[संगीत] ये क्या पुत्र यह क्या किया तुमने अपनी मां के लिए इतनी पीड़ा सही मां मुझे इस पीड़ा का आभास ही नहीं हुआ मेरा तो मात्र आपके नेत्रों की ज्योति लौटाने पर ही ध्यान [संगीत] था [संगीत] हनुमान हनुमान अब शीघ्र ही सूर्यदेव के पास जाओ पुत्र वे तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे किंतु मैं अपनी मां को और सारे मित्रों को यहां पाताल लोक में कैसे छोड़कर जा सकता हूं इनकी चिंता तुम मत करो पुत्र इन्हें मैं अपनी शक्ति से इनके स्थान पर पहुंचा दूंगा और देवी अंजना को सुमेरू पहुंचा [संगीत] दूंगा किन विचारों में डूबे हुए सूर्यदेव जाइए आपका शिष्य हनुमान अपना कार्य संपन्न करके आता ही होगा उचित है महादेव प्रणाम प्रणाम विष्णु देव प्रणाम परमपिता ब्रह्मदेव यह तो दुविधा उत्पन्न हो गई हनुमान को शति पहुंच स स है यह जानते हुए भी मैं कैसे उसे इस महा ज्ञान को देकर संकट में डाल [संगीत] दूं वरुण देव आप मुझे आज्ञा एवं आशीर्वाद दे प्रणाम कल्याण हो मां आज्ञ दीजिए मां सफल मनोरथ हो तुम्हारा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] प्रणाम अरुण देव त्रिदेव ने तो आदेश दे दिया है कि हनुमान को मैं आज ही तीनों देवों का महा ज्ञान प्रदान कर दूं किंतु हनुमान अभी तक आया नहीं न जाने कैसे होगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान आ ग सूर्यदेव वो देखिए प्रणाम गुरुदेव प्रणाम अरुण देव विलंब होने के लिए क्षमा कर दीजिए मातृ सेवा तो सर्वोपरि है हनुमान मातृ धर्म बड़ा है शिक्षा धर्म से मैं शिक्षा के लिए प्रस्तुत हूं गुरुदेव अब आप मेरी शिक्षा पुनः आरंभ कर सकते हैं जिस संपूर्ण ज्ञान को आत्मसात कर आप अपने सूर्य तत्व रूप से इस संसार को आलोकित करते वही महा ज्ञान यदि हनुमान ने आत्मसात कर लिया तो हो सकता है कि एक और सूर्य में परिवर्तित हो जाए अनंत काल तक प्रज्वलित रहने वाला अग्नि का गोला बन जाएगा गुरुदेव प्रतीत हो रहा है आप किसी दुविधा में है क्या मुझसे कोई भूल हो गई है दुविधा तो बहुत बड़ी है हनुमान इतने अल्प समय में त्रिदेव का सारा महा ज्ञान प्रदान करना असंभव सा प्रतीत हो रहा है मुझे आप उसकी चिंता मत कीजिए गुरुदेव आप जो भी ज्ञान मुझे देंगे मैं उसे शीघ्र से शीघ्र आत्मसात कर लूंगा हनुमान जब तीव्रता से जल का भराव होता है तो नदिया किनारे तोड़ देती है मुझे यही आशंका है पुत्र इतने विशाल ज्ञान को यदि तुम्हें एक साथ प्रदान किया गया तो तुम्हारे मस्तिष्क को क्षति पहुंच सकती है किंतु अब मेरे पास कोई विकल्प नहीं बोलो हनुमान क्या तुम इस संकट के लिए प्रस्तुत हो [संगीत] इस महा ज्ञान को जो मुझे धीरे-धीरे तुम्हें सात दिन में प्रदान करना था अब केवल अर्ध दिवस में ही देना हो किंतु इसका परिणाम महा भयानक भी हो सकता है हनुमान तुम्हारा मस्तिष्क और तुम्हारी देह इस महा ज्ञान को एक साथ आत्मसात ना करने के कारण पूर्णता नष्ट भी हो सकती है गुरु की शिक्षा के बिना यह उनसे भी नहीं मिल पाएंगे जिनके लिए इनका जंग मैं किसी भी परिस्थिति के लिए प्रस्तुत हूं गुरुदेव मेरी शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात मैं उनसे भी मिल पाऊंगा जिनसे मिलने के लिए मेरा जन्म हुआ है सब जीवन के तारण हारे मारुती है श्री राम के प्यारे अद्भुत महिमा उनकी जान गुरु देंगे संपू ज्ञान त्रिदेव शक्ति जिन में समाहित उन अस्त्रों को करेंगे अर्जित गुरु वचनों का करते ध्यान ज्ञान प्राप्ति को तत्पर हनुमान कहां कहा नहीं ढूंढा अंजना को ना जाने कैसी होगी वो कहां [संगीत] होगी केसरी जी हमारी अंजना आ गई क्या अंजना अंजना कैसी हो तुम प्रणाम स्वामी अंजना तुम्हारे नेत्र तुम देख सकती हो अंजना हा स्वामी वरुण देव ने उपचार बताया था प्रणाम वरुण [संगीत] देव आपका बहुत बहुत धन्यवाद वदेव आप अजना और हलको को यहां पर लेकर आए इसके लिए मुझ पर ही नहीं संपूर्ण सुमेरू पर उपकार किया है आपने मैं कैसे धन्यवाद करूं आपका धन्यवाद का पात्र आपका पुत्र हनुमान है महाराज केसरी जिसके पराक्रम से देवी अंजना के नेत्रों की ज्योति वापस लौट [संगीत] आई उसी ने मुझे और सूर्यदेव को संकट से मुक्ति दिलाई [प्रशंसा] [संगीत] [हंसी] [संगीत] अब मुझे आज्ञा दीजिए महाराज केसरी आप सबका कल्याण हो सेनापति जी बालकों को उनके घर ले जाने की व्यवस्था की जाए जो आज्ञा महाराज अंजना आज मैं बहुत प्रसन्न हूं मुझे गर्व है अपने पुत्र पर रंजना वह असंभव को भी संभव बना देता है हा स्वामी उसने तो उस राक्षसी का भी वध कर दिया जो मुझे यहां से ले गई और सूर्यदेव के अशको को भी मुक्त कराया है उसने अब तो यही प्रतीक्षा है कि हनुमान अपनी शिक्षा पूर्ण करके वापस आ जाएगा मैं उसके लिए भव्य दीक्षा समारोह करवाऊंगी [संगीत] अंजना एकाएक तुम्हारी बाव बंगी मा परिवर्तित हो गई कोई चिंता की बात है [संगीत] क्या हनुमान की शिक्षा का आज अंतिम दिवस है इतने अल्प समय में ना जाने उसकी शिक्षा पूर्ण हो पाएगी या [संगीत] [संगीत] नहीं हनुमान मैं तुम्हें सर्वप्रथम तीन विशेष दिव्यास्त्र का ज्ञान प्रदान करूंगा यह महा शक्तिशाली एवं महा उपयोगी दिव्यास्त्र ब्रह्मदेव विष्णु देव एवं महादेव की शक्तियों के स्वरूप [संगीत] है इन अस्त्रों को प्राप्त करने के लिए तुम्हें पूर्ण समर्पण के साथ ही अपनी समस्त शक्तियों और ध्यान को केंद्रित करना होगा गुरुदेव मैं अपनी पूर्ण भक्ति एवं शक्ति के साथ धारण करने के लिए प्रस्तुत हूं हनुमान स्मरण रहे इन महान शक्तियों को संभालना सबके सामर्थ्य में नहीं इसीलिए यह दिव्यास्त्र किसी भी अन्य के पास नहीं है तुम वह प्रथम एक मात्र ऐसे पात्र हो जिसे वो तीनों अस्त्र प्राप्त होंगे यह मेरा सौभाग्य होगा गुरुदेव उचित है अनुमान अब इसके लिए मैं प्रक्रिया आरंभ करता [संगीत] [संगीत] हूं ध्यान रहे हनुमान तुम्हे इन अस्त्रों को प्राप्त करते समय इस ज्योति व्रत की बदी में ही रहना होगा यदि किसी भी कारण वर्ष तुम इस परिधि से बाहर पहुंच गए तो तुम्हारी शस्त्र विद्या ही नहीं शास्त्र विद्या भी अपूर्ण रह जाएगी [संगीत] प्रभु जिन तीन दिव्यास्त्र को बड़े बड़े देवता भी संभाल नहीं पाते जिन्ह सैकड़ों वर्षों की साधना के पश्चात भी सिद्ध करना कठिन है उन्हें सूर्यदेव हनुमान जैसे बालक को इतने अल्प समय में प्रदान करने जा रहे हैं कैसे संभाल पाएंगे हनुमान उन दिव्यास्त्र के महाते को अब मैं तुम्हें बताता हूं कि कैसे तुम इन दिव्यास्त्र का आवान करके इन्हें सिद्ध कर सकोगे तुम सर्वप्रथम मां जगदंबा का ध्यान करते हुए तुम्हें इन अस्त्रों की दीक्षा लेनी हे मां जगदंबे मुझे इन दिव्य अस्त्रों को ग्रहण करने एवं धारण करने की शक्ति प्रदान करें इसके अतिरिक्त हर अस्त्र को प्राप्त करने के कुछ विधान जो मैं तुम्हें उस अस्त्र को प्राप्त करने के पूर्व बताऊंगा सर्वप्रथम मैं तुम्हें दगा स्त्र की दीक्षा प्रदान करूंगा जो परमपिता ब्रह्मदेव की शक्ति का सूचक है जिसे तुम केवल पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ ही नियंत्रित कर पाओ अब इसके मंत्र को ध्यान से सुनो और आत्मसात करो अवश्य गुरुदेव मैं ऐसा ही [संगीत] करूंगा शुलेनबर्ग चा घंटा सुने ना पाही चाप जानी सुनन चा ब्रह्मदेव के शक्ति सूचक दगा स्त्र प्रकट [संगीत] हो [संगीत] हनुमान इस दगा स्त्र से तुम्हें सृजन की शक्ति प्राप्त होगी तुम इस अस्त्र की सहायता से किसी भी वस्तु का निर्माण कर सकोगे अब तुम इस मंत्र को पूर्ण श्रद्धा के साथ दरा करर इस दित्र को ग्रहण करो [संगीत] पुत्र शलन पाहि देवी पाही खड़ग चाके घंटा सुने न पाही जाप जानी सुने [संगीत] जा [संगीत] इसे धारण करने से तीव्र ऊर्जा का आभास हो रहा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रणाम गुरुदेव प्रथम दिव्यास्त्र प्रदान करने के लिए आपको नमन गुरुदेव हनुमान ने दगा स्त्र तो सहजता के साथ नियंत्रित कर लिया किंतु वृता स्त्र तथा महास्त्र को नियंत्रित करना इतना सहज नहीं है समय भी तो व्यतीत होता जा रहा है अब मैं वृता स्त्र का आहवान करूंगा यह जगत पालक विष्णु देव का शक्ति सूचक अस्त्र है इसके प्रयोग से तुम पूरी सृष्टि में कहीं भी किसी की भी रक्षा कर सको [संगीत] किंतु वृता स्त्र को मात्र संयम के साथ ही ग्रहण एवं नियंत्रित किया जा सकता है तनिक भी बल प्रयोग किया तो यह अनियंत्रित हो जाएगा [संगीत] हनुमान जगत पालक विष्णु देव का शक्ति सूचक वृता स्त्र प्रकट हो [संगीत] [संगीत] [संगीत] हो हनुमान अब मैं जिस मंत्र का उच्चारण करूं उसे ध्यान से सुनो और पूर्ण संयम के साथ उस मंत्र का उच्चारण करके इस अस्त्र को ग्रहण [संगीत] करो प्राम रक्ष प्रतिम च चं के रक्ष दक्षिण ब्राह्मण नाथ सुस उतर स्याम तते [संगीत] शवरी प्रम रक्ष प्रति चमचा चंडी के रक्ष दक्षिणे ब्राह्मण नात्म शस्य उतर स्याम तथे शवरी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ज [संगीत] [संगीत] [संगीत] h
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