Sunday, 28 December 2025

देवताओं ने बाल हनुमान की कठिन परीक्षा ली Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 335 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] ओ [संगीत] ओ ओ ओ [संगीत] ओ ओ [संगीत] ओ मैं चिंतित हूं चंद्रदेव की शीतल प्रवाह से यदि हनुमान के शरीर का रक्त प्रवाह स्थिर हो गया तो उसका ध्यान भंग हो सकता है [संगीत] [प्रशंसा] ओ [संगीत] ओ [संगीत] ओ [संगीत] ओ [संगीत] ओ [संगीत] ओ [संगीत] [संगीत] ओ [संगीत] [संगीत] ओ जल थल देव वरुण कर डारी वायु देव का वेग भी भारी जिनी पति ने हिम बरसाई अग्नि देव ने अनल जलाई किंतु अडिग हनुमत संकल्प दीर्घ परीक्षाएं भई अल्पी शिव हनुमत शक्ति से पचित आज भया पर जग भी विस्मित महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान प्रणाम महादेव [संगीत] ओ [संगीत] हनुमान तुम अन्य सभी देवताओं की परीक्षा में तो उत्तीर्ण हो गए आशा करता हं तुम्हारे ध्यान को खंडित करने के मेरे प्रयास को भी तुम असफल कर ही [संगीत] दोगे ओ ओ ओ ओ धन्य हो हनुमान हम देवताओं के किसी भी प्रयास से तुम्हारा ध्यान भंग नहीं हो पुत्र ध्यान योग में तुमने महारथ प्राप्त कर [संगीत] ली प्रणाम महादेव कल्याण हो देवराज [संगीत] ओ ओ ओ [संगीत] ओ [संगीत] ओ [संगीत] [संगीत] ओ वन्य जीव हनुमान से सहज होकर उसके समीप आ गए हैं [संगीत] ओ परंतु महादेवी यह कैसे संभव है देव राजेंद्र हनुमान स्थिरता के ऐसे उच्च स्थान पर पहुंच गया है जिसके प्रभाव से वन्य जीवों में सौहार्द उत्पन्न होता है जो मात्र कैलाश में ही देखने को मिलता [संगीत] है परंतु हनुमान ने अपनी साधना से उसका सृजन यही कर लिया [संगीत] है धन्य है पुत्र हनुमान दृढ़ कपीश जब ध्यान लगावे जल थल अंबर सब थम जावे जय मारुति जय केसरी नंदन कोटि कोटि वंदन अभिनंदन [संगीत] ओ ओ प्रभु अब कितनी परीक्षा लेंगे हनुमान की पुत्र हनुमान पुत्र हनुमान पुत्र हनुमान [संगीत] [संगीत] भन [संगीत] [संगीत] पुनः स्थिरता प्राप्त कर तुम ध्यान योग में दक्ष हुए क्या तुम अपने अंतर में स्थिरता और शांति का आभास हो रहा है [संगीत] पुत्र हां भोले बाबा अवश्य हो रहा है परंतु जो शांति स्पर्श जो मुझे आपके हृदय से लगकर हुई थी उसकी तुलना में यह कुछ भी नहीं है परंतु पुत्र जिसकी प्राप्ति तुम्हें हुई वो परम शांति और और एकाग्रता अनुपम है इनकी सहायता से तुम योग की अन्य विधाओं में भी सक्षम हो जाओगे यह तो आपकी कृपा है भोले बाबा आपके मार्गदर्शन से ही हनुमान जैसा चंचल वानर बालक अपने ध्यान को केंद्रित कर पाया पुत्र हनुमान असाधारण शिष्य हो तुम इतनी शीघ्र ही इतना कुछ सीख गए ध्यान योग में निपुण होकर अब तुम हट योग की शिक्षा प्राप्त करने के लिए योग्य हो गए [प्रशंसा] [संगीत] हो पुत्र शरीर की गति विधि और संतुलन दोनों ही व्यक्ति की कार्य करने की क्म के लिए अति आवश्यक है इन दोनों का अभ्यास ही हठयोग है जो शरीर बुद्धि और आत्मा में समन्वय स्थापित करता है जिससे जीवन में उचित निर्णय लेकर सफलता प्राप्त करना सरल हो जाता है भोले बाबा इसका अर्थ है हट योग से हनुमान को अपने शरीर पर नियंत्रण प्राप्त होगा हां पुत्र आजीवन अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य का साध हठ योग इसके नित्य अभ्यास से शरीर का प्रत्येक सूक्ष्म तत्व पोषित होकर शरीर में स्फूर्ति बल और तेज उत्पन्न करता है स्वस्थ मन तो ध्यान योग से प्राप्त कर ही लिया है तुमने अब स्वस्थ तन के लिए हठ योग सीखो हनुमान हठ योग शिक्षा के लिए प्रस्तुत हूं भोले बाबा ति उत्तम तो यह शिक्षा हट योग के सर्वश्रेष्ठ आसन सूर्य नमस्कार से प्रारंभ करते हैं इस आसन के निरंतर अभ्यास से आजीवन तुम्हारा शरीर स्वास्थ्य से परिपूर्ण रहेगा सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में प्रथम आसन प्रणाम आसन से सूर्य नमस्कार आरंभ होता है अपने दोनों पैरों पर शरीर के भाग को विभाजित कर अपने शरीर को संतुलित करो आओ सूर्य नमस्कार आरंभ [संगीत] करें [संगीत] जय राम ज रा [संगीत] राम [संगीत] [संगीत] हे [संगीत] ओम मित्रय नमः ओम रव नमः ओम सूर्याय नमः ओ नवे नमः ओम गाय [संगीत] नमः ओम पूषण नमः ओम हिरण्य गर्भ नमः ओम मरीच नमः ओम आदित्या नमः ओम सवित नमः ओम अर्का नमः ओम भास्कराया [संगीत] नमः [संगीत] हनुमान [संगीत] तुम में विलक्षण प्रतिभा है पुत्र सूर्य नमस्कार को पूर्ण रूप से सिद्ध कर लिया है तुमने अब प्रतिदिन प्रातकाल इस आसन का 108 बार अभ्यास करने से सदैव रोग और व्याधियों से मुक्त रहोगे भोले बाबा आपकी आज्ञा का पालन कर हनुमान नित्य सूर्य नमस्कार का अभ्यास करेगा अब और कठिन आसन सीखने का समय आ गया है पुत्र भोले बाबा क्या हठयोग में और भी कई आसन है हां पुत्र हठयोग में तो अनेकों आसनों का संचय है भोले बाबा फिर तो हनुमान को उन्हें भी सीखना प्रारंभ करना चाहिए चिंता मत करो पुत्र तुम शीघ्र ही समस्त आसनों को सीख जाओगे उसके नित्य पालन से तुम्हारे बल में वृद्धि होगी आओ हठ योग आरंभ [संगीत] [संगीत] [संगीत] करें [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] हनुमान इसमें श्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए तुम्हें कुछ समय और इस मुद्रा में रहना होगा मैं ध्यान योग में लीन होने जा रहा हूं मेरे ध्यान में कोई व्यवधान नहीं आना [संगीत] [हंसी] चाहिए [संगीत] कुछ समय का क्या अर्थ है यह हनुमान तो भोले बाबा से पूछना भूल ही गया जब तक भोले बाबा का ध्यान समाप्त नहीं हो जाता तब तक हनुमान को ही रहना [संगीत] चाहिए प्रभु के आदेश पर हनुमान इतनी दीर्घ अवधि तक इस कठिन नटराज मुद्रा में स्थित है यह हनुमान की सरलता है या प्रभु पुनः ध्यान मग्न होकर बाल हनुमान की परीक्षा ले रहे [संगीत] [संगीत] हैं चीटियों का काटना हनुमान ने सहन तो कर लिया परंतु प्रतीत होता है हनुमान के पांव पर एक वृश्चिक चढ़ रहा है यदि उसने दंश दिया [संगीत] तो [संगीत] हनुमान को किसी भी प्रकार से इस मुद्रा में रहना ही होगा भोले बाबा की अवज्ञा नहीं कर सकता मैं ध्यान योग का दुष्कर आसन धार कपि मुद्रा नटराजन सहे चूटे वृष के दंशा परना तनिक डिगे शिव अंशा सूर्य देव का चक्र फिरी है हनुमत किंतु तो ध्यान रम है शंकर ध्यान पूरण भी कीना किंतु अब ह हनुमत लीना महाबली हनुमत की रच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान भोले बाबा ने मुझे ध्यान एवं ओम का उच्चारण करने से सारी परिस्थितियों से सामना करना सिखाया [संगीत] [संगीत] है [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] पुत्र आंखें खोलो [संगीत] ओ नमो शिवाय नमो नमो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नमो नम [संगीत] शिवाय वषक के दन से कितनी पीड़ा हुई होगी तुम्हें पुत्र मैंने तो तुम्हें स्पष्ट कहा था तुम्हें नटराज आसन तभी तक करना है जब तक तुम्हारे शारीरिक संतुलन का अभ्यास पूर्ण हो जाए फिर तुम इतने दीर्घ अवधि तक ऐसी मुद्रा में क्यों रहे पुत्र भोले बाबा हनुमान आपसे पूछना भूल गया था उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसे नटराज मुद्रा में कब तक रहना है आपके ध्यान यों को भंग करर आपसे पूछना नहीं चाहता था [संगीत] हनुमान इतनी लंबी अवधि तक नटराज आसन में रहकर तुमने यह प्रमाणित कर दिया है कि तुम योग में भी पंगत हो गए हो हनुमान पुत्र मुझे गर्व है कि मुझे तुम जैसा शिष्य [प्रशंसा] [संगीत] मिला भोले बाबा आपसे शिक्षा प्राप्त करना हनुमान का सौभाग्य है आपने हनुमान की सहायता कर उसकी निराशा एवं उदासी को निकाल दिया है अब हनुमान में ऊर्जा विश्वास और प्रसन्नता का का संचार हो रहा है मैं इसलिए तो आया था पुत्र अब तुम संपूर्ण जीवन हट योग का नियमित पालन करोगे तुम्हारा शरीर और मस्तिष्क दोनों उत्तम होंगे असीमित गति ऊर्जा और आंतरिक बल का संचार होगा सदैव रोग और व्याधियों से मुक्त रहेगा तुम्हारा शरीर भोले बाबा हनुमान आपके हर आदेश का पालन करेगा हनुमान तन मन के लिए हठ और ध्यान योग मैंने तुम्हें सिखा दिए हैं इसलिए अब तुम्हारे ज्ञान योग की अत्यंत महत्त्वपूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का समय आ गया है ज्ञान योग तुम्हें अपने जीवन के उद्देश्य के बारे में जागरूक रहकर उसे तुम्हें प्राप्त करने में समर्थ बनाएगा भोले बाबा हनुमान ज्ञान योग सीखने के लिए भी तत्पर है ज्ञान योग की शिक्षा मैं तुम्हें नहीं दूंगा स्वयं माता सरस्वती तुम्हें प्रदान करेंगी तुम्हारा कल्याण हो पुत्र मेरा आशीष सदैव तुम्हारे साथ रहेगा प्रणाम भोले बाबा हनुमान की प्रार्थना है कि आप सदैव हनुमान पर इसी प्रकार अपनी कृपा दृष्टि बनाए [संगीत] रखिएगा [संगीत] [हंसी] [संगीत] माता सरस्वती प्रणाम माता कल्याण हो माता हनुमान के तो भाग्य के द्वार ही खुल गए पहले भोले बाबा ने कृपा की और अब आपने अपने दर्शन दिए पुत्र हनुमान मात्र मेरे दर्शन ही नहीं मुझसे शिक्षण भी प्राप्त होने वाला है तुम्हें ज्ञान योग में [संगीत] निपर्स एवं विद्या की देवी है आपसे ज्ञान प्राप्त करके हनुमान का जीवन तो धन्य हो जाएगा हनुमान ज्ञान योग के बिना हट योगी एवं ध्यान योगी अपूर्ण है ज्ञान योग को प्राप्त करके ही हट योगी एवं ध्यान योगी संसार के कल्याण के लिए अपने योग का समुचित प्रयोग कर पाते हैं ज्ञान योग के द्वारा ही तुम्हें ईश्वर की विशालता एवं महानता का आभास होगा जिससे तुम्हारी आस्था एवं भक्ति में भी वृद्धि होगी अर्थात ज्ञान योग एवं भक्ति योग दोनों एक साथ ही प्राप्त होंगे हनुमान को हां हनुमान ज्ञान योग में भक्ति योग भी समाहित है स्वर्ण को ना पहचानने वाले मनुष्य के लिए स्वर्ण मात्र एक धातु का टुकड़ा है किंतु जो स्वर्ण को पहचानता है वही स्वर्ण का मूल्य समझता है इसी प्रकार ईश्वर की महानता का ज्ञान होने पर ईश्वर की भक्ति में स्वतः ही वृद्धि होती [संगीत] है हनुमान कुछ पूछना चाहते हो हां माता ईश्वर कौन है भगवान शिव जी या भगवान विष्णु जी सत्य तो यह है कि दोनों ही एक है दोनों ही समान है ज्ञानवान ही भगवान के इस गुण रहस्य को पहचान पाते हैं हनुमान शिवजी की सृजन शक्ति जब नारी रूप में होती है तो देवी आधी शक्ति कहलाती है जो देवी पार्वती के रूप में उनके साथ रहती है शिवजी की पालक शक्ति जब पुरुष रूप में होती है तो उन्हें विष्णु देव के रूप में यह संसार जानता है भगवान विष्णु का कार्य है संसार का पालन करना संसार का पालन करना वह कैसे माता हनुमान जिस प्रकार माता अपने पुत्र का पालन करती है समस्त संकटों से अपने पुत्र की रक्षा करती है उसी प्रकार संसार में जब जब पाप और अधर्म बढ़ता है तब तब भगवान विष्णु धर्म एवं संतों की रक्षा के के लिए अवतार लेते हैं और पाप का अंत करके पुनः धर्म की स्थापना करते हैं हनुमान सत्य तो यह है कि मैं तुम्हें भगवान विष्णु के अवतारों के बारे में बताने आई हूं जिससे भगवान की विशालता एवं उनकी महानता से तुम्हारा परिचय होगा भगवान विष्णु जी के सारे अवतारों के बारे में बहुत ही आनंद आएगा माता हनुमान को शीघ्र ही बताइए ना भगवान विष्णु जी ने कौन से कौन से अवतार धारण किए थे हां हां हनुमान बताती हूं ध्यान से सुनो हनुमान भगवान विष्णु का प्रथम अवतार था प्रभु श्री मत से अवतार लिया [संगीत] था ओ तत्पुरुषाय विध महे महा मनाया धीमहि तनो विष्णु प्रचोदयात ओम नमो भगवते महामत नम कठिन परीक्षा साधना एवं उचित ज्ञान ही सौभाग्य की कुंजी है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...