भोजन कराइए आपका कुछ दुख कम हो जाए है तो वानर बुद्धि ही इतनी सहजता से मेरे कूट यंत्र में फस रहा है तुम तुम करोगे भोजन तुम करोगे भोजन पुत्र ठीक है पुत्र तुम बैठो मैं मैं अभी तुम्हारे लिए भोजन लेके आती हूं कहीं मुझे विलंब ना हो जाए परंतु माता को भी इस प्रकार दुखी छोड़कर नहीं जा सकता [संगीत] मैं द्वितीय प्रहर होने को [संगीत] है सात दीपों से मिट्टी लेकर इतने कम समय में लौट पाएगा हनुमान या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता बहुत कड़ी परीक्षा ले रहे हैं गुरुदेव हनुमान [संगीत] की कहीं ऋषिवर द्वारा दी गई अवधि समाप्त ना हो जाए कितना समय लगा रही है [संगीत] माता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ये खड़क यह तो राक्षसों द्वारा प्रयोग की जाने वाली खड़क प्रतीत हो रही है यह यहां कैसे कुछ तो विचित्र व असामान्य [संगीत] है खड़क देख रहे हो पुत्र इस खड़क से तो मैं जलावन की लकड़िया काटती हूं [संगीत] पुत्र इनके हाथों में तो कंपन हो रहा है फिर इतने अशक्त हाथों से यह कैसे इस खड़क को उठाती [संगीत] होंगी लाइए यह मुझे दे दीजिए [संगीत] खड़क तो देख ली इसने कहीं कोई शंका ना हो जाए मुझे शीघ्र ही अपनी योजना के अनुसार इसे समाप्त करना होगा अन्यथा कोई भूल हो गई तो लंकेश के कोक का भाजन बनना पड़ेगा रुक जा पुत्र रुक जा मेरा पुत्र ऐसे ही भोजन आरंभ नहीं करता था हमारे यहां परंपरा है कि भोजन आरंभ करने से पूर्व हम अपने ईष्ट देव को पुष्पों की माला अर्पित करते हैं पुत्र उन्हें उन्हें नमन करते हैं मेरा पुत्र भी ऐसा ही करता था तुम भी ऐसा ही करो पुत्र तुम भी ऐसा ही करो पुत्र वानर पुष्प माला स्पर्श करते ही तुम्हारे हाथ पाव स्तंभित हो जाएंगे अब फिर तुम्हारा अंत कर दूंगी मैं स्वागत समय अबद गति से निकल रहा है ऋषि दुर्वासा के क्रोध से सारा संसार भयभीत है यदि हनुमान ने आने में विल कर दिया और शुभ शुभ बोलो अंजना हमें आशा रखनी चाहिए कि हनुमान समय रहते अपना कार्य पूर्ण कर लेगा और ऋषि दुर्वासा को क्रोधित होने का अवसर नहीं देगा [संगीत] क्या सोच रहे हो पुत्र पुष्प माला उठाकर ईष्ट देव को चढ़ा दो [प्रशंसा] पुत्र माला उठाओ और माला चढ़ा दो पुत्र किंतु पुष्प माला चढ़ाने कैसे है कैसे क्या पुत्र माला उठाओ और इष्टदेव के चरणों में चढ़ा दो पुत्र किंतु कौन से हाथ से इस हाथ से या इस हाथ से दोनों हाथों से उठाओ पुत्र दोनों हाथों से उठाओ देखिए मैं तो वानर कुल का हूं मुझे आपके कुल की परंपरा कैसे पता होगी आप एक बार करके बताइए ना तुम्हें इतना भी नहीं आता मैं दिखाती हूं कैसे माला चढ़ा है [संगीत] तुम्हें ये क्या हो गया मेरे हाथ ये क्या हो गया मैं अपने ही कोट यंत्र में फस गई नहीं वानर ये तुमने क्या किया मैंने कहां कुछ किया है आप तो अपनी बनाई हुई भास में फस गई है वानर उस खड़क को तो तुम स्पर्श भी मत करना यदि तुमने मेरा बत करने का प्रयास किया तो मैं आपका वध नहीं करूंगा मुझे तो अपने कार्य के लिए विलंब हो रहा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है रुको रुको मुझे मुक्तो कर दो ना जाने इस मायावी कुट यंत्र भास में आपने कितने निर्दोष मनुष्यों को फसाकर उनका अहित किया होगा ये आपकी ही बनाई हुई भास है अब इसमें फसक आपके बापों का प्रश्चित होगा क्योंकि यह विधि का विधान है जैसी करनी वैसी भरनी रुको मेरी कोई सहायता करो नर तुम ऐसे नहीं जा सकते कोई मेरी सहायता करो [संगीत] समय रहते सब द्वीपों की मिट्टी एकत्रित हो गई यह क्या मेरी छाया तो छोटी सी रह गई है लगता है द्वितीय प्रहर का समय भी समाप्त होने वाला है मुझे शीघ्र ही सुमेरू पहुंचना [संगीत] होगा किंतु मुझे एक और आवश्यक कार्य पूर्ण करना है [संगीत] नारायण नारायण यह हनुमान को क्या हो गया है तब तो द्वीप की मिट्टी एकत्रित करने के पश्चात व सुमेरू की दिशा में ना जाकर विपरीत दिशा में क्यों जा रहा है हनुमान समय रहते नहीं लौट पाएगा जो कार्य ना हो सके उसके लिए कभी भी अपनी स्वीकृत नहीं देनी चाहिए बहुत बड़ी भूल की है हनुमान ने कहीं ऋषि दुर्वासा क्रोधित ना हो जाए हे प्रभु मेरे लाल को इनके कोप से बचा लो महाराज केसरी प्रतीत होता है आपका पुत्र यह भूल गया कि द्वितीय प्रहर के समाप्त होने से पहले लौट कर आना है क्षमा कीजिए ऋषिवर हनुमान आता ही होगा अभी भी द्वितीय पहर में कुछ क्षण शेष है जो अब तक नहीं आया तो कुछ क्षणों में क्या आ [संगीत] पाएगा [संगीत] मैं आ गया ऋषिवर ऋषिवर प्रणाम ऋषिवर आपकी सेवा के लिए सत द्वीप की मिट्टी प्रस्तुत है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शयो हनुमान हवन के लिए तुम सप्त दीप की मिट्टी तो ले आए किंतु गंगाजल की भी आवश्यकता है हनुमान से कार्य अधूरा रह गया कहीं ऋषिवर कुपित ना हो जाए हनुमान से ऋषिवर जब पिताश्री यहां हवन करवाते थे तब उन्हें गंगाजल की आवश्यकता पड़ती थी यह मुझे स्मरण था तो मैं गंगाजल लेने चला गया हे परम पावनी गंगा माता ऋषि दुर्वासा को अपना हवन करने के लिए आपके जल की आवश्यकता होगी मैं केसरी नंदन हनुमान आपसे जल प्राप्त करने के उद्देश्य से आया हूं मुझ पर कृपा [संगीत] करें प्रणाम माता गंगा प्रिय हनुमान पवित्र उद्देश्य के लिए किए जाने वाले सभी कार्यों में प्रकृति के पांचों मूलभूत तत्व जल वायु अग्नि आकाश एवं पृथ्वी सभी सहायक होते हैं मैं तुम्हें जल प्रदान करती [प्रशंसा] [संगीत] हूं प्रणाम माता ऋषिवर हे [संगीत] गंगाजल हनुमान यह परीक्षा थी तुम्हारे सामर्थ्य की तुम्हारी बुद्धि की मुझे प्रसन्नता है कि तुम इस परीक्षा में सफल रहे अब मैं तुम्हारी वीरता बुद्धि चातुर्य और दूरदर्शिता पर विश्वास कर सकता हूं ऋषिवर हनुमान बहुत ही प्रसन्न है कि आपने उसे विश्वास के योग्य समझा ऋषिवर आपकी सेवा करके तो हनुमान का जीवन धन्य हो जाएगा ठीक है हनुमान अब मुझे जगत कल्याण के लिए कल्प वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करनी है अब मैं उस कल्प वृक्ष की रक्षा करने का कार्य तुम्हें सौंप हूं [संगीत] हनुमान अब मैं कल्प वृक्ष का आवाहन स्वर्ग से पृथ्वी पर आने के लिए [संगीत] करूंगा आइए मेरे साथ स्वर्ग का कल्प वृक्ष इस पथवी बल बला बल बल दशानन को इसकी सूचना देनी होगी बल महाराज बाली और सफल हो गई आपकी युक्ति रंगेश असफल महानतम वाली की युक्ति नहीं आपकी मायावी राक्षसी आपके मायावी अस्त्र आपके द्वारा भेजे हुए विप हुए हैं बारंबार आपकी माया असफल हो रही है मेरी माया असफल नहीं होती वो माया ही थी जिसके कारण वो वानर बालक की शक्तियां छीन ली गई वो माया आई थी जिसके कारण वो नर बालक अशक्त हुआ था किंतु लाभ क्या हुआ इसका लंकेश लाभ होता होता लाभ महाराज मानतम बाली यदि आपकी माता बीच में आकर आपको रोक ना देती तो लाभ होता वाली नहीं वाली नहीं मैं किष्किंदा की महारानी तुम्ह अपने वचन की बंधन से मुक्त करती हूं और पुन उस वानर बालक को शक्तियां एकत्रित करने का अवसर प्राप्त नहीं होता अन्यथा स्थिति आज कुछ और होती स्थिति कोई भी हो किंतु वो मर्कट जीवित नहीं रहना चाहिए नहीं नहीं महाराज बाली असफलता हमारी असुरी माया की नहीं है वो वानर बालक बहुत चतुर है और देवता भी उसकी सहायता करते हैं परंतु लंकेश अब तक तो ऋषि दुर्वासा ने उस कल्प वृक्ष की आहवान [संगीत] कर कल्प वृक्ष का आवान पृथ्वी पर लाने के लिए वानर कल्प वृक्ष की रक्षा करनी है ना तुम्हे अब यही कल्प वृक्ष बनेगा तेरे श्राप का माध्यम [संगीत] ओ तेजो सति कल्प वृक्ष आवाहन विनियोग ओ जो स्थिति कल्प वृक्ष [संगीत] आवाहन [संगीत] [संगीत] [संगीत] कल्प कोई साधारण वृक्ष नहीं है क्या तो होगा ही ना तुम्हें यक्ष भली भाती ज्ञात है पाताल राज यपा को सब ज्ञात है समुद्र मंथन से उत्पत्ति हुई थी इस कल्प वृक्ष की समस्त मन कामनाए पूर्ण करता है यह कल्प वृक्ष स्वर्ग लोक का यह दिव्य कल्प वृक्ष तो तुम्हें यह भी ज्ञात होगा पाताल राज यपा कि यदि तुम उस कल्प वृक्ष को चुराकर यहां पाताल लोक में ले आए तो तुम उसकी सहायता से पाताल लोक को भी स्वर्ग के समान वैभवशाली बना सकते हो और यह कार्य एक मात्र केवल तुम ही कर सकते हो इसलिए हमें तुम्हारी आवश्यकता पड़ी किंतु आप दोनों का कौन सा प्रयोजन सिद्ध होगा इससे पृथ्वी पर उसका आवान ऋषि दुर्वासा ने किया है और उसकी रक्षा के लिए उन्होंने उस केसरी पुत्र वानर बालक को नियुक्त किया है जैसा कि लंकेश ने बताया तुम उस कल्प वृक्ष को चुरा सकते हो और यदि तुमने ऐसा किया तो ऋषि दुर्वासा कुपित होकर उस मर्कट को श्राप दे देंगे बताओ कर सकते हो तुम ऐसा या [संगीत] नहीं हनुमान स्मरण रहे दिव्य कल्प वृक्ष की सुरक्षा का दायित्व अब तुम पर है यदि असरों को पृथ्वी पर दिव्य कल्प वृक्ष की उपस्थिति के बारे में ज्ञात हो गया तो वे किसी भी प्रकार इसे प्राप्त करने का प्रयास अवश्य करेंगे आप निश्चिंत रहे हनुमान पूरी सतर्कता से एवं सजगता से इस दिव्य कल्प वृक्ष की रक्षा [प्रशंसा] करेगा [संगीत]
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