महाभारत भरत वंश संरक्षक शांतनु पुत्र अपराज वीर गंगापुत्र भीष्म पधार रहे [संगीत] हैं लगता है विश् प्रतिज्ञा राजकुमारियों की सुंदरता के सागर में डूब गई ब में अपने आप को यवा सित करने का प्रयास [संगीत] क्यों इन राजकुमारियों का सौंदर्य तो ऋषियों की तपस्या भंग कर दे ये तो केवले का दे राजकुमार और लगता है पिता की मृत्यु की प्रतीक्षा में थे रानी सत्यवती ने अपनी चूड़ियां तोड़ी और इन्होंने अपनी प्रतिज्ञा प्रतिज्ञा भी काज की रही होगी सावधान ये सभा केवल अतिथियों के लिए है जानता हूं इसीलिए मैं आपके इस सभागृह में आपके अतिथियों के जबाने काटकर आपका अपमान नहीं करना चाहता इस स्वंबर में मैं हस्तिनापुर नरेश महाराज विचित्र वरी का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं काशी राजकुमारियां शताब्दियों से कुरुवंश में विह के लिए जाती रही है आज भी यही होगा मैं इन तीनों राजकुमारियों को अपने छोटे भाई विचित्र वरी की रानिया बनाने के लिए ले जा रहा हूं राजकुमारियों का स्वयं भर रचाकर आपने जो हस्तिनापुर का अपमान किया है मैं उसके लिए आपको क्षमा करता हूं परंतु राजकुमारियों को अपना वर चुनने का अधिकार है भीष्म इन राजकुमारियों को य अधिकार नहीं है लराज और यदि है तो मेरे सिवा और कोई स्वयं सभा में बैठने योग्य नहीं अपनी जुबान को लगाम दो मैं केवल घोड़ों को लगाम देता हूं और शाल राज तुम यदि मुझसे जीवन दान पाकर ना जी रहे होते तो भरी सभा में इस प्रकार मेरी बात काटने का कड़ा दंड देता तुम्हे मैं इस बरे दरबार में घोषणा करता हूं मैं राजकुमारियों को लेने आया हूं और ले जा रहा [प्रशंसा] हूं [संगीत] क्या कोई भीष्म को रोकना चाहता है रोकना चाहता है भीष्म को राजकुमारियों को जाने की आज्ञा दीजिए काशी [संगीत] नरेश [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मुझे इसी बात पर डर था [प्रशंसा] महाराज [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] भीष्म सारथी रत घुमाओ शाल्व राज हां मैं शाल्व परंतु यह मार्ग तो शाल्व नहीं जाता तुम योद्धा नहीं हो भीष्म तुम एक मायावी अभिचार हो तुमने काशी राज्यसभा में अपनी वीरता का प्रदर्शन नहीं किया बल्कि अपनी माया का चाल फेंका था अब मेरे बाणों का चाल देखो तुम एक महान योद्धा हो शाल राज और मेरी तुमसे कोई लड़ाई भी नहीं आज वह जीवन मैं कैसे ले लू जो मैंने ही तुम्हे दान में दिया था इसलिए लौट जाओ मैं यहां वापस जाने के लिए नहीं आया हूं भीष्म बल्कि तुम्हे जीवन दान देने के लिए आया हूं क्षमा चाहो तो लौट जाओ हस्तिनापुर या धनुष संभालो सावधान इस घाव के लिए भी मैं तुम्हें क्षमा करता हूं शाल वराज अब भी समय है लौट जाओ मैं यहां लौट जाने के लिए नहीं आया हूं [प्रशंसा] [प्रशंसा] भीष्म [प्रशंसा] अ मेरे पास बाणों की कमी नहीं है शाल राज पर दिया हुआ जीवन में वापस लेना नहीं चाहता इसलिए एक बार फिर क्षमा करता हूं सारथी हस्तिनापुर [संगीत] चलो [संगीत] बड़ी गुर जी लौट आए राजमाता अच्छा और दीपक की लो जैसी तीन राजकुमारियां भी साथ लाए हैं इतनी सुंदर पुत्र वधु पाने पर हार्दिक बधाई माते एक मां का प्यार भरा स्वागत ये अंबा है ये अंबिका और य अंबालिका और ये इनकी दासी क्या मैं एक विनती कर सकती हूं राजमाता केवल मां कहो अंबा परंतु मेरी विनती तो राजमाता से है आज्ञा है परमवीर गंगापुत्र भीष्म के आने से पहले ही मैं मन ही मन शाल्व नरेश को अपना पति मान चुकी थी राजमाता तो तुमने मुझे यह बात बताई क्यों नहीं राजकुमारी भय गंगापुत्र आपका भय तब तो विचित्र वीर्य का विवाह अंबा से नहीं हो सकता माते तुमने ठीक कहा भीष्म तुम निश्चिंत रहो राजकुमारी तुम्हें आदर के साथ शाल भिजवाने का प्रबंध किया जाएगा मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है अंबा राज [संगीत] माता चली सुरक्षित सैन्य से हर्षित कन्यारत्न प्रिय दर्शन की आस में देखे सुंदर स्वपन यह जीवन भी गंगापुत्र का ही दिया हुआ है और अब अंबा को भी दे दिया अंबे अपने पहले पुत्र का नाम देवरथ ही रखेंगे अवश्य आर पुत्र पता है जब मैंने राजमाता सत्यवती से कहा कि गंगापुत्र भीष्म के आने से पहले ही मैं शाल नरेश को अपना पति स्वीकार कर चुकी थी तो गंगापुत्र कहां उठे और मैं उसी वक्त समझ गई कि अब हमारे मिलन को कोई नहीं रोक सकता राजकुमारी जी अब आप शार की सीमा में प्रवेश कर रही हैं भीष्म से कह देना हम हारी हुई वस्तु दान में स्वीकार नहीं करते और उनसे यह भी कह देना कि राजकुमारी को यहां भेजकर उन्होंने हमारा अपमान किया है जब गंगापुत्र भीष्म को पता चला कि मैं आपसे प्यार करती हूं तो उन्होंने स्वयं मुझे आपके पास भेज दिया भीष्म ने हम सबको हराकर तुम्हे जीता है नियमानुसार तुम उसी के हो यही शक्ति धर्म है शाल नरेश यह ना भूले कि वो मेरे स्वयंवर में पधारे थे परंपरा अनुसार वरमाला मेरे हाथ में थ और मेरा पति वही होगा जिसे मैं चुनू मैं कोई राज नहीं हूं जो लड़ाई में जीती या हारी जा सकू या फिर दान में दी जा सकू गंगापुत्र भीष्म के आने से पहले ही मैं शाल नरेश को अपना पति स्वीकार कर चुकी थी हम इस मान के लिए आपके आभारी है राजकुमारी परंतु आपको भीष्म के पास वापस जाना ही होगा उन्होंने आपको यहां भेजकर केवल मेरा ही नहीं आपका भी अपमान किया [प्रशंसा] है राजकुमारी को अंदर आने दिया जाए हस्तिनापुर नरेश की जय हो मैं न्याय मांगने आई हूं महाराज तुम्हें न्याय अवश्य मिलेगा राजकुमारी महाराज गंगापुत्र भीष्म ने सारे राजाओं महाराजाओं और राजकुमारों को हराकर मुझे जीत लिया था परंतु मैं शर्व नरेश को पहले ही अपना पति स्वीकार कर चुकी थी इसीलिए आपकी आज्ञा के अनुसार मुझे शाल नरेश के पास भेज दिया गया परंतु शाल नरेश ने दान में मिली हुई अंबा को स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया हस्तिनापुर की सेनाएं राजकुमारी के अपमान का बदला लेने के लिए शीघ्र ही शाल की ओर प्रस्थान करेंगी पर शाल नरेश ने क्या किया है महाराज जो हस्तिनापुर की सेना उधर प्रस्थान करेंगी मैं अपमानित हुई हूं गंगापुत्र भीष्म के कारण य आप क्या कह रही है राजकुमारी राधा भीष्म तो किसी का अपमान कर ही नहीं सकते मैं किसी और के विषय में बात नहीं कर रही हूं महाराज मैं अपने विषय में बात कर रही हूं अपमान मेरा हुआ है इसलिए मैं ही बता सकती हूं कि मेरा अपमान किसने किया है मेरा अपमान किया है गंगापुत्र भीष्म ने य मुझे शाल नरेश के पास भेजते और ना ही मेरा इतना बड़ा अपमान होता इसलिए गंगापुत्र भीष्म को आदेश हो कि अपने क्षत्रीय धर्म का पालन करते हुए मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें महाराज की जय हो परंतु मैं प्रतिज्ञाबद्ध हूं महाराज मैं विवाह कर ही नहीं सकता विवाह नहीं कर सकते तो काशी से य लाए क्यों मैंने तो काशी दरबार में यह घोषणा कर दी थी कि मैं केवल हस्तिनापुर का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं मेरा हरण ऐसे समय में किया गया था महाराज जब मेरे हाथ में वरमाला थी मेरी बहनों ने आपको स्वीकार किया परंतु मैं आपको स्वीकार नहीं करती अब मैं वह माला गंगापुत्र भीष्म के गले में डालना चाहती हूं यह संभव नहीं है देवी क्यों संभव नहीं है क्योंकि मैंने ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की है घायल नागिन घायल शेरनी और अपमानित स्त्री से डरना सीखो गंगापुत्र तुम वचन बद्ध हो इसलिए मेरे अपमान के घाव पर मान का फाया नहीं लगा सकते तो आज इसी गुरु राज दरबार में हस्तिनापुर नरेश को साक्षी मानते हुए मैं भी ्ा बध होती हूं गंगापुत्र भीष्म मैं तुम्हें अपने अपमान के लिए कभी क्षमा नहीं करूंगी चाहे इसके लिए मुझे जन पर जन क्यों ना लेने पड़े तुम्हारी मृत्यु का कारण बनकर मैं अपने इस अपमान का बदला अवश्य [संगीत] लूंगी क्रोध सर प बन गई सुंदर उपवन बेल दोष किसी का क्या भला भाग्य खिलाए खेल महाभारत महा भारत महाभारत महाभारत हो महा भारत
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment