Sunday, 28 December 2025

देवताओं ने एक शक्तिशाली असुर की रचना क्यों की MeerAli Vighnaharta Ganesh Episode 761 PenBhakti

राजा अभिनंदन के यज्ञ को भंग करने के लिए क्यों ना हम एक असुर उत्पन्न करें असर उपन कर असर उत्पन कर देवगन यही उचित होगा हम सभी अपनी शक्तियों के मिश्रण से एक शक्तिशाली असुर उत्पन्न करेंगे शक्तिशाली [संगीत] ओम स्वाहा ओम [संगीत] स्वाहा कौन हूं मैं क्यों और किसने की है मेरी रचना तुम एक कसूर हो यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करने के लिए तुम्हारी रचना हुई इसलिए आज से तुम्हारा नाम फगना सुर होगा बनासर होगा बिगना सुर होगा इसलिए जाओ जाकर राजा अभिनंदन के यज्ञ को भंग करो असुर होकर देवताओं का आदेश मानू हम तुम्हारे जन्मदाता है और अपने जन्मदाता से ऐसा प्रश्न अनुचित है तुम हमारे प्रत्येक आदेश का पालन करोगे और यदि तुम जीवित रहना चाहते हो तो तुम्हें अभिनंदन का यज्ञ भंग करना ही होगा क्योंकि यज्ञ की भंग सामग्री ही तुम्हारा आहार है इसलिए अविलंब जाओ और हमारे आदेशों का पालन करो उचित है ओम स्वाहा ओम [संगीत] स्वाहा ओम स्वाहा ओम स्वाहा आहार चाहिए मुझे यज्ञ भंग कर अपना आहार चाहिए ओम स्वाहा ओम स्वाहा ओम स्वाहा ओम [संगीत] स्वाहा [संगीत] [संगीत] य असुर तो राजा अभिनंदन की यज्ञ ऊर्जा में ही विलीन हो रहा है कदाचित य सफल हो ही नहीं [संगीत] सकता चिंता मत कीजिए वायु देव हमें शीघ्र ज्ञात हो ही जाएगा हम सफल हुए या फिर हमें और प्रयास की आवश्यकता [संगीत] [संगीत] है वाह अद्भुत यह तो एक पंथ और दो कार्य हुए राजा अभिनंदन का यज्ञ भी भंग हो गया और इस असुर का अंत भी आइए देवगन हम अपनी सफलता का आनंद उठाते हैं [प्रशंसा] [संगीत] आइए आहार पाकर आनंद आ गया कौन हो तुम मुझसे क्या शत्रुता है तुम्हारी मेरा यज्ञ क्यों भंग किया तुमने इसका उत्तर तो आपको देव राजेंद्र और अन्य देवता ही दे सकते हैं राजन क्योंकि मेरा कार्य ही है यज्ञ को भंग करना इस भूल का परिणाम भुगत नहीं होगा परिणाम तो भुगता किंतु मात्र देवताओं ने ही नहीं समस्त सृष्टि ने एक असुर अपनी आसुरी प्रवृति कैसे त्याग सकता था यज्ञ के हविष्य का स्वाद उसके मुख पर लग गया था अब तो वह संसार के सभी यज्ञ के हविष्य को अपना आहार बना लेना चाहता था इसलिए व संसार के सभी यज्ञों को नष्ट करने लगा हा और यह तो सर्व ज्ञात है देवताओं की पुष्टि तो यज्ञ के हविष्य से ही है तो जब यज्ञ ही संपन्न नहीं हो रहे थे तो देवता शक्तिहीन होने लगे [संगीत] थे विना सुर के भय से सृष्टि पर सभी यज्ञ बंद हो गए तो देवताओं ने एक और उपाय सोचा कि वो स्वयं ही यज्ञ कर ले किंतु उसमें आने वाली बाधा का उन्हें आभास नहीं [संगीत] था देवस्य मही मूर्ख असुर देवताओं से उत्पन्न होने के बाद भी तुम्हारी प्रवृति असुरी ही है इतने बड़े मूर्ख हो तुम अपने जीवन दाता के यज्ञ में आधा उत्पन्न करने के लिए प्रस्तुत हो गए एक असुर के भीतर आसुरी प्रवृत्ति नहीं होगी तो क्या हो देवराज आप एक बात भूल रहे हैं कि खंडित यज्ञ की सामग्री मेरा आहार है और जब कहीं और कोई यज्ञ नहीं हो रहा तो इसी यज्ञ से अपना आहार प्राप्त करूंगा मैं मेरा जीवन जीवन अब तुम्हारे जीवन के अंत होने का समय आ ही गया [संगीत] गन [संगीत] आप भूल रहे हैं मैं आप सभी की ऊर्जा से ही उत्पन्न हुआ हूं तो यह र्जा मुझे हानि कैसे पहुंचा सकती है यह सत्य कह रहा है हम इसे क्षति नहीं पहुंचा सकते तो फिर हम क्या करेंगे देवराज इसे इसे रोकने का क्या कोई उपाय नहीं [संगीत] नहीं देवगढ़ आप सब मुझे नहीं रोक सकते देवता होकर भी अपने ही द्वारा उत्पन्न किए गए प्राणी को उसका आहार प्राप्त करने से कैसे रोक सकते हैं आप एक समस्या से छुटकारा पाने के लिए हमने उससे भी बड़ी समस्या उत्पन्न कर दी सब देवताओं को आभास हुआ जो गड्ढा उन्होंने राजा अभिनंदन के लिए खोदा था वह अब उनकी ही खाई बन चुका था और अब वो उससे बचने का उपाय सोचने लगे अब तो हमारे समक्ष केवल एक ही उपाय इस नासुर नामक विन से केवल न हरता महा गनाधिपति जी हमारी रक्षा कर सकते [संगीत] [संगीत] हैं [संगीत] हे प्रभु महा गधिचि प्राप्त ना होने के कारण हम दुर्बल हो गए हमें कोई शक्ति शेष नहीं रही प्रभु इसलिए इस सृष्टि के प्रति अपने कार्यों को पूर्ण करने में अक्षम प्रभु अब आप ही उस विसर का अंत कर हमें उसके आतंक से छुटकारा दिला सकते हैं किसी अन्य के लिए विघ्न उत्पन्न करने से पहले ठीक से विचार करना चाहिए कि उस विघ्न से संसार को किसी बड़ी हानि का सामना तो नहीं करना पड़ सकता है आप सबने यज्ञ में बाधा ने का महापाप किया है आप सब मेरी सहायता के नहीं दंड के अधिकारी [संगीत] है प्रभु भूल मुझसे ही हुई मुझे लगा कि राजा अभिनंदन की दृष्टि मेरे सिंहासन पर इसलिए मुसे दोषपूर्ण आचरण हो गया प्रभु और मैं समझ ही नहीं पाया कि मैं क्या कर रहा हम प्रित करने को प्रस्तुत प्र हा प्रभु प्रभु प्रभ हमारी रक्षा कीजिए प्र प्र प्रभु हमारी रक्षा कीजिए अवश आपकी सहायता करूंगा किंतु आप सबको भी यह सौगंध लेनी होगी भविष्य में ऐसा कार्य आप सब नहीं करेंगे स्वीकार है स्वीकार है तो उचित है मैं अपने गणेश स्वरूप में आपकी सहायता करूंगा किंतु अपनी भूल को सुधारने के लिए अभी आप सबको एक और यज्ञ करना [संगीत] [संगीत] होगा [संगीत] आप यज्ञ शुरू कीजिए [संगीत] इस बार देवताओं ने श्री गणेश का नाम लेकर उनकी पूजा के साथ यज्ञ आरंभ किया किंतु विघ्न सुर को यज्ञ में विघ्न डालने तो आना ही था तो वह आया यज्ञ की अग्नि अर्थात मेरा आहार मेरा आहार मेरा स्वागत कर रहा है मेरे जन्मदाता हो मुझे पुनः आहार उपलब्ध कराने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद विसर तुम यह यज्ञ भंग नहीं कर सकोगे आप भी मुझे नहीं रोक [संगीत] सकते मुझे मेरा आहार [संगीत] चाहिए मेरा आहार मैं प्राप्त करके ही रहूंगा देवताओं की ऊर्जा से और ऊर्जा प्राप्त हो रही है मुझे [संगीत] रुको विसर तुम आगे नहीं बढ़ [संगीत] सकते रा सुतो स्वा ओम सर्व पूर्ण स्वाहा [संगीत] स्वाहा कौन है आप जो मुझसे इन देवताओं की रक्षा कर रहे हैं इतना जानने का अधिकार तो मुझे है कि देवताओं की ऊर्जा से परिपूर्ण होने पर भी ये कौन है जो मुझे शक्तिहीन कर रहा है आप अवश्य कोई दिव्य शक्ति है मुझे अपना परिचय देने की कृपा करें मुझसे भूल हुई है तो उसका दंड मैं स्वीकार करूंगा किंतु पहले आप अपना परिचय देने की कृपा करें बताना होगा आपको कि आप कौन है पू [संगीत] [संगीत] होती प्रणाम प्रभु आपने मेरी विनती सुन मुझे मुक्त किया और अपने दिव्य दर्शन देने की कृपा की धन्यवाद प्रभु [संगीत] ओम नमस्ते गणपतये त्वमेव प्रत्यक्ष तत्व मसी त्वमेव केवलम कर्ता स त्वमेव केवलम धर्ता स त्वमेव केवलम हर्ता स त्वमेव सर्वम लतम ब्रह्मा त्वम साक्षात मासी नित्यम प्रितम बम सत्यम बम एवम धय यो नित्यम सहयोगी योगी नाम पर ओ गम गणपत [संगीत] नम देवराज य असुर कहीं प्रभु श्री गणेश का स्तुति गान कर उन्हें प्रसन्न कर ले और और उनसे कोई वरदान ना प्राप्त कर ले यदि ऐसा हुआ तो हमारा संकट टलने के स्थान पर पुना उठ खड़ा होगा परम ब्रह्म है आप प्रभु तो आप बिना दोष के मुझे दंड कैसे दे सकते हैं मेरा तो जन्म ही यज्ञ को खंडित करने के लिए हुआ है खंडित यज्ञ की सामग्री ही मेरा आहार है आहार बिना जीवन नहीं प्रभु तुम उचित कहते हो [संगीत] किंतु सच्चे मन से यज्ञ करने वाले ऋषि मुनियों का भी तो कोई दोष नहीं जिनके यज्ञ भंग कर तुम उनकी सामग्री को अपना आहार बनाते हो प्रभु अनजाने में ही सही ऋषि मुनियों को मैं कष्ट देता हूं किंतु मैं विवश हूं अब आप ही बताइए प्रभु मैं क्या करूं तुम्हारा जन्म हुआ है तो तुम्हें भी भोजन अवश्य मिलेगा [संगीत] रा आहार है तो तुम उसी यज्ञ को भंग कर सकोगे जो मेरा स्मरण किए बिना आरंभ होगा या अशुद्ध मन से किया गया अवैध यज्ञ होगा मैं वचन देता हूं प्रभु मैं आपके आदेश का पालन [संगीत] करूंगा असुर होते हुए भी तुमने अपनी भूल स्वीकार की मेरे आदेश का पालन करने का वचन दिया इसलिए मैं तुम्ह आशीर्वाद देता हूं यहां इस स्थान पर मेरा एक मंदिर स्थापित होगा जिसका नाम तुम्हारे नाम पर होगा इस स्थान पर मेरा नाम तुम्हारे नाम के साथ सदा के लिए जुड़ जाएगा विघ्नेश्वर विनायक के नाम से मेरा यहां पूजन होगा जो भी यहां आकर अपनी भूल स्वीकार कर पश्चाताप करेगा उसे क्षमा प्राप्त होगी और श्रद्धा से यहां भक्ति न्योछावर करने वालों को अपने मि प्रभु विग्नेश्वर विनायक की जय विघ्नेश्वर विनायक की जय विघ्नेश्वर विनायक की जय और इस प्रकार पूर्ण होती है विग्नेश्वर की कथा हे प्रभु हे विघ्नेश्वर विनायक हमें आशीर्वाद दीजिए कि हमारी शेष यात्रा में कोई विघ्न ना आए और हम इस यात्रा को पूर्ण कर [संगीत] सके मैं पद पग पर आपका सहायक रहूंगा इसलिए आपके मार्ग में अब कोई विघ्न नहीं आएगा अब आपको अगले और आठवें धाम महा गधिचि [संगीत] प्रभु महा गनाधिपति की कथा से तो आप परिचित ही हैं प्रिय नहीं तो स्वामी स्मरण नहीं है आपको एक समय ऐसा था जब तीनों लोगों पर असुर नायक त्रिपुरासुर अर्थात तीन असुर भाई तारा और विरु माली का नियंत्रण था इनकी शक्ति का कारण था घोर तब से मिला इन्हें वरदान इन तीनों भाइयों ने चालाकी से ऐसा वरदान पा लिया था कि उनका वत कर पाना असंभव था कि संसार के देवता स्वयं महादेव ही इस त्रिपुर को नष्ट कर सकते हैं और हमारा वध उन्हीं के हाथों हो उनके अतिरिक्त किसी और के हाथों नहीं तथास्तु तथास्तु [संगीत] जब इन पापियों के विनाश का समय आया अंत में स्वयं प्रभु महादेव को ही उनका सामना करने आना पड़ा भयंकर युद्ध हुआ उसकी पूरी सेना का अंत हुआ किंतु त्रिपुरासुर का नहीं जब महादेव पाखंडी त्रिपुरासुर का वध करने के लिए कठिनाई का सामना कर रहे थे जब स्वयं मैं और ब्रह्मदेव त्रिपुरासुर का वध करने के लिए महादेव की सहायता के लिए आए थे तब भी त्रिपुरासुर का वध करना असंभव हो रहा था और समय निकलता जा रहा था फिर विश्वकर्मा जी ने पृथ्वी को रथ बनाया सूर्य और चंद्र उसके पहिए बने मेरू पर्वत उसका धनुष और वासुकी उसकी डोर और मैं स्वयं बाण बना किंतु रथ पर महादेव के आरू होते ही रथ डगमगाने लगा तभी आकाशवाणी हुई त्रिपुरा सुर के अंत का विघ्न तभी हटेगा प्रथम पूज्य विघ्न हता की प्रथम पूजा का नियम आपके उदाहरण से स्थापित हो जिसके बाद शुद्ध मन और भक्ति से किए जाने वाले किसी धर्म कार्य में कभी कोई देखने ना आए आज की यह पौर्ण महा गणपति तिथि अनंत काल तक संसार में स्थापित रहेगी और मैं ही सहस्त्र नामों को जापक गणेश की पूजा करूंगा त महादेव ने ने ही पुत्र विघ्न हर्ता गणेश की पूजा [संगीत] की [संगीत] [संगीत] त्रिपुर को भस्म कर त्रिपुरासुर का अंत भी किया यदि गिरिजात्मज माता द्वारा अपने पुत्र की पूजा के प्रतीक थे तो महा गणाधीश पूजन से किया [संगीत] नमस्ते ब्रह्म रूपाय विष्णु रूपाय ते नम नमस्ते रुद्रा रूपाय करि [संगीत] रूपाय विश्वरूप स्वरूपाय नमस्ते ब्र आप दोनों ने सभी अष्टविनायक धामों की यात्रा संपन्न की किंतु आपकी या वग सताय महा गणपत [संगीत] [संगीत] नमः [संगीत] प्रभु मर श्वर कृपा कीजिए हमें दर्शन दीजिए [संगीत] प्रभु आइए हम प्रभु का स्तुति गान कर इन्हें प्रसन्न [संगीत] [संगीत] [संगीत] करें [संगीत] [संगीत] स्वामी प्रभु दर्शन क्यों नहीं दे रहे अष्टविनायक की हमारी यात्रा पूर्ण कर हम उनके दर्शन के लिए यहां लौट के आए हैं मेरा हृदय आपके दर्शन के लिए व्याकुल हो रहा है प्रभु व्याकुल तो मेरा भी हृदय हो रहा है देवी धैर्य रखिए प्रभु मयूरेश्वर हमें दर्शन ही नहीं हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण भी [संगीत] [संगीत] करेंगे हमारी मन की इच्छा तो आपको ज्ञात है प्रभु अब वो कब फलित होगी मुझे संतान रत्न की प्राप्ति कब होगी इस माता की ममता को कब तृप्ति मिलेगी प्रभु माता आपकी प्रतीक्षा शीघ्र पूर्ण होगी और इतना ही नहीं समस्त संसार आपके पुत्र के साथ आपकी पूजा [संगीत] करेगा [संगीत] समस्त संसार आपके पुत्र के साथ आपकी पूजा करेगा प्रभु आपके वचन सुनकर मेरा हृदय अपने पुत्र को देखने के लिए और भी आतुर है मुझे यह सौभाग्य कब प्राप्त होगा प्रभु माता भक्त की भक्ति और मां की ममता जब दोनों का संगम हो तो परिणाम सुंदर ही होगा किंतु अभी आपको जगत भ्रमण के लिए निकलना होगा क्योंकि संसार को आपके आशीर्वाद की प्रतीक्षा जो [संगीत] है देखिए ना सभी ने कितनी निष्ठा से आपका व्रत रखा आपकी पूजा की और आपकी कृपा दृष्टि पाने की लालसा है सभी [संगीत] को [संगीत] दूसरों का बुरा करने वाले यह भूल जाते हैं कि वे जैसा बीज बो रहे हैं उन्हें भी वैसा ही फल प्राप्त होगा

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