[संगीत] प्रभु आईबा की कृपा से महिष का अंत हो रहा है मेरी क्रोध की अग्नि तुम्हारे साथ तुम्हारे विकारों को भी नष्ट करेगी [संगीत] [संगीत] मशी हरी भी है और हरा [संगीत] भी [संगीत] जिनके भीतर हरा और हरी दोनों का क्रोध भाव समाया उन पर नियंत्रण करना अत्यंत कठिन है हमें प्रभु अपा को शांत करना ही होगा और यदि इनके क्रोध को शांत करने का शीघ्र कोई मार्ग नहीं निकाला गया तो स्थिति गंभीर हो जाएगी कि तो इन्ह शांत करने का उपाय क्या है एक ही उपाय प्रभु की स्तुति प्रणाम दे [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] हमें असुरी महिषी से मुक्त कराने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद [संगीत] प्रभु [संगीत] चिंता मत कीजिए देवराज महिषी का अंत हो चुका [संगीत] है [संगीत] प्रभु प्रभु मुझे मुक्ति प्रदान करने के लिए आपका अनेकों [संगीत] धन्यवाद वो कौन थी मां रुषी कन्या लीला थी ऋषिक कन्या इतनी भयंकर राक्षसी कैसे बन गई मां व माया से प्रभावित होकर अपने मूल स्वभाव से भटक गई थी और उसने एक ऋषि की तपस्या भंग कर दी इसीलिए उसे श्राप मिला कि उसका अगला जन्म एक असुरी महिषी के रूप में ही होगा और उसके बाद ही उसे मुक्ति प्राप्त होगी प्रभु आपने मुझे मेरे शापित जीवन से मेरे राक्षसी स्वरूप से मुक्त दिलाकर मुझे कृतार्थ कर [संगीत] दिया किंतु मेरे जीवन का आधार क्या होगा प्रभु मुझे अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर मेरा जीवन धन्य कर दीजिए मुझे क्षमा करे देवी जब तक संसार के कोने कोने से मे भ मंदिर में मेरी पूजा अर्चना करते रहेंगे मैं विवाहित जीवन में प्रवेश नहीं करूंगा तो प्रभु मैं प्रतीक्षा करूंगी जिस दिन कोई नया भक्त आपके मंदिर में आपके दर्शन हेतु ना आए और आप मुझसे विवाह कर ले मुझे विश्वास है ऐसा कभी नहीं होगा किंतु देवी मैं आपके समर्पण भाव से प्रभावित होकर आपको वरदान देता हूं आज से आपको मलिकपुर थमा कहा जाएगा और मेरे दर्शन के पूर्व सभी भक्त आपके दर्शन करेंगे जैसे आपको पत्थर से मुक्ति मिली है वैसे ही जब वह पत्थर यहां समर्पित करेंगे उन्हें अपने पापों से मुक्ति मिलेगी प्रभु प्रभु मैं कृतार्थ हुई प्रणाम [संगीत] प्रभु स्वामी शरण मप्पा स्वामी शरण मप्पा स् शरण स्वामी शपा स्वामी शरण प्रभु हम भी आपको अपनी कृतज्ञता अर्पित करना चाहते हैं प्रभु देवी लीला के समान आपने हमें भी मुक्त किया हां प्रभु उसने स्वयं को तो मेरी दृष्टि से बचा लिया किंतु आपने उसे उसके कर्मों का फल दिया इसलिए आज मैं भी ये घोषणा करता हूं कि जो भी पादुका पहने बिना काले वस्त्रों को धारण कर आपका व्रत करेगा एवं आपके दर्शन के लिए आएगा मेरी वक्र दृष्टि और साढ़े साती उस पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी [संगीत] स्वामी शरणम मैपा स्वामी शरणम अपप्पा स्वामी शरणम अपप्पा स्वामी शरण अब ज्ञात हुआ कि प्रभु अयप्पा के व्रत में काले वस्त्र क्यों पहने जाते हैं किंतु मां बागन के दूध का क्या हुआ प्रभु अयप्पा ने देवताओं की सहायता की थी इसीलिए अभी देवता भी प्रभु अयप्पा की विशेष सेवा करने के इच्छुक थे कैसे मां जिस कार्य के लिए मैं वन में आया था अब मुझे वह संपन्न करना है [संगीत] प्रभु आपको क्या कार्य सुपरत किया गया है इसका तो हमें ज्ञात है ही किंतु आपको यह भी ज्ञात होगा कि यह सर्वस्व षड्यंत्र मंत्री का था प्रभु आपने हमारी रक्षा की अब हमें भी आपकी सेवा करने का अ [संगीत] नारायण नारायण [संगीत] प्रभु इस षड्यंत्र को रचने वाले को आपकी दिव्यता का अनुमान होना चाहिए आवश्यक है क्षमा करें महाराज परंतु देर बहुत हो चुकी है अब राजकुमार मण कंठा की प्रतीक्षा त्याग देनी चाहिए उनका लौट कर आना असंभव है महामंत्री महाराज यह कार्य इतना संभव था बाग जैसे वन्य पशु के नियंत्रित करना असंभव है [संगीत] महाराज यह बाग यहां कैसे पहुंच गए बता [प्रशंसा] ओ ब ओ [प्रशंसा] ओ मुंड [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] वि मेरा पुत्र असंभव को संभव बनाकर लौट आया कितना अद्भुत और दिव्य दिश है [संगीत] यह अद्भुत सर्वथा अद्भुत है प्रभु अयप्पा की लीला भक्ति का भाव किसी को भी अछूता नहीं छोड़ता प्रभु अयबा की भक्ति से तुम भी अछूते नहीं रहे गणेश जैसे उस दिन राजा राज शेखर और उनके परिवार के लिए ही नहीं किंतु उस महान दिव्य घटना से पांडु लम में एक दिव्य आलौकिक प्रकाश छ गया [संगीत] था हम तो भूल ही गए थे कि आप आप मात्र हमारे पुत्र नहीं जगत के रखवाले और पालनहारे भी है पुनः अपनी दिव्यता का परिचय देने के लिए अनेको धन्यवाद [संगीत] प्रभु साधारण नहीं असाधारण है [संगीत] यह [संगीत] क्षमा प्रभु क्षमा क्षमा प्रभु क्षमा प्रभु प्रभु क्षमा कर दीजिए हमसे बहुत बड़ा अपराध हो गया क्षमा कर दीजिए अपराध कैसा [संगीत] अपराध महारानी भी अशुभ रही है अर्थात एक मां की ममता इतनी दूषित और कलंकित हो सकती है विश्वास नहीं होता प्रभु क्षमा प्रभु क्षमा हम क्षमा कर प्रभु हम क्षमा [संगीत] कर आज स्वय अपनी दृष्टि में दोषी हो गई हूं मैं मां की ममता की लाज को लज किया है मैंने अपराध नहीं हूं मैं अपराध नहीं प्रभु हरि हरा की भक्त होकर भी मैं सत्य को नहीं देख पाई मुझे दंडित करो मुझे दंडित [संगीत] [संगीत] करो [संगीत] [संगीत] मां तो एक घने पेड़ के समान होती है उसी की छाया में पुत्र पलता है और बढ़ता है मैं भी तो आपके आंचल के छाव में पला बढ़ा हूं मां मैं जानता हूं कि मैं आपसे कितना भी दूर चला जाऊं परंतु आपकी ममता की छाव सदैव मेरे निकट आ जाएगी इसलिए मैं तो केवल आपसे आशीष की याचना कर सकता [संगीत] हूं मैंने तुमसे अपने आंचल कीव को समेट कर बहुत बड़ा अपराध किया है पुत्र ये जान कर मैं तुम्हारे मन में मेरे प्रति इतना सम्मान तुम धन हो तुम धन हो पुत्र तुम ध नहीं मां धन्य तो आप है जिन्होंने मुझे इतना योग्य बनाया यदि आप मुझे जंगल में नहीं भेजती तो मेरे जीवन का प्रयोजन सिद्ध कैसे होता मां यदि आप मुझे जंगल नहीं भेजती तो मेरे जीवन का प्रयोजन सिद्ध कैसे होता मैं इस संसार को महा असुरी महिषी से मुक्त कैसे [संगीत] कराता अर्थात व वन से जो भयंकर स्वर आ रही थी वो मेरे पुत्र के द्वारा महिष को पराजित करने का स्वर था इस राज्य को ही नहीं अभी तो समस्त जगत को जिसने दुष्टा आसुरी शक्ति से मुक्त कराया उससे अधिक मेरा उत्तराधिकारी बनने के योग्य भला और कौन हो सकता [संगीत] है मुझे तुम पर कभी संदेह नहीं था पुत्र कि तुम में एक योग्य राजा के समस्त गुण [संगीत] है किंतु आपने जो समझा वो उचित है है मां परंतु मुझे राजा बनने की कोई इच्छा नहीं [संगीत] है समय आने पर अनुज राज राजन ही यहां के सिंहासन पर विराजमान होंगे नहीं भैया आप ज है चित समय पर राज्य का कारभार संभालना आपका ही दायित्व है हां पुत्र तुम्हारा राजपद का तिरस्कार करना मेरे लिए सबसे बड़ा दंड होगा नहीं मां यह आपका दंड नहीं आपका सौभाग्य होगा आपके जेष्ठ पुत्र के जन्म का प्रयोजन राजा बनना नहीं अपितु संसार का कल्याण करना था और रहेगा इसीलिए राजपद के योग्य मेरा अनुज राजराजन है तुम्हारी मां से भूल अवश्य हुई है पुत्र किंतु मेरी ममता तुम्हें मुझसे दूर नहीं देखना चाहती इतना बड़ा दुख मत दो पुत्र मत दो मुझे मा इतना बड़ा दुख मत दो पुत्र नहीं मां आपको दुख पहुंचाने की तो मैं कल्पना भी नहीं कर सकता किंतु नियति की गति को तो मुझे स्वीकार करना होगा अब तक जो हुआ प्रभु ब्रह्मा देव द्वारा आसुरी महिषी को दिए वरदान के अनुसार हुआ हरि हरा के अंश से उसका अंत हो यह वरदान मांगते समय उसने यह भी मांगा था कि हरिहरा के उस अंश को पृथ्वी पर राज परिवार में 12 वर्ष बिताने होंगे और वह समय अब पूर्ण हो चुका है महिषी का संकट भी दूर हो गया और मेरे अवतार का उद्देश्य भी पूर्ण हुआ इसलिए मैं अब विवश हू मां अब मुझे जाना ही होगा [हंसी] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] स्वामी पा स्वामी [संगीत] अपा [प्रशंसा] [संगीत] नमामि नमाम भावा वेश में आकर बिना विचार किए जो कर्म किए जाते हैं वे व्यक्ति को पश्चाताप और ग्लानि का पात्र बनाते हैं
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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
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