ए काश श्री गणेश श्री स्थान का संबंध देवी पार्वती के अतीत से है जब उन्होंने दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के रूप में जन्म लिया था दक्ष प्रजापति मतभेद था किंतु फिर भी देवी सती ने कठोर तप कर अपने पिता के विरुद्ध मुझे विवाह किया और जब सती को ज्ञात हुआ जिसके पिता ने यज्ञ का आयोजन किया है और हमें आमंत्रित भी नहीं किया तब भी देवी सती ने मेरी इच्छा के विरुद्ध यज्ञ में जान का निर्णय लिया [संगीत] कुमारी [संगीत] पुत्री ये तो बता बहनों से भेंट हुई या नहीं [संगीत] [संगीत] ए चुके हैं इसलिए हमें अब यज्ञ आरंभ करना चाहिए [संगीत] हम कुछ नहीं कर सकते दीदी हां दीदी [संगीत] उत्तम नारायण वरुण देव इंद्रदेव अग्नि देव सूर्य देव सभी का भविष्य प्रस्तुत है यहां पर यज्ञ आरंभ किया जाए [संगीत] समस्त देवताओं का भाग है [संगीत] [संगीत] [संगीत] क्या अधिकार है आपका की तो आप अपने क्रोध में परम मंगलकारी महादेव को ही भूल जगत पिता महादेव सभी विकारों का नस कर सर्वत्र पवित्रता का विस्तार करता अपुन र जाएगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] मैं आपसे भी प्रश्न करती महादेव के बिना तो त्रिदेवों की त्रिमूर्ति अधूरी है फिर उनके यहां ना होने पर सभी व्याख्या में कैसे भाग ले रहे हैं अतिथियों का अपमान करने का तो साहस कर रही हो क्यों आई हो तुम यहां पर जिसे सदैव भूत प्रेत पिशाचों से गिरे रहना फ्री रहो वो मंगलकारी कैसे हो सकता है अरे वो तो अमंगलकारी है अपने पति का चयन तुमने हमारी इच्छा के विरुद्ध किया जिसके प्रेम में आंधी होकर तुमने पिता पुत्री के संबंध का सम्मान नहीं किया जिसके अवगुण नहीं देख पाती हो तुम उसे शिवा की तुलना तुम मेरे भगवानों से कर रही हो [संगीत] [संगीत] इसे स्वच्छता का राती भर विज्ञान नहीं [संगीत] शमशान में विचारण करता है जिसे शास्त्रों का ज्ञान नहीं है तुम मुझे उसे इस माया यज्ञ में आमंत्रित करने के लिए का रही हो क्या मैं किसी यज्ञ में आमंत्रित नहीं करूंगा [संगीत] [संगीत] और हां एक बात ध्यान से सुन लो जब तुम मेरे यज्ञ में ए ही गई हो तो अपने लिए कोई स्थान ग्रहण कर लो और हां यज्ञ के उपरांत एक साधारण भिक्षुणी की तरह भजन करने के बाद अपने भविष्य का भाग अवश्य लेती जाना और साथ में आभूषण और स्वर्ण भी लेती जाना क्योंकि तुम्हारा साधारण नहीं कर सकता [संगीत] [संगीत] जो बिना बोला है कहानी जाते हैं वह अंदर के पत्र बनते हैं ऐसा अनदर जो मृत्यु से भी अधिक कष्टदाई होता है इच्छा जब है का रूप ले लेती है तो उसका परिणाम सदैव विनाशकारी होता है [संगीत] [संगीत] इसके उच्चारण मंत्र से ही व्यक्ति पाप रहित हो जाता है उसका उधर हो जाता है [संगीत] चलिए आप नाम से शिवा और कंठ से अनशिप का रहे हैं वो साक्षात परमेश्वर है अच्छा समस्त शास्त्र समस्त नियम शुद्ध और अशुद्ध के भेद से पैर किचन के स्पर्श से पंगा भी पवित्र हो जाति कैसे हो सकते हैं इसीलिए उन्हें आप पवित्र खाने वाले वो डक और अकाली तो आप है पिता आप है पिता [संगीत] माता का इतना टिप्स मुझे भीतर जाना चाहिए किंतु किंतु मैन तो मुझे यही रुकने को कहा था क्रोध और अहंकार के अंधकार ने मेरे पिता के बुद्धि और विवेक को हर लिया की वह परम ब्रह्मा और यदि ये नहीं भूले तो स्थिति में यहां क्यों गया प्रजापति दक्ष को आप भिक्षुक बुला रहे हैं उन्हें की दया और भिक्षा से हम सभी का अस्तित्व बहुत घमंड है ना आपको आदि संपन्न स्थाई वेदों का यदि आपने दो का साथ समझती तो आपको स्पष्ट हो जाता की वेदों का सर उन दो अक्षरों के नाम में से और वो नाम है शिवा और वो नाम है [संगीत] परमेश्वर का अपमान किया है इसीलिए अब आपका भला नहीं हो सकता पिताश्री जो महादेव की निंदा करता है और जो मौन रखकर उनकी निंदा को सुनता है वो सभी महादेव के अपराधी हैं एक घोषणा करती हूं यार के रूप में मुझे अपना परिचय स्वीकार नहीं है [संगीत] अब मुझे जीवित रहने का अधिकार ही स्वीकार नहीं नहीं चाहिए [संगीत] उसका यही परिणाम होता तो स्वामी के शब्दों पर ध्यान नहीं दी इसीलिए मैं स्थिति की भाग आपके मुख से मेरे स्वास्थ्य समझ संसार के स्वामी के लिए जो अपमानजनस शब्द निकले [संगीत] आप मेरे स्वामी के लिए आप सब नहीं का पे के द्वारा की गई शिवा निंदा का करण भी मैं ही [संगीत] कपड़ा सिर्फ मुझे अपने प्राण देखकर ही करना वो करना हो [संगीत] मुझे क्षमा कर दीजिए [संगीत] [संगीत] मुझे शर्मा कीजिए सो तू आज के ग्लानि के साथ में जीवित नहीं र शक्ति पता ही नहीं बेटा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] महादेव नाथ नाथ [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] अपने यज्ञ में महादेव ये आकाशवाणी कैसी किसका स्वर है यह संपूर्ण सृष्टि संपूर्ण प्रकृति का स्वर है ये प्रकृति के कण-कण में आपको आपके भविष्य की चेतावनी दी है प्रजापति दक्ष [संगीत] अपने अहंकार से ये कैसा अनर्थ कर दिया तुमने अहंकार मैंने नहीं सती ने किया है जो मेरे ही महायज्ञ में आकर अपने पति का गुणगान कर रही थी मेरे निर्णय कौन उचित ठहर रही थी मेरे ही निवास स्थान में आकर मेरे पूजनीय भगवानों का अपमान करने का दंड तो उसे मिलन [संगीत] मैं तुम्हारा पिता हूं इसलिए यहां आया था किंतु यहां जो कुछ भी घटित हुआ है उसके बाद मेरा यहां एक क्षण भी रहना अनुचित होगा रुक जाइए ब्रह्मदेव यहां सभी देवी देवता प्रजापति दक्ष के आवाहन पर इस महायज्ञ में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं इसलिए यह यज्ञ पूर्ण होने तक किसी का भी यहां से प्रस्थान करना उचित नहीं और इससे मैं गधा भी सहन नहीं करूंगा [संगीत] घोषणा करता हूं मैं यदि आप में से कोई भी यज्ञ अधूरा छोड़के गए तो आज के पश्चात आपके लिए कोई यज्ञ नहीं करेगा [संगीत] रिसीवर की घोषणा स्पष्ट है पिता श्री जब तक की ये महायज्ञ संपन्न नहीं हो जाता कोई भी यहां से बाहर नहीं जा सकता [संगीत] प्रत्येक यज्ञ किसी एन किसी के कल्याण के लिए किया जाता है किंतु यहां तो विद्वान सो रहा है आपने हमारी रक्षा का इसलिए यज्ञ में आपका रहना अनिवार्य भक्ति के सामने भगवान भी विवश हो जाते हैं नारायण जो हुआ वो अनुचित था जो अब हो रहा है वह और भी अनुचित है किंतु वचनबद्ध होने के करण हमें यहां रहना ही होगा [संगीत] भीतर की यह शांति चुप क्यों रही है ना तो यज्ञ के मेट्रो की कोई ध्वनि ए रही है और ना ही अब कोई माता का स्वर सुने दे रहा है मुझे भीतर जाकर देखना चाहिए कुशल तो है मां प्रजापति दक्ष हमें यक्रिया को आगे बढ़ाना होगा अन्यथा आपका यह महायज्ञ असफल हो जाएगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रतीक्षा ना करें रिसीवर यज्ञ आरंभ करें [संगीत] [संगीत] माता कहां है आप कोमल मेरी पुत्री को यह कैसा कष्ट भोगना पड़ा है [संगीत] [संगीत] तो आपको भुगतना पड़ेगा प्रजापति दक्ष व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु होता है
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