चंद्रधर जैसे महान भक्त के लिए आप क्या नहीं चाहते थे पिताश्री [संगीत] [संगीत] प्रणाम पिता श्री प्रणाम माता प्रणाम पिता [संगीत] श्री पुत्री पुत्री पुत्री तो मैं आपकी अवश्य पिताश्री किंतु इस पुत्री में ऐसी क्या कमी रह गई थी देवी बनने के मार्ग में आपने ही मुझे भेजा था पिताश्री आप ही मेरे मार्गदर्शक बने थे पिताश्री और आपने ही और आपने ही मुझे लड़ खड़ाने दिया पुत्री धर्म का पालन मैंने संपूर्ण निष्ठा के साथ निया मेरे त्याग का साक्षी संपूर्ण संसार है पिता तो बताइए पिता उसके पहचान भी मुझे ऐसा परिणाम मिला [संगीत] प्र ये चुनौती तो आपने ही दी थी मुझे पिताश्री जब मैं उसे पूर्ण करने का प्रयास कर रही हूं तब आप स्वयं हस्तक्षेप कर मेरे मार्ग में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं मुझे सफल नहीं होने दे रहे हैं ऐसा क्यों पिता श्री ना ही मेरे मार्ग में कभी कोई बाधा आएगी और ना ही असफलता कभी मेरे निकट आएगी मान लो मेरा कहा केवल प्रभु महादेव की पूजा करो यदि किसी और की पूजा करते हो तो भूल जाओ चंद्रधर यह क्या कह रहे हो हम सब महादेव के भक्त भी हैं किंतु हमारा विश्वास भी तो है हमारे ईष्ट है कुल देवता है कुल देवी हैं संभव है कि यह सब महादेव का ही रूप हो हम सनातन धर्मिता है जिस प्रकार तुम्हें शिव रूप में विश्वास है उसी प्रकार हमें अपने इष्ट देवी देवताओं में विश्वास है उनका अपमान क्यों कर रहे हो तुम आप सब की आस्था और आपके विश्वास का आपको क्या लाभ हुआ यह मुझे ज्ञात नहीं किंतु मेरे मेरे विश्वास से मैं कैसे मेरे प्रभु शिवशंभू के कृपा का पात्र बना यह तो आप सबने देखा ना भयंकर विषधर सर्पों के प्रहार का भी कोई असर नहीं हुआ मेरे पुत्रों पर व जीवित है कुशल है स्वस्थ है मेरे प्रभु महादेव ने मेरी ऐसी सहाय उत्तर दीजिए पिताश्री उत्तर दीजिए कि आपने उसकी सहायता क्यों की कोई सच्चा भक्त मुझे सच्ची भक्ति और श्रद्धा से पुकारता है तो मैं स्वयं को कभी रोक नहीं पाता क्योंकि सच्चे भक्त की पुकार ना सुनना उस सच्चे भक्त के साथ अन्याय के समान है किसी एक के साथ अन्याय ना हो और उसके लिए किसी और के साथ अन्याय हो जाए क्या यह उचित है [संगीत] संदेह है मुझे कदाचित आप मुझे देवी पद पर आसीन होते हुए देखना ही नहीं चाहते मुझे देवी पद पर आसीन होते हुए देखना ही नहीं चाहते माता पिता अपनी संतान की उन्नति से सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं इसलिए तुम्हें संदेह नहीं होना चाहिए मैं तुम्हे देवी के पद पर आसीन ही नहीं अपितु संसार द्वारा तुम्हारी पूजा होते देखना चाहता हूं बस महादेव की पूजा करते हुए देखना चाहता हूं मैं आप सबको और किसी की पूजा करने की कोई आवश्यकता नहीं यदि आप मुझे वास्तव में देवी बनते हुए देखना चाहते हैं यदि देवी बनना ही मेरे जीवन का उद्देश्य है यदि आपको विश्वास है कि मैं देवी बनने की योग्य हूं तो आप चंद्रधर की सहायता मत कीजिए मुझे वचन दीजिए पिता श्री कि आप चंद्रधर की सहायता नहीं करेंगे वचन दीजिए मुझे पिता श्री कि आप उसे अपने छत्रछाया से वंचित रखेंगे अपने छत्रछाया से वंचित रख उनकी छत्रछाया सदैव रहती है मुझ जैसे महान भक्त पर इसलिए जो भी मेरे निकट है उनकी ऐसी ही कृपा का अनुभव देखना चाहता हूं मैं उनके लिए क्योंकि जो भी मेरे साथ रहेगा उन पर भी मेरे प्रभु महादेव की कृपा बनी रहेगी मेरी एक ही पुकार पर स्वयं महादेव मेरी सहायता के लिए आएंगे मेरा सबसे यही सुझाव है कि बस और बस महादेव की पूजा करो बाकी किसी की पूजा तो मूर्खता है मूर्खता क्या हुआ पिताश्री आप मौन क्यों है क्या आप यह कर सकेंगे क्या चंद्रधर के सहायता करने से आप अपने आप को रोक सकेंगे आप उसे अपने छत्रछाया से वंचित कर सकेंगे मैं पुकारूंगा शिवशंभू को तो आना ही होगा उन्हें मेरी सहायता करने को वह बाध्य [संगीत] होंगे मैं बाध्य नहीं मैं उसकी सहायता नहीं [संगीत] करूंगा गरा शरीर का करपूर [संगीत] मैं वचन देता हूं अब नहीं जाऊगा उसकी सहायता करने मेरे शब्द असत्य नहीं होंगे पुत्री अब उस पर मेरी कृपा नहीं होगी काम चरता चता राजा वि जल चिताय कृत स्मरा कृत स्मरा नम शिवाय पुत्रम मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हा साथ हैकन पुराय तारा पन पुरा री सफलता में म क्यों यही रा उ कोट कोटि धन्यवाद पता धन्यवाद संभव है मेरे जीवन का यही उद्देश्य कि मैं अपने प्रभु की महिमा से सबको परिचित करा सक और यह विश्वास दिला सक एक मात्र महादेव है जिनकी पूजा हमें करनी चाहिए उनके सिवा और किसी की नहीं हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेवर हर [संगीत] महादेव पिता श्री क्या यह आपके लिए संभव होगा क्या आप चंद्रधर की सहायता करने से स्वयं को रोक सकेंगे भगवान का मन भक्ति भाव का भूका होता है अहंकार का नहीं और भक्ति जगाई जाती है थोपी नहीं जाती अपने भगवान का किसी भी रूप में विश्वास करना भक्त का अधिकार है किंतु दूसर के अधिकार कान इसलिए स भक्त व है जो दूसरो के विश्वास का समान करे जो उनकी पूजा को भी मान्यता दे चंद्रधर जैसे श्रेष्ठ भक्त को यह समझना अति आवश्यक है इसमें उसे कठिनाई तो होगी किंतु यही उसकी भक्ति के चरण पर पहुंचने का अंतिम उपाय है और यह मंसा के लिए भी अनिवार्य है कि व चंद्रधर को उचित मार्ग दिखाकर देवी प पाने की अपनी यात्रा पूर्ण करे पिता श्री दीदी मनसा और भक्त चंद्रधर के बीच के इस मंथन से कौन सा अमृत निकलेगा या कौन सा विष यह तो मुझे ज्ञात नहीं किंतु यह अवश्य ज्ञात है कि आपकी लीला अपरम पार है [संगीत] नम स्वामी आप अभी भी यात्रा पर जाने पर विचार कर रहे [संगीत] हैं हमारे पुत्रों के साथ ऐसा हुआ है उसके बाद मुझे भय है कि कहीं कुछ अशुभ देवी मेरी भक्ति ने अशुभ को शुभ में बदल दिया और क्या प्रमाण चाहिए आपको विपदा जैसी भी हो मेरे प्रभु महादेव को हमारे साथ रहना ही होगा आप भय छोड़ [संगीत] दीजिए परंतु स्वामी देवी मंसा ने यदि कोई संकट उत्पन्न किया तो देवी कैसी देवी मेरा विश्वास है उसे क्या भय संकट और काल का जो भक्त हो स्वयं महाकाल का देवी बैठ भय और शंका त्याग दो देवी हमें किसी के भय से छिपकर बैठने की कोई आवश्यकता नहीं हमें तो और सबल और समर्थ दिखने की आवश्यकता है क्योंकि हमारे ही उदाहरण से प्रभु महादेव में सबका विश्वास बढ़ेगा और सभी उनकी पूजा करेंगे हमारी भक्ति की शक्ति हमारे साथ है स्वयं भोलेनाथ महादेव हमारे साथ है अब किसी भी कारणवश स्वयं को रोकना मत पुत्री अब तो तुम्हें स्वयं महादेव का आशीर्वाद प्राप्त है प्रणाम नाग माता हां नाग माता इस बार आप हमें मत रोकिए संसार को यह जानने का अधिकार है कि प्रत्येक देवी देवता का स्थान महत्त्वपूर्ण है और उनका आशीर्वाद भी चंद्रधर को ना केवल अपनी भूल स्वीकार करनी होगी बल्कि उसे आपकी भक्ति भी करनी होगी वह हमारी नाग माता का अपमान नहीं कर सकता नाग तो अनंत काल से प्रभु महादेव के भक्त रह चुके हैं चंद्रधर को समझना होगा कि वह प्रभु का एकमात्र भक्त नहीं [संगीत] है अपने अहंकार के परिणाम का सामना चंद्रधर कल करेगा अरे आपकी माता देवी सुनो का कीजिए व्यापार पर जाना है आकर विदा तो कीजिए हम [संगीत] देख अपने पति को समझाइए कि वो मुझे देवी मानकर मेरी भी पूजा करे अन्यथा परिणाम भयंकर होगा और बचा लीजिए अपने कुल दीप को देवी क्या सोच रही है देवी स्वामी आपका अभी जाना अनिवार्य है क्या आप रुक नहीं सकते देवी इस समय रुकने का क्या अर्थ नौ काए भर चुकी है सेवक तैयार है आपके सारे पुत्र भी तैयार हैं कुछ दिन रुक जाइए फिर चले जाइएगा कुछ दिनों में क्या हो जाएगा देवी कुछ दिनों में स्वामी आपको एक और संतान के पिता होने का सौभाग्य मिलने वाला [संगीत] है यह तो बहुत ही शुभ सूचना है हर समाचार शुभ समाचार है आप बस भोलेनाथ में विश्वास रखिए खुश रहिए मेरे प्रभु सब कुछ शुभ करेंगे और ऐसे समय में उ नहीं होते हसी हस चलिए [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] च [प्रशंसा] हम शीघ्र ही लौटेंगे अपना ध्यान रखना ओम नमः [संगीत] शिवाय क्या दीपक की ल ये तो फिर से सर्प का रूप लेने लगी यह तो शुभ संकेत नहीं ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नम शिवाय हर हर महादेव आने दो आने दो इन सर्पों को चिंता मत करो भगवान शिवशंकर हमारी रक्षा करेंगे उन्हें हमारी रक्षा करनी होगी क्या पिता श्री अपने भक्त की पुकार को नकार सकेंगे ओम नमः शिवाय हर हर महादेवर हर हर महादेव हर हर महादेवर हर महादेव ओम नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नम शिवाय ओ नमः शिवाय नमय हर हर महादेवर हर [संगीत] महादेव [संगीत] सच्चा भक्त हूं मैं महादेव का मेरी पुकार सुनकर व अपने आप को रोक नहीं सकेंगे वो विवश हो जाएंगे और तब यह सर्प यहां से हटेंगे भी और हम आगे बढ़ेंगे भी हर हर महादेव हर हर [प्रशंसा] [संगीत] महादेव [संगीत] कल कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारे सम्मुख ऐसी परिस्थिति प्रकट हो जाए कि तुम्हें मेरा नाम पुकारना पड़े देवी मंसा कहां है आप सामने आइए मेरी भक्ति की शक्ति का प्रमाण मिल चुका है आपको फिर भी आप अगर अपनी असफलता की माला में एक और मोती जोड़ना चाहती है तो जोड़ लीजिए महादेव का भक्त हूं मैं आपकी यह चाल मेरी भक्ति के सामने नहीं टिकने वाली स्वयं महादेव मेरी रक्षा करने पर विवश हो जाएंगे सामने आइए और इसकी भी साक्षी बनिए छिपने की कोई आवश्यकता नहीं है इधर उधर मत देखो ऐसे मत पुकारो कहीं नहीं छिपी हुई हूं मैं यही हूं दर्शन चाहिए मेरे तो दर्शन प्राप्त करो [संगीत] [प्रशंसा] चंद्रधर क्षमा करना देवी परंतु मुझे आपके दर्शन की क्या आवश्यकता जब स्वयं आपके पिता महादेव की कृपा हो मुझ पर तो भला मुझे किसी और के दर्शन की क्या अभिलाष हो सकती है चंद्रधर तुम्हारी भक्ति में पवित्रता की शक्ति है दोष रहित है मुझे ऐसा ही प्रतीत हुआ था किंतु अब मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तुम्हारी भक्ति पर घमंड का कलंक लग चुका है घमंड नहीं देवी गर्व है मुझे महादेव का ऐसा भक्त होने पर जो उनकी भक्ति पर दृढ़ता के साथ स्थिर है इसमें कैसा दोष है चंद्रधर क्योंकि गर्व और घमंड में भेद है भक्ति विवेक देती है उसे ीनती नहीं है किंतु तुम्हारा विवे कहां गया चंद्रधर जो तुम इस भेद को समझ नहीं पा रहे हो समझी तो आप नहीं है पिता श्री पर प्रभु कृपा का उदाहरण देखने के बाद भी आपके नाग हमारा कुछ नहीं कर सकेंगे यह जानते आप फिर भी आप हमारे मार्ग में बाधा डालने आ गई और बिना बुलाए जो आ जाए चाहे कोई भी हो वो अपमान का भागी तो बनता ही है चाहे मनुष्य हो या देवी देवता और आप तो देवी भी [प्रशंसा] नहीं अगर आप अपने प्रयासों में असफल नहीं होना चाहती है तो अपने नागों को पीछे हटा दीजिए अन्यथा आपकी और उनकी ऊर्जा शक्ति व्यर्थ हो जाएगी तुम्हारी सफलता में मेरा सुख है इसलिए अब पीछे मट हटना पुत्री क्योंकि यही तुम्हारा अंतिम उद्देश्य है हटा अवश्य हटा लूंगी किंतु उससे पूर्व तुम अपने भक्ति पर लगे घमंड को दूर करो जिसके कारण तुम यह नहीं देख पा रहे हो कि तुम्हारे ही आराध्य भगवान शिव शंकर शंभू अनेकों रूप में भक्तों के सामने आते हैं अर्थात यदि तुम मेरी भक्ति करो तो तुम उन्हीं की भक्ति करोगे यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो उन्हीं की पूजा करोगे देवी मैं तो कहूंगा कि आप अपना भ्रम दूर कीजिए कि मैं अपनी अटूट भक्ति को त्याग कर किसी और की भक्ति करूंगा आप कुछ भी कर लीजिए किंतु ऐसा कदापि नहीं [संगीत] होगा संभल जाओ चंद्रधर अभी भी समय है क्योंकि इस बार तुम्हारी भक्ति से अधिक अति विश्वास और अहंकार दिखाई दे रहा है अहंकार और अति विश्वास नहीं देवी मेरा विश्वास है मेरी भक्ति मेरे प्रभु में जो उन्हें अवश्य विवश करेगी यहां आके मेरी सहायता करने के लिए इसलिए अगर आपके नाग स्वयं नहीं हटे तो वो भस्म होंगे महादेव के क्रोध से आप देखती रह जाएंगी देवी किंतु मैं मेरे महादेव की कृपा से इन नागों के के बाधा को भी बहुत सरलता से पार कर जाऊंगा ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः शिवाय [संगीत] [संगीत] शवा उ क्या भय संकट और काल का जो भक्त हो स्वयं महाकाल का ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमय ये अभी भी ये क्यों नहीं समझ पा रहा है कि अपने और अपने पुत्रों की विनाश की ओर बढ़ रहा है धधध धधध धध ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय धे [संगीत] ओम नमः शिवाय ओम नमय ये क्या हुआ पिता श्री ने कहा था वो इसकी सहायता नहीं करेंगे फिर अब इनका बचाव कैसे हो रहा है ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नम शिवाय ओम नमः शिवाय हर हर महादेव मदेव ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नम शिवाय नहीं ये अपमान फिर एक बार यह उचित नहीं मुझे यह कता भी स्वीकार नहीं [संगीत] [संगीत] ओम नमः शिवाय ओम नमः [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शिवाय [संगीत] [संगीत] ये तो फिर मेरे और मेरे नागों का अपमान कर आगे बढ़ने में सफल हो गया आप देखती रह जाएंगी दे किंतु मैं मेरे महादेव की कृपा से इन नागों के बाधा को भी बहुत सरलता से पार कर जाऊ हर हर महादेवर हर हर [प्रशंसा] महादेव देखा देवी महादेव स्वयं विवश है मेरे जैसे भक्त की पुकार सुनने को मेरी सहायता करने [प्रशंसा] को पिता श को यदि यही करना था तो उन्होंने मुझे वचन क्यों दिया दीदी मंसा अनुचित समझ रही है इस बार पिता श्री ने चंद्रधर की सहायता नहीं की किंतु इसकी सहायता स्वामी ने नहीं की मैंने नहीं की तुमने नहीं की तो फिर किसने की माता के इस प्रश्न का उत्तर शीघ्र सोचना होगा मुझे क्योंकि यदि दीदी इतने क्रोध में यहां पहुंच गई और यदि उनका क्रोध शांत ना हुआ तो वो इसके लिए पिता श्री को दोषी ठहरा करर स्वयं पाप की भागी बन जाएंगी और तब यदि पिता श्री का क्रोध जागृत हो गया तो उसके परिणाम की कल्पना भी कठिन है समय कम है दीदी के यहां पहुंचने के पहले मुझे जानना होगा चंद्रधर की सहायता करने वाला कौन है पुत्री मैं वचन देता हूं अब नहीं जाऊंगा उसकी सहायता करने आप देखती रह जाएंगी दे किंतु मैं मेरे महादेव की कृपा से इन नागों के बादा को भी बहुत सरलता से पार कर जाऊगा मेरे इस अपमान का क्या अर्थ है पिताश्री मेरा अपमान क्यों हुआ पिताश्री क्या ये आपको स्वीकार है मंसा दीदी का क्रोध तो बढ़ता ही जा रहा है ऐसी अवस्था में उनका कैलाश आना विनाशकारी सिद्ध हो सकता है मेरे नाक दुर्बल नहीं इसलिए आज जो भी हुआ वो आपके सहायता के बिना संभव ही नहीं क्यों किया पिता श्री आपने ऐसा क्यों किया जगत पिता महादेव अपने शब्दों का मान नहीं रख सके यह संभव ही नहीं सत्यम शिवम सुंदरम है स्वामी सस्वत सत्य अवश्य पुत्री से ही कोई भूल हो रही है हां माता किंतु फिर कौन थे चंद्रधर के सहायक ये तो तुम्हें ही याद करना होगा और वो भी [संगीत] शीघ्र यह तो मेरे रद्र रूप के समान पुत्री मनसा के भीतर के क्रोध के इस प्रभाव से वातावरण प्रभावित हो जाता है सर्वत्र हलचल मची ई पुत्री मंसा के भीतर के क्रोध के इस प्रभाव से वातावरण प्रभावित हो जाता है भीतर का क्रोध इतना प्रभावशाली हो सकता है तो भीतर की भक्ति तो और भी प्रभावी होगी पुत्र यह क्या कर रहे हो तुम आपको अनेकों धन्यवाद माता मुझे समझाने के लिए कि भक्त चंद्रधर की सहायता किसने [संगीत] की सरलता निष्ठा और निश्छल होता ऐसे सद्गुण है जो भक्ति की पवित्रता को बढ़ाते हैं और अहंकार वह दुर्गुण है जो भक्ति को कलंकित करता है
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