Sunday, 28 December 2025

देवराज इंद्र ने बाली पर क्रोध क्यों किया Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 302 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] यदि तुम मेरे प्रति निष्ठावान होते तो तुम्हें यह कष्ट नहीं होता परंतु तुम्हें तो मुझसे अपने भाई से अधिक वो वो मर्कट प्रिय है मुझे आश्चर्य होता है सुग्रीव कि तुम मेरे मुझ महानतम वाली के भाई होकर इतने भीरू इतने भावुक हो तुम शक्ति के प्रति तुम्हारा कोई आकर्षण ही नहीं देखो मुझे भरपूर शक्ति का भंडार है मुझ में और तुम य दूसरों के प्रेम के प्रति ही आश्रित हो तुम मैं अपनों का प्रेम पाकर को धन्य मानता हूं वालू भैया मुझे जीवन में इससे अधिक कुछ चाहिए ही नहीं मैं आपसे भी अपने लिए प्रेम की आकांक्षा रखता हूं भैया क्या प्रेम निरर्थक है यह शब्द मेरे लिए हां पर यदि तुम अपने मित्र से स्नेह करते हो तो आओ इस प्रसाद को प्राप्त करके रक्षा करो अपने मित्र की देवी मां का प्रसाद मेरे पुत्र का जीवन लौटा सकता है यदि वो प्राप्त नहीं हुआ तो मैं क्या करूंगी आओ सुग्रीव बचा लो इस प्रसाद को रक्षा करो अपने मित्र उस मर्कट की रुक जाइए वाली भैया रुक जाइए शीघ्रता करो सुग्रीव मैं और प्रतीक्षा नहीं कर सकता इतनी धीमी गति से तो तुम कदापि यहां नहीं पहुंच पाओगे सुग्रीव शीघ्रता करो शीघ्रता करो सुग्रीव हे महादेव अंजना अभी तक देवी माता का प्रसाद लेकर नहीं आई मंत्री जी आप शीघ्र राज वैद को बुलाइए तब तक मैं हनुमान को राजमहल के कक्ष में लेकर जाता हूं जी [संगीत] महाराज मां वो प्रसाद कहां गया यदि मेरी भक्ति सच्ची है मेरा व्रत सच्चा है तो वो प्रसाद मुझे अवश्य मिलेगा कहां ढूंढू मैं उसे ऐसा भागन मां पर कृपा कीजिए मेरे पुत्र को स्वस्थ कर दीजिए इस मां की पीड़ा दूर कर दीजिए मा सुग्रीव शीघ्रता करो सुग्रीव नहीं नहीं भैया भैया यह क्या कर दिया भैया ले लो [संगीत] प्रसाद अब कैसे बचाओगे तुम इस प्रसाद को सुग्रीव मेरे शत्रु का मित्र मेरा भाई मुझ महानतम वाली का भी शत्रु है अब होगा दोनों कान प्रसाद के नष्ट होने का अर्थ है हनुमान के जीवन पर संकट क्या करूं मैं हे प्रभु हनुमान के जीवन को बचाना बहुत ही आवश्यक है कुछ कीजिए प्रभु स्वामी क्या हुआ अंजना स्वामी स्वामी जो प्रसाद मेरे हनुमान का जीवन बचा सकता उसे मैं खो बैठी हूं य क्या कह रही हो तुम यह कैसे हो सकता है प्रसाद राज भवन से ऐसे कैसे खो सकता है मैंने सब और ढूंढ लिया कहीं नहीं मिला उसके बिना मेरा जीवित पुत्र का व्रत पूर्ण नहीं हो पाएगा आश्चर्य है मेरी बिना अनुमति के कोई प्रसाद ले जाने का साहस कैसे कर सकता हैरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा स्वामी क्या करू कैसे अपने लाल का जीवन बचाओ अब तो मुझे इसके जीवन की अंतिम आशा भी समाप्त होती दिखाई दे रही है हे प्रभु आप आप चाहे तो कुछ भी कर सकते हैं हनुमान पर आए हुए संकट को दूर कीजिए प्रभु इस प्रसाद को नष्ट होने से [संगीत] बचाइए हे प्रभु अकस्मात इतनी वायु कैसे चलने लगी वायु [संगीत] देव प्रणाम वायु देव वायु देव आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपने इस प्रसाद को नष्ट होने से बचाकर हनुमान के जीवन को आशा दी है मुझे वहां तक पहुंचाने के लिए आपका आभार आपको कोटि कोटि नमन [संगीत] अब तक तो मर ही गया होगा वह मरकेट हनुमान मुझ महानतम वाली ने तुझे परास्त कर ही [संगीत] दिया हनुमान के जीवन का अंत होने का अर्थ है कि अब इस सृष्टि में कोई भी शेष नहीं है जो मुझ महानतम वाली की शक्तियों को चुनौती दे सके स्वर्ग के शस्त्रागार से यह इंद्र कूप लेकर अच्छा ही किया मैंने ये कूप महादेव शिव के प्रलयनकारी शक्ति से निर्मित हुआ है इससे इच्छा अनुसार किसी भी आकार में कूब को उत्पन्न करके उसमें किसी को भी बंदी बनाया जा सकता है इंद्र को बिना अनुमति के लाकर तुमने बहुत बड़ा अपराध किया है और उससे भी बड़ा अपराध उसका दुरुपयोग करके शांत शांत [संगीत] देवराज इतना कोप अपने ही अंश पर बाली तुम मेरे अंश हो इसीलिए प्रेम वश में तुम्हें स्वर्ग के शस्त्रागार लेकर गया था किंतु तुमने मेरे प्रेम का अनुचित लाभ उठाकर वहां से इंद्र गुुप को चुरा लिया बस ऊंचा स्वर और मुझ महानतम पर उठी उंगली मुझे किसी की भी अच्छी नहीं लगती हाथ चुराया है मैंने इंद्र कूप मुझे आवश्यकता थी उसकी बस वाली बस मैं देवराज इंद्र तुम्हें वरदान दे सकता हूं तो इंद्र कूप को चुराने के दंड स्वरूप तुम्ह शराप भी दे सकता हूं वरदान और श्राप की परिधि से बहुत ऊपर उठ चुका है वाली अब आपको भी यह समझ लेना चाहिए कि वरदान प्राप्त कर कर सत्य में वाली महानतम बन चुका है अब आपकी शक्तियां भी ण हो जाएंगी मेरे समक्ष वाली अहंकार ने तुम्हें अंधा कर दिया है नित्र तो आपके नहीं देख पा रहे हैं यदि मैं चाहूं तो से भी आपका सिंहासन छीन सकता हूं परंतु मैं ऐसा नहीं करूंगा उपकार किया है आपने मुझ पर मेरा शत्रु था हनुमान जिससे मेरे जीवन को संकट था परंतु अब तक तो उसका भी अंत हो चुका होगा इसे तो ज्ञात ही नहीं है कि हनुमान का जीवन बच गया है अच्छा है अन्यथा फिर ना जाने ये क्या अनर्थ करने चल देता किंतु तब तक मुझे इस समस्या का कोई ना कोई समाधान तो ढूंढना ही होगा हे ईश्वर यह कैसी विडंबना है जिस हनुमान ने सदैव सबके जीवन की रक्षा की सबके संकट हरे आज आज स्वयं उसका जीवन संकट में है और मैं विवश होके देखने के अतिरिक्त कुछ भी नहीं कर पा रहा हूं महाराज हमारे मित्र को कुछ नहीं हो सकता मुझे पूर्ण विश्वास है वाली के शत्रु का अंत तो होना ही था यदि यह किसी प्रकार बच भी गया तो वाली इसे जीवित नहीं रहने देगा कुछ नहीं होगा मेरे हनुमान को सुग्रीव [संगीत] पुत्र यह लीजिए महाराज शीघ्र द कीजिए [संगीत] महाराज महाराज सुग्रीव यह तुम्हें क्या हो गया पुत्र यह तुम्हारी दे से रक्त कितना बह रहा है मेरी चिंता मत कीजिए महाराज बह जाने दीजिए इस रक्त को कदाचित भाई के द्वारा किए गए पाप दूसरे भाई के रक्त से धुल जाए यह तुम क्या कह रहे हो सुग्रीव हा महाराज इस प्रसाद को वाली भैया नष्ट कर के लिए ले जा रहे थे मैंने किसी प्रकार वायु देव की सहायता से इस प्रसाद को नष्ट होने से बचा लिया मेरी चिंता छोड़िए आप सब शीघ्र हनुमान को प्रसाद ग्रहण कराइए और उनके जीवन की रक्षा कीजिए शीघ्र कीजिए महारानी मां शीघ्र [संगीत] रेना रेना ना रेना रेना रेना रेना [संगीत] [प्रशंसा] रे क्या हुआ [संगीत] देवराज यदि आप मुझसे युद्ध के बारे में सोच रहे हैं तो भूल जाइए उसमें आपका ही अहित होगा मुझे ऐसा वरदान दीजिए देवराज जो भी शत्रु मेरे समक्ष युद्ध की मंसा से आए उसकी आधी शक्ति मुझ में समा जाए उसका आधा बल मुझे प्राप्त हो जाए तथास्तु तथास्तु तथास्तु [संगीत] [संगीत] ऐसा प्रतीत होता है देवराज जैसे कुछ स्मरण आ गया हो आपको पाली शक्तियां भी अपनी सीमा में अच्छी लगती है झील का जल भी जब अपना बंद तोड़ देता है तो झील भी सूख जाती है मैं स्पष्ट देख रहा हूं अहंकार तुम्हें पतन के मार्ग पर ले जा रहा है अ भी वक्त है संभल जाओ [संगीत] वाली यह कोई दू स्वपन है या सत्य य मैं क्या सुन रही हूं हनुमान से शत्रुता वो तुम्हारे लिए छोटे भाई के समान बस मा उसका नाम भी मत लीजिए मेरे समक्ष पाली तुम मेरे दूत को लज्जित कर रहे हो और केसरी जी का परिवार मित्र है हमारा मा महानतम वाली की मत्व कांक्षा भी महान है अड़क पर्वत के समान जिसे ना आंधियां हिला सकती है ना प्रलयंकारी बाढ़ बहा सकती है मैंने अपने पिता श्री को ही बंदी गरी में डाल दिया तो फिर हनुमान और काका केसरी यह तो छोटी मोटी नदियां है मुझ महानतम पर्वत के लिए तुम भूल रहे हो बाली छोटी छोटी नदिया ही अंतर भाव से बड़े-बड़े पर्वतों को धराशाई कर देती है इसीलिए इसीलिए मां मैंने इन छोटी मोटी नदियों को सुखा दिया सुग्रीव भी ऐसी ही नदी बनते जा रहा था सुग्रीव तुम कहना क्या चाहते हो वाली वो हनुमान को बचाने का प्रयास कर रहा था दिया मैंने भी उसे सुमेरू की गहरी खाई में जब मैंने अपने पिता श्री और भाई को नहीं छोड़ा तो फिर वह हनुमान वो तो पराया है मेरे लिए वो मेरे मार्ग का सबसे बड़ा कंटक था हटा दिया मैंने उसे भी अपने मार्ग से और अब तक तो उसका जीवन समाप्त हो गया होगा क्या तुमने सुग्रीव और हनुमान दोनों को हा हो सकता है कि सुग्रीव घायल होकर बच गया हो परंतु स्मरण रहे मा आपको मुझ महानतम वाली और मेरा विरोध करने वाले उस बीरू सुग्रीव दोनों में से किसी एक को चुनना होगा वाली तुम अधर्म के मार्ग पर चल रहे हो किंतु मैं धर्म और न्याय के पथ को नहीं त्यागी हे देवी मां मेरे पुत्र ने भी मेरे साथ आपका व्रत रखा कि जीवन की रक्षा कता हे देवी माता हनुमान को इस घोर संकट से बचाइए उसके जीवन की रक्षा कीजिए माता मारुती के मंगल की चिंता परिजन पुजन चिंतित माता पाई प्रसाद परम अकुला हनुमत को दय गद गद वाणी करत प्रार्थना देवी मनाव कर जो रे सुत सुफल सुहावल देवी अनूपा हनुमत मंगल भई एक [संगीत] [संगीत] रूपा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ना [संगीत] हनुमान हनुमान मा [संगीत] पिता श्री सा सा सा सा सा सा सा सा रे रे सा सा सा सा सा सा सा सा सा मरे सा रे रे सा प ग म ग रे [संगीत] सा मुझे शीघ्र ही जाकर महाराज वाली को सूचित करना होगा कि हनुमान सुग्रीव के कारण बच गया

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...