Sunday, 28 December 2025

देवर्षि नारद हिरण्यकश्यप के दरबार में क्यों पहुँचे Sankat Mochan Mahabali Hanuman 348 Pen Bhakti

[संगीत] बोलो ओम हिर नमः ओम हिर नमः ओम हिर नमः ओम हिर नम हिर नम ओ हिरण नम ओम हिर नम हिर पुत्र ओ हिर नम हिर नम ओ हिर नम ओम नारायणाय नम हि नम ओ हिर नम ओ हिर नम ओम नारायणाय नमः ओ हिर नम नारायणाय नम रय नम रय नम प्रणाम देवर्ष कल्याण हो [संगीत] देवी प्रणाम कल्याण [संगीत] मस्त देवर्षि स्वामी हम पर संदेह कर अत्यंत क्रोधित हो रहे हैं ऋषिवर आप उन्हें समझाकर उनका क्रोध कम करने की कृपा [संगीत] कीजिए ओ हिय नम ओम रय नम सावधान देवर्ष आपकी किसी भी सुझाव की कोई आवश्यकता नहीं है हिरण कशु को अवश्य महाराज सुझाव नहीं दूंगा मैं मात्र इतना कहूंगा कि आपके पुत्र का कथन सर्वता सत्य है स्पष्ट कहिए देवर्ष क्या अर्थ है आपका क्या सत्य है उसका कथन में यही महाराज कि श्री हरि ने ही आकर एक ही समय पर आपकी पत्नी और आपके पुत्र को भोजन कराया ओम नारायणाय नमः महाराज आप अत्यंत सत्य निष्ठ है होले हैं कि श्री हरि के छल को नहीं समझ सके अवध राज्य सर्वशक्तिमान है आप इसलिए बल से नहीं छल और माया से आपके अपने परिवार में ही फूट डालकर आपको पराजित करने का प्रयास कर रहे हैं माया विहारी अवश्य छल से ही उस छलिया हरि ने मेरे अपने पुत्र को मेरे ही विरुद्ध कर दिया वो पुत्र जिसके शिरा में मेरा रक्त प्रवाहित है पि द्रोही बनकर मेरे ही समक्ष हरि भजन में लीन है उसे यह भी ज्ञात नहीं है कि उसके कृत्य से मैं कितनी असीम वेदना से द्रवित होता हूं नहीं पिता श्री से कष्टदायक वचन मत [प्रशंसा] कहिए आपका पुत्र हूं मैं मेरा उद्देश्य आपको कष्ट पहुंचाना कदापि नहीं हो सकता तक विचार कीजिए महाराज इस अबोध बाल बुद्धि में आपके प्रति विशाख विचारों ने प्रवेश कैसे [संगीत] किया अवश्य छल है अवश्य छल है उस छल या हरि का और छल से श्री हरि आपको पराजित कर रहे हैं तराज आपकी उपस्थिति में ही आपके अपने पुत्र द्वारा प्रभु श्री हरि की भक्ति के बाल हट आपको प्रजा के उपहास का पात्र भी बना सकता [संगीत] परंतु पुत्र मुह से विवश उसको दंडित कैसे करेंगे [संगीत] आप करूंगा दंडित करूंगा उसे अपने पुत्र पर छाए उस छले हरी के मोह पाश को खंडित करूंगा भले ही उसके लिए मुझे कठोर से कठोर उपाय करने पड़े सेनापति इस बार यंत्रणा कक्ष में ले जाइए इसे व हरि भक्तो की दुर्दशा से साक्षात्कार होगा इसका तो इसकी हृदय में व्याप्त हरि भक्ति स्वत ही मिट जाएगी नहीं किंतु फिर भी यदि इसके हर के पति सम मोहन भंग ना हो तो इसे साधारण अपराधी के समान भेड़ में बा कर दंडित करो दंडित करो दंडित करो दंडित करो नहीं स्वामी ऐसा मत कीजिए जैसा आप चाहते हैं वैसा ही होगा पिताश्री ले जाओ इसे यहां [संगीत] से माता देवर्ष नारद तो स्वयं महा हरि भक्त है उन्होंने ही भक्त प्रहलाद को हरि भक्ति का पाठ सिखाया परंतु माता प्रभु विष्णु जी की भक्ति को त्याग कर दैत्य राज हिरण्य कश्यप के अनुगामी क्यों बन गए पुत्र तिव शी नारद जी अपने नटखट स्वभाव के लिए प्रसिद्ध है परंतु हास परिहास से परिपूर्ण उनकी प्रत्येक युक्ति में जगत कल्याण का कोई उद्देश्य अवश्य निहित होता है जिसका सुखद परिणाम भविष्य में दिखाई देता है परंतु माता देवर्षि ने तो हिरण्य कश्यप को उकसाया कि वह भक्त प्रहलाद को यातना देकर दंडित करें इससे जगत का क्या लाभ था माता पुत्र कभी-कभी वर्तमान में मिली पीड़ा भविष्य में आनंद बनकर फलित होती है देवर्षी को ज्ञात था कि जीवन में में हर प्राणी को उनके कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होते हैं दुष्ट दैत्य हिरण कश्यप पाप पथ पर अग्रसर तो था परंतु पूर्व काल में उसके किए हुए कुछ पुण्य कर्म भी अभी शेष थे जिनके कारण वह प्रभु द्वारा दंडित होने से बचा हुआ था हनुमान समझ गया माता देवर्षि नारद इसीलिए उनको इतना उकसा रहे थे देवर्षि नारद ने दैत्य राज हिरण्य कश्यप को और पाप करने के लिए प्रेरित किया जिससे उसके पापों का घड़ा बर जाए और शीघ्र ही प्रभु हरि के हाथों से उसका विनाश हो माता क्या वास्तव में ही तेरा हिरण का शप ने अपने पुत्र भक्त प्रहलाद को यंत्रणा कक्ष में डाल दिया हां पुत्र उस कालकोठरी में स्थित यंत्रणा गृह अत्यंत भयंकर था वहां अहंकारी हिरण कश्यप हरि भक्तों को कड़ी यातना देता था जिससे भयभीत होकर वह अपनी हरि भक्ति त्याग दे प्रहलाद को भी वहीं ले जाया गया प्रभु के सच्चे भक्त अपने प्रभु की भक्ति के लिए प्रत्येक यातना प्रत्येक कष्ट सहने का साहस रखते हैं बो ओम हिर नम नारायणा नारायणाय नम नारायणा जो सत्य है वही बोलूंगा ओम नारायणा नम रुक जाइए ऐसा करते हुए आपके हाथों में कंपन नहीं होता यहां हमारे हाथ नहीं युवराज स्वयं हरिभक्त कापते हैं हरि भक्ति छोड़ने पर ही यहां से मुक्ति मिलती है और जो हरि भक्ति नहीं छोड़ते स्वयं प्राण उनका साथ छोड़कर उड़ जाते हैं अन्यथा हम उनकी जिवा काटकर हरि नाम लेना असंभव बना देते हैं बोलो बोलो ओ हिर नमः ओम नारायण नारायणा नम ओम नारायण नम नारायणाय नम ओम नारायणाय नम बोलो रय नम ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः बोलो ओम हिर नम नम नम ओम नारायण देखा युवराज यदि आपने हरि नाम लेना नहीं छोड़ा तो आपको भी यही परिणाम भुगतना पड़ेगा जीवा काट दे मेरी तो मैं प्रभु का नाम नहीं ले पाऊंगा परंतु मेरे नेत्र सदैव हरि दर्शन के लिए ही तत्पर रहेंगे युवराज उसका उपाय भी है हमारे [संगीत] [संगीत] पास ओम नारायणाय नम ओम नारायणाय नम ओम नारायणा नम बोलो हरि भक्ति त्यागो ग या नहीं नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नम बोलो ओम हिरण नम नम ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः ओम नारायणा प्रभु हे प्रभु अपने भक्तों की रक्षा कीजिए प्रभु प्रभु प्रभु हे प्रभु हे श्री हरि अपने इन भक्तों की रक्षा कीजिए रक्षा कीजिए प्रभु रक्षा कीजिए यहां हरि शब्द का अर्थ है घोर यंत्रणा सहना इसीलिए युवराज अपनी जिवा पर यह नाम लाकर स्वयं को पीड़ा का भागी मत बनाओ अभी भी समय है भूल जाइए हरि को और उसके नाम को आप जीवा काटकर हरि नाम का उच्चारण करने से रोक सकते हैं नेत्रों को छीनकर हरि की प्रतीक्षा में बिछी दृष्टि को बाधित कर सकते हैं लेकिन मन में स्थित हरि स्मृति को कैसे मिटा पाएंगे आप जिस शरीर के रोम रोम में श्री हरि व्याप्त है उन्हें उस शरीर से मिलक करने का सामर्थ्य कहां से लाएंगे आप नारायण नारायणा नम राय नम ओम नारायणाय नम ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नम प्रतीत होता है युवराज तुम्हे भी अन्य हरि भक्तों की भाति पीड़ा देकर हरि के प्रकोप से मुक्त कराना [संगीत] होगा ओ नारायणाय नम हरि भक्ति में होने वाली पीड़ा भी प्रसाद के समान ही होगी क्योंकि हरि भक्ति करने वालों का सच भी हरी है तो उनके मन का चैन भी हरी [प्रशंसा] है नारायणा नम नारायणाय नम नारायणा नम ओम नारायणाय नम ओ नारायणाय नम नारायणा नम नारायणा नम नारायणा नम ओ नारायणा नम नारायणा नारायणा हरि दीन दयाला [संगीत] नारायणा [प्रशंसा] [संगीत] नारायणा नारायणा हरि केशव कृपाला [संगीत] [संगीत] [संगीत] नारायणा दम सहस्त्र रूप अनेक श्री नारायण विष्णु हरि कण कण में तुम्हारा वास है संकट विमोचन [संगीत] पीतांबरी नारायणा नारायणा हरि श्री श्री पाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि श्री श्री पाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि श्री श्री बाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि श्री श्री बाला [संगीत] नारायणा [संगीत] ये कै संभव है [संगीत] य ये कैसे संभव है हमारे अस्त्र हम परिवार कर रहे हैं ओ मेरा न्याय नम प्रभु मुझ कृपा दृष्टि कर मेरी जीवा लौटा दी है प्रभु आपने आपकी दया से आपका भक्त धन हो गया [संगीत] प्रभु मेरी दृष्टि वापस आ गई प्रभु मेरी दृष्टि वापस आ गई आपका सत सत नमन प्रभु आपको सत सत नमन [संगीत] प्रभु ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नम प्रभ प्रभु धन्यवाद अ ये कौन कर बहुत बहुत धन्यवाद [संगीत] प्रभु ओम नारायणाय नमः नारायणाय नम ओम नारायणाय नम इस मां की विनती सुनिए स्वामी हमारे पुत्र यंत्रणा कक्ष लौटा लीजिए यंत्रणा तो दूर उसका कोमल हदय वहा के बंदियों की वेदना भी नहीं सहन कर पाएगा इतने निष्ठुर मत बनिए स्वामी मेरे पुत्र को इतना कठोर दंड मत दीजिए आप चिंता मत कीजिए महारानी मुझे पूर्ण विश्वास है अन्य हरि भक्तों को यंत्रणा पाते देख वह स्वयं वहां से मुक्त होने के लिए प्रार्थना कर रहा होगा मेरी बात समझने की चेष्टा कीजिए [संगीत] स्वामी एक अप आचार लाया क्या हुआ मेरा पुत्र प्रहलाद कुशल तो है उसे कोई गंभीर आघात तो नहीं लगा नहीं महाराज इसके विपरीत हुआ है शति तो हमारे सैनिकों को पहुंची है जो युवराज एवं अन्य बंदियों को यातना देने का प्रयत्न कर रहे थे महाराज मुझे तो लगता है अवश्य ही युवराज दिव्य शक्तियों के स्वामी है यंत्रणा कक्ष में तो चमत्कार हो गया हमारे सैनिकों की शस्त्र उन्ही आगात पहुंचाने लगे पिता श्री मुझे कोई देवी शक्ति प्राप्त नहीं है यह चमत्कार तो प्रभु विष्णु का ही है उन्होंने अपने भक्तों को संकट में देखकर हम सबकी रक्षा की मेरा [संगीत] पुत्र सुरक्षित है मेरा पुत्र नक राहत नहीं हुआ माता प्रभु श्री हरि जिसकी रक्षा करें उस पर कोई विपदा कैसे आ सकती है आप व्यर्थ चिंता मत कीजिए मेरे प्रभु मुझे कोई कष्ट नहीं होने [संगीत] देंगे पिताश्री [संगीत] पिताश्री अब तो आपका विश्वास हो गया ना कि श्री हरि ही ईश्वर है सुपुत्र की इच्छा थी मेरी दुर्भाग्य मेरा कि मुझे ऐसा कुपुत्र मिला जो अपने पिता के शत्रु का नाम भज करर उसकी महिमा का बखान कर रहा है ईश्वर बला रहा है उसे दुष्ट बालक अपने पिता के लिए तनिक सम्मान लेश मात्र भी स्नेह नहीं है तुम्हारे मन में ऐसा मत कहिए पिताश्री आपसे तो मुझे अपार स्नेह है इसीलिए तो मैं आपसे श्री हरि की शरण में आने का निवेदन कर रहा हूं हरि हरि हरि थक गया हूं तुम्हारे मुख से यह नाम सुनते सुनते उस हरी का प्रभाव बढ़ता ही जा रहा है तुम पर और यह मत सोचो कि वह छलिया हरी हर बार अपने दिव्य शक्तियों से तुम्हारी रक्षा करेगा इस बार मैं ऐसा प्रबंध करूंगा कि तुम उस हरी का नाम भूलने पर विवश हो जाओगे [संगीत] अहंकार सत्य और असत्य का भेद करने की शक्ति भी हर लेता है और मनुष्य को अंधकार की ओर धकेल देता है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...