आपकी देवी मंसा को देखने की इच्छा अवश्य पूर्ण होगी किंतु उसके लिए आपको एक कार्य करना होगा अपने श्वसुर जी को उनमें विश्वास दिलाकर उनकी पूजा करानी होगी और ऐसा करने पर आप अपने पति को भावी दुर्भाग्य से भी बचा सकेंगी किंतु पिताजी तो बहुत हटी है उन्हें मनाना तो तो आप भी कहां सरलता से पराजय स्वीकार करने वालों में से हैं मुझे विश्वास है कि आप कदापि विफल नहीं होंगी गणपति [प्रशंसा] बापा [प्रशंसा] देवी मंसा का ये आशीर्वाद अपने हाथों में धारण कीजिए फिर अपने शसुर जी की आस्था ही नहीं आप अपने पति का भाग्य भी बदल सकेंगी वासुदेव माधवम गिका वलभ जान नायम रामचंद्र हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे रामरे रामम सौभाग्यवती [संगीत] भव अब चले अन्यथा पिताजी बुरा मानेंगे जी स्वामी मैं आशीर्वाद देकर आ गया नहीं जा सकी मैं गणेश स्वयं आशीष देकर उसके लिए दुर्भाग्य का द्वार खोलना मेरे लिए संभव नहीं था और मैं अभी भी तो उसका कुछ अहित नहीं कर सकती पुत्री मंसा बहुला लखंदर को देवी माता के मंदिर ले जाने में सफल रही संभव है कि यह एक आरंभ है जिस तरह से उसने लखंदर का हृदय परिवर्तन किया उसी प्रकार वह चंद्रधर का भी हृदय परिवर्तन कर सकेगी और उसे भी तुम्हारी पूजा के लिए प्रेरित [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] करेगी [संगीत] पुत्री तुम मेरी पुत्र वधु ही नहीं मेरी पुत्री भी हो मैं भी तुम्हारे पिता के समान ही हूं जिस प्रकार मेरे मित्र शाह ने अपनी पुत्री की हर इच्छा का मान रखा है उसी प्रकार तुम्हारा यह पिता भी तुम्हारी हर इच्छा को पूर्ण करेगा बताओ पुत्री अपनी इच्छा मैं अवश्य पूर्ण करूंगा मांग लो पुत्री संकोच मत करो पिताजी अपने पति की दीर्घायु के लिए मैं देवी मंसा की पूजा अर्चना करना चाहती हूं [संगीत] पिताजी मेरी बस यही एक छोटी सी इच्छा है क्या आप देवी मां को देवी के स्वरूप में स्वीकार कर पाएंगे क्या आप मुझे उनकी पूजा करते हुए देख पाएंगे मुझे आपकी इच्छा जत हो गई है पिताजी [संगीत] उचित है अपने माता-पिता के विरुद्ध जाकर किसी पूजा का क्या फल मिलेगा मुझे और यहां पर आप दोनों ही मेरे माता-पिता है आपकी इच्छा अनिच्छा का सम्मान करना ही मेरा कर्तव्य है तो फिर वो मत मांगो पुत्री जो यह पिता तुम्हें नहीं दे सकता पुत्री क्या देवी मनसा ने तुम्हें भयभीत करकर यहां भेजा है ब मत करो पुत्री बिल्कुल भी डरो मत यह महादेव के परम भक्त का घर है मेरी भक्ति की शक्ति के आगे देवी मंसा का प्रकोप कुछ भी नहीं आओ [संगीत] पुत्री देखो पुत्री यह है लव कक्ष इसमें नाथ तो क्या स्वयं शिव पुत्री मनसा भी नहीं प्रवेश कर सकती विनय के अभाव से मूर्खता का ही भाव जागृत होता है ये कक्ष तो मैंने तुम्हें विश्वास दिलाने के लिए बनवाया है किंतु इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी क्योंकि मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरी भक्ति की शक्ति का सामना कर तो तुम्हारे पति और मेरे पुत्र का कोई अरत नहीं कर सकती इसलिए पुत्री ब भीत होकर उनकी पूजा की कोई आवश्यकता नहीं पिताजी क्षमा चाहती हूं आपने अपनी पुत्री बनाया है इसीलिए कह रही हूं विश्वास किसी से भयभीत होकर या किसी के कह देने से उत्पन्न नहीं होता और मैं भी यह नहीं चाहती कि उन्हें देवी रूप में स्वीकार करने के लिए कोई भी विवश हो अभी तो मैं तो यह चाहती हूं कि उनकी करुणा उनके प्रताप उनकी दिव्यता से प्रभावित हो तभी आप अपना शीश उनके सामने झुकाए प्रिय मुझे पता है कि तुम मेरे प्राणों के लिए चिंतित हो किंतु यदि हमारा साथ नियत है तो मुझे कोई हानि नहीं पहुंचेगी इसलिए मेरा तुमसे अनुरोध है कि पिताजी के अटूट विश्वास को डिगा करर मेरे जीवन की कामना मत करो नहीं स्वामी नहीं किसी को विवश करना ये मेरा स्वभाव नहीं और आपके विरुद्ध जाऊ ऐसा मैं कदा भी नहीं करूंगी मेरी आशा को निराशा में बदल दिया इसने इतनी आसानी से पराजय स्वीकार कर ली पराजय नहीं माता प्रथम प्रयास है जो सफलता की प्रथम सीढ़ी है किंतु अब पुत्री मनसा को वह करना ही होगा जो अनिवार्य है [संगीत] [संगीत] आ पुत्री अब क्यों रोक दिया उन्हें जाने दो करने दो उन्हें उनका [संगीत] [प्रशंसा] कार्य [संगीत] [संगीत] [संगीत] मुझे तो ज्ञात ही था कि मेरी बहू रानी को ही मिलेगी अंगूठी अपने पति की दीर्घायु के लिए मैं देवी मनसा की पूजा अर्चना करना चाहती हं मेरी बस यही एक छोटी सी इच्छा है क्या आप देवी मां को देवी के स्वरूप में स्वीकार कर पाएंगे मेरे घर में महादेव को छोड़कर किसी की पूजा कैसे हो सकती [संगीत] है मैं कल सुबह ही पुत्री बिहुला को शिव मंदिर ले जाऊंगा और पुत्र लखंदर के बाती उसे भी शिव भक्त बनाऊंगा तब वह समझ जाएगी कि जो भी है एक मात्र मेरे प्रभु महादेव ही है तो फिर वो मुझसे कभी ऐसा अनुचित निवेदन नहीं करेगी जाओ अपनी भाभी को उनके कक्ष में ले [संगीत] जाओ [संगीत] स्वामी चिंता मत करो प्रिय मैं कुशल हूं और आज के बाद हमारी सभी चिंताएं दूर हो जाएंगी क्योंकि शिव पुत्री मनसा ने वचन दिया है आज मैं अपने पुत्र लखंदर की रक्षा कर मैं उन्हें अपने परिवार से दूर रहने पर विवश कर दू [संगीत] द यही अवसर है पुत्री अपने नागों को उनका कार्य करने दो एक बार यदि वह लौ कक्ष में प्रवेश कर गए तो नाग प्रवेश नहीं कर पाएंगे प्रतीक्षा क्यों कर रही हो पुत्री नियति निर्धारित है जो होना है वो होकर रहेगा इसलिए मत रोको नागों को उन्हें प्रवेश करने दो नियती तो है किंतु वो इतनी निष्ठ और इतनी कठोर क्यों है यह कैसी परीक्षा है मेरी चंद्रधर को समझाने के लिए यह भी अनिवार्य है पुत्री नागों को मत रोको पुत्री उन्हें प्रवेश करने दो पति यदि पास ना हो तो उसका क्या दुख होता है वो मुझे ज्ञात है और यदि पति संसार छोड़कर चला जाए तो कितनी पीड़ा होगी उसका भी मुझे अनुमान है और बेहुला को मैं वो दुख दे दो जिसे मुझ पर अटूट विश्वास है जो मुझे अपना मार्गदर्शक समझती है और अपना रक्षक भी नहीं मैं उसके साथ ऐसा नहीं कर [संगीत] सकती नहीं कर सकती इसके प्रति मैं इतनी कठोर नहीं बन सकती [संगीत] माता [संगीत] सा नि सा नि धनी प ध प ध प म प सा नि सा नि धनी प ध प म म म नि सा [संगीत] [संगीत] विघ्न हरता गणेश शांत खड़े हैं तो मैं ही पुत्री मनसा को समझाने का प्रयास करती हूं नियती का लिखा बदला नहीं जाता पुत्री लखंदर के भाग्य में जो लिखा है वह होकर रहेगा इसलिए जो होना है उसमें अपना भाग निभाकर अपना कर्तव्य पूर्ण करो और संसार को देवी मंसा के आशीष का भागी [संगीत] बनाओ दीदी मंसा पिता श्री महादेव के अनुसार यह विवाह आपके देवी पद की प्राप्ति में अहम भूमिका निभाएगा तुम्हारी सफलता में मेरा सुख है इसलिए अब पीछे मट हटना पुत्री क्योंकि यही तुम्हारा अंतिम उद्देश्य [प्रशंसा] [संगीत] है कोई भी आ जाए आज भीतर नहीं आने दूंगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आज की रात्रि मेरे पुत्र तक तो क्या मेरे घर तक भी नहीं पहुंच पाएंगे [संगीत] सर्प आपने मेरे लिए जो भी किया उसके लिए धन्यवाद वोह अंगूठी अरे वोह तो भूल से मेरे हाथ में पड़ गई थी नहीं नहीं उससे पहले माता के दर्शन के लिए आपने अनुमति दिलवाई और वो कंकट जो मेरे पांव के नीचे आने वाला था और आपने चोट पत्नी को लगे या पति को पीड़ा तो दोनों को ही होती है और तुम्हें कष्ट होता हुआ मैं कैसे देख सकता [संगीत] हूं आपको कोई पीड़ा हो ये तो मैं भी नहीं देख [संगीत] सकती [संगीत] धन्यवाद मैं अपने प्राण गवा दूंगा किंतु तुम तक कोई कष्ट नहीं पहुंचने दूंगा ऐसे अशुभ वचन मत बोलिए स्वामी आपके प्राण सदैव सुरक्षित रहने [संगीत] चाहिए चिंता ना करो देवी यदि किसी सर्प ने य अग्नि पार भी कर ली व हमारे पुत्र के कक्ष तक नहीं पहुंच पाएगा नहीं पहुंच [संगीत] पाएगा उस ल की चादर को भेद कर तुम्हारे नाग अंदर कैसे प्रवेश करेंगे चंद्रधर ने नागों के प्रवेश के लिए तनिक भी स्थान नहीं छोड़ा यदि आज मैंने अपनी भक्ति से अपने पुत्र की रक्षा कर ली यदि विवाह की रात्रि उसका अंत नहीं हुआ तो आज के बाद आप मुझे दर्शन कभी नहीं देंगी लाइए मैं घाव पर लेप लगा दूं अच्छा तो जब मैंने कक्ष में प्रवेश किया तो तुम यह लेप तैयार कर रही थी [प्रशंसा] उस लॉ कक्ष में ये छिद्र कैसे बन गया सर य तो कोई शर्त नहीं [संगीत] है लगता है बारात लौट रही है मैंने चंद्रधर जी को वचन दिया था कि उनके लौटने तक मैं सुरक्षित लौह कक्ष का निर्माण कर दूंगा [संगीत] इस छेत्र को मैं लाख से भर देता हूं पता नहीं माता मैंने उचित किया है या अनुचित पता नहीं क्यों उन दोनों के लिए बहुत दुख अनुभव हो रहा है जीवन साथी यदि एक दूसरे की पीड़ा समझने लगे तो दांपत्य जीवन में प्रेम और भी गहरा हो जाता है
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