Sunday, 28 December 2025

देवी महामाया ने असुरों का उपाय कैसे किया था Akanksha Puri Malkhan S Vighnaharta Ganesh Episode

हता श्री गणे श्री गणे फिर फिर क्या हुआ माता वही हुआ जो श्री महाकाली की इच्छा थी जो मेरी इच्छा थी य युद्ध तो और भी भयंकर होता जा रहा है और नारायण क्लांत हो रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इन असरों का अंत क्यों नहीं हो रहा है माता का आदेश था कि तुमसे युद्ध करना है माता का आदेश यही कहा था इन असरों ने माता के आदेश से ही यह नारायण से युद्ध कर रहे हैं अर्थात माता की इच्छा से ही इनका वध भी होगा उसी एक पल में अचानक से ब्रह्मदेव के ज्ञान चक्षु खुल गए और व समझ गए कि जो भी हो रहा [संगीत] है मेरी ही इच्छा से हो रहा है इस घटनाक्रम के स्त्रोत में मैं ही हूं श्री महाकाली हमको जन्म देने वाली देवी महाकाली आप ही स्वधा आप ही वट का हो [संगीत] त्वम स्वाहा त्वम स्वधा त्वम हीव शट का स्वराम का सुधा त्वम चरे नित्य त्रिदा मात्रात्मक स्थिता अर्ध मात्रा स्थिता नित्या यान चर्या विशेषत त्वमेव संध्या सावित्री त्वम जननी परा यत धार्य विश्वम यत सजते जगत यत पालते देवी त्मते च सर्वदा विशो सृष्टि रूपा त्वम स्थिति रूपा च पालने तथा संहति रूपा जगतो जगम महा विद्या महामाया महा मेधा महाम महा मोहा च भवती महादेवी महासुर प्रकृति सर्वस्य गुण त्रय वि भाविनी काल रात्र महा रात्र मोह रात्र दारुणा त्वम श्री स्वम श्वरी त्वम तम बुद्धिर बोध लक्षणा लज्जा पुष्टि तुष्टि शांति शांतिरे वचा खडग शूलिनी गोरा गद चक्रण [संगीत] तथा स्वर भी आपका ही स्वरूप है आप ही जीवन दयनी सुदा हो नित्य अक्षर प्रणव में आकार उकार और मकार और इन तीनों मात्राओं के साथ बिंदु रूप में अरद मात्रा है वो भी आप ही संध्या सावित्री तथा आप ही परम जननी हो आप ही परम ब्रह्मांड को धारण करने वाली [संगीत] हो और आपसे ही इस जगत की सृष्टि होती है आप से ही इसका पालन होता है और कल्प के अंत में आप ही सबको ग्रास जगत की उत्पत्ति के समय आप सृष्टि रूपा हो पालन के समय आप स्थिति रूपा हो और प्रलय के समय संघार रूपा भी आप ही हो देवी आप ही काल रात्रि महरात्रि और महा रात्रि हो आप ही श्री ईश्वरी ह और बोध रूपा बुद्धि हो लज्जा पुष्टि तुष्टि क्षमा और शांति आप ही हो संसार में जो कुछ भी है और उनकी जो भी शक्ति है सब आप ही हो माता मैं तुच्छ आपकी क्या स्तुति कर सकता हूं आपने ही मुझे और नारायण को हमारा अस्तित्व प्रदान किया फिर मुझ में इतना सामर्थ्य कहां जो मैं आपकी स्तुति कर सकूं हे देवी आप तो अपने उदार प्रभावों से ही प्रशंसक करो माता रक्षा करो माता माता रक्षा करो इन दोनों असुरों मधु और कैटभ जिनका जन्म आपकी ही शक्ति से हुआ है इन्ह मोह में डालकर नारायण के द्वारा इनके वध का उपाय करो माता रक्षा करो माता रक्षा करो माता ब्रह्मदेव मैं तुम्हारी स्तुति से प्रसन्न हुई चिंता मत करो मा सदैव अपनी संतानों की रक्षा के लिए तत्प रहती मैं ही महामाया हूं और अपने महामाया स्वरूप में मैंने जो आरंभ किया था मैं ही उसे संपन्न करूंगी तुम हमें नहीं रोक सकते विदव हम विजय होकर रहेंगे पुत्र मधु पुत्र कैटक [संगीत] माता देवी महामाया देवी महामाया ही इन असरों का कोई उपाय करेंगी देवी माया क्या इन असुरों को रोक सकेंगी देवी महामाया की माया से अवश्य भ्रमित होंगे यह [संगीत] दोनों प्रणाम [संगीत] माता माता आपकी आज्ञा का पालन कर रहे हैं हम विष्णु देव से युद्ध कर रहे हैं और विजय की र अग्रसर है पुत्रों इसमें कोई संदेह नहीं कि तुम दोनों बड़ी तत्परता और कुशलता से युद्ध कर रहे हो किंतु युद्ध में विरोधी योद्धा का सम्मान भी एक योद्धा का धर्म होता [प्रशंसा] है विरोधी अर्थात अपने शत्रु का सम्मान जो हमसे युद्ध कर रहा है हम उसका सम्मान करें यह तो हमारी प्रवृति नहीं पुत्रों इसमें कोई संदेह नहीं कि नारायण इतनी कुशलता से तुम्हारा सामना कर रहे हैं इसीलिए उनके सम्मान स्वरूप और युद्ध के पूर्व उन्हें एक वरदान दो इसी में तुम्हारी महानता है वरदान माता हम अपने शत्रु को वरदान दे हां पुत्र तुम दोनों अपनी अपार शक्ति प्रमाणित कर चुके हो नारायण ने अनेकों बार तुम्हारा वत किया किंतु तुम पुनः जीवित हो गए इसलिए उन्हें वरदान देने से तुम्हारी शक्ति शीन नहीं पड़ेगी किंतु तुम यह सिद्ध करोगे कि शक्तिशाली होने के साथ-साथ तुम कितने उदार भी हो और उदारता तो महानता का ही लक्षण है जैसी आपकी आज्ञा [संगीत] [प्रशंसा] माता तुम्हें तो अपनी पराजय बास समय पूर्व स्वीकार कर लेनी चाहिए थी विष्णुदेव किंतु तुम अपनी हट के आगे अड़े रहे लड़ते रहे हमसे यह जानते हुए भी कि युद्ध में तुम्हारा विजय होना असंभव है किंतु हम तुम्हारी दृढ़ता की सराहना करते हैं इसलिए तुम्हें युद्ध में पराजित करने के पूर्व तुम्हें एक वरदान अवश्य देंगे मांगो वरदान मांगो हमसे मैं वरदान मांगो इन दुष्ट असुरों से मैं समझ गया यह आपकी ही लीला है देवी वही होगा जो आपकी इच्छा है इतना क्या विचार कर रहे हो विष्णुदेव शीघ्रता करो वरदान मांगो [संगीत] हमसे ठीक है यदि तुम मुझे वरदान देना ही चाहते हो तो मुझे वरदान दो कि तुम दोनों का अंत मेरे ही हाथों हो हमारा अंत हो इसके हाथों हम तो इसका अंत करेंगे फिर यह हमारा अंत कैसे कर सकता है राता केट अप यह कैसा वरदान मांग लिया विष्णु [संगीत] ने चतुर विष्णु तुम सोच रहे हो कि चतुराई से तुमने हमारी मृत्यु का उपाय ढूंढ लिया किंतु यह केवल मात्र तुम्हारा एक भ्रम है किंतु हम तुम्हें वरदान अवश्य देंगे कि हमारी मृत्यु तुम्हारे ही हाथों हो ता मधु यह क्या कह रहे हो तुम यह क्या वरदान दे रहे हो तुम बुद्धि भ्रष्ट तो नहीं हो गई तुम्हारी हमारे अंत का वरदान मांग रहा है ये शांत रहो भ्राता केटब के बल को पराजित किया था हमने इसके छल को भी पराजित करेंगे वरदान अवश्य देंगे इसे किंतु उसका कोई लाभ नहीं होगा विष्णुदेव वचन दिया है तुम्हें इसलिए वरदान भी अवश्य देना ही होगा किंतु एक अवस्था में ही ऐसा हो [संगीत] सकेगा [संगीत] हम तुम्हें वरदान देते हैं कि हमारा वध तुम्हारे हाथों होगा किंतु तुम जल में हमारा वध नहीं कर सकोगे जल में हमारा वध नहीं कर सकोगे जल में हमारा वद नहीं कर सकोगे [संगीत] यहां तो सर्वत्र जल ही जल है फिर इन दोनों का वध कहां करेंगे [संगीत] वह बताओ स्वीकार है हमारी चुनौती या फिर भयभीत हो गए स्वीकार है स्वीकार है स्वीकार है तो प्रतीक्षा क्यों कर रहे हो आगे बढ़ो आओ वध करो हमारा किंतु यदि मामा जी उनका जल में अंत नहीं कर सकते थे तो फिर यह कैसे संभव था वहां तो जल ही जल का विस्तार [संगीत] था मैं कुछ समझा नहीं मां आपने ही मधु और कटप को मामा जी को वरदान देने का सुझा दिया और मामा जी को मधु कटप से यह वरदान मांगने के लिए प्रेरित किया कि वह उन दोनों असरों का अंत कर सके और फिर मधु ने वरदान भी दिया किंतु ऐसी स्थिति के साथ जिससे मामा जी द्वारा उनका वध करना असंभव हो जाए गणेश जी का प्रश्न तो सर्वता उचित ऐसी अवस्था में नारायण ने उन असुरों का वध कैसे किया होगा गणेश के इस प्रश्न का उत्तर देवी श्री महाकाली के द्वारा ही दिया जाना उचित है उचित किया मैंने मेरा रहस्य समझना चाहते हो ना समझ गणेश समझ मेरी इच्छा के पीछे छिपे कारण को यही मेरी लीला है और यही मेरी माया माता की लीला का रहस्य तो मुझे अभी भी ज्ञात नहीं हुआ यही तो है देवी महाकाली की लीला जिसका रहस्य समझना सरल नहीं उनके संकेत ही मुझे सफलता का उपाय प्राप्त हुआ इतना स्तंभित क्यों खड़े हो नारायण क्या हुआ हमारी दानवीरता से स्तब्ध हो क्या अरे तुमने वरदान मांगा और हमने दे दिया तो आओ अब युद्ध करो करूंगा अवश्य करूंगा युद्ध तुमसे और वध भी करूंगा तुम्हारा आओ वध करो हमारा किंतु वही जहां थल जल में डूबा ना हो सर्वप्रथम ढूंढो वो स्थान और तब अंत करो हमारा अवश्य अवश्य अवश्य तुम्हारी यह मनोकामना मैं अवश्य पूर्ण करूंगा राता कटप इसके छल का तो उचित उत्तर दिया मैंने फिर क्या कारण है विष्णु देव के इस विश्वास का कि वह अब भी हमारा वध करने में सक्षम है यह तो मैं भी नहीं समझ पा रहा हूं भ्राता शांताकारम भुजग पदमनाभम सुरेशम विश्वाम गगन सदम वेवण शुभम लक्षमी कांत कमल नयनम योगी ध्यान गम्यम वंदे विष्णु भव भय हरम सर्व लोक [संगीत] नाथम [संगीत] आपके विराट रूप के दर्शन पाकर मैं धन्य हुआ श्री महाविष्णु य यह क्या हो रहा है विष्णु ने अपना आकार इतना विशाल कैसे कर लिया ता मधु वो तो मुझे भी ज्ञात नहीं किंतु उचित प्रकार से से मैं विष्णु को देख भी नहीं पा रहा [संगीत] हूं हमारा वध असंभव है किंतु फिर भी मुझे भह का आभास क्यों हो रहा है राता मधु भयभीत तो मैं भी हो रहा हूं कदाचित इसका कारण विष्णु का यह विकराल रूप है अपने को मिटाना होगा हमें तभी विजय हो सकेंगे [संगीत] हम विष्णु यह क्या कर रहे हो तुम यह मत समझो कि तुम्हारे इस विशाल रूप को देखकर भयभीत हो जाएंगे हम और और तुम हमारा वध कर सकोगे स्मरण रहे स्वीकार किया था तुमने जल में हमारा वध नहीं करोगे तुम इसलिए तुम हमारा वध नहीं कर सकते हां हां क्योंकि यहां तो सर्वत्र जल ही जल है और यदि आप अपने विशाल आकार से हमें भयभीत करना चाहते हो तो मत भूलो हम भी विशाल आकार ले सकते [संगीत] हैं यह देखो तुम जितना अपना आकार विराट करोगे तुम्हारा वध करने में मुझे उतनी ही सुविधा होगी किंतु हां अपना दिया हुआ वचन भंग नहीं करूंगा तुम्हारा वध करूंगा किंतु जल में नहीं राता कैट हमारे विशाल होने से इसे सुविधा होगी हां ता मधु हम और विशाल नहीं होंगे इसकी असुविधा में तो आनंद आएगा ना हमें और वैसे भी यह अभी भी हमसे विशाल ही है तुमने अपनी ओर क्यों खींच लिया हमें दूर से युद्ध करो हमसे तुम दोनों असुर देवी महामाया की आज्ञा का पालन कर रहे थे ना तो लो मैं अब देवी महाकाली की आज्ञा का पालन करूंगा तुम्हारा वद तो करूंगा किंतु जल में नहीं अरे ये क्या कर रहे हो मुक्त करो मुझे अब तुम दोनों का अंध होगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] इन असुरों के साथ इनके आतंक का अंत करने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद [संगीत] नारायण माता आपने ही मधु और कैट अप को उत्पन्न किया जब उनका अंत ही होना था तो आपने उन्हें जीवन दिया ही क्यों ईश्वर के प्रत्येक कार्य के पीछे जगत कल्याण का महान उद्देश्य निहित होता है

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...