Wednesday, 31 December 2025

भीष्म पितामह ने माता से क्या विनती की थी Gautam Rode Suryaputra Karn Episode 226 Pen Bhakti

[संगीत] एक मनुष्य सदैव शांति और अपनी स्वतंत्रता चाहता है परंतु जैसे उसे यह अधिकार मिलता है वह दूसरों का प्रभुत्व छीन लेना चाहता है वो उनका अधिकार उनकी स्वतंत्रता को छीन लेना चाहता है वह ऐसा अपने आनंद अपने लाभ के लिए करता है अपने लाभ के लिए वह दूसरों का शोषण करता है जो आलोचना नहीं करता उन पर अधर्म करता है परंतु वही मनुष्य एक बात का स्मरण रखना भूल जाता है कि उसके कर्म ही उसे उसका फल भी देंगे उसका प्रारब्ध उसे उसके मंतव्य तक अवश्य लेकर जाएगा वर्षा का जल चाहे सागर में मिले या माटी में परंतु समय के सूर्य की किरण उसी जल को वषम में परिवर्तित भी कर देती है इसीलिए किसी भी मनुष्य की विनम्रता का इतना अधिक लाभ ना उठाए कि वह उग्र हो उठे [संगीत] एक पुत्र का दथ एक माता को तो दे सकते हो ना दुर्योधन पुत्र करने सदा मुझे आ के सम्मान का आदर किया है ी ता श्री आपसे कुछ मांगना चाहती हूं मैं जानती हूं यह आपके ऊपर 100 कौरवों की रक्षा का उत्तर दत्व [संगीत] है क्या आप 101 की रक्षा कर सकते हैं यहवा कौन है पुत्री कुंती [संगीत] अंगराज का यह जानते हुए कि कर्ण पांडवों के विरुद्ध है तुम उसकी रक्षा करना चाहती हो जान सकता हूं क्यों क्योंकि उसकी [संगीत] मा उसकी मां से उसके बच्चे को दूर जाते नहीं देख सकती भली भाती यह जानता था कि य उसके पास कवच ना रहा तो वो अर्जुन के समक्ष कमजोर पड़ जाएगा फिर भी उसने अपना कवच तान दे दिया ऐसे योद्धा को अपनी मां के पास सुरक्षित देखना चाहती हूं क्योंकि मैं उसकी मां का दर्द समझ सकती हूं वो दुख जो अपने पुत्र से दूर होने का जिसका पुत्र घोर संकट में हो मुझसे बला और कौन इस दुख को समझ पाएगा इसके सभी पुत्र इस महायुद्ध के मृत्यु के समक्ष [संगीत] हो के माता की ओर से मैं आपसे विनती करती हूं कि आप उसकी रक्षा करें उसे अपनी सुरक्षा प्रदान करें जो कण के साथ घटित हुआ है मुझे उसका अत्यंत खेद है परंतु युद्ध में शत्रु का वाण एक योद्धा के हृदय को छेदने पहले उसकी कवच को भेद देता है यही योद्धा का प्रारब्ध है मैं केवल कौरवों की रक्षा के लिए वचन बध हूं मैं कर्ण की रक्षा का वचन तुम्हें नहीं दे सकता और यदि मैं ऐसा करता हूं कुंती तो यह स्वाभाविक है कि कर्ण की रक्षा के लिए मुझे अर्जुन का व करना होगा क्योंकि कण कर प्रतिबंधी तुम्हारा पुत्र अर्जुन है और अर्जुन का प्रथम लक्ष्य है क क्या तुम चाहती हो कि मैं ऐसा करूं ऐसा नहीं चाहती कैसी स्थिति है प्रभु मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर [संगीत] सकती त पिता मा मैं चाहती हूं आप आप क की रक्षा करें र की रक्षा करें मेरे पास कोई और मार्ग नहीं [संगीत] पुत्री मैंने जो कुछ भी किया उसका मुझे कोई पश्चाताप नहीं क्योंकि मैं स्वयं के लिए नहीं समाज के लिए जिया हूं संसार में परिवर्तन आने से पूर्व हमें स्वयं में परिवर्तन लाना चाहिए और यदि मैं ऐसा नहीं करता तो तुम आज एक सूत पुत्र होकर हाथ में शस्त्र नहीं उठा [संगीत] पाते शद एक पिता की दृष्टि से देखो तो बहुत दुख पहुंचा था मुझे परंतु परिवर्तन की कामना रखने वाले एक योद्धा की दृष्टि से देखूं तो मुझे गलानी नहीं गर्व है तुम पर मुझे विश्वास है कि एक दिन तुम मेरा बलिदान अवश्य समझोगे मैं उस समय की प्रतीक्षा [संगीत] करूंगा मुझे सदा लगता था कि परिवर्तन के बहाने आप अपने परिवार से दूर रहना चाहते [संगीत] हैं परंतु आज समझ में आया पिताश्री की आपका लक्ष्य कितना महान [संगीत] था अब आंखें खोलिए पिता अपने वृष सेन से बात कीजिए मुझे आप पर आपकी सोच पर विश्वास है पिता श्री [संगीत] [संगीत] [संगीत] मुझे क्षमा कर दीजिए पिता मेरी हर एक भूल के लिए मेरी हर एक दृष्ट के लिए मुझे क्षमा कर दीजिए सदा आपसे घृणा करता आया परंतु आज आज मुझे आप पर अभिमान है मेरे पुत्र को मेरी सोच पर विश्वास है यह विश्वास पाने के लिए एक कवच कुंडल तो क्या स्त्र कवच कुंडल अपने शरीर से उतार कर फेंक सकता [संगीत] हूं अब स्वस्थ हो [संगीत] पुत्र वो मैं युवराज को बता करर आता हूं कि आप स्वस्थ है प्रणिपात राजमाता रुष सेन तुमने मुझसे तो क्षमा मांग ली परंतु अपने व्यवहार के लिए किसी और से क्षमा मांगना शेष है मैं क्षमा चाहता हूं राजमाता वो जो भी मैंने पुत्र तुम्हारा कोई दोष नहीं तुम्हारे स्थान पर कोई और पुत्र होता व भी ऐसे ही [संगीत] करता [संगीत] धन्यवाद [संगीत] पीड़ा तो नहीं है ना पीड़ा तो तब होगी जब एक पुत्र अपनी माता का मान नहीं रख पाएगा राज माता भावनाओं में बहकर यह भूल मत कर [संगीत] बैठिए कि कौरवों को आपका सत्य ज्ञात हो जाए और हां मुझे मेरा वचन स्मरण है युद्ध के पश्चात आपके पांच पुत्र ही जीवित [संगीत] रहेंगे [संगीत] कितना सुंदर सूर्यास्त है ना [संगीत] गंगापुत्र कदाच ये इस युद्ध के प्रारंभ से पूर्व का अंतिम सूर्यास्त है इस युद्ध के पश्चात इस सूर्य की स्वर्ण आभा रक्त से लाल हो जाएगी है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ना और यह रक्त मेरे ही वंश का होगा वासुदेव मेरे वंश की सुरक्षा और नाश के मध्य की अंतिम संध्या है ये किंतु सत्य यही है कि अब इस अनहोनी को कोई रोक नहीं सकता आज मेरा जीवन इन्हीं प्रश्नों से घिरा हुआ है वह प्रश्न जिनके उत्तर मेरे पास नहीं वह संदेह इसे मैं कभी स्पष्ट नहीं कर पाऊंगा परंतु जब बालक के मन में प्रश्न होता है कोई संदेह होता है तो व इन सब प्रश्नों का उत्तर पाने के लिए अपनी मां से पूछता है कदाचित आपके प्रश्नों का उत्तर आपकी माता के पास हो गंगापुत्र [संगीत] माते मैं आपसे विनती करता हूं प्रकट होइए मुझे सत्य अवगत कराए कदाचित आपसे आज मेरी यह अंतिम भेंट है मेरे मन से संताप को अपनी शीतल धारा से शांत कीजिए [संगीत] माते मुझे क्षमा कर देना पुत्र भगवान सूर्यनारायण री रक्षा [संगीत] करे धर्म अ हाक तुम राधे नहीं कुंती पुत्र हो इस महाभारत के पश्चात आपके पांच पुत्र जीवित रहेंगे यदि अर्जुन ने मेरा वत किया तो भी और मैंने अर्जुन का वत किया तो भी क्या आप 10 की रक्षा कर सकते हैं यह 10 वा कौन है अंगराज काण [संगीत] [संगीत] बैठो बैठ आ गए मित्र आज आज मुझे मेरे ईश्वर के ऊपर विश्वास हो गया मेरा मित्र मेरे सामने स्वस्थ बैठा है मैं बता नहीं सकता कि मैं कितना प्रसन्न हूं मित्र मित्र तुम ठीक हो ना अब अब मैं यह युद्ध तू हार कोई अंतर नहीं पड़ता मि कोई अंतर नहीं पड़ता तुम चिंता मत करो मित्र हम यह युद्ध अवश्य [संगीत] जीतेंगे और कल तक तो मैं इस युद्ध के लिए तैयार भी हो जाऊंगा हा कल इस युग का सबसे बड़ा महायुद्ध प्रारंभ होने जा रहा है ष सेन सारी तैयारिया हो जी पिताश्री सभी महारथी और उनके सैन्य तल और अस्त्र शस्त्र सज्ज है बस सारी तैयारियां हो गई मित्र अब हमारे प्रधान सेनापति पितामह के आदेश की प्रतीक्षा है कि वो हमें इस युद्ध में हमारा स्थान बता दे अच्छा है कल मैं भी अपना स्थान लेने के लिए प्रस्तुत रहूंगा अवश वैसे पितामह है कहां कुंती आज मैं तुम्हें आशीर्वाद देने नहीं आया हूं मैं तुमसे कुछ प्रश्न पूछने आया हूं कैसा प्रश्न ्र वो प्रश्न जिसका उत्तर तुम्हारे अतीत में है उस अन्याय के विषय में पूछने आया हूं जो तुमने एक अबोध बालक के साथ किया उस सत्य के विषय में प्रश्न करने आया हूं जो तुमने समस्त हस्तिनापुर से छुपाया क्या दोष था उस बालक का गुंद वरदान तुम्हें मिला दोष तुमसे हुआ तो फिर दंड उस बालक को क्यों यह मत कहना कि तुम विवश थी किंतु इतना तो तुम्हारे वश में था कि तुम मुझे इस सत्य से अवगत कराती हो एक वीर क्षत्रिय वर्षों तक क्षत्रिय होने के अधिकार से दूर था सूर्य पुत्र ने वर्षों सूत पुत्र होने का कलंक अपने सर लिया वर्षों तक वह उस अपराध का दंड सहता रहा जो उसने किया ही [संगीत] नहीं तुमने ना स्वयं कर्ण के साथ अन्याय किया है कुंती बल्कि हर पल हर पग पर उसके विरुद्ध मुझसे भी अन्याय करवाया [संगीत] है सब आ जाती हूं ता श्री परंतु समझ नहीं पाई कि मैं आपको सत्य कैसे बताऊ समझ तो तुम नहीं रही हो कुंती कितना बड़ा अनर्थ करवा दिया है तुमने हस्तिनापुर से एक क्षत्रिय को सूत का जीवन व्यतीत करना पड़ा उसे ना शत्र उचित शिक्षा मिली ना ही अधिकार रंगभूमि से उसे अपमानित करके निकाला गया उसके भाई के मुंह में उबलता हुआ स्वर्ण डाला गया हर पल उसे पीड़ा मिली हर पल उसके साथ र अन्याय हुआ तुमने ठीक नहीं किया कुंती परंतु मैं मैं अब सब ठीक कर दूंगा हमें इस सत्य से सबको अवगत कराना होगा कि कण तुम्हारा पुत्र है अन्यथा अनर्थ हो जाएगा ता श्री आप ऐसा मत कीजिए इस सत्य का अगर सबको भान हो गया तो अनर्थ हो [संगीत] जाएगा जन से क को सम्मान नहीं मिला अपने कर्ब से जो उसने सम्मान अर्जित किया है सबको सत्य बते से वो भी समाप्त हो जाएगा आपसे विनती करती ह द इस सत्य को आप रहसे ही रहने दीजिए [संगीत] उस रहस्य का लाभ ही क्या जब कण का बलिदान हो [संगीत] जाए ये सब आपको ही रोकना होगा दो सहोदर एक दूसरे का रखना भाई य उत्तर आपको ही लेना होगा आपको और के प्रधान के सेनापति ण की रक्षा के ला भी कर सकते हैं अपने पुत्र को जीवित देखना चाहती हूं अब आपको ही कुछ करना होगा इस विना का आपको ही दिखाना होगा

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