[संगीत] माता प्रभु श्री हरि ने अग्नि से भी मेरी रक्षा की मुझे तो ताप का अनुभव भी नहीं हुआ मां इस चेता में प्रज्वलित अग्नि मेरे तन को अपने स्पर्श से सुखा भूति प्रदान करने वाली शीतल वायु के समान प्रतीत हुई मां मुझे आशा है माता कि अब तो पिताश्री भी मेरे प्रभु श्री हरि की लीला की महिमा जान गई [संगीत] होंगे ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नम ओम नारायणाय नम नारायणा नारायणा हरि श्री श्री पाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि श्री श्री पाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि श्री श्रीपा नारायणा शांत हो जाओ [संगीत] माता होली का दहन के साथ ऐसी विचित्र घटना घटने के पश्चात हिरण्य कश्यप को प्रभु हरि की देवता का मर्म समझ आ ही गया होगा नहीं पुत्र दुर्भाग्यवश इस अलौकिक घटना के बाद भी ना तो उसने प्रभु की महिमा को माना और ना ही अपने आचरण में कोई परिवर्तन लाया परंतु इस दिव्य घटना के पश्चात प्रत्येक वर्ष उसी रात्रि को होलिका की अग्नि जलाकर समस्त संसार बुराई और पाप की प्रतीक होलिका की दहन की प्रसन्नता मनाता है और आगामी दिवस सभी मनुष्य भाति भाति के रंग एक दूसरे पर छिड़क कर होली के पर्व के रूप में बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव मनाते हैं ठीक उसी प्रकार माता जैसे भक्त प्रहलाद अर्थात साधु ता के रक्ष होने और बुराई की प्रतीक होलिका के भस्म हो जाने से आनंदित प्रजा एक दूसरे पर उचिता की राग छिड़क रही थी हां पुत्र परंतु भक्त प्रहलाद को जीवित जलाने का प्रयास का खोर अपराध कर हिरण कश्यप अपने पापों का घड़ा लगभग भर चुका [प्रशंसा] था मेरा पुत्र रुक जाइए महारानी माता हे नाथ धधकती ज्वाला से लौट कर आया है मेरा पुत्र एक बार उसे अपने अंग से लगाकर इस माता को अपना हृदय शीतल कर लेने दीजिए कदा भी नहीं आप अपने सरल मातृत्व से भ्रमित हो रही है महारानी आपका पुत्र नहीं है य पित द्रोही उस मायावी विष्णु का भिन्न रूप है परंतु मैं आज अपने इस काल रूपी शत्रु को अपने हाथों से मिटा दूंगा अब देखता हूं मेरी प्रचंड दिव्य गदा से कौन तुम्हारी रक्षा करता है नहीं स्वामी नहीं स्वामी अब मैं आपको इस पर अत्याचार नहीं करने दूंगी हट मेरे मार्ग [संगीत] से रुक जाओ रुक जाओ रुक जा रुक [संगीत] जा [संगीत] अपने स्थान पर स्थित रहो द्रोही विष कीट तुम्हारी मृत्यु तुम्हारे समक्ष खड़ी है और तुम्हें तनिक भी भय नहीं लग रहा कपटी बालक असंभव किसी भी साधारण मनुष्य के लिए असंभव है यह सत्य बताओ कौन हो तुम कौन हो तुम पिताश्री मैं और कौन हो सकता हूं आपका पुत्र ही तो हू और इस जगत के पालनहार प्रभु श्री हरि की अनेकों जीवं कृतियों में से एक हूं मैं ओ तो तुम्हारा अर्थ है तुम्हारे श्री हरि अभी भी मुझसे सर्वशक्तिमान हिरण क शिप से तुम्हारी रक्षा कर सकते हैं अवश्य पिता श्री प्रारंभ से ही प्रभु श्री हरि ही मेरी रक्षा करते आ रहे हैं और अब भी अवश्य करेंगे अच्छा कहां है तुम्हारे प्रभु श्री हरि मुझे तो कहीं दिखाई नहीं देते यदि वो तुम्हारी रक्षा करने के लिए यहां आए हैं तो अदृश्य क्यों है दिखाओ मुझे दिखाओ तुम्हारे प्रभु श्री हरि कहां है दिखाओ दिखाओ दिखाओ दिखाओ दिखाओ मेरे प्रभु श्री हरि वो तो सर्वत्र व्याप्त है पिताश्री ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां वो विद्यमान ना हो अच्छा तो फिर वह इस गदा में भी होंगे जिससे मैं अभी तुम्हारा वध करने वाला हूं हां हां अवश्य है मुझ में आप में इस पृथ्वी के समस्त जीवों के रोम रोम में है खड़क में खंभ में ब्रह्मांड के प्रत्येक तत्वों के कण कण में है जहां मेरी दृष्टि जाती है पिताश्री वहां भी और मेरी दृष्टि से परे भी प्रभु श्री हरि ही हरि है पिता श्री अच्छा मुझ में है और तुम में है और इस खंभ में [संगीत] भी यही अर्थ है ना तुम्हारा उदंड बालक है पिताश्री इस खंभ में भी है अच्छा तो दिखाओ इस खं में उन्हें सुनो मेरी चेतावनी यदि इस खंभ में मुझे तुम्हारे श्री हरि के दर्शन नहीं हुए तो सर्व प्रथम मैं इस गदा से तुम्हारे शीष के सहस्त्र टुकड़े कर दूंगा प्रार्थना करो अपने प्रभु से कि व इस खंभ में से प्रकट हो और तुम्हारे कथन को सत्य कर दे मैं भी देखता हूं कि तुम्हारे प्रभु श्री हरि इस खंभ में है या नहीं इसी खंभ में है ना तुम्हारे प्रभु येलो आ [संगीत] ये कपन कैसा ये क्या हो रहा हैप कप ये क्या हो रहा है क्या हो रहा है ये कपन कैसा प्रतीत होता है जैसे भुल आ गया [संगीत] हो कसी है ओम नारायणाय नम ओम नारायणाय नम ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः [संगीत] [संगीत] प [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] क [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] हा [प्रशंसा] [संगीत] हा [संगीत] [संगीत] वा ना भीतर ना बाहर ना आकाश ना बादल ना दिन है ना रात आपका मृत्यु स्थल और मृत्यु का क्षण है ये तुम्हारी मृत्यु तुम्हारे समक्ष खड़ी है तुम्हारी मृत्यु तुम्हारे समक्ष खड़ी है कोई नहीं है मुझसे अधिक शक्तिशाली सर्वशक्तिमान [संगीत] ना जल में ना थल पर [संगीत] ये ना अस्त्र है ना शस्त्र है परंतु आपकी मृत्यु का साधन है [संगीत] ये [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] नाराय नम ओम नारायणा [संगीत] नम ओम नारायणाय [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नमः उग्रम विरम महाविष्णु ज्वलंतम सर्वतो मुखम नृसिंह भीषमा भदम मृत्युर मृत्युम नमामि [संगीत] अहम प्रणाम प्रणाम [संगीत] प्रभु प्रणाम [संगीत] लक्ष्मीन सह करावलमबम श्रीमत पयो निधि निकेतन चक्र पाण श्रीमत पयो निधीन के चक्र पाण भोगेंद्र भोग मणि रंजित पुण्य मूर्ते योगीश शाश्वत शरण भवा पोत लक्ष्मी नसह मम देहि करावलमबम [संगीत] लक्ष्मीन सिह करावलमबम श्रीमत पयो निधि निकेतन चक्र [संगीत] पाण श्रीमत पयो निधी निकेतन चक्र पाण भोगेंद्र भोग ग मण रंजित पुण्य मूर्ते योगीश शाश्वत शरण भवा पोत लक्ष्मी नरसिंहम मम देहि करावलमबम [संगीत] ब्रहम रुद्रम रुद किरीट कोटि संघिता कमला मल कांति कांत लक्ष्मी सत कुछ सोरु राज हंस लक्ष्मीस मम देहि करावलमबम संसार घोर गहने चर तो मुरारे मोग भीकर मृग प्रवरा दस्य आर्त मत्सर निदा घन पीडित लक्ष्मीस मम देहि करावलमबम लक्षमी पते कमल ना सुरेश विष्णु वैकुंठ कृष्ण मधुसूदन [संगीत] पुष्कर्ण वासुदेव देवेश देही कृपण करावलमबम यमाय योजित प्रचुर प्रवाह मनाथ मत्र करावलमबम लक्ष्मी ष चरणा मन स्तोत्रम कतम सुख करम भु शंकरे [संगीत] नारायणा नारायणा हरि केशव कृपाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि केशव कृपाला श्री ह आपका कल्याण हो देवग प्रभु मेरे हरि आप आ [संगीत] गए प्रणाम कल्याण हो वर्ष नारायणा नारायणा हरि श्री श्री नारायणा नमय नम ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नम ओम नारायणाय नमः अहंकार सदैव अनुचित है दुराचारी अत्याचारी और पापी का अंत भयानक होता [संगीत] है
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