[संगीत] विश्वास नहीं होता मेरा यह प्रयास विफल कैसे हो गया एक बार और प्रयत्न करना होगा मुझे सूर्यास्त हो गया [संगीत] ओ सावित्री सूर्यास के साथ तुम्हारा व्रत संपन्न हुआ चलो [संगीत] स्वामी सावित्री सावित्री सावित्री तुम यही विश्राम करो स्वामी सावित्री तुम्ह ऐसी अवस्था में देखना मेरे लिए आसान है क्यों कहा मैंने तुम्ह इतना कठोर वत करने के लिए स्वामी इससे अच्छी अवस्था तो मेरी कभी भी नहीं थी आप चिंता मत कीजिए आप तो बस मुझे आशीर्वाद दीजिए स्वामी कि जिस कामना के साथ मैंने यह वत किया है पूर्ण हो जाए मुझे इस व्रत का सुफल प्राप्त हो जाए स्वामी सावित्री मेरी शुभकामनाए सदा तुम्हारे साथ है ऐसी भक्ति और निष्ठा का मान तो मां भी अवश्य रखेंगी वो तुम्हें आशीष अवश्य देंगी तुम्हारी सारी कामनाएं अवश्य पूरी होगी कोई चाह कर भी नहीं रोक सकता तुम जो चाहोगी होगा सावित्री अपने स्वामी के जीवन के लिए इन्होंने इतना कठोर व्रत किया और उन्हे ही ज्ञात नहीं देवी सावित्री मैं तो आपको आपका व्रत करने से नहीं रोक सका किंतु यह भी सत्य है आयु सभी की समाप्त होती है तृष्णा एक ऐसी इच्छा है जो प्रतिदिन बढ़ती है किंतु विधि का विधान ही है जो सदा एक समान है और कल वही होगा जो विधि का विधान है यह व्रत तो धर्म के पद पर देवी सावित्री का एक छोटा सा भाग था उनकी धर्म निष्ठा और उनके आत्मविश्वास का वास्तविक चमत्कार तो अभी होना शेष था मां आपको कोटि कोटि धन्यवाद आप ही की कृपा से मैं अपने तीन दिन का व्रत संपन्न कर [संगीत] सकी मा मा देवर श्री नारद की भविष्यवाणी के अनुसार आज मेरे स्वामी के जीवन का अंतिम दिवस है इस अनर्थ को टालने के लिए मैंने अपने व्रत का पहला पढ़ाव पार कर लिया है मां किंतु पारण तो मैं तभी करूंगी जब उनकी मृत्यु टल जाएगी मां मुझे साहस और शक्ति प्रदान कीजिए और आपकी कृपा से मां आज का दिन उनके जीवन का अंतिम दिवस नहीं अभी तो उनके नवीन जीवन का प्रथम दिवस बना [संगीत] सकू [संगीत] सावित्री सावित्री देखो सावित्री तुम्हारे व्रत के पारण के लिए मैंने कितने स्वादिष्ट वजन पकाए हैं खीर चूरमा पूरी और यह सब मैं तुम्हें अपने हाथों से खिलाऊंगा आओ अन्यथा विलम होगा क्षमा कीजिए स्वामी मैं अभी पारण नहीं कर सकती क्यों क्यों नहीं खा सकती तुमने ही तो कहा था कि व्रत के चौथे दिन तुम पारण से अपना व्रत संपन्न करोगी देखो अब समय आ गया है आज चौथा दिन है तुम तीन दिन से भूखी हो तुमने कुछ नहीं खाया तो भीतर शक्ति कैसे आएगी मैं तीन पहर कुछ ना खाऊं ना तो मरना सन हो जाता हूं स्वामी क्यों अशुभ बातें कर रहे हैं शुभ शुभ बोलिए स्वामी मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगी मुझे मेरा संकल्प मेरा प्रण ज्ञात है आज सूर्यास्त के बाद पति पूजन के बाद ही मैं अपना पारण करूंगी अभी मुझे क्षमा कीजिए किंतु देवी तुमने तो कहा यदि आप बारबार मनोहर करेंगे तो मैं आपको नका नहीं सकूंगी स्वामी कि तो तब मेरा तीन दिन का व्रत व्यर्थ चला जाएगा उचित है तो फिर मैं भी नहीं जाऊंगा सूर्यास्त तक तुम्हारे निकट ही रहूंगा उसका क्या लाभ स्वामी कार्य या कर्तव्य अधूरा छोड़ने से अनुष्ठान भी अधूरा रह जाता है और कार्य का महत्व तो सबसे अधिक है स्वामी आप यहां रहने के स्थान पर मुझे अपने साथ क्यों नहीं ले जाते स्वामी मुझे अपने साथ ले जाइए मुझे ले जाइए ना स्वामी नहीं प्रिय तुम तीन दिनों से भूखी हो एक पांव पर खड़ी हो इतना कठोर वर्क कर रही हो एक अन का दाना नहीं जल की बूंद नहीं कुछ भी ग्रहण नहीं किया तुमहे देखो मैं तुम्हें अपने साथ वन में जाने की अनुमति नहीं दूंगा इस अवस्था में इतनी गर्मी में मैं तुम्ह अपने साथ वन नहीं ले जा सकता किंतु तुमने उचित कहा परिस्थिति कोई भी हो परिश्रम तो परम धर्म है मुझे जाना होगा मेरे जाने का समय हो गया है परिस्थिति कोई भी हो परिश्रम तो परम धर्म है मेरे जाने का समय हो गया है नहीं आप ऐसा क्यों कह रहे हैं स्वामी आपको कहीं नहीं जाने दूंगी सावित्री सावित्री तुम इतनी विचलित क्यों हो रही हो मैं तो मात्र अपने दिनचर्या के अनुसार वन में जाने की बात कह रहा हूं और तुम तो ऐसी रो रही हो जैसे मैं संसार छोड़ के जा रहा हूं कितनी बार कहूं मैं आपसे ऐसी अशुभ बातें मत कहिए मत करिए ऐसी अशुभ बातें सर्वथा उचित ही कहा सत्यवान ने उसके संसार छोड़कर जाने का समय आ गया है स्वामी आप क्यों बारबार जाने की बात कर रहे हैं स्वामी मैं आपको कहीं नहीं जाने दूंगी आप जहां जाएंगे मैं वही आपके पीछे पीछे आ जाऊंगी फिर वो वन होय यमलोक प्रे मुझे क्षमा कर दो मेरे शब्दों ने आपको बहुत मेरा यह आशय नहीं था स्वामी तो मान लीजिए ना मेरा निवेदन ले चलिए ना मुझे अपने साथ आज मैं एक पल के लिए भी आपको अकेला नहीं छोड़ना चाहती साया बनकर आपके साथ रहना [संगीत] चाहती पुत्र सावित्री की अगर इतनी प्रबल इच्छा है तो उसको अपने साथ लेकर जाओ वैसे भी इससे पहले इसने कोई इच्छा व्यक्त नहीं की है और ना ही कहीं जाने का अनुरोध किया है बस हमारी सेवा में लीन रहती है पुत्र उसकी यह इच्छा पूर्ण करो हां पुत्र नारी के मन की थाप आना अत्यंत कठिन है वो जो कहती है या करती है उसके पीछे कोई ना कोई बड़ा कारण अवश्य होता है इसलिए तुम सावित्री पुत्री को भी अपने साथ ले [संगीत] जाओ जैसी आपकी आज्ञा पिताजी प्रणाम माता प्रणाम पिता श सदा सुहागन रहो सदा सुहागन यही एक इच्छा तो है मेरे मन में कि आपका यह आशीर्वाद फलित हो इसके सिवाय और कुछ नहीं चाहिए मुझे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] चलो इच्छा इच्छा नहीं धर्म सर्वोपरि है मैं अपना धर्म अपना दायित्व अवश्य [संगीत] निभाऊंगा सावित्री यह उचित स्थान है तुम यहां विश्राम करो मैं अपना कार्य समाप्त कर शीघ्र लौटता हूं तुम यहां बैठकर मेरी प्रतीक्षा [संगीत] करो [प्रशंसा] स्वामी यह कैसा अशुभ भ्रम था [संगीत] मेरा स्वामी स्वामी क्यों आ रहे हैं मेरे मन में ऐसे अशुभ [संगीत] विचा [संगीत] नहीं नहीं ऐसे बुरे विचारों का मन में आना उचित [संगीत] नहीं जाओ [संगीत] जाओ यहां तो आगे कुआ पीछे खाई है यमदेव के आदेश का पालन तो करना ही होगा किंतु इन देवी के निकट जाने में भी संकट [संगीत] है [संगीत] [संगीत] स्वामी क्या हु सावित्री स्वामी स्वामी आगे एक विषैला कंटक है सावधानी से चलिए स्वामी अभी चुप जाता आपको सावित्री को सर्प नहीं है मात्रे काटा है इस वन में मैं बाल्यावस्था से आता हूं तो इन कंटक का आभास है मुझे तुम चिंता मत करो सावित्री मैं शीघ्र लौटता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हूं [संगीत] संभ मैं ठीक हूं सावित्री मेरी चिंता मत [संगीत] करो [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] स्वामी [संगीत] संभाली स्वामी स्वामी आपने ऐसी असावधानी क्यों की सावित्री तुम व्यर्थ में चिंतित होती रहती हो किंतु स्वामी तुम्हें पता है ना मेरा कार्य ही कुछ ऐसा है आज तक कभी कोई हानि नहीं पहुंची लाओ यह कुल्हाड़ी दे दो मुझे दे दो ना बस यह डाल काट लू फिर साथ में घर चलेंगे [संगीत] लाओ [संगीत] धन्यवाद प्रभु यमदेव जब तक देवी सावित्री सत्यवान के साथ है उनके प्राण लेना असंभव है तुमने उचित ही कहा जब तक पति धर्म परायण नारी अपने पति के साथ है हम उसके पति के प्राण नहीं ले सकते देवी सावित्री को सत्यवान से दूर करना ही होगा मां मां कृपा कीजिए मुझ पर मेरे स्वामी का कोई अहित ना हो दया कीजिए [संगीत] मां पानी थोड़ा जल हो ना प्यास लग रही है स्वामी मैं अभी लाई अभी लाई यही उचित अवसर [संगीत] है [संगीत] प्यार से अधीर रो रहा हूं मैं [संगीत] स्वामी सर य सब कहां से आ गया स्वामी मेरी यह युक्ति भी असफल हो गई स्वामी स्वामी आप ठीक है प्यास के कारण त हो रहा हूं स्वामी [संगीत] संभालिए जल जल जल स्वामी नहीं स्वामी स्वामी स्वामी [प्रशंसा] स्वामी स्वामी स्वामी स्वामी क्या हो गया आपको स्वामी सावित्री ये कैसी पस है मेरे प्राण सु रहे स्वामी कुछ नहीं हो मैं हूं आपके पास आपको कुछ नहीं होने दूंगी [संगीत] स्वामी विश्वास रख स्वामी मेरे होते आपको कोई हित नहीं कर [संगीत] सकता स्वामी स्वामी हा स्वामी मैं अभी चलती हूं मैं चलती हूं आपको कुछ नहीं [संगीत] होगा [संगीत] सॉरी सावित्री सावित्री स्वामी स्वादी स्वा [प्रशंसा] स्वामी स्वामी स्वामी स्वामी स्वामी क्या हो गया आपको ये नहीं हो सकता ये कैसे हो गया बा ये कैसे होने दिया आपने स्वामी रेत्र खोलिए स्वामी खोलिए रे स्वामी स्वामी उठिए उठिए स्वामी स्वामी मुझे क्षमा करना [संगीत] देवी आपके अद्भुत पति धर्म परायणता का साक्षी बनने पर भी मुझे अपना कर्तव्य तो निभाना ही था [संगीत] नहीं नहीं नहीं [संगीत] नहीं स्वामी स्वामी स्वामी ये कैसे हो गया स्वामी मैं तो यही थी फि आपके प्राण कैसे चले गए कैसे चले गए स्वामी कैसे चले [संगीत] गए किंतु मां कथा के आरंभ में माता सावित्री का परिचय देते समय तो आपने कहा था कि उन्होंने स्वयं यमदेव को भी विवश कर दिया था अपने पति के प्राण स्वयं धर्मराज से सुरक्षित किए थे हां पुत्र उन्होंने वैसा ही किया जैसा मैंने कहा [संगीत] था यदि मेरे कर्म अच्छे होंगे तो मुझे अवश्य मिलेगा जिसके मैं योग्य हूं मैं आपको वचन देता हूं आपकी पुत्री को कोई भी कमी नहीं होने दूंगा और यद इनके भाग्य में राज्य योग होगा तो इन्ह अवश्य मिलेगा मैं तीन पहर खाऊ ना तो मरना सन हो जाता हूं तुम्हारी सारी कामनाए अवश्य पूरी होंगी कोई चाहा कर भी नहीं रोक सकता तुम जो चाहोगी होगा सावित्री तुम जो चाहोगी होगा [संगीत] [संगीत] सावित्री आप जहां जाएंगे मैं वही आपके पीछे पीछे आ [संगीत] जाऊंगी हे माता गायत्री वेदों की अधिष्ठात्री देवी ना तंत्री बाते वीणा ना चक्र बाद ते रथ ना आप सुख में दे या शाद पी शता अर्थात जैसे वड़ा तारों के बिना बजाई नहीं जा सकती बिरा पहिए का रथ नहीं हो सकता वैसे ही एक स्त्री बिना पति के सुख नहीं पाती चाहे वो 100 पुत्रों वाली ही क्यों ना हो माता आज मेरे धर्म मेरे कर्म और मेरे पति के प्रति रे प्रेम मेरी आस्था की परीक्षा है माता य मेरा पति हर परायणता सच्ची तो मुझे गति की शक्ति दीजिए कि यमदेव मेरे पति के प्राण मुझसे दूर नहीं ले जा सके माता सतन नमस नम त नम तस नमो नम कुछ तो है जो उचित नहीं है लौट जाइए देवी आप इस प्रकार यमलोक नहीं आ सकती लौट जाइए और अपने पति के दाह संस्कार की तैयारी कीजिए हे धर्मराज हे यमराज यदि आप मेरे स्वामी के प्राण ले जाएंगे तो आपको मेरे भी प्राण ले जाने होंगे यदि दा संस्कार होगा तो हम दोनों का होगा अन्यथा नहीं हो नैनम छिंदंति शस्त्राणि नैनम दहति पावक ना चैन क्ले देन त्या पो ना शोष यती मारुता अर्थात आत्मा तो अजर अमर है ना इसे शस्त्र काट सकते हैं ना अग्नि जला सकती है ना ही जल इसे गला सकता है ना ही वायु इसे सुखा सकती है तो पुत्री तुम मात्र नश्व देह के लिए व्यर्थ विलाप कर रही हो नहीं पुत्री मुझे मत रोको मैं तो मात्र अपना धर्म निभा रहा हूं साधवी नाम तू सिता नाम तू शिले सते श्रु सिते श्री राम पवित्रम परम पति एक विशेष अर्थात सदाचार सत ज्ञान और मर्यादा में रहने वाले साध और पति धन प्रणता स्वभाव की स्त्रियों के लिए उनके पति ही पवित्र और परम विशिष्ट होते हैं उनके बिना व अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकती इसीलिए यदि स्वामी जीवित नहीं है तो फिर मेरे जीवन का भी क्या लाभ प्रकृति तो ईश्वर के अधीन है व समस्त जीवों को उनके कर्म के अनुसार बार-बार नवीन जीवन देती है यदि प्राणी का एक जीवन समाप्त नहीं होगा तो उसे नया जीवन कैसे प्राप्त होगा उसे अपने पूर्व जन्म के कर्म को सुधारने का अवसर कैसे मिलेगा यही नियति है और यही मेरा कर्तव्य तो फिर उचित है आप अपने धर्म का पालन कीजिए और मैं अपने पति के प्राणों के साथ जाकर अपने धर्म का पालन करूंगी हट करने से तुम्हारी इच्छा पूर्ण नहीं होती जाएगी देवी आगे परलोक की नदी वैतरणी है उसे कोई भी मनुष्य स देह पार नहीं कर सकता उसमें प्रवेश किया तो वही रह [संगीत] जाओगी इसीलिए लौट जाओ अन्यथा ना पति के प्राण के साथ जा सकोगी और ना ही उसका अंतिम संस्कार करने लौट सकोगी यह तो यमराज ने उचित ही कहा है मां कोई भी जीव देह के साथ वैतरणी को पार नहीं कर सकता फिर माता सावित्री ने अपने पति के प्राण कैसे लौटाए अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से पुत्र जब व्यक्ति आत्मा को भुलाकर शरीर का दास हो जाता है तो वहां आत्मा गौण हो जाती है किंतु जब किसी की आत्मा देह के बंधनों को भुला दे तो वह शरीर भी आत्मा समान दिव्य हो जाता है पुत्र नारायण नारायण हे गायत्री माता कुछ कीजिए अन्यथा अनर्थ हो जाएगा क्या हुआ देव शी नारद किस अनर्थ की बात कर रहे हैं आप मां इस पुत्री को मैंने ही नाम दिया हो उसी को वैतरणी में उलझा हुआ कैसे देख सकता हूं मां रोक लीजिए पतिव्रता साधवी सावित्री और यमराज के मध्य इस वाद विवाद को रोक लीजिए मां [संगीत] मां पुत्री वैतरणी में जा रही है रोक लीजिए मा अनर्थ हो जाएगा मा किसी को रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है देवर्ष कि मा व कैसे पार करेगी यह संभव नहीं है ना य विधि का विधान [संगीत] है कदाचित व वैतरणी में नहीं उतरेगी उसके पहले ही रुक [संगीत] [संगीत] जाएगी नम नम नम नमो नमः धर्म निष्ठ आचरण के साथ जो अपने कर्तव्य का पालन दृढ़ता पूर्वक करते हैं प्रकृति की दृश्य अदृश्य शक्तियां सदैव उनकी सहायता करती हैं
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