[संगीत] महाभारत मैं नहीं चाहता माते कि रण भूमि सच जाए और मुझे दुर्योधन और यिर दोनों में से किसी एक के पक्ष में युद्ध करने का निर्णय लेना पड़े मेरा मार्ग दर्शन कीजिए माते मेरी सहायता कीजिए माते [संगीत] प्रणाम माते मुझसे कोई भूल हुई माते तुम कायन की भाती संकट की हर घड़ी में मा के क्यों चले आते हो पुत्र जो प्रतिज्ञा तुमने की वो मुझसे पूछे बिना की अपने पिता और हस्तिनापुर को जो वचन तुमने दिया वह भी मुझसे पूछे बिना दिया तो अपनी प्रतिज्ञा और अपने वचन के परिणामों का सामना भी करो पुत्र जो आदेश माते जो आदेश अब मैं नहीं आऊंगा माते अब स्वयं आपको आना होगा आपको आना होगा प्रधान सेनापति की जय हो आचार्य द्रोण पधार रहे हैं प्रणाम आचार्य विराजी लगता है आपको भी नींद नहीं आ रही यह वोह रातें हैं गंगापुत्र जिनमें हस्तिनापुर के किसी भी शुभ चिंतक को नींद नहीं आ सकती महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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