Friday, 2 January 2026

यम को महत्वपूर्ण दायित्व कैसे प्राप्त हुआ था Akanksha Puri Malkhan Vighnaharta Ganesh Episode

हता श्री गणे श्री गणे मैं अपना तेज टा नहीं सकता अब आप ही इस समस्या का कोई निदान सुझाए ससुर श्री बताइए मुझे कि मैं क्या करू क्या करू इस लोह पात्र में गिरकर सूर्यदेव की किरणें शिथिल पड़ रही [संगीत] है कदाचित मुझे इस समस्या का समाधान प्राप्त हो [संगीत] गया संसार के महानतम शिल्पकार विश्वकर्मा ने सूर्यदेव की समस्या का समाधान ढूंढ लिया और अपने विशेष उपकरणों से उनके तेज को खंडित [संगीत] किया [संगीत] [हंसी] [संगीत] फिर उन तरल किरणों से सभी देवताओं के लिए अस्त्र शस्त्र का निर्माण [संगीत] किया [संगीत] [संगीत] पिताश्री पिताश्री पिताश्री यहां भी नहीं है और अपने कक्ष में भी नहीं क्या वो नाना जी के स्थान से अब तक लौटे नहीं [संगीत] धन्यवाद विश्वकर्मा जी एक और तो सभी देवताओं को उनके नवीन शस्त्र प्राप्त हो गए तो वही दूसरी ओर अभी भी कुछ किरण शेष थी जो कदाचित विश्वकर्मा को आदेश दे रही थी कि उन्हें उन शेष किरणों का उपयोग कर एक और शस्त्र का निर्माण करना चाहिए मानस पव संया अभिता ना कभी भी [संगीत] ज [संगीत] मुझे ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है जैसे नाना जी के भवन से मुझे कोई पुकार रहा हो यह किस प्रकार के शस्त्र का निर्माण किया था देव शिल्पी विश्व कर्मा जी ने माता वो साधारण अस्त्र नहीं मृत्यु पाश था मृत्यु पाश था मृत्यु पाश था ऐसा पाश जो जिसका भी स्पर्श करे उसकी तत्काल मृत्यु हो जाए फिर फिर क्या हुआ माता मुझे स्मरण है उस पाश पर तो यमराज का अधिकार है तो उन्हें वो पाश कैसे प्राप्त हुआ माता इस बार किसी देवता ने नहीं स्वयं मृत्यु पाश ने अपने स्वामी को चुना किंतु शस्त्र कैसे चुन सकता है अपना स्वामी माता क्या हुआ कार्तिके क्या तुम्हारी समझ अपने अनुत से भिन्न है हां माता उचित है तो फिर तुम ही समझाओ अनुज गणेश तुम तो सर्व ज्ञाता हो बुद्धि के देवता हो किंतु फिर भी यदि तुम मेरे मुख से शस्त्र की महिमा समझना चाहते हो तो सुनो शास्त्र और योद्धा एक दूसरे के पूरक हैं यह कोई संयोग नहीं है कि पिताश्री मामा जी फफ जी समस्त देव मैं और तुम्हारा भी अपना एक विशेष शस्त्र है प्रत्येक शस्त्र का स्वामी पूर्व से ही नियत होता है और फिर जो कुछ भी घटित हो रहा था वह तो मां की लीला का ही परिणाम था सर्वथा उचित कहा तुमने कार्तिके माता इंद्र देव सूर्य देव वायु देव वरुण देव अग्नि देव यहां तक कि पिता श्री मामा जी ूपा जी अर्थात त्रिदेव भी तो वहा एकत्रित है ना तो बताइए ना उस पाश ने उन सभी योग्यता संपन्न देवों में से यम देव को ही अपना स्वामी कैसे चुना माता तुम्हारी यह जिज्ञासा भी अवश्य शांत करूंगी मैं गणेश अदभुत है य शस्त्र य पाश मैंने इस पाश का सृजन कैसे कर दिया कैसे हुआ यह इस पाश का स्वामित्व तो देवराज अर्थात मुझे ही प्राप्त होना [संगीत] चाहिए प्रभु महादेव यह पाश मुझे तो कुछ भी स्मरण नहीं है कि मैंने इसे कब कैसे और क्यों रचा नम शिवाय ओ नम शिवाय देव शिल्पी विश्वकर्मा आपके जिन हाथों से समोच सृष्टि की रचना हुई है व जो भी रचें उसका अवश्य कोई बड़ा महत्व होगा किंतु प्रभु आप त्रिदेव के साथ इंद्र देव और सभी देवों के शस्त्रों का मैं पूर्व निर्माण कर चुका हूं फिर इस पाश रूपी शस्त्र का क्या रहस्य है जो भी हो यह मेरे भवन में स्थित रहे यह उचित नहीं है इसका अवश्य ही कोई ना कोई कारण होगा इसे वो पूरा करना ही होगा [संगीत] किंतु इसका अधिकार किसे मिलेगा यह हम कैसे ज्ञात [संगीत] करेंगे या [संगीत] नाना जी के भवन से यह कौन मेरा आवाहन कर रहा है रह रहकर पिताजी वही है कहीं उन्हें तो मेरी आवश्यकता नहीं मुझे स्वयं जाकर वहां देखना [संगीत] [संगीत] चाहिए मैंने इस पाश का सृजन कैसे कर दिया कैसे हुआ यह मुझे ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है जैसे नाना जी के भवन से मुझे कोई पुकार रहा हो मुझे स्वयं जाकर वहां देखना [संगीत] [संगीत] चाहिए अनायास देव शिल्पी विश्वकर्मा जी ने जिका सीजन किया उस शस्त्र का इस शक्तिशाली पाश का उचित अधिकारी तो मैं देवराज ही हो सकता हूं महादेव मैं आपसे विनती करता हूं कि आप इस पाश के लिए उचित अधिकारी घोषित कीजिए जो इसे स्वीकार करे और इसके उचित स्थान पर ले जाए यदि महादेव ने इसे स्वीकार कर लिया तो मैं मैं इस पाश से वंचित रह जाऊ किंतु इसका प्रथम अधिकार तो कदाच उ का है देव शिल्पी विश्वकर्मा जो आत्माओं के लोग का दायित्व संभालेगा वही इस पाश का अधिकारी [संगीत] होगा आचरण की श्रेष्ठता धर्म और न्याय के प्रति सर्वोच्च निष्ठा धारण करने वाला ही इस पद दत्व का और पास का अधिकारी [संगीत] होगा [संगीत] देवगण मुझे ज्ञात है आप सभी इस पाश को पाने के लिए लालायित हो रहे हैं तो संकोच मत कीजिए आप इसे पाने का प्रयास करने के लिए स्वतंत्र हैं उचित है महादेव नारायण और ब्रह्मदेव को इस पाश की कोई आवश्यकता नहीं उनके बाद तो वरिष्ट मैं ही हूं मैं ही इस पाश के योग्य हूं देव राजेंद्र मन की इच्छा को भीतर मत रखिए अब तो महादेव की भी अनुमति यदि आप इस पाश को प्राप्त करना चाहते हैं तो आगे बढ़ प्रयास कीजिए जो आज्ञ नारायण [संगीत] स [संगीत] बस अब पल भर में यह पाश मेरा ही [संगीत] होगा [संगीत] अरे इस पास ने तो मुझे जकड़ कर अपने वश में कर दिया ये ये कहां गिरा जा रहा हूं [संगीत] मैं ये कौन सा कौन सा लो [संगीत] देवराज क्या हुआ देवराज आप कुशल तो है ना इस भाष से दूर रहना ही उचित [संगीत] होगा कैसे अदभुत शक्तिशाली अस्त्र का निर्माण हुआ है मुझसे जिसे देवराज इंद्र भी नहीं संभाल पाए कोई तो अवश्य होगा जो इसका अधिकारी [संगीत] बनेगा देव कोई स्पष्ट संकेत क्यों नहीं दे रहे [संगीत] हैं अरे देवराज इंद्र एक क्षण पूर्व अभी आप उस पाश को उठाने गए थे और अचानक पीछे हट गए अग्निदेव यदि आपकी इच्छा है तो आप आप स्वयं प्रयास क्यों नहीं कर लेते समझ गया मैं इंद्रदेव पाश को अपने वश में नहीं कर सके इसलिए ऐसे वचन बोल रहे हैं मैं अग्नि का देवता हूं इसलिए यह पाश तो मेरा ही होना चाहिए प्रभु यदि आपकी आज्ञा हो तो इस पाश को उठाने का प्रयास [संगीत] [संगीत] करूं [संगीत] अरे मेरे हाथ इन अंधिका छिद्रों में कैसे फस गए मेरे हाथ सहायता कीजिए कोई मेरी सहायता [संगीत] कीजिए कोई मेरी सहायता करने के लिए भी नहीं है यहां एका की हूं मैं [संगीत] इंद्रदेव अग्निदेव ये क्या हुआ आप लोगों को [संगीत] यह तो स्पष्ट है कि देव राजेंद्र और अग्निदेव दोनों इस पाश के उत्तराधिकारी नहीं है किंतु क्या अशेष देवताओं में कोई इसे प्राप्त करने का प्रयास करना चाहेंगे य पाश मुझे आकर्षित तो कर रहा है किंतु इंद्रदेव और अग्निदेव के प्रयत्न का परिणाम देखकर मैं सशंकित भी हूं इंद्रदेव और अग्निदेव दोनों इसे उठाने में असफल क्यों हुए किंतु यह आवश्यक नहीं कि जो पाश इंद्रदेव और अग्निदेव नहीं प्राप्त कर सके वह मैं भी ना उठा सक इस पाश को पाकर अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के स्वर्ण अफसर को दवाना उचित नहीं प्रभु नारायण आपकी आज्ञा हो तो मैं प्रयास करूं [संगीत] [संगीत] अवश्य [संगीत] एक एक कर सभी देवताओ ने उस पाश को अपने वश में करने का प्रयास किया और असफल हुए अंतता एक मात्र सूर्य देव ही शेष रहे यह पाश जिसका निर्माण मेरी किरणों के पेट से हुआ है उसने सभी अन्य देवताओं को अस्वीकार कर दिया त्रिदेव तो पूर्व में ही स्पष्ट कर चुके हैं किय उनके लिए नहीं तो क्या मैं इसका अधिकारी हूं प्रभु आपकी आज्ञा हो तो मैं प्रयास करूं [संगीत] [संगीत] [संगीत] य ये कैसा विचित्र दृश्य दिखाई दिया मुझे सूर्यदेव कहिए क्या देखा आपने महादेव वो वो मैंने मैंने देखा कि कि वो पिताश्री [संगीत] यम उदयम तुम यहां [संगीत] पिताश्री मुझे ज्ञात था आप यहां है तो जब मुझे प्रतीत हुआ कि कोई मुझे यहां से पुकार रहा है तो मैं आपका विचार कर यहां चला आया यम को प्रतीत हो कोई पुकार रहा है उसे यहां से और मैंने जो दृश्य देखा तो क्या यम पुत्र यम उचित समय पर उचित स्थान पर पहुंचे हो [संगीत] तुम महादेव मैं कुछ समझा नहीं शीघ्र सब समझ जाओगे पुत्र किंतु सर्वप्रथम जाओ इस पास को उठाओ उस पाश को उठाओ यह महादेव क्या आदेश दे रहे हैं मुझे ऐसा क्या विशेष है उस पाश में महादेव य हमको पाश लेने के लिए क्यों कह रहे महादेव य यह उचित होगा क्या मेरा अर्थ है यम तो एक मात्र नव युवक है इस पाश को इतने सबल इतने शक्तिशाली देव नहीं उठा पाए तो क्या यम चिंता मत कीजिए देव शिल्पी विश्कर्मा जी यम को प्रयास तो करने दीजिए जाओ यम उस पाश को प्राप्त करो जो आज्ञा प्रभु महादेव नारायण [संगीत] ब्रह्मदेव ओ आ कृष्णन रजस वर्तमान निवेश यन मतं हिरण्यन सविता रना देवो भवना [संगीत] प [संगीत] अगनि यम सूर्य पुत्र यम मैं आपको अपना स्वामी स्कार करता हूं [संगीत] यमराज [संगीत] आश्चर्य पाश ने यम का स्पर्श स्वीकार कर लिया अर्थात यम ही इसका अधिकारी है [संगीत] मेरे पुत्र यम ने इस पाश का स्वामित्व प्राप्त [संगीत] किया तुम तो केवल एक साधारण बालक हो यम फिर ऐसा क्या है तुम में जो इस पाश ने मुझ देवराज इद्र को छोड़कर तुम्हें अपना स्वामी स्वीकार कर लिया [संगीत] जय प्रणाम [संगीत] माता देवराज आप ही अपनी समस्या लेकर मेरे पास आए थे और अब मेरे समाधान देने पर आप मेरी लीला पर संदेह कर रहे हैं प्रश्न उठा रहे हैं मुझ पर नहीं नहीं माता मुझे आपकी लीला पर कदा भी संदेह नहीं मुझे तो बस ज्ञात करना था कि यम ही क्यों क्योंकि यम उत्तम आचरण धर्म परायणता और न्याय परता में श्रेष्ठतम है क्षमा कीजिए माता किंतु यह सब मेरी समझ के परे है यम तुम्हें एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य हेतु चुना गया है जिस पाश ने तुम्हें चुना है वह मृत्यु पाश है जो आज से यम पाश भी कहलाएगा यह तो आपका सौभाग्य है देवगण कि आप सभी सुरक्षित है क्योंकि अब अपने स्वामी के हाथों में स् पाश की शक्ति अपनी पूर्णता प्राप्त कर चुकी है और अब जो भी इसका स्पर्श करेगा वो तत्काल मृत्यु का भागी [संगीत] बनेगा यम मैं तुम्हें मृत्यु का देवता और मृत्यु के उपरांत आत्माएं जिस लोक में निवास करेंगी उसका अधिपति बनाती हूं आज से वो लोग यमलोक के नाम से भी जाना जाएगा और उसकी व्यवस्था को सुचारू और नियंत्रित रूप से चलाने का दायित्व तुम्हारा होगा आयु समाप्त होने पर जीव को स् पाश से बंदी बनाकर यमलोक लाना होगा तुम्हें और उसके कर्मों के अनुसार उसकी उचित गति निर्धारित करनी होगी [संगीत] जो आजा [संगीत] माता [संगीत] मुझे गर्व है कि माता ने मुझे इतना बड़ा कार्य दिया है किंतु क्या मैं इतना बड़ा दायित्व निभा सकूंगा इस दायित्व को निभाने में चित्रगुप्त और यमदूत तुम्हारे सहायक [संगीत] बनेंगे प्रणाम माते प्रणाम त्रिदेव प्रणाम महाराज यमदेव चित्रगुप्त सभी लोकों पर जीवों के कर्मों का विस्तर लेखा जोखा रखेंगे विचार शब्द और क्रिया से जीव जो भी कर्म करेंगे चित्रगुप्त उन्हें सूची बद्ध करेंगे और जब मृत्यु होगी यमराज अपने दूतों की सहायता से उन आत्माओ को उनके कर्मों के अनुसार उचित फल देंगे यम तुम अपने लोक अर्थात यमलोक में भू विचार नामक आसन पर बैठकर आत्माओ के कर्मों का विचार करोगे और तुम्हारे दूत आत्माओं को बंदी बनाकर लाने में तुम्हारी सहायता करेंगे जो आज्ञा माता जो आज्ञा माता स्मरण रहे यम मेरे द्वारा नियत जन और मृत्यु के विधान के अनुसार समय आने पर किसी की भी मृत्यु टल नहीं चाहिए माता मुझे इतना बड़ा दायित्व सौंपने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद माता जो असंभव है वह संभव कैसे हुआ बताइए ना माता योग्य व्यक्ति को उसकी योग्यता के अनुसार उत्तरदायित्व दिए जाते हैं इसलिए श्रेष्ठ नहीं योग्य बनने का प्रयास करना चाहिए

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