Friday, 2 January 2026

यमराज और विश्वकर्मा को बंदी किसने बनाया था Basant B Uzair Basar Vighnaharta Ganesh Episode 629

पिता श्री आपकी कथा के अनुसार सुरा पद्मन का वध मात्र भैया कार्तिके के द्वारा ही हो सकता है हा पुत्र राज जब मे दक्षिण मूर्ति रूप ने अपने पल छकी तो यह संकेत था अधर्म के अंधकार का जो सूरा पने एक सहस्त्र आठ ब्रह्मांड में फैलाया है अब उन्ह अार शक्ति प्राप्त हो चुकी है जिससे व संपूर्ण को आतंकित कर रहे हैं अर्थात पिता श्री आपकी पलक झपक से जो अंधकार छाया था और जिसे हम किसी अनहोनी का संकेत समझ रहे थे वह क्षण वस्तुत जयंत के हरण का ही क्षण था जयंत हां पुत्र देवताओं को यह ज्ञात नहीं जयंत के हरण से पूर्व ही देव शिल्पी विश्वकर्मा और यमराज का उनकी पुत्रियों के साथ हरण कर वो अपनी माता का दिया कार्य आरंभ कर चुके [संगीत] [संगीत] [संगीत] थे [संगीत] ना ना ना यह ना होना चाहिए ना होगा मेरे दोषी मेरे सामने अपना शिश उठा कर रहे यह कैसे स्वीकार करूं मैं दोषी हमने तुम्हारे प्रति क्या दोष किया दोष सुनना चाहते हो ना अपना तो सुनो मेरे मुख से [संगीत] [संगीत] सुनो [संगीत] उठो मेरे आज्ञाकारी [संगीत] पुत्रों देखो स्थान को तुम्हें अपना दोष स्वयं ही स्मरण हो जाएगा [संगीत] मेरे पिता का वध करने के पूर्व क्या कहा था तुम सबने प्राण पखेरू का उड़ना तो अब निश्चित ही है मरा समय आ गया तैयार हो जाओ असुर सम्राट मृत्यु के पाश में बनने के लिए मृत्यु पाश ना यमराज उसमें तो तुम सब देवता बं होगे नहीं पुत्र इतनी सरल मृत्यु नहीं इतनी सरल मृत्यु तो अपनों को दी जाती है शत्रुओं को नहीं शत्रु को कष्ट देना सीखो पुत्र एक ही वार के अंत से उसे कहां कष्ट होगा विश्वकर्मा की पुत्री पद्म कोमल तुम उससे विवाह करो सुरा पद मन और सिह मुखन तुम यम की पुत्री विदाई से किंतु इनके पिता को कारागार में रख कर ही प्रताड़ित करो और तुम्हारे ससुर तो देव शिल्पी है ना सुरा पद्मन उनका लाभ उठाओ कारागार और तुम्हारी नगरी का निर्माण उनसे ही करवाओ अधीन है वो तुम्हारे और मेरा पुत्र गज मुखन वो क्यों रहे विवाह से वंचित उसके लिए देवराज की पुत्री ही उपयुक्त है ले आओ उसे भी ले आ उसे भी आ उसे भी अर्थात मेरा पुत्र सुरा पद्म का बंदी है और मेरी पुत्री देव सेना पर भी संकट छाया [संगीत] है जयंत ही नहीं अग्निदेव वायु देव और वरुण देव भी उसके बंदी हैं [संगीत] [संगीत] जयंत अग्निदेव वायु देव वरुण देव भी इस दुष्ट असुर के बंदी [संगीत] है [संगीत] स्वागत है मेरे नवीन [संगीत] सेवकों तो क्या पुत्र कार्तिके को इन दुष्टों से अकेले ही युद्ध करना होगा मैं अकेला कहां हूं मां आप दोनों का आशीर्वाद है ना साथ किंतु उसका अंत ऐसे नहीं होगा पुत्र उसे उसके संपूर्ण वंश के साथ नष्ट करना होगा तुम्हें इस युद्ध की तैयारी तुम्हें एक विशेष यात्रा से करनी होगी पुत्र जिसका आरंभ मेरे ज्योतिर्लिंग केदारनाथ और उसके बाद अपनी माता की शक्ति पीठ मण कणिका से होगा एक ऐसी यात्रा जिससे तुम पंच भूतों को समझकर स्वयं की शक्ति को पहचान सको तभी तुम्हें वास्तविक शक्ति और प्राप्त होगा जिससे तुम इस युद्ध में सफलता प्राप्त कर सकोगे उनका वध मात्र पाशुपतास्त्र से ही संभव है [संगीत] पुत्र आप केवल आज्ञा दीजिए पिता श्री पुत्र इस यात्रा में मेरा आशीष प्रत्यक्ष रूप में तुम्हारे साथ [संगीत] रहेगा शक्ति अस्त्र शक्ति अस्त्र शक्ति अस्त्र शक्ति अत्र [संगीत] शति सरु वि देव सेनापति कुमार कार्तिके की देव सेनापति कुमार कार्तिके की जय कुमार कार्ति की देव सेनापति कुमार कार्तिके [प्रशंसा] की महा सेनाय प्रो चलिए मयूर जी रुकिए भैया मैं भी तैयार हूं चलिए नहीं गणेश तुम मेरे साथ नहीं चल सकते किंतु क्यों भ मैं आपको इस संकट का सामना अकेले नहीं करने देना चाहता यदि ऐसा है तो फिर अकेले ही सारी बात तुम स्वयं तक ही क्यों रखना चाहते हो गणेश मुझे बताते क्यों नहीं ओ तो भैया चाहते हैं कि मैं विवाह से जुड़ा भेद अभी उन्हें बता दूं जिससे वह तुरंत विवाह के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दे जो सत्य है उसे बताने में इतना संकोच क्यों गणेश मैं अंतिम बार पूछ रहा हूं गणेश शीघ्र कहो वहां इंद्र पुत्र जयंत संकट में है वो वो वो भैया आप क्या करेंगे चतुर गणेश जी वो वो वो वास्तव में वो मैं [संगीत] विवा विवाद नहीं कर सकता अभी विवाद का समय नहीं है मुझे साथ ले चलिए भैया [संगीत] ठीक है अर्थात तुम्हारे मन में जो है उसे तुम अभी भी गुप्त रखना चाहते हो ठीक है कोई बात नहीं अनुज मैं इस विचार से अभी अपने ध्यान को भटकने नहीं दे सकता इसीलिए मैं तुम्हें अपने साथ नहीं ले जा सकता चलिए मैं [संगीत] जी आपका अनुज की आज्ञा का पालन करेगा भैया आपके साथ नहीं चलूंगा किंतु हां आपके पीछे पीछे अवश्य आऊंगा और युद्ध के अंत तक मां के द्वारा बताए विवाह के महत्व को भी आपको अवश्य समझा दूंगा और विवाह के लिए आपकी सहमति भी ले लूंगा यह मेरा निश्चय ही नहीं दृढ़ निश्चय है गणेश के मन में विचारों के जो मेघ मर रहे हैं अभी उनकी नहीं अभी तो इस यात्रा में दुष्ट असुरों पर जो मेरे अस्त्रों की वर्षा होगी उसके लिए मुझे स्वयं को तैयार करना है कुमार [संगीत] [संगीत] कार्तिक देव सेनापति संपूर्ण देव सेना आपके साथ इस यात्रा पर चलने के लिए प्रस्तुत है देवराज अब अपनी चिंता त्याग दीजिए चिंता मुक्त हो जाइए क्योंकि अब किसी भी क्षण आपका पुत्र जयंत अन्य देवताओं के साथ आप सभी के साथ होगा देव सेनापति कुमार का मुझे आपकी शक्ति और सामर्थ्य पर पूर्ण विश्वास है किंतु त नहीं वो दुष्ट उन्हे कैसे कैसे कष्ट देकर प्रताड़ित कर रहा होगा कैसे कैसे अत्याचार उ में सहने पड़ रहे [संगीत] होंगे वायु के देवता अब स्वर्ग में तुम्हारा कोई स्थान नहीं है अब केवल महेंद्र गिरी के सेवक हो तुम एक तु सेवक जिसे भैया सुरा पद्मन के आदेश का पालन करना होगा सभी मार्ग सब स्थान महेंद्रपुरी नगरी का एक एक कोना तुम्हारे स्वर्ग से भी अधिक स्वच्छ होना चाहिए अब यह कार्य तुम्हारा है सेवक वायु देव जहा वो स्थान मेरे सुंदर मुख के लिए दर्पण के समान होना चाहिए समझे अन्यथा चलो अब अपना का [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] करो विवशता व्यक्ति से क्या नहीं करवाती इच्छा हो अन्यथा ना [संगीत] हो तो सेवक वरुण देव अब सदा अपना कर्तव्य स्मरण रखना तुम अनावश्यक जल का बहाव ना कोई भी पात्र और फुहार जल से रिक्त ना हो और हां मेरे नगर के सभी मार्ग धोने का कार्य भी अब तुम्हारा है सेवक वरुण देव [संगीत] न कार्य में विलंब हो नकारी रुकना चाहिए अन्यथा विवश हो मुझे पुन स्मरण कराना पड़ेगा क्यों स्मरण नहीं है तो भी करा देता हूं अपने अग्नि के ताप को अपने तक ही सीमित रखना किसी को भी किसी प्रकार की हानि ना हो यहां पर कोई भी अग्नि की भेट चढ़ने नहीं चाहिए ना तन ना वस्त्र ना भोजन स्मरण रखना [संगीत] अग्निदेव तो चलो उठो पकाना आरंभ करो ध्यान रहे एक भी दाना जलाना तो कठोर दंड के भागी [संगीत] बनोगे [संगीत] [संगीत] उत्तम अति उत्तम [संगीत] सेवक [संगीत] जयंत [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] म म महाराज और तुम छोटे सेवक तुम सदैव हमारी सेवा के लिए तत्पर रहोगे की सेवा और गुणगान दोनों साथ-साथ होना चाहिए ध्यान रखना क्षमा महाराज क्षमा असुर के परम उद्धारक एक सहस्त्र आठ ब्रह्मांड के विजेता शत्रुओं को त्रस्त करने वाले हे महान असुर सम्राट सुरा पद्मन अपने इस तुच्छ सेवक की सेवा स्वीकार कीजिए ना ना ना ना ना ना तनिक भी आनंद नहीं आया मुझे मेरा गुणगान अभी भी अधूरा है दुर्बल इंद्र के पुत्र को सेवक बनाने वाले का गुणगान किया तुमने बोलो शीघ्र बोलो अपना संपूर्ण गुणगान सुनना है हमें पिता श्री के पुत्र को अपना सेवक बनाने वाले पिताश्री नहीं दुर्बल इंद्र को अब तुम किसी के पुत्र नहीं मात्र और मात्र हमारे सेवक हो सुना नहीं तुमने असुर असुरो के परम उद्धारक एक सहस्त्र आठ ब्रहमांड के विजेता असहाय देवताओं को पराजित करने वाले दुर्बल इंद्र के पुत्र को अपना सेवक बनाने वाले हे महानतम मसूर सम्राट मेरी सेवा स्वीकार कीजिए इंद्र का पुत्र मेरा सेवक आनंद ही आनंद सर्वत्र आनंद महाराज महाराज महाराज महाराज प्रणाम महाराज महाराज वो देवराज इंद्र यहां पढ़ा आ रहा है अकेला आने दो मुझे और एक सेवक मिल जाएगा क्योंकि अपने पुत्र की रक्षा करना तो रात्रि में स सदय के समान है उसके लिए क्षमा करें महाराज अकेले नहीं संपूर्ण सेना के साथ आ रहा है वो और उस सेना का नेतृत्व कोई युवा योद्धा कर रहा [संगीत] है तु सेवक क्यों मूर्खता कर रहा है क्यों मुस्कुरा के मेरे दंड का भागी बनना चाहता है तू महाराज आप तो बस आनंद कीजिए तुच्छ देवताओं की तुच्छ सेना के लिए तो हमारे सेनापति और हमारी सेना ही पर्याप्त होगी पुत्र क्या हुआ इंद्रद शरावती कुमार कार्तिक व दुष्ट सुरा पत में बहुत ही दुष्ट है क उसे हमारे और हमारी सेना के आगमन की सूचना प्राप्त हो गई तो कहीं वो मेरे पुत्र जयंत और अन्य सभी देवताओं को और कष्ट ना देने लग जाए उचित आप [संगीत] इंद्र उस दुष्ट को हमारे आने की सूचना तो मिल ही गई होगी और वह हमें रोकने के लिए किसे भेजेगा यह हमें ज्ञात नहीं प्रणाम देवऋषि नारायण नारायण जहां तक मैं उस को समझता हूं गजमुख को ही कार्य देगा वो उसे ही भेजेगा अन्य किसी को नहीं हा हा गजमुख महान सेना नायक जिसे देख युद्ध भूलकर भाई से काप उठेगी य देव सेना स्वयं नारायण को पराजित करने वाला गजमुख प्रतिशोध वह अग्नि है जिसमें व्यक्ति स्वयं के सुख और शांति को जलाकर भस्म कर लेता है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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