हरता श्री गणेशा श्री गणेशा श्री समय आ गया है अब हम स्वर्ग लोक पर विजय प्राप्त करेंगे स्वर्ग लोक हमारा होगा असुरों का हमें इस लो चाहि हमें स्वर्गलोक चाए चाहिए स्वर्ग असुर सम्राट यह लोग भले ही युद्ध के लिए लालायित है किंतु क्या इनम इतनी शक्ति है देखि कितने ीन हो चुके हैं [संगीत] यह और देवताओं को युद्ध में परास्त करने के लिए हमें शक्तिशाली सेना की आवश्यकता है यदि इन असुर सेनाओ द्वारा हमें स्वर्ग लोक पर आधिपत्य स्थापित करना है तो सबसे पूर्व इनके भोजन की व्यवस्था करनी पड़ेगी अन्यथा इन निर्लों को शक्ति नहीं मिलेगी हम उचित कहता है दं तक स्वर्गलोक चाहिए हमें स्वर्गलोक चाहिए असुरो आज से नवीन नियम लागू होगा यहां अब तुम सब बालकों का नहीं राक्षस का भक्षण करोगे भक्षण करोगे भक्षण करोगे भक्षण करोगे भक्षण करोगे जाओ और अपना भोजन आरंभ करो और अपनी शक्ति बढ़ाओ [संगीत] जाओ असुर स्त्रियों का भक्षण ऐसा आदेश क्यों दिया सम्राट एक कपटी स्त्री आदि शक्ति की भक्त तारुका के कारण हमारी यह स्थिति हुई है ये कदापि मत भूलो बा वो स्वयं तो चली गई यहां से तू हमें हमारी दुर्दशा के लिए यहां पीछे छोड़ गई हमारी दुर्बलता है यह राक्षस भूल जाएंगी आदि शक्ति की भक्ति करना और वैसे भी अब हमें इनकी कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि स्वर्ग की अप्सराएं हमारी प्रतीक्षा जो कर रही [संगीत] है [प्रशंसा] बचाओ बचा अत्यंत दुष्ट था ना ये राक्षस माता एक दारुका पर क्रोध के कारण इतना बड़ा अन्याय किया उसने अपने ही समुदाय की स्त्रियों को सभी असुर स्त्रियों को इतनी भयानक मृत्यु का दंड दिया यह भी नहीं सोचा उसे जन्म देने वाली भी एक नारी ही है दुराचारी राक्षसों में भी इस राक्षस का ये कृत स्त्रियों पर ऐसा आघात तो नीचता की पराकाष्ठा है असुरों की तामसी प्रवृत्ति यही होती है गणेश दया ममता कलेश मात्र भी नहीं होता उनमें होता है तो एक मात्र अहंकार का अंधकार दारुक से भी अधिक कुटल और दुष्ट था एकाक्ष और जो व चाहता था उसके लिए वह किसी भी सीमा का उल्लंघन करने के लिए तैयार था और फिर जो उसे चाहिए था वह वो उसने प्राप्त कर ही लिया अर्थात एकाक्ष अपने राक्षस की सेना लेकर स्वर्ग पहुचा जिसके कारण ऐसा भूकंप बन हुआ कि स्वर्ग ही कंपित हो देव सभा सभी महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार कर चुकी है और अन्य समाचार भी संतोष जनक पृथ्वी पर संतुलन शांति पूर्वक स्थापित है ऋषि गण स्त्रिया मनुष्य सभी सुरक्षित और असुरों ने अन्य जीव के साथ शांति पूर्वक जीवन व्यतीत करना सीख ही लिया मैं सहमत इंद्रदेव दारू के आतंक के पश्चात पृथ्वी पर शांति के लिए हम निरंतर दृष्टि बनाए हुए हैं वहा सर्वत्र शांति है हा सूर्यदेव आप उचित कह रहे हैं किंतु हमें तब भी सतर्क रहना चाहिए इन असुरों का कदापि विश्वास नहीं किया जा सकता वो किसी भी समय कोई ना कोई नवीन संकट अवश्य उत्पन्न कर सकते [संगीत] हैं इंद्र [संगीत] इंद्र इसका स्वर था ये स्वर्गलोक का कोई भी वासी मुझे इस प्रकार नहीं पुकार सकता तो फिर कौन है यह [संगीत] [संगीत] कौन हो तुम और यहां स्वर्ग लोक आकर इतनी धृष्टता से मेरा नाम लेने का दो क्यों कर रहे [संगीत] [संगीत] हो वाह उत्तम अति उत्तम चमक दमक से परिपूर्ण है स्वर्ग लोक सुंदर अति सुंदर बहुत सुना था स्वर्ग लोक संपन्न है स्मृत है और आज अपने इस एक मात्र नेत्र से एक लिया जो कुछ सुना था सत्य था और समझ में भी आ गया कि तुम देवता गण अपने इस स्वर्ग लोक की रक्षा क्यों करते हो और क्यों ना करो रक्षा यह दुष्ट क्यों आया है यहां रक्षा करने योग्य सभी कुछ तो है तुम देवताओं के पास बड़े ठाट है तुम देवताओं के इतने सुंदर भवन है तुम्हारे आभूषण है रेशमी वस्त्र है और शीष पर धारण करने हेतु इतने सुंदर सुंदर मुकुट है स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध है यहां और वो जिनसे मैं और मेरे असुर सर्वाधिक मुग्ध है और वह अनेकों अद्भुत सुंदरिया [संगीत] है बस अब ना एक भी शब्द कहना और ना ही एक भी पग आगे बढ़ाना अन्यथा इसका का भीषण परिणाम भुगतना होगा तुम्हें ओ इंद्रदेव मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई क्या करता तुम्हारा यह सुंदर लोक देखकर सब कुछ स्वयं मेरे मुख से निकलता ही चला गया इ मेरे शब्दों को ध्यान से सुन लो देवताओ अब तुम्हारी गीदड़ भबकी से भयभीत नहीं होंगा मैं कदापि नहीं परिणाम तो अब तुम्हारा अच्छा नहीं होगा इंद्रदेव क्योंकि अब तुम्हारे राज की इति समाप्ति करूंगा मैं तुम देवता यहां स्वर्ण सिंहासन पर विराजित हो और हम वहां कंकड़ प थर की शैया पर विश्राम करने के लिए विवश है तुम देवता गण यहां भोग और विलास का जीवन बिता रहे हो और वहां मेरे असुर भूख और प्यास से मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं ये उचित नहीं है कदा भी उचित नहीं है मूर्ख असुर तुम्हारे कर्मों के कारण ही माता महाकाली ने तुम्हें रसातल लोक में स्थित किया है किंतु तुमने वहां पर भी कुकर्म किए अपने सारे साधन नष्ट कर दिए जब तुम ही प्रकृति का निराधार करोगे तो प्रकृति तुम्हारे साथ कैसे रहेगी और जब प्रकृति नहीं रहेगी तो तुम्हे कष्ट ही कष्ट होगा प्रवचन बंद करो अपना सूर्यदेव उधर भरा है इसलिए मुख से ज्ञान फूट रहा है भूख लगने पर ज्ञान नहीं मात्र भोजन की इच्छा होती है भोजन की तो ठीक है परिस्थिति उलट देते हैं तुम कोमल देवता हमारा स्थान ले लो और हम हम असुर रहेंगे स्वर्ग लोक में स्वर्ग लोक में स्वर्ग में स्वर्ग लोक में कदाचित तुम ऐसे मानोगे नहीं प्रतीत होता है बल पूर्वक मुझे तुम्हें रसा लोक लौटाना ही होगा अर्थात य सूरे का नहीं है मेरे योद्धाओं और उनके अस्त्रों के समक्ष तुम शक्तिहीन हो इंद्रदेव शक्तिहीन यह देखो मेरा योद्धा और तुम्हारी पराजय का [संगीत] स्वरूप और [हंसी] दूसरा तुम देवताओं के लिए तो मेरे योद्धा ही पर्याप्त है किंतु चिंता मत करो ये तुम्हें अधिक कष्ट नहीं देंगे बस बस बहुत बोल चुके तुम अब और नहीं तो दिखाओ अपना पराक्रम और शांत कर दो मेरा क्रोध अन्यथा ये स्वर्ग लोक छोड़कर चले जाओ रसातल में संतक [हंसी] कदाचित थोड़ा कष्ट तो तुम्हें देना ही चाहिए इंद्रदेव तुम्हें कष्ट देने के सुख से मैं मैं कैसे वंचित रह सकता [हंसी] हूं बाओ बोल दिखाओ अपना [संगीत] पराक्रम [संगीत] दुष्ट असुर शीघ्र अंत करूंगा मैं [संगीत] तुम्हारा साहस सुरो हम देवताओं का सामना नहीं कर पाओगे तुम इंद्र तुम कितने भी प्रयास क्यों ना कर लो मुझे आगे बढ़ने से कदापि नहीं रोक पाओगे कदापि नहीं स्वर्ग पर आक्रमण करने की तुम्हारी उद्दंडता का दंड मैं तुम्हें अवश्य दूंगा दुष्ट असुर [संगीत] हम देवताओं की शक्ति से पार पाना इतना सहज नहीं है क्यों परिचय प्राप्त हो गया ना हमारे बल का स्मरण रहे तुम्हारा सामना देवराज इद्र से हुआ था अपने असुरों को लेकर लौट जाओ अपने लोग अन्यथा पुन तया नहीं करूंगा मैं चलिए देवगन चलो स्वीकार करता हूं मैं भूल हो गई मुझसे थोड़ा कम माक लिया था मैंने तुम देवताओं को तो ठीक है अब मैं युद्ध का नियम परिवर्तित करता हूं अब एक दिन देवता और एक असुर में युद्ध नहीं [संगीत] होगा यह दुष्ट कर क्या रहा है इंद्रदेव ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे किसी का आवान कर रहा [संगीत] [संगीत] है अब ये धनी कैसी है यह ध्वनी सुनाई दे रही है किंतु कोई दिखाई क्यों नहीं दे रहा य क्या है हमारे समक्ष ये कैसे विचित्र और भयंकर असुर है और अपनी इस भयानक ध्वनि के साथ ये हमारी ओर ही बड़े आ रहे हैं देवताओ अब आएगा आनंद युद्ध [हंसी] [प्रशंसा] [प्रशंसा] का क्यों देवताओ कैसा लगा मेरा उपहार स्वर्ग लोक आया हूं असुर हूं किंतु कुछ नियम मैं भी जानता हूं इसलिए अपने अनुसार उचित उपहार लाया हूं तुम सभी के लिए भोजन प्राप्त होगा हमें आक्रमण करेंगे हम स्वर्ग लोक पर अधिकार करेंगे असुरों का साम्राज्य होगा स्वर्ग लोक हमारा होगा भोजन प्राप्त होगा हमें स्लोक हमारा होगा स्वर्ग लोक पर अपना अधिकार होगा भोजन [हंसी] [संगीत] करेंगे [संगीत] इस ससुर समूह का क्या करें [हंसी] हम आक्रमण गन अपने अपने अस्त्रों का आवाहन कीजिए और नष्ट कर दीजिए इन दुष्टों को या व्यर्थ है देवताओं का यह प्रहार हमें उनसे कोई क्षति नहीं होगी किंतु हमारे प्रहार से नष्ट होंगे देवता देवगन और शक्तिशाली प्रहार कीजिए इन पर हमारे निकट पहुंचे इसके पूर्व ही इन्ह रोकना होगा हमें मैं सूर्यदेव तुम्हें अपनी ऊर्जा से भस्म कर दूंगा [संगीत] आ संकट विकट है यह असुर तो असंख्य इन्ह कहा तक नष्ट करेंगे हम सूर्यदेव अग्नि देव वरुण देव वायु देव सभी घिरे हुए हैं य दुष्ट कुछ नष्ट होते हैं तो उनसे अनेक गुना अधिक उत्पन्न भी हो जाते अब कहो देवताओं आनंद आया अब बोलो इस युद्ध के पश्चात किसका अधिकार रहेगा स्वर्ग लोक [संगीत] पर असुर सम्राट देखा आपने मैंने कहा था ना यदि हमारी सेना शक्तिशाली हुई तो हमें कोई परास्त नहीं कर सकता उचित था तुम्हारा कथन उचित था दं तक अब कुछ ही समय में देवताओं की पराजय निश्चित है [हंसी] निश्चित उन असुरों से युद्ध के लिए देव सेना भी प्रकट ई किंतु उनके सभी प्रयास व्यर्थ हो गए क्योंकि देवता और उनकी सेना नहीं टिक सकी उन दुष्ट असुरों के समक्ष इस युद्ध में हमारा सफल होना संभव नहीं है हमारी सुरक्षा संकट में आ जाएगी हमें इसी क्षण यहां से प्रस्थान करना होगा मुझे ज्ञात था यही होगा यही भाग गए सभी भीरू देवता जद था मुझे विजय होंगे हम स्वर्ग लोक पर अब हमारा हम असरो का अधिकार होगा हम असरो का आप सभी देवता स्वर्गलोक असुरक्षित छोड़कर चले गए उस समय हम निरपाल हो गए थे प्रथम पूज्य गणेश जी उन असंख्य रक्त पिपासु कीट असुरो के लाचार थे हम और स्थिति हमारे नियंत्रण के बाहर हो चुकी थी इसलिए उस समय युद्ध को छोड़कर स्वयं की रक्षा को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक था इससे भविष्य में हम सहायता प्राप्त कर उन असुरों का सामना कर सके और स्वर्ग लोक को उनके प्रभाव से मुक्त करा [संगीत] सके तो सहायता के लिए आप कहां गए थे देव राजेंद्र उसे एक मात्र शक्ति के पास जो उस स्थिति में हमारी सहायक बन सकती थी कदाचित मैं समझ गया वह शक्ति कौन [संगीत] थी जब जब संसार में पाप की अति होती मैं अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवश्य प्रकट होती यह निश्चित पाप और पापियों का सर्वनाश अवश्य [संगीत] तम मेरे अगले अवतार के प्रकट होने का समय आ गया देवी छिन [संगीत] मस्ता [संगीत] [संगीत] [हंसी] स्वर्ग लोक पर अब मेरा और मेरे असुरों का अधिकार है मेरा ये भोग विलास ये सुख सुविधाओं भरा जीवन इस सब पर अब हमारा असरों का अधिकार है असरों का ये सब अब हमारा है हमारा और मैं हूं स्वर्ग लोक का सम्राट सम्राट [हंसी] [संगीत] एकक [हंसी] यह सब यह सब अब हमारा है [हंसी] हमारा कैसा भयंकर स्वर है ये कौन [संगीत] है दुष्ट प्रवृत्ति वाले व्यक्ति की कोई भी मनोकामना कभी पूर्ण नहीं हो सकती चाहे वह कितना भी प्रयास कर ले
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