[संगीत] भक्त के घर भगवान का वास हो इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है एक भक्त के लिए प्रभु आपने तो सेवा का अवसर देकर मेरे जन्म को सफल कर दिया किंतु किंतु दुख है प्रभु कि आपको केवल माल भाती परोस [संगीत] सका प्रभु मैं विश्वास दिलाता हूं जो कमी भोजन में रह गई वह इस भक्त की सेवा में कदापि नहीं रहेगी प्रभु हमें क्षमा कर दीजिए हमारे कारण शुक्ल आपको व्यंजन और भगवान नहीं दे पाया देवहर जी की अटूट भक्ति ने हम दोनों के नेत्र खोल दिए हमें क्षमा कर दीजिए प्रभु [संगीत] हम भी अपना जीवन आपको समर्पित करते हैं आप जो भी दंड देंगे मुझे स्वीकार है [संगीत] प्रभु भूल होना तो प्रकृति है मान लेना संस्कृति और उसे सुधारना प्रगति और शरणागत तो क्षमा का ही पात्र होता है और जो भक्ति एवं विश्वास के मार्ग पर चलकर भी उस मार्ग से भटक जाते हैं ईश्वर उन्हे भी अच्छे मार्ग पर लौटने का पूरा अवसर देते हैं भगवान के लिए भक्त और उसका परिवार ही उनका परिवार होता है जिनका साथ व कभी नहीं छोड़ते और सदैव उनका कल्याण ही करते हैं हे विनायक आप स्वामी की सहायता के लिए उनके साथ यहां आए थे आप काशी की रक्षा के लिए यहां आए थे तो अब इस विकट समय में हमारा साथ मत छोड़िए प्रभु भगवान ना किसी का साथ छोड़ते हैं ना किसी को दंड देते के अपने कर्म होते हैं जो उसके जीवन के अनुभव बनकर उनके सामने आते हैं रांत तुम्हारा अंत मैं करके ही रहूंगा भड़िया नारा तक शेर काशी नरेश पर भारी पड़ गया अब जब आप अपनी भूल समझकर शुक्ल शर्मा के भक्ति और अच्छाई के मार्ग पर चलने को तैयार है तो दंड का तो प्रश्न ही नहीं उठता अब तो आपका जीवन मेरे आशीर्वाद का ही भागी बनेगा प्रभु आज तक इस घर में मैं ही आपका भक्त था फिर मेरी पत्नी आपकी भक्ति में लीन हुई किंतु आज मेरे संपूर्ण परिवार को भक्ति भाव से भरकर आपने मुझे कृतार्थ किया प्रभु आपके इस भक्त परिवार को आपकी पूजा के साथ आपकी सेवा करने की अनुमति [संगीत] [संगीत] दीजिए [संगीत] काशी की रक्षा कीजिए प्रभु सहायता कीजिए विनायक इस संकट में विनायक जी ही मेरे पति की रक्षा कर सकते हैं मुझे उनसे प्रार्थना करनी चाहिए नमस्ते ब्रह्म रूपाय विष्णु रूपाय ते नम नमस्ते रुद्र रूपाय करि रूपाय ते नमः विश्वर रूप स्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मा चारण भक्त प्रिया देवाय नमस्तुभ्यं [संगीत] विनायक काशी नरेश अब तो तुम्हारा धनुष भी नष्ट कर दिया मैंने अब क्या [संगीत] करो तुमने मेरा धनुष नष्ट किया है खड़क नहीं तक तो आओ यदि साहस है तो अपना खड़क उठाओ और युद्ध करो मुझसे और युद्ध करो मुझसे युद्ध करो मुझसे और युद्ध करो मुझसे करो काशी नरेश अब इस क्रीड़ा के साथ-साथ तेरे जीवन का भी अंत करूंगा मैं श्री गणे श्री गणे श्री गणेशा श्री गणेशा वि हता श्री [प्रशंसा] गणेशा [संगीत] [संगीत] [संगीत] नमामि देवा नमामि देवा जय गणराजा नमाम देवा दया करो हे मंगल देवा जय गणराजा नमाम देवा मंगल दाता मंगल जय जन राधा काशी नरेश अब ये ा सुर तुम्हारा काल बनेगा हे प्रभु रक्षा कीजिए प्रभु सहायता कीजिए प्रभु स्वामी की रक्षा कीजिए स्वामी की रक्षा कीजिए सर्व याव वे उपनिषद ओ ग गण पतय नम मात्र एक पल और काशी नरेश त तुम्हे मृत्यु के घाट उतार देता धन्यवाद करो अपने प्रभु का कि महान देवांतक और नारा तक आज भी के पश्चात युद्ध विराम के नियम को मान्यता देते हैं लगता है आज तुम्हारे प्रभु ने तुम्हारी रक्षा की है ये क्या कहा इसने भक्त शुक्ल शर्मा अब दिन समाप्त हो रहा है मैं विश्राम करना चाहता [संगीत] हूं आज तू बच गए काशी नरेश किंतु कल कौन बचाएगा अब भी समय है हमारी अध स्वीकार कर लो क्योंकि कल सूर्योदय होते ही मैं फिर वापस आऊंगा और तुमने समर्पण नहीं किया तो अपने अंत के लिए तैयार रहना यदि कल सूर्योदय के समय तुम यहां घुटने टेक कर सर झुकाए नहीं मिले तो मैं तुम्हारा अंत तो करूंगा ही किंतु तुम्हारे साथ साथ तुम्हारे संपूर्ण परिवार और काशी का भी विनाश करूंगा और हा याद रखना कल तुम्हारे भगवान को भी तुम्हें बचाने का अवसर प्रदा भी नहीं मिलेगा इससे पहले मैं अपना निर्णय बदलू चले जाओ यहां से चले जाओ सारथी रस [प्रशंसा] भगाओ यही सोच रहे हो ना कि अवसर मिलने के बाद भी मैंने उसका अंत क्यों नहीं किया तो सुनो कल जब लाचार होकर काशी नरेश हमारी अधीनता स्वीकार करेगा उसके पश्चात किसी राजा में यह साहस नहीं होगा कि महान नारा तक और देवांतक की ओर आंख उठा के भी देख सके और कल उसका वध करने से मुझे उसका भगवान भी मुझसे नहीं बचा [संगीत] पाएगा लगता है आज तुम्हारे प्रभु ने तुम्हारी रक्षा की है विनायक जी पर अविश्वास कर मैंने कोई मैंने कोई भूल तो नहीं कर दी प्रभु विश्राम करना चाहते हैं किंतु इस छोटे से घर में उनके विश्राम के लिए उचित स्थान कहां है क्या हुआ शुक्ल शर्मा जी आप इस प्रकार शांत होकर क्या विचार कर रहे हैं मेरे विश्राम की तैयारी कीजिए प्रभु आप यहां विश्राम करेंगे यह हम सभी का सौभाग्य होगा किंतु किंतु कहाय हमारा छोटा सा घर और कहा राज भवन का सुख श्वर वो तो क्या हम तो आपके लिए उचित बिछोना भी प्रस्तुत नहीं कर सकते यह क्या कह रहे हैं आप शुक्ल शर्मा जी भीतर आपके संदूको में ढेरों स्वर्ण मुद्राएं हैं और आप कह रहे हैं निर्धनता के कारण आप मुझे उचित बिछौना भी नहीं दे सकते प्रभु ऐसा क्यों कह रहे हैं ऐसे विशाल और भव्य भवन में निवास करते और कह रहे हैं मेरे विश्राम के लिए आपके पास स्थान नहीं है प्रभु यह क्या कह रहे हैं आप हमारा घर राज भवन जैसा कहा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है [संगीत] [संगीत] [संगीत] क्यों यहां वह सब कुछ तो है जो किसी राजभवन की शोभा बनता है बहुमूल्य कलाकृतियां कोमल छने विशाल काय पलंग इतने बड़े कक्ष फिर भी कह रहे हैं आप मुझे राजभवन का सुख नहीं दे सकेंगे मुझे अनाज का भंडार चाहिए मुझे बहुत सारा धन चाहिए बहुत बड़ा र चाहिए राज भवन जैसा यह तुम्हारे भगवान करेंगे भक्ति की तुलना धन समृद्धि से कर मैंने बहुत बड़ी भूल की थी जिसके लिए आपकी भक्ति ही बड़ा सुख है उसके लिए य सब सुख निरर्थक है प्रभु मैंने ही यह सब मांगा था किंतु तब मेरा हृदय भक्ति के मार्ग से रिक्त था मुझे क्षमा कर दीजिए प्रभु मुझे आपके दर्शन के बाद अब कुछ नहीं चाहिए बस आप अपने चरणों में स्थान देने की कृपा करें प्रभु आज की युद्ध में मेरी विफलता ने मुझे बड़ी दुविधा में डाल दिया है किस पर विश्वास करूं मैं स्वयं पर या उन पर जिन्ह महर्षि कश्यप ने मेरे साथ मेरी सहायता के लिए भेजा था प्रभु इस भक्त परिवार को बस आपका आशीष चाहिए और कुछ नहीं ना यह धन ना ऐश्वर्य ना भवन तो मुझे भी राज भवन का सुख नहीं अपने भक्त के घर में उसकी भक्ति का सुख चाहिए फिर तो हम धन्य हुए हम अभी आपकी विश्राम की व्यवस्था करते [संगीत] हैं प्रभु मैं आपके लिए पुष्प लेकर आती [संगीत] हूं प्रभु इन पुष्पों की सुगंध बहुत मधुर है इससे आपका विश्राम और भी आनंदमय होगा आपको अच्छी निंद्रा भी आएगी इन पुष्पों को समय समय पर बदलती रहूंगी और मैं आपके लिए पंखा जल दूंगी मैं मैं आपके पांव दबा दूंगा प्रभु मैं भी आपके पैर दबा दूंगा आप सभी ने प्रभु की सेवा का दायित्व लिया तो मैं क्या [संगीत] करूंगा यहां तो मात्र शुक्ल शर्मा के परिवार का घर था यह भवन कैसे बन गया चिंता मत कीजिए आप वो करेंगे शुक्ल शर्मा जी जो सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है मेरे विश्राम में कोई बाधा ना आए भले ही कोई भी आ जाए उसे भीतर मत आने दीजिएगा इसका ध्यान रखेंगे आप प्रभु आप आप निश्चित रहिए जब आप विश्राम करेंगे तो मैं तो मैं प्रहरी बना रहूंगा और और किसी किसी बाधा को आपके पास फटकने नहीं [संगीत] दूंगा जब तक प्रभु विश्राम कर रहे हैं मैं किसी को भी भीतर जाकर उनकी उनकी निंद्रा भंग नहीं करने [संगीत] दूंगा यह तो वही है शुक्ल शर्मा प्रणाम महाराज दरिद्र अचानक धना हो गया साधारण घर जैसा निवास राज भवन जैसा विशाल और सुंदर हो गया कैसे हुआ यह चमत्कार चमत्कार नहीं आशीर्वाद है विनायक जी का अच्छा तो बताओ कहां मिलेंगे व मैं भी उनसे भेंट करना चाहता हूं मैं भी तो सुनू मेरी प्रजा को अपना भक्त क्यों बना रहे हैं वो क्षमा करें महाराज मैं अभी आपको रोकने के लिए विवश हू मैं आपको भीतर नहीं जाने दे सकता तुम रोकोगे मुझे भूल तो नहीं गए कि मैं कौन हूं राजा हूं मैं तुम्हारा मैं काशी नरेश हूं महाराज मैं कुछ नहीं भूला कदाचित भूल तो आप रहे हैं आप काशी नरेश हैं हमारे महाराज हैं किंतु जो समस्त ब्रह्मांड के महाराज है उनकी आज्ञा भंग करर एक राज्य के एक नगर के राजा का आदेश में कैसे स्वीकार करूं ओ तो यही सत्य है मेरे पद को छीनकर मेरी प्रजा को ही मुझसे विमुख करना चाहते हैं विनायक राजा हो या रंग सब उन्हीं की प्रजा है महाराज तो आपका पद भला व क्यों नेंगे तुम्हे उनके लिए उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है अब यह प्रश्न मैं उन्हीं से पूछूंगा क्षमा करें महाराज भूल कर रहे हो तुम उनको काशी लाने वाला मैं हूं मेरे अतिथि है वो उनसे फेट करने का पूर्ण अधिकार है मुझे अतिथि तो भगवान का रूप होते हैं उनकी इच्छा तो सर्वो परी होती है और जब स्वयं भगवान हमारे अतिथि हैं तो उनकी इच्छा के विरुद्ध में कुछ नहीं होने दूंगा उन्हीं का आदेश है मैं किसी को भी भीतर ना जाने दूं तो मैं किसी को भीतर नहीं जाने दूंगा आपको भी नहीं बस अब तुमने मेरे आदेश का उल्लंघन किया तो अभी तुम्हारा शीश धर से विलग हो जाएगा उचित है महाराज आप अपने खड़क से मेरा वद कर दीजिए और भीतर जाइए क्योंकि नाय भक्त अपने प्रभु की आज्ञा का उल्लंघन कर सकता है और आपकी प्रजा होने के नाते अधिक देर तक मैं आपको रोक भी नहीं सकता किंतु जब तक प्रभु विश्राम कर रहे हैं मेरे जीती जी आप भीतर नहीं जा सकते तुम मुझे अधिक समय तक रोक नहीं पाओगे मेरी इच्छा हुई तो पल भर में भीतर चला जाऊंगा मैं लेकिन आश्चर्य तो मुझे इस बात का है कि राज भवन का सुख त्याग कर तुम जैसे साधारण काशीवासी के पास क्यों चले आए वो ऐसा क्या है तुम्हारे पास विश्वास मेरे पास प्रभु के प्रति विश्वास है महाराज अब मैं आप पर कभी विश्वास नहीं खंगा यह मेरा वचन है आपसे आपने सत्य कहा महाराज मैं तो अत्यंत साधारण निर्धन काशीवासी हूं मेरे पास भक्ति और विश्वास के सिवा कुछ नहीं था और अब तुम्हें यह भवन और संपन्नता प्राप्त हो गई हां महाराज यह प्रभु का आशीर्वाद ही है जन्म से आज तक जो भी मिला वह प्रभु की कृपा से ही मिला और मेरी मृत्यु और उसके बाद भी जो मिलेगा वह उन्हीं की कृपा होगी और उनकी इस कृपा के लिए भक्ति और विश्वासी दे सकता हूं मैं [संगीत] उन्हें इसलिए महाराज यदि आप प्रभु से भेंट करने के लिए मेरा वध भी कर देंगे तो इसे भी मैं प्रभु की इच्छा समझकर स्वीकार कर लूंगा क्योंकि जहां प्रभु की इच्छा है वहां भक्त की भलाई के सिवा और कुछ नहीं हो सकता चिंता मत कीजिए काशी नरेश मुझ पर विश्वास रखिए प्रभुत्व का ढोंग करके आपके अंदर विश्वास जगा दिया उन्होंने बस इतना समझ लीजिए जहां अविश्वास है वहां विश्वास श्वास नहीं लेता ऐसा अटूट विश्वास कैसे है तुम्हें कि उनके लिए तुम अपने प्राण भी गवाने को तैयार हो कहीं इसलिए तो नहीं कि उन्होंने तुम्हें विशाल भवन प्रदान किया है नहीं महाराज चमत्कार मेरे विश्वास का आधार नहीं है मेरी भक्ति है चमत्कार विश्वास का आधार नहीं होता राजन क्योंकि कोई मायावी भी चमत्कार दिखाकर लुभा सकता है विश्वास सच्चा तभी हो सकता है जब व श्रद्धा और भक्ति पर आधारित हो क्योंकि यह तो परम सत्य है कि संसार में जो भी है सभी के स्रोत परम ब्रह्म है और जो परम ब्रह्म है उन पर विश्वास करने के लिए कोई कारण ढूंढने की कोई आवश्यकता नहीं और जो परम ब्रह्म है उन पर विश्वास करने के लिए कोई कारण ढूंढने की कोई आवश्यकता नहीं महाराज आशा है मैंने जो भी कहा आप समझ रहे होंगे मैं समझ गया समझना और मानना दो सर्वथा भिन्न बातें होती है किंतु मुझे विश्वास है जो बात आपने अभी समझी है शीघ्र आप उसे मानने भी लगेंगे मैं मान भी गया प्रभु मैं मान [संगीत] गया मैं अहंकार में भ्रमित होकर भटक गया था बस अब एक बार मुझे भीतर जाकर विनायक प्रभु के दर्शन कर लेने दो महाराज मैं अ भी क्षमा चाहता हूं मैं अब भी आपको भीतर जाने नहीं दे सकता तुम मुझे उनके पास जाने नहीं दे सकते किंतु उनको अपने पास यहां बुलाने का मार्ग तो सुझा सकते बताओ भक्त शिरोमणि शुक्ल शर्मा मैं मैं क्या करूं बस इतना ही महाराज उन पर अटूट विश्वास रखिए किंतु मैं अपना विश्वास उन पर कैसे व्यक्त करू लक्ष्य ज्ञात हो तो मार्ग अपने आप मिल जाता है चिंता मत कीजिए काशी नरेश मुझ पर विश्वास रखिए मैं समझ गया प्रभु मैं समझ गया मुझे सहज सरल भक्ति से अपने विश्वास को प्रकट करने की आवश्यकता है मैं समझ गया प्रभु मुझे सहज प्रेम और सरल भक्ति से अपने विश्वास को व्यक्त करना चाहिए अब समझ अब मैं समझ गया आएंगे मेरे प्रभु अवश आएंगे मेरे प्रभु प्रभु म विनायक आ अव स्वामी स्वामी स्वामी स्वामी स्वामी आप सुरक्षित है मैं बहुत प्रसन्न हूं स्वामी मैं बहुत प्रसन्न हूं [संगीत] स्वामी स्वामी यह घाव यह कुछ नहीं है देवी सब कुशल होगा सब मंगल होगा प्रसन्नता ही प्रसन्नता होगी देवी तक भी चिंता मत कीजिए हमारे इस भवन पर प्रभु का आशीर्वाद होगा प्रभु य आने वाले शीघ्र जाइए और एक सहस्त्र दीपक प्रज्वलित कीजिए प्रभु हां देवी प्रभु महुत कट विनायक उसके लिए मुझे सहज प्रेम और सरल भक्ति व्यक्त करनी होगी हां हां उसके लिए मुझे सहज प्रेम और सरल भक्ति मेरे प्रभु [संगीत] आएंगे स्वामी को क्या हो गया और सहज प्रेम व्यक्त करने से प्रभु आएंगे अवश्य आएंगे सहज प्रेम व्यक्त करने से प्रभु आएंगे अवश्य आएंगे प्रभु मोत खाएंगे संभालिए स्वामी खुद को स्वामी संभालिए स्वामी संभालिए खुद को स्वामी प्रभु मत आएंगे अवश स्वामी संभालिए स्वामी [संगीत] स्वामी महारानी मुझे मिट्टी चाहिए हल्दी चाहिए जल पुष्प मुझे समस्त पूजा की सामग्री चाहिए महारा शीघ्र व्यवस्था कीजिए जी महाराज मेरे प्रभु अवश्य [संगीत] [संगीत] लौटेंगे मेरे प्रभु लौट आएंगे मेरे विनायक मैं अपने विश्वास को श्रद्धा और भक्ति से व करूंगा मेरे प्रभु अवश्य लौट [संगीत] [प्रशंसा] आएंगे कल का सूरज उस काशी नरेश और तुच्छ बालक के अंत के साथ ही अस्त होगा नरेश के समर्पण करते ही मेरा यह त्रिशूल उसके प्राणों का अर्पण [संगीत] करेगा प्रभु तुझको तेरा अर्पण सब कुछ है तुझको समर्पण प्रभु मुझे क्षमा कर दीजिए क्षमा कर दीजिए मेरे अहंकार ने मेरी मति भ्रष्ट कर दी थी जो आप पर संदेह कर बैठा अब जब तक आप स्वयं यहां नहीं आएंगे तब तक आपका यह भक्त इसी प्रकार आपके सामने बैठकर पूज में लगा रहेगा फिर चाहे वो दुष्ट बवंडर बनकर क्यों ना आ जाए चाहे मुझे नष्ट क्यों ना कर दे मेरे विश्वास की आस प्रभु मेरे विदाय मेरे प्रभु अवश्य [संगीत] आएंगे ओम नमस्ते गणपतये त्वमेव प्रत्यक्ष तत्व मसी त्वमेव केवलम कता स एक दंताय विघ्न वक्र तुंडाय धीमहि तन्न दंती प्रचोदयात एक दंतमंजन रदमेल दरम शूर ण कम रक्त वासस रक्त गंधा लिंगम रक्त पुष्प सुजित भक्तान कंपन देवम जगत कारण मतम आवि भूतम च श प्रकृत पुरुष परम संध्याय यो नित्यम सहयोगी योगम पर ये कैसी ध्वनि है जिसने मेरी निद्रा को भंग [संगीत] [प्रशंसा] किया भक्तान कंपन देवम चतम काशी में न हो [संगीत] गया का विश्वास उ [संगीत] उना रायता नाने शिव सुताय श्री वरद मूर्त ये नमो [प्रशंसा] [संगीत] नमः यो दूर्वा कुर्य जति सव श्रवण मपो भवति योला जर जति स भव क्या किसकी पूजा कर ने इस मा जाल से निकाल दिया था उसके बाद भी आप उस मा जाल में फस रहेम लभते स सर्वम लभते अष्ट ब्राह्मणा सम नरेश अब तुम्हारे अंत में केवल है महा [संगीत] महा स्वामी अपनी रक्षा कीजिए रक्षा तो प्रभु करेंगे यदि मैं उनकी कृपा दृष्टि के योग्य हूं तो वही मेरे जीवन की डोर संभालेंगे [संगीत] नम ये क्या हुआ [संगीत] श्री गणे श्री गणे श्री गणे सच्चा भक्त वही है जिसकी भक्ति में आडंबर ना हो मात्र विश्वास और सहज प्रेम हो
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