यह असुर सुरक्षा महा अस्त्र है वो अस्त्र जिसे भूमि में गाड़ करर जहां तुम खड़े हो ग वहीं से तुम्हारी शक्तिया अनेक गुना बढ़कर चारों दिशाओं में फैलने लगेगी जब तक तुम इसके निकट रहोगे तुम्हारी अकाल शक्तियां तुम्हारे नियंत्रण में रहे इतना ही नहीं स्वयं वरुण देव अर्थात जल के देवता भी तुम्हारे आगे विवश हो जाएंगे तुम्हारा फैलाया अकाल मिटाने में असमर्थ हो जाएंगे वो तो क्या स्वयं त्रिदेव भी आ जाए स्वयं देवी दुर्गा भी प्रकट हो जाए तो भी तुम्हें रोकना असंभव होगा असंभव होगा असंभव [प्रशंसा] होगा [संगीत] मुझे आभास हो रहा है कि कोई बड़ा कपड़ जाल रच रही है माया सुरा सेही परंतु मैं ज्ञात नहीं कर पा रहा हूं कि यह क्या है किंतु प्रभु अभी तो भोजन का समय है आज समय है प्रभु आप भी मन भर कर खाइए और मुझे भी खाने फिर कल य आरंभ होने के बाद कहा अवसर मिलेगा उचित है किंतु मैं केवल मोदक खाऊंगा आपके लिए मोते खिलाया हूं प्रभु अन्य व्यंजन मैं खा [संगीत] लूंगा मूषक जी आप तो अधिक मात्रा में भोजन लेकर आ गए भोजन लालच नहीं आवश्यकता के अनुसार करना चाहिए विशेष रूप से तला भोजन तो बहुत सावधानी से करना चाहिए नहीं तो अपच हो जाता है और प्यास भी बहुत लगती है प्रभु आज मत रोकिए क्योंकि जितना भोजन करूंगा युद्ध के लिए उतनी ही ऊर्जा मिलेगी मुझे महास्त्र देकर आपने मुझे धन्य कर दिया गुरुवर कैसे मैं आपका धन्यवाद करूं अब देखिए आपका यह शिष्य गजा सुर द्वितीय कैसे देवताओं को ा माम करने पर विवश करता है बस इतना स्मरण रखना त् इस महास्त्र की यह विशेषता है इसको क्रियान्वित करने के बाद इसे तभी रोका जा सकता है जब कोई इसे नष्ट कर दे विजय भवा विजय भवा भवा अब कोई नहीं रोक सकेगा मुझे अपने पिता का प्रतिशोध लेने [प्रशंसा] से यह कैसी भयंकर गर्जना है इसकी कहीं ये इस अस्त्र के प्रयोग की तैयारी तो नहीं कर रहा आ [संगीत] सत्य कहा था गुरुदेव ने मेरी ऊर्जा का विस्तार हो रहा है अनेको गुना बढ़ गई है मेरी ऊर्जा सावधान देवताओं अब मैं सर्वनाश करूंगा तुम्हारा हे माता यह [संगीत] क्या ताप नहीं श्राप हूं मैं सब का विनाश मैं तो मेरी शंका उचित थी किसी भयानक मायावी शक्ति का प्रयोग ये दुष्ट संपूर्ण सृष्टि के सर्वनाश पर तुला [संगीत] [संगीत] है हा आनंद आ गया उचित कहा था आपने प्रभु तालाब भोजन करने से प्यास बढ़ जाती है प्यास का तो सरल उपाय है [संगीत] जल अभी समाप्त होना था इस जल को मेरी प्यास बढ़ती जा रही है प्रभु मैं जल लेकर अभी [संगीत] आया ये सब पात्र तो जल से रिपत है जल की एक बूंद ही नहीं है यहां किंतु जलाशय में अवश्य जल मिलेगा वही चलता हूं [संगीत] यह जलाश कैसे सूख गया कहां गया इसका जल प्रभु कैसी अवस्था हो गई है मेरी प्यास से मुख सूखा जा रहा है और कहीं जल नहीं मिला मैंने तो पहले ही कहा था मूषक जी लालच बुरी बला है और तले भोजन का लालच तो करेला वो भी नीम चढ़ा है मुझसे भूल हो गई प्रभु क्षमा करें दया करें अपने सेवक पर अपनी लीला को रोक दीजिए प्रभु क्योंकि जल के बिना मैं एक पल भी नहीं रह सकता मूषक जी मेरी लीला नहीं किसी की माया है [संगीत] यह षक जी ही नहीं संपूर्ण देव सेना प्यासी [संगीत] [संगीत] प्रभु हो ना हो यह वही अनिष्ट है जिसका आपको आभास हुआ था इस अनिष्ट का कारण हमें ही ज्ञात करना होगा मूषक जी [प्रशंसा] [संगीत] आइए [प्रशंसा] सा [संगीत] सा जल चाहिए हमें ये कैसा सं है पस कसेसे ता जल जैसे पृथ्वी से अदृश्य ही हो गया है कहां जाऊ जल कहां से [संगीत] लाऊ यह तो अत्यंत भीषण और विकट स्थिति है महेंद्र पुरी में उन असुरों को जल की कोई कमी नहीं हा प्रभु हमारे शत्रु को जल से क कर रही है और उसे अकारण वय कर रही है और य जल का ऐसा अभाव है कि हमारे सैनिक प्यास से व्यथित है आप प्रत भम धम तवे मम जो सूर्यम दश अर्थात हे जल समूह जीवन रक्षक औषधियों को हमारे शरीर में स्थित करें जिससे हम निरोग होकर चिर काल तक सूर्य देव का दर्शन करते रहे हमारे देवताओं और सैनिकों की रक्षा हो पृथ्वी पर तीन ही रत्न है अन्न वायु और जल जो इसका संचय नहीं करेंगे उन्हें तो इसका परिणाम भुगतना ही होगा किंतु यह स्पष्ट है उन असुरों के पास जल का कोई अभाव नहीं है अवश्य इसके पीछे माया सुरास की ही चाल है आइए हम शीघ्र जाकर भ्राता को सूचित [संगीत] करें अनुज गणेश यह किस प्रकार का संकट है समस्त संसार में जल सूख गया है जल कहीं भी नहीं यहां तक कि मैं अपने जल तत्व से भी जल प्रकट नहीं कर पा रहा हूं और तो और वरुण देव तक जल प्रकट करने में असमर्थ रहे वर [संगीत] दे अब आप ही बताइए प्रथम कुछ है आप ही बताइए मैं क्या करूं माया सुर सई मैंने अपने महास से गजा सूर द्वितीय के तप के प्रभाव को इतना बढ़ा दिया देवता कितना भी प्रयास कर ले गजा सुर द्वितीय का काल नहीं रोक सकेंगे अब तुम्हारी विजय निश्चित है माया सुर सई असुर गुरु मैं आपकी आभारी रहूंगी युद्ध के पहले ही हमारी सेना को धराशाई करने की यह माया सुरास की चाल है अकाल के कारण को ढूंढकर शीघ्र ही उसे नष्ट करना होगा अन्यथा अनुज युद्ध आरंभ होने से पूर्व ही हम पराजित हो जाए [संगीत] जाए एक उपाय है भ्राता हर आपदा का कोई केंद्र होता है जहां से उसका आरंभ होता है और जहां उसका सर्वाधिक प्रभाव होता है यदि हम उस केंद्र को ढूंढ सके तो इस संकट का कारण और समाधान दोनों हमें एक ही स्थान पर मिल जाएंगे किंतु हम वो केंद्र ढूंढेंगे कैसे जिस प्रकार सागर की गहराई सागर में उतर कर ही ज्ञात की जा सकती है उसी प्रकार किसी भी समस्या या आपदा की शक्ति उसके केंद्र के निकट जाकर ही ज्ञात होगी और इस अकाल के केंद्र की ओर ले जाएगी हमारी प्यास जैसे-जैसे वह बढ़ती जाएगी हमें ज्ञात होगा कि हम उस केंद्र के निकट पहुंच रहे [संगीत] हैं किंतु हम दोनों को तो प्यास लगती ही नहीं इसका समाधान तो अत्यंत सरल है प्रभु ऐसे किसी को अपने साथ ले जाइए जो प्यास से पहले ही त्रस्त हो जैसे [संगीत] मैं ओ हो ये क्या किया मैंने अपने पांव पर स्वयं कुल्हाड़ी नहीं नहीं कुल्हाड़ी पर ही अपना पांव दे मारा प्रभु मुझे छोड़ दीजिए प्यास के कारण बहुत दुर्बलता का आभास हो रहा मुझे प्रभु प्रभु प्रभु इसलिए तो आप मेरे वाहन नहीं अपितु मैं आपका वाहन बना हुआ हूं मूषक जी आप तो बस मुझे इतना बताते रहिए कि आगे बढ़ने पर आपकी प्यास बढ़ रही है या नहीं तभी पता चलेगा हम सही दिशा में जा रहे हैं अभी तो कुछ पता नहीं चल रहा प्रभु मूषक जी ध्यान से सोचिए और उत्तर दीजिए उचित है प्रभु मेरी प्यास तो वैसे ही है जैसे आरंभ में थी अच्छा अर्थात हम अकाल के केंद्र में नहीं कहीं और ही जा रहे हैं हमें दिशा बदलनी [संगीत] होगी ओ प्रभु प्यास प्यास बढ़ रही है मेरे आप तो सहन करना कठिन हो रहा है प्रभु अति उत्तम प्यास बढ़ना तो अच्छा संकेत है मुक जी आप अपनी ऊर्जा बचाइए मुक जी अधिक बोलेंगे तो और प्यास बढ़ेगी [संगीत] हा प्रभु यह उचित दिशा है मेरी प्यास कम हो रही है अर्थात यह अनुचित दिशा है हमें उस ओर जाना चाहिए जहां आपको सर्वाधिक प्यास लगे क्योंकि वही इस समस्या का केंद्र होगा और वहीं जाकर हमें इसका समाधान भी प्राप्त [संगीत] होगा य सा महा संकट छ गया हम सब पर यह सूखा यह अकाल यह संपूर्ण सृष्टि का सर्वनाश कर [संगीत] देगा सृष्टि को इस महा संकट से वही बचा सकती है सृष्टि की माता सृष्टि की देवी जो स्वयं प्रकृति है जगत जननी है माता पार्वती हे माता जब जब सृष्टि पर विकट संकट छाया है आपने सदा अपने संतानों की सभी जीवों की रक्षा के लिए संहारक रूप धारण किया है हे माता आज फिर इस दुष्ट के प्रकोप से पृथ्वी पर आपके संतानों पर अग्नि बरस रही है अब आप भी अग बरसा माता अपने उ रूप में पर उसे नष्ट करके हमें इस कष्ट से मुक्ति दो माता मुक्ति दो ओम जयंति मंगला काली भद्र काली [प्रशंसा] कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते से सहायता की गुहार लगा रहा है कदाचित उसे कुछ ज्ञात हो माता ने यदि गुहार सुन ली तो मेरे प्राण बच जाएंगे ओम जयंति मंगला काली भद्र काली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते की पुकार है मेरा कौन भक्त मुझे पुकार रहा है किस संकट में है [संगीत] वो वो नहीं संपूर्ण सृष्टि संकट में मेरी सभी संताने कष्ट में कि त कौन है इसका [संगीत] कारण ओ ज मंगला वत्र काली कपा दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा [संगीत] नमोस्तुते जयंती मंगला का कल जयती मंगला अकाली कमानी दुर्गा क्षमा शिवा वहा सदा नमोस्तुते सुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वा स्वा नमोस्तुते अद्भुत है आपका ये दिव्य रूप ये दिव्य तेजरी चरी रक्त बीज को मरी तू स्वाहा शक्तिशाली के मुक्त बलशाली अ अपने भक्तो को उनके क से मुक्ति दिलाने के लिए ्र रूप धारण कर [प्रशंसा] [संगीत] रही [संगीत] ओम जयंति मंगला काली भत्र काली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते माता अपने देवी उग्र चंडी स्वरूप में आ रही है सृष्टि की रक्षा [संगीत] करने प्रकृति के साथ इस प्रकार की क्रीड़ा करने का दु साहस जिस किसी ने भी किया माता के क्र को जिसने भी जागृत किया है उसे इसका दंड मिलने का समय अब आ गया है मातम मातंगी मातम [संगीत] [संगीत] मातंगी मेरा एक पग रखते ही सृष्टि की यह दुर्दशा तो दूसरा पग रखते ही सृष्टि का सर्वनाश ही हो [संगीत] [प्रशंसा] जाएगा भस्म का ठेर बनेगी ये सृष्टि फिर ना तो कार्तिकी शेष बचेगा ना कोई जीव जंतु बस महेंद्र पुरी के वासी मेरे असुर ही जीवित [प्रशंसा] रहेंगे [प्रशंसा] नमन माता आपको शत शत नमन गजा सुर दती को गिराने का कियास दुती को गिराने का दु साज किया देवी यहां तो क्या मेरा अंत आ गया है क्या ये अपने त्रिशूल से मेरा वध कर [संगीत] देंगे ये असुर सुरक्षा महास्त्र जब तक तुम इसके निकट रहोगे तुम्हारी अकाल शक्तियां तुम्हारे नियंत्रण में रहे इतना ही नहीं स्वयं देवी दुर्गा भी प्रकट हो जाए तो भी तुम्हें रोकना असंभव होगा गजा सुर द्वितीय तुमने प्रकृति के साथ क्रीड़ा करने का दुस्साहस किया जिसे मैं कदापि सह नहीं करूंगी यदि तुमने शीघ्र इस दु साहस का अंत नहीं किया तो मैं तुम्हारे जीवन को मृत्यु के अंधकार में भेज दूंगी नहीं देवी नहीं ऐसा कुछ नहीं होगा तुम मुझे क्षति नहीं पहुंचा सकोगी परंतु विचित्र बात तो यह है सृष्टि पर इतना बड़ा संकट छाया है फिर भी ना तो शिवपुत्र आया मुझे रोकने के लिए ना ही स्वयं शिव आपको भेज दिया मूर्खा सुत मैं आई हूं क्योंकि तुम्हारी नियती में मुझसे ही मृत्यु पाना लिखा था तुम्हारी गर्जना से तुम्हारी चेतावनी से भयभीत होने वाला नहीं हूं देवी अार तो अजित किया है मैंने तुम मुझे हानि नहीं पहुंचा सकती नहीं रोक सकती हो चाहो तो प्रयास करके देख लो जब तक रे पावय पृथ्वी पर टके है ये अकाल इसी प्रकार फैलता जाएगा जहां तक मेरी इच्छा होगी सब मारे जाएंगे शेष बचेंगे केवल चिंता मत करो सुरा पद्मन गजा असुर द्वितीय को रोकने देवी अवश्य स्वयं आई है किंतु उसके तप और असुर गुरु शुक्राचार्य द्वारा दिए गए महास्त्र के कारण उसे हानि नहीं पहुंचा सकेंगे अतु उसकी शक्तियों के निरंतर बढ़ने के कारण सृष्टि की ही हानि होगी उचित है देरी पराजय का अपमान सहना ही चाहती हो प्रन मेरे त्रिशूल का प्रहार स हो [संगीत] दुष्ट पराजय भी तुम्हारी ही होगी और मृत्यु भी वो भी मेरे [संगीत] हाथों कहा था ना मैंने कोई क्ति नहीं पहुंचा सकेगा मुझे अपना प्रतिशोध लेने तक मैं ऐसे ही विनाश करता [संगीत] रहूंगा प्रभु सावधान यह तो बहुत अच्छा संकेत है प्रभु मेरे प्राण जाते जाते रह गए और आप इससे अच्छा संकेत कह रहे हैं हां मूषक जी कभी-कभी संकट में भी अच्छे संकेत छिपे होते हैं यह अस्त्र जहां से आया है आपदा का केंद्र वही कहीं है अर्थात हम उचित दिशा में बढ़ रहे हैं किंतु अब और शीघ्रता करनी होगी हमें ये कैसा सर्वनाश है प्रभु एक तो प्यास नहीं बुझी और अब ये युद्ध भी छेड़ गया प्यास से मृत्यु नहीं हुई तो इस गा माशान युद्ध में जाने से अवश्य मर [संगीत] जाऊंगा मेरा य शूल प्रहार व्यर्थ नहीं जाएगा हे माता [संगीत] सोम नंदी य क्यों सुरक्षित है इसका रहस्य जत कर शीघ्र इसका अंत करना चाहिए मुझे देवी मुझे दुर्बल समझने की भूल कर रही हो इस युद्ध में यदि किसी की शति होगी वो स्वयं तुम्हारी या तुम्हारी सृष्टि की इसीलिए उचित यही होगा कि अपनी पराजय स्वीकार कर तुम स्वयं यहां से चली [संगीत] जाओ क्यों व्यत में अ प्रहार कर रही हो इस सृष्टि की रक्षा करने आई हो उसे ही नष्ट करना चाहती हो तो कर लो अपनी ये इच्छा पूरी किंतु तुम्हारे अन्य अस्त्रों के समान ये अस्त्र भी मुझ तक पहुंचने से पहले नष्ट हो जाए सृष्टि की चिंता तुम मुझ पर छोड़ दो दुष्ट तुम स्वयं अपनी चिंता [संगीत] करो मंद श पासिनी विष्णु वि विग कुटि री कुटि री रहे भ शसुर भरते निरम कबर रसते जय जय हे मनिशा सुर भरते नि रम्य कमते श ये क्या देवी के प्रहार ने मेरा आकार छोटा कर दिया अभी तो केवल तुम्हारा आकार ही लगू किया है अब तुम्हें इस संसार से भी लुप्त कर दूंगी दर् [संगीत] सु बुद्धिमान वही है जो जानता है कि बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान भी समस्या के भीतर ही अंतर्निहित होता है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment