Sunday, 28 December 2025

देवराज इंद्र ने कार्तिकेय से क्या विनती की थी Basant B UzairBasar Vighnaharta Ganesh Episode 627

मेरी सहायता कीजिए माता क्या हुआ देवराज महा संकट छाया है मुझ पर एक राह सेम हाथ अचानक से आया और उसने मेरे पुत्र जयंत का हरण कर लि और हम सब देवता मिलकर उसे रोक नहीं पाए सूर्यदेव किंतु सावधानी से इंद्रदेव जयंत को कोई क्ति नहीं होनी चाहिए आक्रमण [संगीत] प [संगीत] पता स्वामी इस से मुझे मुक्त कीजिए रुक जाइए इंद्रदेव मैं इस हाथ को इस से ही विलक कर देता [संगीत] हूं ज हिव कौन है वोष जो मेरे पुत्र को मुझसे छीन कर ले ग कहां ढूंढा मैं अपने पुत्र को कहां ढूंढा मैं [संगीत] उसे मेरा पुत्र मुझसे छिन गया माता और मेरी पुत्री देव सेना भिलानी से स्तब्ध क्योंकि मेरी पुत्री ही मुझे उस स्थान पर लेकर गई थी जहां से जयंत का हरण हुआ था माता कुछ कीजिए माता क्योंकि इसके पीछे का मूल कारण मैं ही हूं मैं ही इसका मा इसका दोषी हू आप इसके दोषी कैसे हो सकते हैं इंद्रदेव प्रजापति तक्ष के यज्ञ में भाग लेना मेरी बहुत बड़ी भूल थी प्रभ जिसका दंड आपको अवश्य मिलना चाहिए इसलिए मैं शाप देता हूं आपको इसका भयंकर परिणाम भुगतना होगा समय आने पर आपका कोई अपना छन जाएगा करुणा प्रभु प्रभु मुझ पर दया कीजिए मैं आपका दोषी हूं मुझे मुझे क्षमा कर दीजिए [संगीत] प्रभु क्षमा कर दीजिए मुझे जिस प्रकार धनुष से निकला बाण नहीं लौटता उसी प्रकार मेरे मुख से निकला हुआ श्राप भी नहीं लौट सकता मैं इसके निवारण का मार्ग आपको बताता हूं कि जिस दिन ऐसा होगा और आप पे यह संकट छाएगा तब कैलाश में ही आपको इस संकट से मुक्ति का उपाय [संगीत] मिलेगा वो दिन आज ही है मत एक अत्यंत मायावी शक्ति का प्रकोप हुआ है हम पर और हम देवता मिलकर भी कुछ ना कर पाए इसलिए मैं मैं य कैलाश दौड़ा चला आया माता उस महा मायावी शक्ति को केवल महादेव अथवा उन्हीं के समान ज्ञानी और शक्तिशाली व्यक्तित्व ही रोक सकता है आप चिंता मत कीजिए देवरा सब आपकी इच्छा के अनुसार ही होगा आपके पुत्र जयंत का कोई अहित नहीं होगा मैं देवराज इद्र य घोषणा करता हूं जो भी महा पराक्रमी योद्धा मेरे पुत्र को मेरे पास वापस लाएगा मैं उसे अपनी पुत्र देव सेना के योग्य समझकर अपनी पुत्री का विवाह उससे करवा वह सर्व शक्तिशाली महा पराक्रमी योद्धा जो उस मायावी शक्ति को परास्त करेगा वह दिव्य संपन्न व्यक्तित्व योद्धा ही मेरी मेरी पुत्री देव सेना की सुरक्षा कर सकता [संगीत] है [संगीत] तुमने उचित कहा था पुत्र जो भी होता है उसके पीछे कोई उचित कारण अवश्य होता है और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का भी यही कारण चिंता मत कीजिए देवराज पिता श्री महादेव के समान सामर्थ्य वान तो समस्त संसार में एक ही है भैया कार्तिके जो शिवांश भी है और उनमें प्रभु शिव के समस्त गुण भी हैं वह अवश्य आपके पुत्र जयंत को लौटा लाएंगे हा पुत कार्तिक के बलशाली भी और देव सेनापति होने के नाते यह उसका कर्तव्य भी यदि देव सेनापति कुमार कार्तिके मेरे पुत्र को वापस ला तो मुझे अपनी पुत्री देव सेना का हाथ उनके हाथ में देने में अत्यंत हर्ष [संगीत] होगा पुत्र गणेश जाकर अपने अग्रज को क मुझे अभी उसकी आवश्यकता है यहां इसी क्ण यह मेरा आदेश जो आज्ञ माता [संगीत] गणेश तु तुम इतनी शीघ्र ही लौटे कहीं तुम्हें पुनः किसी ने कुछ समझा बुझा कर तो नहीं भेज दिया भैया वह माता ने मैंने कहा ना मैं विवाह नहीं करूंगा तो नहीं करूंगा नहीं भैया मैं तो बस मुझे ज्ञात है अनज तुम मुझे पूरी बात ना बता करर अपने शब्दों के जाल में फसाक यहां से ले जाने आए हो है ना इन्ह कैसे हु कि मैं इन्ह यहां से ले जाने आया हूं यदि तुम चतुर हो तो मैं भी तुम्हारा भ्राता हूं वो भी जेष्ठ तो मेरा एक निर्णय और सुन लो अनज ना विवाह और ना ही कुछ और मैं मात्र अपने कर्तव्य पर स्थिर रहना चाहता हूं हां उचित कहा देव सेनापति आपके कर्तव्य के लिए ही तो आपको कैलाश जाना है कैलाश ऐसा कौन सा कर्तव्य है अनुज जो मैं कैलाश जाकर ही पूर्ण कर पाऊ कहीं तुम पुनः मुझे अपने शब्दों के जाल में तो नहीं उलझा रहे हो आप जानते हैं आपकी भाति मैं भी कभी असत्य नहीं बोलता देवराज इंद्र पर संकट छाया है किंतु ऐसा कौन सा संकट है अनुज जो स्वयं विघ्न हरता गणेश नहीं हर सकते आपको क्यों आना है यह तो आपको वही ज्ञात होगा [संगीत] मुझे अभी भी ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है अनुज कि तुम मुझसे कुछ छिपा रहे हो मैं तो मां का आदेश सुनाने आया हूं कि उन्होंने आपको यथाशीघ्र वहां बुलाया है शीघ्र चलिए क्या माता का आदेश है और व भी यथाशीघ्र बुलाया है तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया अनुज वही प्रयास कर रहा था भया ठीक है ठीक है अब और कारण बताकर समय त मत करो मयूर [संगीत] जी माता के आदेश का अर्थ है जो भी है अत्यंत महत्त्वपूर्ण है आपका विवाह उस महत्त्वपूर्ण कार्य का भाग है [संगीत] भैया मां का आदेश सचमुच महत्त्वपूर्ण है भैया आप शीघ्र चल रहे हैं ना मयूर [संगीत] [संगीत] जी देव सेनापति कुमार कार्तिक मेरी सहायता कीजिए उस अत्यंत शक्तिशाली मायावी दानव से मेरे पुत्र जयंत की रक्षा कीजिए जैसे हम सब देवता मिलकर भी नहीं रोक पाए मैंने मैंने माता से भी कहा यदि आप मेरे पुत्र को लौटा सके मैं अपनी पुत्री देव से देव सेनापति है मेरे भैया इसलिए आप सभी की रक्षा उनका कार्य और कर्तव्य दोनों है और माता का वचन तो भैया अवश्य रखेंगे [संगीत] देवराज पुत्र कार्तिक मैंने देवराज इंद्र को वचन दिया [संगीत] है माता आपके प्रत्येक वचन का मान रखना मेरा परम धर्म है आपके मुख से जो भी शब्द निकले वो मेरे लिए स्वर्ण अक्षरों के समान और यह आप भी जानती कि मैं उसे कदा भी भंग होने नहीं [प्रशंसा] दूंगा देवराज मेरी माता का आदेश मेरे लिए सर्वोपरि है इसीलिए आप अब निश्चिंत हो जाइए आपका पुत्र जयंत जहां कहीं भी होगा मैं उसे जीवित अवश्य लटा [संगीत] लाऊगा चिंता करोगे तो अपनी ही चिता तैयार करोगे क्योंकि तुम्हें यहां असुर सम्राट से बचाने कोई नहीं आ सकता आपके आशीर्वाद से तो असंभव भी संभव हो जाता है यदि वो दुष्ट जयंत को पाताल लोग भी ले गया मैं उसे वापस लाऊंगा और जयंत का हरण करने वाले उस दुष्ट असुर कोच दा एक नहीं अनेक दुष्ट पुत्र [संगीत] संपूर्ण वंश है य और इनके पापों का घड़ा भर चुका है इनका अंत ही तुम्हारे जन्म का मूल उद्देश्य है पुत्र जिसे पूण करने का अब समय आ गया है [संगीत] संपूर्ण वंश कौन है यह मैंने तो कभी नहीं सुना कृपया विस्तार से बताइए पिता श्री उचित है तो सुनो इनके वंश की बेल असुर सम्राट असुर इद्र और उसकी पत्नी मंगला केशी की पुत्री से आरंभ होती है जिसका नाम है सुरास सुरा सई सुरास को अपने माता-पिता से बहुत प्रेम था साथ ही व पार आसुरी शक्तियों की स्वामिनी भी थी और उसे माया का ज्ञान भी था एक दिन अचानक उसकी माता और उसे सूचना मिली कि उसके पिता असुर देवासुर संग्राम में देवताओं से पराजित हो य भूमि में अंतिम शवास ले रहे हैं [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] इस समाचार ने सुरा साई उस की आसुरी शक्ति को और भी भड़का दिया जो अपनी माय वि ज्ञान का प्रयोग कर कोई भी रूप ले सकती थी पताश पिताश्री [संगीत] पिताश्री ये कैसे हो गया पिताश्री आपकी पुत्री सुरास आ गई है पिताश्री पिताश्री पिताश्री नेत्र खोलिए देखिए आपकी शक्तिशाली पुत्री आ गई है अब चिंता की कोई बात नहीं है सब कुशल मंगल होगा पिताश्री एक बार अपने नेत्र खोलिए और मेरी ओर देखिए पिताश्री जिसने भी यह किया है उसे आपकी पुत्री की शक्तियों का भान ही नहीं है उसे इसका दंड अवश्य मिलेगा पिताश्री आप बस एक बार बताइए किसने किया ये दु साहस पिताश्री इंद्र [संगीत] देवता पिताजी [संगीत] [हंसी] देवताओ असुर की मायावी शक्ति और उनके दिव्यास्त्र का सामना करना इतना सहज नहीं है विश्वास नहीं होता तो कर लो [संगीत] सामना असुर विश्वास तो तुम्हे नहीं हो रहा हम पर हमने तुम्हारी सारी सेना का अंत कर दिया है अति शीघ्र तुम्हारा अंत करने वाले हैं हम [संगीत] छोटी सी सफलता पर इतने उत्साहित मत हो देवताओं संभालो संभालो मेरे इस चक्र का पहार सामने हम नहीं अब तुम करोगे तुम वो भी अपने अंत का तैयार हो जाओ अब तुम्हारे प्राण पखेरू का उड़ना तो निश्चित ही है तुम्हारा समय आ गया तैयार हो जाओ असुर सम्राट मृत्यु के पाश में बनने के लिए [संगीत] कितना कष्ट हुआ पिता श्री को पिताश्री पिता पिताजी [संगीत] देवताओं आठ शिलो से मेरे पिता का अंत किया है ना तुम सबने उचित है तुम सबको भी मैं आठ का ही पाठ पढ़ाऊंगा सही ये प्राण लेती हूं एक स्त्री होते हुए भी 108 वर्षों तक दंडित करूंगी मैं दंडित करूंगी मैं दंडित करूंगी मैं दं बहुत पुरुषार्थ दिखाया है ना तुम देवताओं ने तो अब एक स्त्री की शक्ति का बल देखना एक सहस्त्र आठ ब्रह्मांड को रिक्त कर दूंगी तुम देवताओं से एक सहस्त्र आठ ब्रह्मांड को रिक्त कर दूंगी तुम देवताओं से [संगीत] [संगीत] से से यदि तुमने अभी आक्रमण किया तो तुम्हारा भी यही परिणाम [संगीत] होगा सुरा सई अब उचित समय आ गया है तुम्हारी माया के ज्ञान के प्रयोग का तुम्हारी प्रतिशोध की अग्नि तभी शांत होगी जब तुम स्वयं माया बंद सबको दृष्टि होते हुए भी दृष्टिहीन बना दो देवता तो क्या बड़े से बड़े धर्मात्मा ऋषि भी तुम्हारा भेद ना जान सके तब तुम्हारे पुत्र एक ऐसे असुर वंश की स्थापना करेंगे जो देवताओं को भी अपने अधीन करने की क्षमता रखेंगे तो बताओ क्या तुम बन पाओगी ऐसी माया [संगीत] हो देवासुर संग्राम जो असुर इद्र की मृत्यु से संपन्न हुआ था अब वह प्रतिशोध के संग्राम में परिवर्तित हो गया सरसई के हृदय में बस एक ही स्वर था एक ही लक्ष्य था प्रतिशोध और देवताओं का विनाश पिता के चीता ने उसके क्रोध की ज्वाला को और भड़का दिया था अपने पिता का प्रतिशोध लेने के लिए सब कुछ करेगी माया सुरा सई सुरास सुरास सुरारा घृणा हिंसा का अति सूक्ष्म रूप है और हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं

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