भ्राता काशी गए हैं माता मणि कणिका के दर्शन प्राप्त करने जब वहां से लौट आएंगे तब मैं सब कुछ बता दूंगा तो हम भी काशी जाएंगे हां हां जाएंगे तुम्हें मोक्ष की इच्छा है क्या मोक्ष प्रभु जो मृत्यु उपरांत प्राप्त होता है जब भ्राता कार्तिकेय मात्र अपनी दृष्टि से तुम्हारा अंत कर सकते हैं तो फिर माता मणि करने का तो माता है वहां उनके क्षेत्र में प्रवेश भी किया ना तो फिर क्या होगा कौन जाने नहीं हम नहीं जाएंगे नहीं नहीं नहीं नहीं कदा भी नहीं जाएंगे किंतु प्रभु यहां रुककर करेंगे भी क्या समय का सदुपयोग करो गणेश जी का भजन कीर्तन करो वो प्रसन्न हुए तो और भी बहुत कुछ बता [संगीत] देंगे भ्राता तो अब काशी पहुंचने वाले हैं मुझे शीघ्र जाना चाहिए स्वामी इनका भजन कीजिए कीर्तन [संगीत] कीजिए हम काशी में है कहीं ये दोनों हमें मूर्ख तो नहीं बना [संगीत] रहे दिव्य काशी नगर में प्रवेश से पूर्व काशी के रक्षक प्रभु काल भैरव के दर्शन ही नहीं उनकी अनुमति भी आवश्यक है उचित कहा गणेश प्रभु काल भैरव के भोग के लिए हमारे पास मिष्ठान तो है अब बस सेनापति वर बाहू की प्रतीक्षा है शीघ्र ही व भोग के लिए सुरा भी लेकर आते ही होंगे ओम काल भैरवाय नमः ओ काल भैरवाय नमः [संगीत] आइए सेनापति वीर भाव मुझे काल भैरव के भोग के लिए सुरा यहां कहीं प्राप्त ना हो सका य बाबा काल भैरव प्रसन्न हो तो देव सेनापति कुमार कार्तिके की आगे की यात्रा संभव कैसे होगी हे बाबा काल भैरव कृपा कीजिए कि भ्राता कार्तिकेय अपनी यात्रा संपन्न कर सके कोई बात नहीं सेनापति वीर बा आइए हम आगे बढ़ते [संगीत] हैं [संगीत] [संगीत] यह स्वान इस प्रकार मेरे आसपास क्यों घूम रहा है चलो चलो यहां से ये तुम्हारे लिए नहीं है तो यह स्वान मेरे हाथ से प्रसाद लेना चा रहा [संगीत] है भ्राता खाली हाथ ही बाबा के पास जाएंगे [संगीत] सुरा प्राप्त हुई नहीं और प्रसाद यह भूखा स्वान खा गया अब बाबा को भोग लगाने के लिए तो मेरे पास कुछ भी शेष नहीं रहा आइए देव [संगीत] संभालिए पहले वह काला स्वान और अब यह अघोरी बाबा कहां से प्रकट [संगीत] हुए आप ठीक तो है ना बाबा आपको चोट तो नहीं [संगीत] लगी उचित है अब आप यहां विश्राम कीजिए और मुझे आके दीजिए रो पुत्र भैरव बाबा है वो उनके दर्शन के लिए जा रहे हो और उन्हें समर्पित करने के लिए तुम्हारे पास कोई भोग वस्तु भी नहीं उचित कहा बाबा आपने मेरे पास भोग के लिए तो कोई भी वस्तु नहीं है किंतु उससे भी अधिक अमूल्य कुछ है मेरी निश्चल भक्ति और मेरी निष्ठा अद्भुत मैं तुमसे बहुत प्रसन्न [संगीत] हुआ यह लो नहीं नहीं बाबा मैं मैं यह आपसे कैसे ले सकता हूं मैं यह नहीं ले पाऊंगा ले लो मेरी आवश्यकता से अधिक है तुमने शन की भूख मिटाई मेरी सहायता की तो तुम मुझसे भी कुछ प्राप्त करने के योग्य हो हो ले लो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद बाबा मात्र संयोग नहीं है यह इसके पीछे अवश्य कोई दिव्य कारण [संगीत] है [संगीत] [संगीत] हे भैरव बाबा हमारी पूजा एवं भोग स्वीकार हमें काशी के इस पावन भूमि में प्रवेश करने की अनुमति दीजिए ओम श्री काल भैरवाय नम ओम काल भैरवाय [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नमः यह तो वही बाबा है जिनसे बाहर भेंट हुई [संगीत] थी मुझे आभास तो था कि वह दिव्य स्वान अघोरी बाबा आप ही थे प्रभु स्वयं हमारी सहायता के लिए प्रकट हुए थे हे बाबा क्या यह हमारी परीक्षा थी यदि हम आपके की परीक्षा में सफल हुए यदि आप हम सबसे प्रसन्न है तो हमें अपने वास्तविक रूप में दर्शन प्रदान करने की कृपा [संगीत] कीजिए प्रणाम प्रभु प्रणाम प्रभु कल्याण हो आपके दर्शन पाकर हम कृतार्थ हो गए मैं तुम्हें अनुमति देता हूं तुम काशी में प्रवेश कर अपनी यात्रा का यह पड़ाव संपन्न कर सकते हो यदि यहां आपके लिए सब कुछ कुशल रहा तो शीघ्र आपको देवी मनी क निका के दर्शन होंगे किंतु सर्वप्रथम काशी के स्वामी बाबा विश्वनाथ के दर्शन कीजिए ये उनकी पंच भोग आरती का समय है ज गणेश जितना विवा कर रहा ने के सा उतना उसके साथ भी है य भेद तो ज्ञात करना ही होगा यह यात्रा कुमार कार्तिक के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है इसका कुछ रहस्य तो अवश्य है पार्वती पिता महादेवा जय गणेश जय गणेश मा की पार्वती जय गणेश जय गणेश देवा माता जा की पार्वती पिता महादेवा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा इन मेघों को भी अभी उत्पन्न होना थाव जय गणेश जय गणेश जय गणेश देव माता जाकी पार्वती पिता महादेव जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जग पार्वती कीद शांत हो जाओ [संगीत] ग तो मेरा संदे उ चती [संगीत] था इतनी तैयारी इतनी व्यवस्था अवश्य इस यात्रा के पीछे कोई विशेष प्रयोजन [संगीत] है देखू तो सावधान साधन साधन करना पड़ा हमें ये स्मरण कराने के लिए कि गणेश जी ने क्या कहा था काशी को लेकर के जब भ्राता कार्तिकेय मात्र अपनी दृष्टि से तुम्हारा अंत कर सकते हैं तो फिर माता मणि करने का तो माता है वहां उनके क्षेत्र में प्रवेश भी किया ना तो फिर क्या होगा कौन जाने और य भी कैसे बोल जाए क्या किया था उन्होने हमारे साथ और फिर ये तो उनके माता-पिता का स्थान है पता है ना कितनी दूर दशा करेंगे वो तो क्या हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जय की पार्वती पिता महादेवा जय गणेश जय गणेश से निकलने दो उन्हे तब व गजानन हमारे साथ नहीं रहा तो देखना जो मैं करूंगा उसकी व कल्पना भी नहीं कर सकते मुझे किसी ऐसे स्थान पर रहना होगा जहां से सदा इन दोनों पर अप दृष्टि रख जय गणेश जय गणेश जय कुछ तो अवश्य है इस यात्रा का उद्देश्य भ्राता बाबा विश्वनाथ की पूजा के लिए पांच तत्व आवश्यक हैं दूध घृत मधु दही और गन्ने का रस प्रभु के भोग के लिए और उसके साथ बेलपत्र और पुष्प भी चाहिए आप उनमें से कुछ भूले तो नहीं [संगीत] ना नहीं गणेश मैं कुछ भी नहीं भूला पूजा के लिए जो कुछ अनिवार्य है वो सब कुछ ले चुका हूं और अब बस केवल प्रभु दर्शन पाना चाहता हूं भज बाबा विश्वनाथ भज बाबा विश्वनाथ भज बाबा विश्वनाथ विश्वनाथ भज बाबा विश्वनाथ भज बाबा [संगीत] [संगीत] विश्वनाथ नारायण प्रिय मन मदा प हारम राण स पुर पतिम भज विश्वनाथम गंगा तरंग रमणीय जटा कलाप गौरी निरंतर विभूषित वाम भागम नारायण प्रिय मलंग मज पहा [संगीत] वाराणसी पुर पति भज विश्वनाथम गंगा तरंग रमणीय जटा कलाम गौरी निरंतर विभूषित बागम नारायण प्रिय मन [प्रशंसा] म हे बाबा विश्वनाथ आपका कोटि कोटि धन्यवाद कि मेरी इस यात्रा में आपने अपने दुर्लभ दर्शन मुझे प्रदान करने की कृपा की पुत्र यह तुम्हारा दूसरा पड़ाव उस यात्रा का जिसके अंतिम पड़ाव को संपन्न करने के उपरांत ही तुम्ह उश पकास प्राप्त होगा जिससे तुम सरा पन को पत कर सको काशी की तुमरी देवी म का दर्शन प्राप्त करने के बाद ही संपन्न हे बाबा विश् अब मुझे आशीष दीजिए कि मैं माता मण कणिका को प्रसन्न कर उनके भी दर्शन प्राप्त कर सक पुत्र काशी वो पावन धाम है जहा प्रत्यक कम का सुखल अनेको गुना हो जाता है यहां का एक वत करोड़ों वर्तो के समान है और एक मंत्र के जाप से करोड़ों मंत्रों के जाप का फलित प्राप्त होता है मुझे विश्वास है तुम्हारी अटूट श्रद्धा से तुम अपनी पूजा के फल से कदापि वंचित नहीं हो होगे जो होगा उचित होगा इस विश्वास के साथ आगे बढ़ो जब वो तुम्हे दर्शन प्रदान करने की कृपा करे तुम्हे उसके लिए पूर्ण रूप से तैयार रहना होगा [संगीत] देवराज आप चिंतित हो उठे क्षमा कीजिए प्रभु म की दे माता महाकाली के समान वो भी रक्त पान करती फिर उन्ह उन्ह प्रसन्न करना बहुत ही कठिन हो उचित समय पर उचित कार्य करने से ही सुफल प्राप्त होता है इसलिए आप से दिन के मध्य के पूर्व देवी मण कर्णिका के सामने पहुंच क्योंकि तब आपको व महान दिव्य दृश्य दिखाई देगा जो सर्व अनुपम होगा असमान रखिए जब कोई कार्य पूर्ण विश्वास और अपनी सफलता पर बिना संध किया जाता है व पूर्ण होकर ही रहता है [संगीत] प्रणाम [संगीत] [संगीत] प्रभु जैसा प्रभु ने कहा उसके अनुसार हमें शीघ्र आगे बढ़ना चाहिए तभी तो हम दिन के मध्य के पहले वहां पहुंचकर उस दिव्य दृश्य के साक्षी बन सकेंगे और आशा है कि माता मणि कणिका की कथा सुनाकर मैं भ्राता को विवाह के दूसरे संकल्प के बारे में समझा सकूंगा जिससे वह विवाह के लिए अवश्य तैयार हो जाएंगे जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जकी पार्वती पिता महादेवा जय गणेश जय गणेश या का एक पड़ाव पूरा हु तो काशी से बाहर आना चाहिए था किंतु य तो कहीं और जा रहे शांत हो [संगीत] जाओ बाधाएं कितनी भी आए अपना कार्य तो मैं करूंगा ही इनके यहां आने का वास्ते को देश मैं क्या करके रहूंगा [संगीत] भ्राता अभी दिन का मध्य भी नहीं हुआ है और वह देखिए हम मां मण करनेका घाट पर पहुंच भी [संगीत] गए काशी के सभी घाटों के मध्य में स्थित होने के कारण मण करण का घाट को काशी का नाभी केंद्र भी कहा जाता [संगीत] है हां अनुज गणेश यहां माता मण कणिका के निकट दिव्यता के बढ़ने का एक अद्भुत आभास हो रहा है मुझे भ्राता काशी जैसे अत्यंत पावन धाम में भी यदि कोई सर्वाधिक पावन स्थान है तो वह यही है क्योंकि यही वह स्थान है जहां श्री हरिनारायण के चक्र के प्रयोग के उपरांत माता सती की मणि जड़ित करने का यहां आकर गिरी थी इसलिए यह स्थान 51 शक्ति पीठों में से एक बना और माता की मणि कर्णिका यहां गिरी थी इसलिए इसका नाम मणि कणिका घाट पड़ा करने का घाट [संगीत] पड़ा यहां मां विशालाक्षी के रूप में माता की पूजा होती है प्रणाम माता प्रणाम [संगीत] माता किंतु गणेश हमें माता मणिकर्णिका के दर्शन कहां प्राप्त होंगे आइए भ्राता मैं आपको वहां भी ले चलता हूं मणिकर्णिका के दिव्य कुंड [संगीत] पर वह देखिए भ्राता वह रही माता मणि करने का स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान जिनके मस्तक पर महादेव के समान तीसरा नेत्र है जिनके तन में स्फटिक के समान शुभ्र कांति है माणिक्य के समान जिनके तरल लाल होठ है जिनके जुड़े में मोगरे के पुष्पों का गजरा है और वस्त्र श्वेत है और जो स्वयं स्फटिक के समान ही है माता मणि करने का और कोई नहीं स्वयं अपने अन्य शाश्वत रूप में माता आदि शक्ति ही [संगीत] है माता के इस चतुर्भुज रूप में उन्होंने काला कमल पुष्प और डंब फल धारण किया हुआ है नीचे के हाथ सदैव पश्चिम अर्थात काशी विश्वनाथ मंदिर की दिशा में नमस्कार की मुद्रा में जुड़े हुए हैं उनके खुले नेत्र सदैव प्रभु दर्शन के लिए लालायित है हर दिन भोर में ब्रह्म मुहूर्त के समय सर्वप्रथम माता ही प्रभु विश्वनाथ के दर्शन कर जाती है बाबा विश्वनाथ के नेत्र भी माता मणि कणिका की ओर ही है जो माता पार्वती की ही रूप है उनके प्रत्येक रूप में माता प्रभु महादेव की और प्रभु महादेव माता के ही तो है दोनों में एक दूसरे के प्रति अपार अगाध स्नेह है समान रूप से एक दूसरे के प्रति सम्मान और परस्पर निष्ठा से समर्पित है और यही उनके संबंध की सुंदरता है और यही उनके अटूट जुड़ाव का आधार है ऐसा संबंध जिसमें दोनों भागीदार एक दूसरे के प्रति सच्ची निष्ठा रखें और सदा एक दूसरे का ध्यान रखें ऐसा अनूठा संबंध विवाह का ही परिणाम होता है अनुज गणेश अब हमें माता मण कणिका की कथा सुनाओ हां अवश्य सुनाऊंगा भ्राता मुझे आशा है कि यह कथा सुनकर आपके मन में भी विवाह के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न हो ईश्वर को अर्पित करने के लिए फल फूल मेवा मिष्ठान से कहीं अधिक उपयुक्त उपहार निश्छल भक्ति प्रेम और शुद्ध चित्त की चेतना है
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