Sunday, 28 December 2025

देवराज इंद्र किसके विषय में चिंतित थे Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महा [संगीत] [संगीत] भारत [संगीत] हे देवेंद्र इस चिंता का कारण क्या है जिसने संध्या की भाति आपके मुख मंडल के सूर्य को ढक लिया है मेरी चिंता का कारण सूर्यदेव है उरवशी सूर्यदेव हां और और मैं उन्हें उलाना भी तो नहीं दे सकता ऐसा क्या कर दिया है सूर्यदेव ने देवी कुंती को एक पुत्र देके उन्होंने मेरे लिए समस्या खड़ी कर दी है देवी कुंती को तो एक पुत्र आपकी कृपा ने भी दिया है देवेंद्र यही यही तो एक समस्या है उर्वशी जो मुझे चैन से बैठने भी नहीं देती उर्वशी पृथ्वी पर एक महा युद्ध होने वाला है पृथ्वी लोक के युद्ध से हमें क्या देवेंद्र तुम्ह तो कुछ नहीं रशी किंतु इस युद्ध का कांटा मेरे उस सूर्यदेव के हृदय में अवश्य अटका है सूर्य पुत्र करण इस युद्ध में एक और होगा और मेरा पुत्र अर्जुन दूसरी ओर यह तो चिंता का कोई विषय नहीं हो सकता क्योंकि अर्जुन सारे दिव्यास्त्र लेकर गया है यहां से उसे भला कोई क्या क्षति पहुंचा सकता है करण के कवच को कोई भी दे अस्त्र वेद नहीं सकता उर्वेश इसलिए मैं अर्जुन की ओर से चिंतित हूं स्वर्ग में अस्त्र तो बहुत है किंतु कवच वही एक है कुंडल की वही एक अकेली जोड़ी है जिन्हें दिव्यास्त्र प्रणाम करके लौट आएंगे तब अवश्य ही चिंता का विषय है और वो सूर्य पुत्र पांडवों से इतनी गणा करता है और विशेषत अर्जुन वद के लिए जैसे जैसे व जी ही रहा है जब तक उसके पास वो कवच और व कुंडल है रशी तब तक तब तक अर्जुन सुरक्षित नहीं है परंतु वे कवच कुंडल उनके साथ है ही देवेंद्र एक उपाय है सूर्य देवता उसके इष्ट देवता है वह दोपहर में उनकी पूजा करता है यदि पूजा की समाप्ति के पश्चात कोई उससे कुछ मांगे तो व कभी ना नहीं करता तो फिर आप यही तो विचार कर रहा हूं क्योंकि करण को तो उस कवच में रन भूमि की ओर नहीं जाने दूंगा मित्र कैसे हो मित्र क्या बात है आज बहुत प्रसन्न दिखाई दे रहे हो हां मित्र आनंद की तो घड़ी है तो अपने आनंद का भागीदार मुझे भी बनाओ मित्र तुम्हारे अतिरिक्त अपने इस आनंद का भागीदार मैं किसी और को बना ही नहीं सकता मेरी मां इस आनंद की भनक पाते ही डर जाएगी मेरी दो प्रेमिका हैं मित्र दो प्रेमिका है और तुमने दोनों प्रेमिकाओं को मुझसे अब तक छिपा के रखा मित्र बताओ तो सही कौन है वे और यदि इनका अपहरण करना हो तो मुझे बताओ मैं अभी जाता हूं इन प्रेमिकाओं का हरण नहीं किया जा सकता है मित्र और मि मिलन भी संभवत एक ही के साथ हो सकता है पहेलिया ना बुझा अंगराज कौन है य प्रेमिका कहां य प्रेमिका और इनका अपहरण होगा कैसे नहीं मैं स्वयं जाकर इनका अपहरण करूंगा मैं जानता हूं मित्र किंतु यह प्रेमिका ऐसी हैं कि यदि इनका अपहरण मेरे अतिरिक्त किसी और ने किया तो उसी की हो [संगीत] जाएंगी मैं समझा नहीं मित्र इनमें से एक अर्जुन की मृत्यु है और दूसरी स्वयं मेरी अर्जुन वत के अतिरिक्त मेरे जीवन का और कोई लक्ष्य [संगीत] नहीं तो क्या तुम अर्जुन वत करके मेरे भाग का आनंद मुझसे छीन सकते [संगीत] हो अर्जुन वत तो उन अपमान के सारे घावों पर स्नेह लेप लगाएगा जो जीवन भर मुझ पर लगते रहे अर्जुन व तो यह सिद्ध करेगा कि यह सूत पुत्र राध कर्म से क्षत्रिय है हे गांधारी पुत्र मुझ पर तुम्हारा य एक और उपकार हुआ कि तुमने अर्जुन से मेरे अंतिम युद्ध का प्रबंध कर दिया यह बात भली भाति समझ लो मित्र कि मैं केवल तुम्हारे जीवन और अर्जुन की मृत्यु के लिए जी रहा हूं मुझे अपने अपमान का एक एक क्षण याद आ रहा है वो क्षण दिन रात बिच्छू की भाति मुझे टंक मारते रहते हैं मेरे शरीर में रक्त नहीं है मित्र वही विष दौड़ रहा है सोते जागते वह सारे दृश्य मेरे आंखों के सामने आते रहते हैं मुझे सांस तक नहीं लेने देते परंतु परंतु अब मेरे अपमान की कथा समाप्त होने की घड़ी निकट आ रही है हर हर क्षण के साथ निकट आती जा रही है आती जा रही [संगीत] है [संगीत] मित्र घबराओ मत मित्र मुझे बधाई दो कि अब शीघ्र ही अपनी दो प्रेमिकाओं में से एक के संग अवश्य ही मेरा मिलन होने वाला है आचार्य व की सेवा में अधिरथ का प्रणाम तुम तो महाराज के सारथी हुआ करते थे जी आचार्य व यह तुम्हारा पुत्र है जी आचार्य क्या नाम है तुम्हारा राधे राधे राधे क्यों इसकी मां का नाम राधा है तुम्हारा नाम तुम्हारे मुख मंडल के तेज से मेल नहीं खाता है बस तुम्हारे मुखड़े पर तो सूर्य का तेज है तुम इसका नाम करण रखो जो आ [संगीत] महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत

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