Friday, 2 January 2026

माता पार्वती ने असहज व्यवहार क्यों किया था Akanksha Puri Uzair Basar Vighnaharta Ganesh Episode

हरता श्री गणेशा श्री गणेशा श्री अद्भुत है इसका सौंदर्य नेत्र नहीं हट रहे हैं इस देवी से [संगीत] ये ये क्या हुआ इसे कहीं हमारे लिए कोई संकट तो उत्पन्न नहीं हो रहा पाप दृष्टि में हो अथवा कर्म में उसका विनाश अवश्य होगा [संगीत] मां क्या हुआ मां मां इतनी क्रोधित क्यों है माता का यह उग्र रूप [संगीत] मां अरे पुत्र तुम लौट [संगीत] आए और आप सभी यहां क्या कर रहे हैं नंदी जी स्वामी के लिए फल में ले आई हूं आप सभी अपने कार्य [संगीत] कीजिए जो आज्ञा [संगीत] माता स्वामी ध्यान से पूर्व आप यह फल ग्रहण कीजिए [संगीत] अकारण तो कुछ नहीं घटता इस घटना का भी कोई कारण तो अवश्य है कुछ ना कुछ तो अवश्य हुआ है अन्यथा मां का इतना ऊंचा स्वर क्यों हुआ कहीं यह किसी भावी संकट का संकेत तो नहीं संकट है अवश्य संकट है हमें यहां से भाग निकलना चाहिए निकल चले नहीं इसने हमारा आखेट गवाया है और अब यह हमें भयभीत करने का प्रयास कर रही है किंतु इतनी सरलता से मैं कहीं नहीं जाऊंगा इसे यही मंडरा सताएंगे पुत्र गणेश पुत्र कार्तिके क्या हुआ तुम्हारे मुख पर यह चिंता की रेखा क्यों उभर आई मां हम तो आपको लेकर ही चिंतित हैं आप कुशल तो है ना क्यों कुशल नहीं होंगी मैं मुझे क्या हुआ है सर्वदा कुशल हूं मैं च चलो तुम दोनों भी शीघ्र जाओ मैं तुम दोनों के भोजन का प्रबंध करती [संगीत] [प्रशंसा] हूं मेरी चिंता अभी भी दूर नहीं हुई मैं मां को लेकर अभी भी चिंतित हूं कुछ तो है जो उचित नहीं है मुझे मां को लेकर भैया से बात करनी ही चाहिए भैया मुझे बहुत चिंता हो रही है आपने मां हां गणेश चिंतित तो मैं भी हूं किंतु मुझे मां को बताने का कोई ना कोई उपाय तो ढूंढना ही होगा अब मेरे जाने का समय आ गया है अब मुझे दक्षिण की ओर प्रस्थान करना ही होगा ओ मैं तो भैया से मां को लेकर चिंता व्यक्त करने जा रहा था किंतु वह तो अपनी चिंता की ही बात करने लगे मैं भैया से बात करने का एक और प्रयास करता हूं भैया भैया भैया वह बात नहीं है मैं मैं तो आपसे यह कहने जा रहा था कि पुत्र गणेश पुत्र कार्तिके कहां रह गए तुम दोनों मां से कैसे कहूं कि अब मेरा जाना आवश्यक है [संगीत] भैया तू अपनी ही चिंता में डूबे हैं फिर मैं अपनी चिंता किससे [संगीत] कहूं [संगीत] तोतला जी आप कुछ मिष्ठान का प्रबंध कीजिए मा अभी लाया चलो पुत्रों अब भोजन प्रारंभ करो हां मां मां अभी तो पूर्ण रूप से सामान्य है फिर तब क्या हुआ था इसके पीछे क्या कोई रहस्य क्या कोई संकट है जो अचानक अपना मुख [संगीत] उठाएगा मां भोजन तो अत्यंत स्वादिष्ट है आनंद आ गया किंतु मां मुझे आपसे कुछ कहना है यही मंडराएंगी हम दोनों जब तक हमें हमारा आखेट ना मिल जाए [प्रशंसा] मां आपने मेरी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी मैं कुछ कहना चाह रहा हूं आप सुन रही है ना मा मां पुनः शांत हो गई [संगीत] मां क्या हुआ [संगीत] मां मां आप आप कोई उत्तर क्यों नहीं दे रही हैं उत्तर तो अवश्य प्राप्त होगा कठोर उत्तर मृत्यु का उत्तर प्राप्त होगा मा ये क्या कह रही हैं आप [संगीत] मां अरे क्या कर रहे हो तुम दोनों भोजन के स्थान से ऐसे नहीं उठते चलो तुम दोनों अपना स्थान ग्रहण करो मैं तुम्हारे लिए शीतल पेय का प्रबंध करती [संगीत] हूं भैया आपने भी देखा और सुना ना यह मां को क्या हो रहा है गणेश हमें भोजन समाप्त कर पिताश्री से बात करनी [संगीत] चाहिए अ माते माते येय दे माते देता बनाए तल पे देवी कभी तो बाहर आओगी तब हम तुम्हें अपने साथ लेकर जाएंगे लाल रक्त रक्त पान रक्त [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] पान माते माते यद मुझसे ला झमा [संगीत] माते तोतला जी पे आपके हाथों से गिर भी गया तो इसमें इतने चिंतित क्यों हो रहे हैं आप कोई बात नहीं अच्छा ही बना होगा और सबको भागा भी जाइए और लेकर [संगीत] आइए माता क्या लक्ष पान ता [संगीत] लन सानी सानी सा सानी सानी मा क्या हुआ मां ओ [संगीत] मा प्रणाम पिता श्री [संगीत] पुत्र कार्तिकेय अब तुम्हारा दक्षिण प्रस्थान कर वहां अपने दायित्व निभाने का समय आ गया [संगीत] है ओ मां मुझे ज्ञात है पुत्र का जाना कितना कठिन है किंतु कार्तिक कहीं नहीं [प्रशंसा] जाएगा मा मैंने कहा ना कार्तिके अभी कहीं नहीं जाएगा अभी बसंत उत्सव का समय निकट है मेरी इच्छा है इस बार कैलाश में विधिवत रूप से होली का उत्सव आयोजित हो होली का दहन हो बस मुझे जो कहना था वह मैंने कह दिया अब मैं किसी की नहीं सुनूंगी पुत्र तुम होली के उत्सव के बाद ही यहां से प्रस्थान करोगे मां पिताश्री से इतने कठोर शब्दों में बात क्यों कर रही [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] है ये क्या कर रही है मां मृत्यु को प्राप्त होगा मृत्यु को बचेगा नहीं नहीं बचेगा या [संगीत] जा ओ मुंड [संगीत] मां अरे आप सभी अभी भी यहां है पुत्र गणेश पुत्र कार्तिके भोजन समाप्त हो गया है तो तुम दोनों विश्राम करो स्वामी आप भी मैं आप सभी के विश्राम का प्रबंध करती [संगीत] हूं पिता श्री मां के इस असहज व्यवहार का क्या कारण है मैं मा को लेकर अत्यंत चिंतित हूं पिता श्री यह अचानक क्या हो जाता है उन्हें कभी इतनी शांत और सौम्य रहती है और कभी इतनी कठोर क्यों हो जाती [संगीत] है प्रभु माता का इतना तीव्र स्वर सुनाई दिया तो देखने चले आए प्रभु माता कुशल तो है ना क्या हुआ उन्हें प्रभु कहीं चिंता का कोई कारण तो नहीं है कुछ तो असामान्य अवश्य [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] है [संगीत] क्या हुआ पिता श्री ऐसा क्या देखा आपने जो आप भी विचार करने लगे पापी असुर अतुल ता अतुल अबला तुल असर अभी जाकर अंत करता हूं उसका पुत्र [संगीत] कार्तिके अंत उन असरो का हो चुका है तुम्हारी माता के द्वारा कदाचित संपूर्ण दिवस इन असरो से उत्पन्न संकट का आभास होता रहा है तुम्हारी माता को यही कारण है उनके व्यवहार के बदलने [संगीत] का मां ने उचित ही किया दुष्ट दु साहसी असुरों का अंत ही उचित है असुरों का अंत हो चुका है तब तो मां को शांत हो जाना चाहिए था किंतु वह तो अभी भी अशांत है कहीं य असुर किसी अन्य संकट का संकेत तो नहीं [संगीत] पुत्र जिस शिलाखंड के वार से तुम्हारी मां ने उ सरो का वध किया है वो शीला खंड पृथ्वी पर गिरने के बाद के रूप में स्थापित हुआ है क्योंकि वह शिलाखंड एक कंदूक के रूप में था इसलिए यह शिवलिंग कंदू केश्वर शिवलिंग के नाम से विख्यात होगा जिसकी पूजा करने वालों को उसके अक्ष में पापों से मुक्ति प्राप्त [संगीत] होगी [प्रशंसा] पिताश्री संसार में जब कोई बुराई भी छती है तो आपकी और मां की लीला से उस बुराई का अंत संपूर्ण जगत के लिए आशीष बनकर ही उभरता [संगीत] [संगीत] है पिता श्री को विचार में देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मां की अशांति के पीछे कोई और भी बड़ा कारण है और जिसका आभास उन्हें भी है मां का ऐसा व्यवहार तो मात्र असुरों के कारण नहीं हो सकता कदाचित कोई और संकट घात लगाए बैठा है ओम नमः शिवाय शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नम शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय उत्तर तो अवश्य प्राप्त होगा कठोर उत्तर मृत्यु को प्राप्त होगा मृत्यु [संगीत] को मां कुशल तो है ना कदाचित मुझे जाकर देख लेना चाहिए गणेश क्या बात है तुम इतने अशांत क्यों हो तुम एकाग्र होकर ध्यान क्यों नहीं कर पा रहे हो जब मां शांत है तो मैं कैसे शांत रह सकता हूं भैया मुझे उनकी चिंता सता रही है कल जैसा उनका व्यवहार था उससे स्पष्ट है कुछ तो अवश्य असहज हो रहा है उनके साथ उनमें निरंतर परिवर्तन आता ही जा रहा है भैया [संगीत] चिंता मत करो गणेश कदाचित मुझे इसका कारण ज्ञात है वास्तव में मां नहीं चाहती है कि मैं कैलाश से दूर जाऊं कल जब पिताश्री ने मेरे प्रस्थान की बात की तो स्नेह वश मां विचलित हो उठी किंतु अब मैं रुक गया हूं ना तो मां पुनः सहज हो जाएंगी जो कारण भैया बता रहे हैं वह तो पुत्र के लिए मां का स्नेह है किंतु उनका क्रोध जो रह रह कर जागृत हो रहा है उसका क्या कारण है आओ अनुज गणेश चिंता छोड़ो ध्यान करते [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] हैं [प्रशंसा] [संगीत] कदाचित आपका कथन सत्य ही होगा भैया किंतु मैं अपने मन को शांत नहीं कर पा रहा हूं मुझे क्षमा कीजिए मां को देखे बिना उनका कुशल ज्ञात किए बिना मेरी चिंता दूर नहीं हो सकती [संगीत] ओम नमः शिवाय [संगीत] मां मां ने तो मुझे सुना ही नहीं मां उत्तर क्यों नहीं दे रही है मेरे पुकारने पर भी मुझे मुड़कर दे क्यों नहीं रही है [संगीत] मां [संगीत] मां [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मां ये क्या यह मां को क्या हो रहा है ओम नमः शिवाय ओ न मा ने मुझे रो क्यों दिया ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय पुत्र जब तुम आए तब मैं अपनी पूजा संपन्न कर रही [संगीत] थी [संगीत] अरे क्या हुआ पुत्र तुम्हें मुझसे कोई कार्य था क्या और अभी तो तुम्हें ध्यान में होना चाहिए फिर तुम यहां क्या कर रहे [संगीत] हो पुत्र तुम मुझे एक तक ऐसे क्यों देख रहे हो भैया उजित ही कह र थे मां उन्हीं के प्रस्था को लेकर चिंतित थी किंतु अब तो वह पूर्ण रूप से अपने सामान्य रूप में है कुशल है क्रोध लेश मात्र भी नहीं है उनके मुख पर मैं व्यर्थ ही चिंता कर रहा था मां मैं होली के उत्सव को लेकर बहुत उत्साहित हूं हां [संगीत] पुत्र और तुम्हें उत्साहित होना भी चाहिए इस बार हम बड़ी धूमधाम से कैलाश में होली का उत्सव मनाएंगे और मेरी इच्छा कि हम सभी को आमंत्रित कर उन्हें कैलाश में रंगोत्सव के लिए बुलाए अवश्य मां मेरे दोनों पुत्र मेरे साथ हैं गणेश और कार्तिक से ही तो कैलाश की शोभा [प्रशंसा] बढ़ती हां मां भैया तो है ही किंतु मेरे कैलाश में होने से यहां कैलाश की शोभा सत्य में अद्भुत रहती है है ना मां क्या हुआ मां क्या ढूंढने लगी आप पुत्र नंदी जी अभी फल तोड़कर यहां लाए थे कदाचित मैंने उन्हें रसोई घर में रख दिया होगा मैं अभी लेकर आती हूं फिर मुझे पूजा भी प्रारंभ करनी है मां रुकिए मां आप कष्ट क्यों कर रही है आप यहीं रुकिए मैं फल लेकर आता हूं मैं अभी गया और अभी आया [संगीत] मां तो पूर्ण रूप से कुशल है भैया और पिताश्री उचित कह रहे थे मैं अकारण ही चिंता कर रहा था देखा मां मैंने कहा था ना मैं अभी गया और अभी आया मां मां तो अभी यही थी फिर अचानक कहां चले गए मां तोतला जी आपने मां को देखा क्या नहीं मैंने तो माता तो नहीं देता ने नंदी जी नंदी जी आपने मां को कहीं देखा क्या गणेश जी माता तो इस समय पूजा कक्ष में ही होती है वो वही होंगी अब कहां ढूंढू मां को मां मां तो जलाभिषेक के लिए मानसरोवर से जल लेने जा रही है जल भरने पर तो कलश भारी हो जाएगा मैं जाकर मां की सहायता करता [संगीत] हूं [संगीत] मां रुकिए मां मैं आ रहा हूं आपकी सहायता [संगीत] करने मां रुकिए अचानक य धुंद कहां से उत्पन्न हो गई और यह धुंद मेरे और मां के मध्य क्यों आ रही [प्रशंसा] है और मां रुक क्यों नहीं रही है मां रुकिए ना मैं भी आ रहा हूं इस धुंद का प्रभाव तो और भी गहरा होता जा रहा है मुझे शीघ्र मां तक पहुंचना होगा कदाचित मां को पुकारने का कोई लाभ नहीं मुझे बस उन तक पहुंचना [संगीत] चाहिए [प्रशंसा] मां ये ये कैसी ऊर्जा प्रवाहित हुई मां के भीतर [प्रशंसा] से [संगीत] ईश्वर की कोई भी लीला अकारण नहीं होती आवश्यकता है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...