हो गया तुम्हारा लेखा जोखा जी पिताजी लाओ मुझे दिखाओ पिताजी वो अरे लाओ पिताजी पिताजी [संगीत] [संगीत] पुत्र नाविक से कहना अपरान नाव तैयार रख मुझे उज्जैन जाना है य कैसा चित्र बन गया मुझसे पिताजी ने देख लिया तो नहीं नहीं मैं इसे ढक देती [संगीत] हूं पहले एक दूसरे का सामने आना और अब यह चित्र भविष्य के गर्भ में अवश्य कोई कारण छुपा होगा अचानक उज्जैन पिताजी कोई आवश्यक कार्य है क्या भूल गए मैंने तुम्हें संदेश के साथ उज्जैन भेजा था अब वही संदेश मुझे मेरे तक शीघ्र पहुंचाना है तुम जाओ जाके नाव की व्यवस्था देखो मैं ब्रह्म महूरत में अकेला निकलूंगा उचित है पिताजी यह इतना महत्त्वपूर्ण है तो मैं सभी प्रबंध कर दूंगा आप विश्राम [संगीत] [संगीत] कीजिए देवी मां पर अपने विश्वास को अडिग रखिएगा सदा आपका भला होगा और शीघ्र ही आपको अपने पति के बारे में ज्ञात [संगीत] होगा क्या हुआ स्वामी रात्रि के तीन प्रहर बीत चुके हैं सुबह होने को है और आप सोए ही [संगीत] नहीं ना जाने कौन वह योग्य युवक होगा जो मेरी पुत्री का हाथ थामे [संगीत] का [संगीत] आप आप यहां हां तुम्हारे मृग नैन मुझे यहां खींच लाए [संगीत] बला सर्प काट गया तुम्ह मैं कुछ करता [प्रशंसा] हूं चाहे कुछ भी हो जाए मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा [संगीत] भला आंखें खोलो बला बिला आंखें खोलो बिलवा देखो हम व जी के यहां पहुंच गए वैद जी वैद जी वैद जी मेरी सहायता करिए वैद जी देखिए उसे क्या हो गया वैद जी सर्प ड है [संगीत] उसे ै जी कोई मेरी सहायता करो कोई मदद करो मेरी इसके प्राण संकट में कोई मेरी मदद करो मेला आख खोलो बला बलाला आख खोलो बलाला मा मा [संगीत] [संगीत] मा पुत्री क्या हुआ पुत्री तुम ठीक तो हो हां मां हां पिताजी मैं मैं बिल्कुल ठीक हूं अब देखिए मुझे कुछ नहीं हुआ मैं बिल्कुल ठीक हूं अब बस कोई बुरा स्वप्न देख लिया है शायद मां पिताजी आप मेरी चिंता ना करें मैं बिल्कुल कुशल हूं उचित है पुत्री सो [संगीत] जाओ वो चित्र देखा आपने चंद्रधर के पुत्र लखंदर का चित्र है वो बला ने बनाया है गजानन महाराज ने कहा था हमें संकेत मिलेंगे कहीं यह वो संकेत तो नहीं नहीं नहीं ऐसा कहिए भी मत यह क्या कर रहे हैं आप कहां जा रहे हैं यह तो पता नहीं बस इतना पता है चंद्रधर के पुत्र लखंदर की मृत्यु उसके विवाह की रात्रि में होगी अब यह सब पता होते ही मैं अपनी पुत्री का विवाह उससे नहीं कर सकता चंद्रधर को दिए वचन के कारण मैं अपनी पुत्री को दुर्भाग्य के उस अंधकार में जाते हुए नहीं देख सकता नहीं देख [संगीत] सकता पिताजी क्या कह रहे कैसा वचन कैसा दुर्भाग्य नहीं नहीं कुछ नहीं पुत्री मैं तो बस ऐसे ही बड़बड़ा रहा था तुम चिंता मत करो पिताजी मुझे अपनी नहीं मुझे आपकी चिंता है आपके द्वारा दिए गए वचन की चिंता है कि कहीं मेरे कारण आपका वचन भंग ना हो जाए और पिताजी वैसे भी जोष महाराज बाल गजानन जी ने ने मुझसे कहा था कि मेरा वर्क कौन होगा इसका संकेत मुझे स्वयं मिलेगा स्वयं देवी मां उन्हें मुझ तक पहुंचाएंगे मुझ तक कहीं वो पहुंच तो नहीं गए उस दिन मंदिर के निकट देखा उन्हें फिर हमारे घर फिर ये चित्र वो स्वप्न हर स्थान पर मेरी कल्पना में वही है हां पिताजी मुझे लगता है वही मेरे वर है वही मेरे बर है वही मेरे बर है वही मे दुर्भाग्य जिसका पीछा कर रहा हो उससे तुम्हारा विवाह मैं कदा भी नहीं होने दूंगा भले ही तुम्हें कुछ भी लग रहा हो चंद्रधर के पुत्र का भविष्य अंधकार में उससे तुम्हारा विवाह नहीं होने दगा नहीं होने दूंगा मैं चंद्रधर तो क्या मित्र को दिया हुआ वचन तोड़ दोगे मित्र सा वचन भंग करना चाहते हो मित्र पिताजी क्या आपको अपनी पुत्री के भाग्य पर विश्वास नहीं है क्या तुम्हें अपनी मित्र की शिव भक्ति की शक्ति पर विश्वास नहीं रहा मित्र साह कहो मित्र उत्तर दो क्या इस महादेव के भक्त के शब्दों का कोई प्रवाह नहीं तुम पर दोष नहीं अखंड सौभाग्य है आपकी पुत्री के भाग्य में अपने पति के प्रति निष्ठा का ऐसा अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करेंगी आपकी पुतली जिससे आने वाले समय में बिहुला नाम का एक उत्सव मनाया जाएगा अब निश्चिंत हो जाइए आप दोनों क्योंकि आप जो चाहे करें जो होना है वो तो होकर ही रहेगा कहो मित्र कहो मैं तुम्हारे मुख से सुनना चाहता हूं क्या है तुम्हारा अंतिम उत्तर [संगीत] [संगीत] जाओ मित्र शीघ्र जाओ बारात लेकर आओ तुम्हारे पुत्र से मैं अपनी पुत्री का विवाह करूंगा [संगीत] आ [संगीत] मित्र चंद्रधर मेरे [संगीत] मित्र आप प्रसन्न नहीं है दीदी प्रसन्न कैसे हो सकती हूं अनुज गणेश जिस बेहुला को मुझ पर अटूट विश्वास है उसका पते छीनना होगा मुझे और वो भी विवाह की प्रथम रात्रि में मैं तुम्हारी चिंता समझ सकता हूं मित्र पर इस शिव भक्त की भक्ति की शक्ति पर विश्वास रखो मैं अपने पुत्र का हित नहीं होने दूगा मैं अपने पुत्र का हित नहीं होने [संगीत] दूंगा अनुज गणेश तुम्हें तो ज्ञात है कर्तव्य से मुख मोड़ना मेरा स्वभाव नहीं किंतु ऐसा कर्तव्य मुझे नहीं निभाना जो किसी की आस्था पर ठेस पहुंचाए विवाह की रात्रि में बेहुला के पति के अंत का आदेश मैं नहीं दे सकती यह अन्याय मैं नहीं कर सकती नियति को पूर्ण करने के लिए कोई अन्य उपाय ढूंढना होगा मुझे मैं बेहुला के विश्वास को उसके विश्वास को मैं नहीं तोड़ सकती पुत्री विश्वास ऐसा भाव है जो नियति को भी चुनौती दे सकता है संभव है उस क्षण के आने से पहले ही उसका भाग्य बदल [संगीत] दे हलवाई को मिष्ठान और पकवान के लिए बोल दिया है माली पुष्प लेकर आता ही होगा बारात रुकेगी कहां मंदिर के निकट की धर्मशाला में ना वहां बोल दिया आपने मैं बोलू उसके पहले ही चंद्रधर ने रोक दिया उसी दिन बारात चंदन नगर लौट जाएगी यहां रुकेगी [संगीत] नहीं मां और पिताजी उल्लास और उत्साह से वंचित है उनके मुख पर तो बस भय का भाव है क्या करूं मैं आपकी चिंता समझती हूं मां पिताजी [संगीत] अपनी पुत्री की विदाई इस तरह से भय और संदेह के साथ करेंगे आप दोनों नहीं नहीं पुत्री भई नहीं चिंता नहीं कोई संदेह नहीं है हम तो प्रसन्न है पुत्री हूं आप दोनों की अच्छी तरह से समझती हूं आपके मन की बात चिंता भविष्य के दुख को कम नहीं करती अी तो आज के वर्तमान के सुख को छीन लेती है आने वाले कल का सामना हम दो प्रकार से कर सकते हैं विश्वास के साथ चिंता के साथ और आप दोनों भूल गए जो गजानंद महाराज जी ने क्या कहा था कि मेरी कुंडली में अखंड सौभाग्य है और इसके लिए अगर मुझे पर्वत भी झुकाना पड़े तो वह मैं झुकाऊ ये मेरा निर्णय है मैं अपने पति के साथ कुछ भी अनुचित नहीं होने दूंगी उन पर कभी कोई संकट नहीं आने [संगीत] दूंगी मां सब कुशल तो है [संगीत] ना आप इतनी शांत क्यों है मां क्या छिपा रहे हैं आप दोनों मुझसे और पिताजी अचानक उज्जैन क्यों गए और जब से पिताजी गए आप इतनी चिंतित क्यों है चिंता की क्या बात होगी पुत्र कोई चिंता की बात नहीं है और तुम्हारे पिताजी तो बड़े शुभ कार्य के लिए गए हैं तुम्हारे पिताजी के परम मित्र शहा जी की पुत्री है बिहुला तुम दोनों का संबंध तो दोनों मित्रों ने बचपन में ही तय कर दिया था बस उसी का स्मरण कराने गए हैं तुम्हारे पिताजी स्मरण है मित्र साहा [संगीत] को और मेरे मित्र साहा ने स्वीकार भी कर लिया है उसने कहा है कि शीघ्र ही हम लखेंद्र की बारात लेकर उज्जैन आए पुत्र का विवाह है शनों का और समय भी कम है और बहुत सारी तैयारियां भी करनी है किंतु इस संबंध में कोई समस्या भी है पिताजी [संगीत] यह विचार क्यों आया तुम्हारे मन में क्योंकि जब आप यात्रा में थे तो मां बहुत तनाव में थी पिताजी क्या किसी कारणवश व इस विवाह के लिए मना तो नहीं करने वाले ना यदि उसका कोई कारण था भी पुत्र तो वह अब नहीं रहा चिंता की कोई बात नहीं क्योंकि उसे क्या भ संकट और काल का जो भक्त हो स्वयं महाकाल का वैसे भी जो शी गजानन महाराज ने कहा था कि देवी मां पर विश्वास रखना तो इसमें चिंता की क्या बात है पिताजी किंतु एक समस्या है अ समस्याओं बाधाओं सबको भूल जाओ बारातियों की सूची बनाओ और ध्यान रहे बाराती तुम्हारे और मेरे समान शिव भक्त होने चाहिए वहां तुम्हें माता की पूजा की अनुमति मिलना कठिन है क्योंकि चंद्रधर का एक विश्वास है उसके परिवार में ही नहीं अभी तो उसके संपर्क में आने वाले सभी महादेव के भक्त ही होने चाहिए समस्या का आकार तो हल करने वाले पर निर्भर करता है और यह तो बहुत छोटी सी समस्या है भक्त है वोह और एक भक्त की आस्था को समझेंगे महादेव की भक्ति के साथ-साथ मां की भक्ति करने की अनुमति भी अवश्य देंगे मुझे उसे यह भी ज्ञात नहीं कि बिहुला को अपने साथ अपने शसुर को भी पूजा के लिए तैयार करना होगा विवाह के दिन हम दोनों को मिलकर यह कार्य करना होगा दीदी हा किंतु मेरी इच्छा है इस बार चंद्रधर स्वयं मेरी पूजा करना स्वीकार करें और यदि चंद्रधर ने य स्वीकार नहीं किया तो क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में वह अपने महादेव की भक्ति के प्रति बहुत कट्टर हो गया है आप चिंता ना करें पिताजी मैं देवी माता और स्वयं महादेव की सहायता से उन्हें बना लूंगी बेहुला जैसी निर्मल भक्त को भला मैं कष्ट में कैसे देख सकती हूं मैं स्वयं जाकर समझाऊ चंद्रधर [संगीत] को असंभव ऐसा नहीं हो सकता मा असं क्या नहीं हो सकता देख अभी से अपने होने वाले प्रीतम के सपने देखने लगी य कैसा दृश्य देखा मैंने देवी मां य कैसा संकेत देना चाहती हैं आप मुझे हर हर महादेव नानी विनीता माता शक्ति महादेव की भी यही इच्छा है मेरी भक्ति करो चंद्रधर अन्यथा कष्ट तुम्हे भी होगा और मुझे बारात तैयार है पुत्र कहां है वो अवश्य अपने कक्ष में तैयार हो रहा होगा आइए ना आप [संगीत] चलिए यह रहे दूल्हे [संगीत] राजा हमारे दूल्हे राजा पर किसी की कुदृष्टि ना पड़े मैं भी यही चाहती हूं किसी की कुदृष्टि ना पड़ी तुम्हारे सुख पर ये किसका स्वर था जकार ज गरी आन सास को [संगीत] ददा भग मेरे अतिथि जड़ हो गए नहीं इस बार में अपना कोई अहित नहीं होने दूंगा वैवी रागा भगनी शवी नागेश भता नागेता नागेरी चिंता मत करो चंद्रधर मैं यहां किसी की अहित करने नहीं अभी तो तुम्ह समझाने आई हूं यही समझाना चाहती है ना आप कि मैं शिव भक्ति छोड़कर आपका भक्त ब नहीं ज मैं चाहती हूं कि तुम सभी देवी दे क्या चाहती है यह मैं नहीं जानना चाहता मैं तो आपसे बात भी नहीं करना चाहता महादेव के प्रति टूट भक्ति अतुल निय फिर भी आप बार-बार मेरी भक्ति को भंग करने क्यों आ जाती [प्रशंसा] है दृढ़ निश्चय ही व्यक्ति के निर्णय में सहायक होता है
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