Sunday, 28 December 2025

देवताओं ने और्व ऋषि से सहायता क्यों मांगी थी Akanksha Puri Malkhan S Vighnaharta Ganesh Episode

न हरता श्री गणेशा श्री गणेशा [संगीत] [प्रशंसा] श्री इंद्रदेव इव देवराज इंद्रदेव इनकी तुता से तो हम भी क्रोधित है किंतु अभी आपने कहा था मा आदि शक्ति इनकी संरक्षक है इन पर विजय प्राप्त करना तो असंभव है इसीलिए अभी हमारा इनसे युद्ध करना भी व्यर्थ है आप उचित कह र अग्निदेव हमें कोई अन्य युक्ति ही सोचनी होगी माता की इच्छा के समक्ष लाचार हो गए हैं इस समय यहां से प्रस्थान करना ही उचित [संगीत] होगा असुर सम्राट की जय असर सम्राट की जय असुर सम्राट की जय असुर सम्राट की जय हमारी रक्षा करने के लिए कोटि कोटि प्रणाम माता अब हम असुरों को पृथ्वी से कोई नहीं हटा सकता सर्वशक्तिमान हूं मैं हा असुर शेष रुक आप उन ऋषियों की रक्षा करने में असमर्थ रहे देवराज मां क्या हुआ रे शांत क्यों है स्वयं शांत मत रह तेरे मन में जो जिज्ञासा है उसे शांत कर पूछ ले यह आपकी कैसी विचित्र लीला थी असुर अपने अत्याचार का विस्तार करते रहे और आपकी सुरक्षा कवच के कारण सुरक्षित भी रहे देवता ऋषियों की रक्षा करने में भी असमर्थ हो गए तुझे यह ज्ञात होना चाहिए कि मैं जो भी करती हूं उसके पीछे कोई बड़ा कारण अवश्य होता है [संगीत] इ जिज्ञासा शांत करो इनकी आगे का घटनाक्रम भी बताओ इन्ह माता के कवच को हम कैसे भेज सकते थे इसलिए हम निराश और विवश होकर धारक के वन से चले आ किंतु जब हम आपस में विचार विमर्श कर इस समस्या का समाधान ढूंढने और हमारी रणनीति की रचना करने के लिए लोक की र बढ़ रहे थे तभी हमें कुछ दिखाई दिया हा दारुक और उसके असुरों के द्वारा फैलाए गए विनाश के मध्य में उन सबसे अन छुआ पावन आश्रम क्या एक आश्रम देखा आपने किंतु पृथ्वी पर तो अनेकों आश्रम है यदि एक आश्रम और था तो इसमें असाधारण क्या [संगीत] था बात है असाधारण अद्भुत बात है भैया इतनी साधारण घटना में गणेश को क्या असाधारण दिखाई दे रहा है दारुक ने पृथ्वी को आतंकित कर दिया था चह दिशाओं में विनाश ही विनाश किया था उसने उसके असुर सैनिकों ने सभी ऋषि मुनियों को बंदी बना लिया था उनके आश्रम भी नष्ट कर दिए थे ऐसी अवस्था में यदि देवताओं को इस विनाश से अं छुआ आश्रम दिखाई दिया तो यह तो वास्तव में बहुत ही अद्भुत घटना है भैया हां यह तो गणेश उचित कह रहा है इतने विनाश में वो आश्रम कैसे सुरक्षित रहा वो किसका आश्रम था माता ऋषि और का आश्रम था वह और ऋषि उस आश्रम को देखकर हम आश्चर्य चकित थे जो इस विनाश के मध्य अं छुआ खड़ा था जिसे देखकर हमारे मन में जिज्ञासा जाग और हमारी जिज्ञासा को देवऋषि नारद ने शांत किया उन्होंने बताया कि ऋषि और अत्यंत तेजस्वी ऋषि उनकी तापस शक्ति इतनी शक्तिशाली है कि वह किसी को भी भस्म कर सकते हैं यह जानकर तारुका के असुरों ने उनके आश्रम में प्रवेश करने का दुस्साहस नहीं किया देवऋषि नारद का कथन सुनकर हमें विश्वास हो गया कि इस निराशा के अंधकार में ऋषि और भी हमारे की किरण और हमने उनसे हमारी सहायता करने की गुहार लगाने की ठान ली [संगीत] किंतु रुको रुको रुको [संगीत] [संगीत] सावधान देव राजेंद्र ऋषि का स्वभाव है क्रोधी हस्तक्षेप करके ना बनिए उनके विरोधी [संगीत] प्रणाम ऋषिवर प्रणाम ऋषिवर प्रणाम ऋषिवर देवर्षि नारद अब कौन सी अग्नि प्रज्वलित करने आए हैं यहां अग्नि कैसी कर रहे हैं आप कथनी ऋषिवर आपको भी ज्ञात है मैं जो भी कहता हूं जो भी करता हूं केवल जगत कल्याण की मंशा रखता हूं मुझे दिखाई दे रहा है उसके अनुसार तो आप और आपके देवताओं की ये टोली मेरे स्थान पर मेरी अनुमति के बिना प्रवेश करने वाले [संगीत] थे इसमें भला कौन सा जगत कल्याण छिपा है इस प्रश्न का उत्तर यदि देवराज इंद्र दे तो उचित रहेगा क्षमा कीजिए श्वर संकट भारी है हम सभी देवता आपके समक्ष सहायता की गुहार लगाने आए आपको तो अवश्य ज्ञात होगा पूरी पृथ्वी पर कैसा उत्पाद मचा है एक तारक नामक असुर ने समस्त पृथ्वी पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया है और इसलिए मैं तो आप सभी देवता तो योद्धा हैं आपको उस असुर को पराजित कर पृथ्वी से खड़ देना चाहिए इसमें भला मैं क्या कर सकता हूं हमने युद्ध किया दारुक से किंतु उसे पराजित नहीं कर सके अनेकों ऋषियों को बंदी बना रखा है उसने निर्बल और निर्दोष लोगों को वह अपना दास बना रहा [संगीत] है ऐसी स्थिति में उन ऋषियों को मां आदि शक्ति की आराधना कर उनसे सहायता प्राप्त करनी चाहिए जैसा कि मैंने पूर्व में कहा था ऐसी घटना में मेरे हस्तक्षेप का कोई स्थान नहीं है देवराज हमें मार्ग दीजिए किंतु ऋषिवर क्षमा रे [संगीत] शिवर देवताओं की समस्या भी स्थान पर नहीं है ऋषिव समस्त देवता और ऋषि मां आदिशक्ति की पूजा अर्चना करते हैं किंतु जब मां आदिशक्ति असुरों की रक्षा करने के लिए सुनिश्चित है तो क्या [संगीत] करें असुर समस्त ऋषियों को प्रताड़ित कर रहे हैं ऐसे में देवता और ऋषि किसके पास जाकर रक्षा की गुहार लगाए ऋषिवर मां आदि शक्ति असुरों की रक्षक बनी हुई है परंतु यह कैसे संभव है अति उत्तम अत्यधिक सुख की अनुभूति हो रही है प्र पृथ्वी पर हमारा अधिकार हां [संगीत] स्वामी अति उत्तम है यह मासा आरी आहार इस पृथ्वी का [संगीत] वाह अब आप ही बताइए ऋषिवर ऐसी अवस्था में हम सहायता की आस लेकर किसके पास [संगीत] जाए [संगीत] कदाचित ऋषिवर इस समस्या का समाधान करने के लिए समर्थ नहीं है कदाचित वे स्वयं ही विवश है इसी कारण हमें इस समस्या में ऋषिवर को सम्मिलित नहीं करना [संगीत] चाहिए जैसी हमारी नियती हम कोई और उपाय ढूंढ लेंगे [संगीत] आइए रुको आ गया रे शिवर आदि शक्ति मेरी और आप सभी की माता है सत्य वचन यदि उन्होंने असुरों की रक्षा करने का चुनाव किया है तो कदाचित उन्हीं के दिए हुए किसी वरदान हेतु वह विवश है या यह उनकी लीला है जिसे हम समझने में असम है किंतु मैं माता के सर्वोच्च भक्तों में से एक हूं और निर्दोषों का रक्षण करना मेरा धर्म है यदि माता असुरों को संरक्षण देना चाहती है तो यह उनकी इच्छा है किंतु ऋषियों की रक्षा करना मेरा धर्म है मैं करूंगा उन ऋषियों की रक्षा मैं करूंगा उन ऋषियों की रक्षा मैं करूंगा उन ऋषियों की रक्षा आभार ऋषिवर धन्यवाद ऋषि धन्यवाद ऋषिवर [संगीत] [संगीत] [हंसी] ब [संगीत] यह क्यों लट कर आए यह ये देवता गण फिर आ गए यहां अब तुम्हारे आतंक से मुक्त होने का समय आ गया है तारुक देवता प्रतीत होता है कि हमारे सत्कार से बहुत आनंदित हु हो तो फिर सत्कार करवाने चले आ करेंगे पहले भोजन ग्रहण कर हम देवता अत्यंत उदार है यदि जो कुछ भी किसी से पाते हैं उसे उससे भी अधिक मात्रा में पुनः लौटा भी देते हैं दार ऐसा क्या कारण है इनका साहस इतना बढ़ गया [संगीत] है किसके बल पर इतना उत्साहित है यह देवगढ़ कि फिर से हमारा सामना करने चले [संगीत] आए [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] दुष्ट असुर तुमने निर्दोष ऋषियों को त्रस्त करने का दु साहस कैसे [संगीत] किया इस दुष्ट का य अठस असहनीय है मेरे [संगीत] लिए मान गए देवराज इद्र मान गए तुम्हारी बुद्धि और शक्ति अरे तेजस्वी सूर्यदेव प्रचंड ताप से संपन्न अग्निदेव दत गति से संपन्न वायु देव अति शक्तिशाली वरुण देव जब ये मुझे पराजित नहीं कर पाए तो तुम तुम किसे किसे किसे किसे प यो ऋषि अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा देवराज इंद्र इस ऋषि को तुम मेरे समक्ष उपहार स्वरूप लाए हो क्षमा याचना के लिए ताकि मैं तुम्हारी उद्दंडता को क्षमा कर सकू तुम बड़े चतुर हो देव राजेंद्र तुम जानते हो कि मुझे इन ऋषियों का कोमल मान कितना कितना प्रिय लगता [प्रशंसा] है मैं इस उपहार के लिए तुम्हारी उद्दंडता को क्षमा [संगीत] करता अच्छा देव राजेंद्र पहले पहले इस ऋषि को मेरे निकट लाओ मैं देखूं तो सही यह मेरे खाने योग्य है या मेरे दास बनने होग्य है कि हमेशा मैं इससे अपनी सेवा करवाता [संगीत] रहूं सावधान कदाचित ये हम पराक्रम करने जा रहे हैंक [संगीत] देवगण इनके और मेरे मध्य कोई नहीं आएगा कोई भी नहीं आप सभी समझ गए ना मेरे इस आदेश का उल्लंघन नहीं होना चाहिए उचित है [संगीत] ऋषिवर ये क्या इस ऋषि ने मेरे सैनिकों को भस्म कर दिया इन दुष्टों के विनाश का आरंभ है [संगीत] य मैं ऋषि और दारुक और उसके असुरों को शाप देता [संगीत] हूं अहंकार और बल का मद व्यक्ति के विवेक को हरकर उसके सोचने और समझने की क्षमता को नष्ट कर देता है

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