Monday, 29 December 2025

नरकासुर की रणनीति क्या थी Mahabharat (महाभारत) Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत वासुदेव नरकासुर तक पहुंचना इतना सरल नहीं है एक तो स्वम बहुत ही शक्तिशाली है फिर उसका दानव सेनापति मुर और उसकी सुपुत्री मौरवी ने सुरक्षा का इतना कड़ा प्रबंध किया है कि प्राग ज्योतिपुर की सीमा में प्रवेश करना असंभव है दुष्ट और अत्याचारी लोगों की शक्ति मोम की भाति होती है देव राजेंद्र देखने में बहुत कठोर किंतु अग्नि की एक छोटी सी लव से पिघल जाने वा आप चिंता ना करें वह हमें अपनी सीमाओं में प्रवेश करने से रोक नहीं पाएगा ठहरी वासुदेव हम भी आपके साथ चलेंगे न जाने क्यों हमारा मन कहता है कि प्राग ज्योतिपुर में हमारा आपके साथ रहना आवश्यक है तो चलिए न जाने उन असहाय अलाओ की क्या दशा [संगीत] होगी ज [प्रशंसा] [प्रशंसा] चुप रहो दया तुम हमसे वह वस्तु मांग रही हो जो हमारे पास है ही [प्रशंसा] नहीं हमसे हमारे सारे अ लेलो सारा धन लेलो पर हमें मुक्त करो हम तुमसे जो धन चाहते हैं वह तो तुम्हारा रूप धन है जो अब हमारा हो चुका है और जिसे भोगने से हमें कोई वंचित नहीं कर सकता ब करो पुकार बंद करोल ले जाओ इ [प्रशंसा] [संगीत] महाराज की जय हो कोई नई सूचना लाए हो जी महाराज सूचना मिली है कि इंद्र के भड़काने पर कृष्ण सेना लेकर प्राग ज्योतिपुर की ओर प्रस्थान कर चुके हैं हम जानते थे हम जानते थे कि अपने अभिमान की इस हार पर यह अहंकारी देवलोक वाले चुप नहीं बैठेंगे कोई ना कोई अवश्य इधर आएगा सेनापति महाराज आप हमें यह बताइए कृष्ण को रोकने के लिए आपने क्या प्रबंध किया है महाराज सीमाओं पर विद्युत रस्सियों और कटार का जाल बांध दिया गया है जो भी प्राग ज्योतिपुर की सीमाओं में प्रवेश करने की मूर्ता करेगा वो विद्युत रस्सियों में उलझ करर समाप्त हो जाएगा और कटारे उसके शरीर के टुकड़े टुकड़े करके वायु में उछाल देंगी आप चाहे तो स्वयं चलकर देख सकते हैं हम अवश्य देखना चाहेंगे आइए [संगीत] महाराज [संगीत] महाराज वो रहा हमारा सुरक्षा प्रबंध प्रबंध तो उत्तम है किंतु हमें इसका उपयोग बताइए सेनापति जो आज्ञा महाराज सैनिक वह सामने विद्युत जाल है वहां जाकर अपनी खड़क से प्रहार करो [संगीत] हम प्रसन्न हुए किंतु कृष्ण को कम ना समझो व बहुत चतुर और साहसी है कोई ना कोई चाल अवश्य चलेगा बहुत चौकन ना रहने की आवश्यकता है जो आज्ञा महाराज मैं अभी जाकर अपनी पुत्री मोरवी को कहता हूं कि वह स्वयं आकर इस सुरक्षा जाल की देखरेख करें आप निश्चिंत रहे महाराज युद्ध हुआ तो मेरी पुत्री मोरबी कृष्ण की सेना के रक्त की नदियां ब [संगीत] देगी [संगीत] प्रणाम पिता श्री आयुष्मान भव आप कब आए थोड़ी देर हुई तु पूजा में लीन देखकर मैंने विघ्न डालना उचित नहीं समझा किंतु बेटी देवी कामाख्या ने तुम्हें वह सब दिया है जिसकी तुमने कामना की थी खड़क त्रिशूल शक्ति अब देवी से क्या मांग रही हो वही जिसके बिना एक कन्या का जीवन और अस्तित्व अधूरा होता है एक कुचित वर की दी हुई शक्तिया अब मेरे लिए शाप बनती जा रही है क्यों बेटी मैं तो विवाह के लिए यह प्रस्ताव रखकर स्वयं अपने ही जाल में फस गई हूं कि उसी से विवाह करूंगी जो मुझे शस्त्र और शब्द से पराजित कर देगा विवाह के छुप नित्य आते हैं और मेरी शक्ति से पराजित होकर मारे जाते हैं यह हाथ जो मेहंदी से लाल होने के लिए तरस रहे हैं केवल रग से लाल होते रहते हैं मैं तुम्हारा दुख समझता हूं बेटी पर यह समय इन सब बातों के लिए नहीं है कृष्ण सेना लेकर हम पर आक्रमण के लिए आ रहे हैं और हमारा परम कर्तव्य अपने महाराज की रक्षा करना है पिता श्री से कहिए वो अपनी रक्षा की चिंता छोड़ दे क्योंकि एक तो कोई रस्सी और कटार का जाल ही पार नहीं कर पाएगा और यदि कर भी गया तो कामाख्या देवी का खड़क त्रिशूल और मेरी शक्ति से नहीं बच पाएगा और श्री कृष्ण आने दीजिए उनको भी देख [संगीत] लेंगे [संगीत] [संगीत] [संगीत] इंद्रदेव नरकासुर की इसी सुरक्षा व्यवस्था से भयभीत थे यह विद्युत रस्सियों का जाल यह तो बहुत दुर्बल व्यवस्था है केशव किसी भी जाल को दुर्बल समझ लेना अज्ञानता होगी सेनापति यह जाल तो दिखाई दे रहा है माया जाल तो दिखाई भी नहीं देता किंतु उसमें फस जाने वाला व्यक्ति कभी बाहर नहीं निकल पाता इंद्रदेव की चिंताओं पर संदेह करना मूर्खता होगी यदि आपकी आज्ञा हो तो इस जाल को काट दे ऐसी भूल कभी ना करना सेनापति नरकासुर का सेनापति मूर एक उच्च कोटि का शिल्पी भी है अवश्य ही इस घेरे में कोई रहस्य है बहुत सोच समझकर चोट करना ही उचित होगा जो आज्ञा केशव सोच समझ कर ही प्रहार होगा सैनिक [संगीत] इंद्रदेव ठीक कहते थे मूर ने आकाश की विद्युत शक्ति को बंदी बना लिया है इस जाल को पार करना सरल नहीं है यह मोरवी पाश है केशव मूर की पुत्री ने कामाख्या देवी की सहायता से अपूर्व शक्ति प्राप्त की है किंतु मेरे पास भी सूर्यदेव का दिया हुआ दिव्यास्त्र है जिस पर विद्युत का कोई प्रभाव नहीं होता मैं इस जाल को पार [संगीत] करूंगी सूर्य कवच धारण किया सत्य भा माने [हंसी] आज दुखियारी अबला की चली बचाने [हंसी] ला [संगीत] महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...