मेरी प्राथमिकता सेे पराजित करना नहीं अभी तो सृष्टि में हो रहे और अधिक विनाश को रोकना है इसके लिए सर्वप्रथम इसे सृष्टि से दूर अन्य सृष्टि में ले जाना [संगीत] होगा सुन दर् के प्रहार में मेरा आकार छोटा कर दिया अभी तो केवल तुम्हारा आकार ही लगू किया है अब तुम्हे संसार से भी लुप्त कर [संगीत] दूंगी [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] भी स भटे नम नम नम नमो [संगीत] नम [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ठहरो अब इस छोटे से घरू में मेरा आकार घटाने से मुझे यहां भेजने से कुछ नहीं होगा देवी सृष्टि का संकट नहीं डलने [संगीत] [संगीत] वाला इस अकाल के आतंक का अंत इस आतंकी के अंत से ही जुड़ा हुआ मैंने तुम्हारे और अपने अस्त्रों के प्रहार से सृष्टि को बचा लिया है क्यक अब यह युद्ध मेरे कण आभूषण के घुंगरू के भीतर ही होगा किंतु मेरे फैलाया काल से संसार कैसे सुरक्षित होगा ना ही मेरा हक्त संभव है ना ही इस अकाल का परंतु तो अब तुम्हारी सृष्टि का होगा [प्रशंसा] [प्रशंसा] हा कदाचित यही केंद्र है इस अकाल का क्योंकि यहां की भूमि पूर्ण रूप से सूखी पड़ी है और मशक जी आपको सर्वाधिक प्यास भी यही लगी और उस असुर की चित्कार भी यहीं से आ रही है किंतु माता कहीं क्यों नहीं दिखाई दे रही है अब तो मां आ गई है तो अब हमारे भला क्या आवश्यकता वो इस अकाल को अवश्य रोक देंगी चलिए हम लोग लौट चलते हैं नहीं मूषक जी संकट का अंत हुए बिना लौटना उचित नहीं और आपकी प्यास तो तभी बुझेगी जब अकाल का अंत होगा तो अब हमें माता को ढूंढना चाहिए और उसे भी जिसने इस अकाल की स्थिति को उत्पन्न किया है अस्त्रों के टकराने की ध्वनि तो आ रही है किंतु कोई दिखाई क्यों नहीं दे रहा है ऋषि पुलस्त्य ऋषिवर गिरकर आहत हो जाएंगे सर्वप्रथम मुझे उनकी रक्षा करनी [संगीत] चाहिए कौन है ये जिन्होंने मेरी रक्षा की गणेश जी या जो चरणों में [संगीत] आया प्रम जगत कर सेवा [संगीत] स प्रणाम गजानन मेरी रक्षा करने के लिए आपका कोटि कोटि धन्यवाद ऋषिवर आपकी रक्षा मैंने नहीं आपके तब के फल ने की है विकट परिस्थितियों में मनुष्य के सुकर्म ही उसकी ढाल बनते हैं फिर वह कोई महामारी हो अकाल हो या ऐसी कोई आपदा किंतु मैं अभी भी ज्ञात नहीं कर सका हूं कि संकट के पीछे कौन कुकर्मी है और माता कहां है हे पार्वती नंदन हे प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता गणेश जी इस महा संकट का कारण वो महासुर गजा सुर द्वितीय [संगीत] है और माता वहां उस असुर के साथ युद्ध कर रही है ओ तो यह युद्ध माता के कर्ण आभूषण के टूटे घुंघरू के भीतर हो रहा है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ [संगीत] मेरा खड़क दुष्ट असुरों का अंत करता है [संगीत] मूर्ख ना खड़क ना कोई अस्त्र मेरा अंत कदा भी नहीं होगा किंतु मैं तुम्ह अवश आहत करूंगा देवी सर्वू देत नम नम नम नमो नम मेरा क प्रहार कहां तक होगा देवी [संगीत] आश्चर्य असुर गजस द्वितीय की शक्ति निरंतर पढ़ती जा रही है और माता के प्रहार व्यर्थ जा रहे [संगीत] हैं हे विघ्नहर्ता गणेश जी आप भी किसी युक्ति से माता की सहायता क्यों नहीं करते क्योंकि जब तक माता स्वयं मुझे इस युद्ध में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देती ऐसा करना उनका अपमान होगा और तब मां के कोप के प्रकोप का भागी मैं भी बन सकता [संगीत] हूं [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] वि कुरी कुटु पूरी जय जय हे म [संगीत] [संगीत] मते [प्रशंसा] [संगीत] तुम्हारे पास कोई भी मायावी शक्ति क्यों ना किंतु मेरे हाथों से तुम्हारा अंत होने से नहीं रोक [संगीत] सकती तुम्हारा अंत करूंगी तभी रुकू मैं सार मेरा नहीं सृष्टि का होगा मेरे अकाल [संगीत] से दिता के पास जल तक नहीं है और असुर नगरी में मरा की नदियां बह रही है [संगीत] प्रकृति के साथ इस प्रकार की कड़ा करने का तो साहस जिस किसी ने भी कि माता के क्रोध को जिसने भी जागृत किया है उसे इसका दंड मिलने का समय अब आ गया है [संगीत] जासर द्वितीय पराजय स्वीकार नहीं करेगा देवी अंदर वार करेगा [संगीत] इस प्रकार तो यह युद्ध ऐसे ही चलता रहेगा इसे निर्णायक मोड़ पर पहुंचाने के लिए मां की सहायता करने के लिए मुझे इसका भाग बनने का कोई उपाय ढूंढना ही होगा देवी लगता है तुमने ठान ही लिया है कि धरती का अंत करके ही थोगी उचित है तो मैंने भी ठान लिया है कि मैं भी तुम्हारी सृष्टि का अंत करके ही रखूंगा क्या करूं मैं जिसे मां मुझे अवसर दे अपना सहायक बना ले युद्ध के ने का समय आ गया है अब और [संगीत] [संगीत] नहीं [संगीत] [संगीत] [संगीत] ब अचानक कहां दृश्य हो गया [संगीत] यह [संगीत] [संगीत] [संगीत] हो [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्रभु माता ने उसका अंत कर दिया जय मां चंडी जय जय मां जय मां जय मां चंडी जय [संगीत] मां आनंद लो इस मदिरा का इस उत्सव का क्योंकि ये युद्ध तो आरंभ होने से पहले ही अंत हो गया विजय हुई हमारी सम्राट [प्रशंसा] [संगीत] भगवान मेरी मदिरा कैसे समाप्त हो [संगीत] गई यहां सब कुछ सूखने क्यों लगा इस अकाल का प्रभाव महेंद्र पुरी पर भी होने लगा हमारा दाव उल्टा कैसे पड़ गया हमारी योजना का एक ऐसा प्रभाव है ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हमारा छोड़ा हुआ विषद साप हमें ही डसने लगा है ये क्या हो रहा है सत्य है बुरे कर्म उस बाण के समान ही है यह स्वयं पर ही लौटकर आघात प्रकट करते हैं दूसरों के लिए विपत्तियों का कुआ खोदने वाले स्वयं उस कुए में जा गिरते हैं यह कैसी परिस्थिति बन गई है धरती का रक्त सोक कर यह महेंद्रपुरी को मरुभूमि बना रहा जल के अभाव में य असुर एक दूसरे के रक्त के प्यासे हो गए शीघ्र कुछ कीजिए धरती के जल रत्न को व्यर्थ करने के पूर्व यदि उसके महत्व पर विचार ना किया तो ऐसी दुर्दशा तो निश्चित ही है आपने उचित कहा [संगीत] था मा विफल हो गई हमारी जान गजा सुर द्वितीय हम पर ही भारी पड़ गया ना चाल विफल हुई है और ना गजा सुर [संगीत] द्वितीय जय मां चंडी जय मां अभी नहीं अभी संकट टला नहीं है गजा असुर द्वितीय का अंत नहीं हुआ है देखिए अभी अकाल समाप्त नहीं हुआ अर्थात वह जो इस अकाल का कारण है अभी जीवित है श्रम तो बहुत किया हैने थोड़ा विश्राम तो बनता है ना देवी और कुछ क्षणों के लिए मैंने आखे क्या म द आपने तो मुझे मृत समझ लिया [संगीत] देवी इतना सरल नहीं है मेरा [संगीत] अ ताप नहीं साप हूं मैं सबका सर्वनाश [संगीत] [प्रशंसा] [हंसी] [संगीत] मैं माता कभी विफल नहीं हो सकती उनसे कुछ भी छिपा नहीं है किंतु इस दुष्ट की रहस्यमय शक्ति की र कदाचित मुझे ही उनका ध्यान आकृष्ट करना होगा देवी सहस्त्र गजों के शक्ति के स्वामी गजस दती के समक्ष विफल हो गई तुम्हारी शक्ति और अभी तो य युद्ध का आरंभ मात्र है अंत तो धरती के अंत के साथ ही [संगीत] होगा मूषक जी जी प्रभु उचित अवसर है इस युद्ध का भाग बनने का उपाय सूझ गया मुझे कैसे [संगीत] प्रभु कोई भी युद्ध तभी सार्थक है जब उसमें जय और पराजय का निर्णय हो युद्ध चलता रहे और कोई निर्णय ना हो तो ऐसे युद्ध का क्या लाभ अच्छा गजमुख उचित ही कहा तुमने मैं इस देवी को विश्राम करने का पूर्ण अवसर जिससे य पुन अपनी शक्ति एकत्रित कर सके और यह युद्ध अपने निर्णय की ओर बढ़ सके विश्राम की आवश्यकता मुझे नहीं तुम्हे है मूर्ख नहीं विश्राम की आवश्यकता नहीं है मुझे मैं युद्ध के लिए तैयार हूं तो फिर आओ मेरा वार स्वीकार करो प्रभु मा क्रोध के कारण रुकने के लिए तैयार नहीं और य दुष्ट अपने अहंकार के कारण अब तो आपको ही अपनी बुद्धि और युक्ति का प्रयोग करना होगा प्रभु जब बड़े क्रोध में हो तो उन तक अपनी बात बड़ी सावधानी से पहुंचा चाहिए मुझे कुछ ऐसा कहना होगा जिससे माता क्रोध में भी मेरा संकेत समझ जाए और यह अहंकारी मेरी युक्ति ना समझ [संगीत] पाए वीर और सच्चा योद्धा वही होता है जो अपने शत्रु को अपनी एकत्र करने के लिए विश्राम का भी अवसर देता है और ऐसा वही योद्धा कर सकता है जिसे अपने बल और तप पर पूर्ण विश्वास हो और इस अवस्था में वह वार नहीं करता अपितु अपने विरोधी योद्धा का युद्ध भूमि में पूर्ण शक्ति के साथ आने की प्रतीक्षा करता है तभी योद्धा को अपनी जय का वास्तविक आनंद आता है मैं तुम्हारा संकेत समझ गई पुत्र गणेश यदि इस युद्ध विराम से तुम्हारा उद्देश्य पूर्ण होता है तो यही से सत्य है मेरी शक्ति का वास्तविक प्रयोग उसकी परिक्षा तभी होगी जब मैं इस देवी को उसकी पूर्ण शक्ति के साथ पराजित करूंगा सोम नंदी [संगीत] जी मक जी आ अब योजना का दूसरा भाग क्रियान्वित करें और इस असुर को उए कि व मुझे भी युद्ध में सम्मिलित करे क्योंकि माता तो इसकी अनुमति कदापि नहीं [संगीत] देंगी यह गजमुख बालक मेरी ओर क्यों बढ़ता चला आ रहा है मूषक जी आप बस चुपचाप खड़े रहिएगा कुछ बोलिएगा नहीं क्या हुआ तुम्हारी दृष्टि मुझ पर क्यों टिकी है तुम तो परिचित लग रहे हो ओहो समझा तुम तो गजा असुर के पुत्र हो वही असुर जो अपने आप को महासुर मानता था किंतु मेरे पिता श्री के कारण मृत्यु को प्राप्त हुआ बस शिव पुत्र हो गए तुम किंतु मुझसे नहीं बच सकोगी प्रभु ये तो क्रोध में आप का गुना हो रहा है हां मशक जी यही तो चाहिए बड़ी भयंकर मृत्यु हुई थी उनकी मेरे पिता श्री के परम भक्त नंदी जी ने उधर चीर दिया था उनका मेरा प्रतिशोध तो उससे भी भयंकर होगा गति का व चीर कर इसका संपूर्ण रक्त सक लेगी मेरी शक्ति उसके बाद मैं तुम सबका अंत करूंगा इसके बढ़ते क्रोध से तो मेरी प्यास और भी बढ़ रही है आश्चर्य मूषक जी के स्वेत की बूंद के स्पर्श से इतना विचलित हो गया य तुम्हारा यह स्वप्न कभी पूरा नहीं हो पाएगा गजा सुर द्वितीय किंतु तुम हो तो भाग्यशाली जो अभी तक जीवित हो क्योंकि माता का हृदय तो माता का ही होता है वो तो अपने शत्रु को भी अनेक अवसर देती हैं उन पर दया करती हैं किंतु यदि मैं तुम्हारे साथ युद्ध कर रहा होता तो अब तक तुम काल के गाल में समा गए होते अच्छा इतना विश्वास है स्वयं पर तो तुम भी मुझसे क्यों नहीं युद्ध कर लेते हां हां क्यों नहीं अवश्य करता युद्ध किंतु बस माता की अनुमति चाहिए क्योंकि आप अकेले हम दो से युद्ध करें और हम आप पर भारी पड़ जाए यह तो उचित नहीं होगा ना मेरी बजाए भी युद्ध के लिए बड़बड़ा रही है अब और विश्राम नहीं मैं तुम दोनों माता और पुत्र को एक साथ युद्ध के लिए चुनौती देता हूं देवी दे दो अपने पुत्र को अनुमति मैं भी तो देखूं ये केवल बातें करता है या युद्ध भी मूर्खा हसर तेरे लिए तो मैं अकेली ही पर्याप्त हं चलो यद्ध आरम करो भयभीत हो गई ना कि कहीं तुम्हारा यह पुत्र मेरे हाथों मृत्यु को प्राप्त ना हो जाए मेरी तपो शक्ति और बल के आगे मां की मुमता जाग गई कदाचित तुम्हारी यही इच्छा कि तुम्हारा अंत हम दोनों के हाथों से हो तो उचित यही होगा गणे कभी-कभी किसी अति सूक्ष्म घटना में भी बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान छिपा रहता है
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