[संगीत] महाभारत प्रणाम गु गुरुदेव गुरु दक्षिणा दिए बिना शिक्षा समाप्त नहीं होती है राजकुमारों आज्ञा हो तो आपके चरणों में सोने चांदी के ढेर लगा दूं गुरुदेव ब्राह्मण सोने चांदी के ढेर लेकर क्या करेगा गांधारी नंदन गुरु दक्षिणा में हम अपने प्राण भी दे सकते हैं गुरुदेव प्राण तो वो मांगे कुंती नंदन जिसके स्वयं प्राण ना हो तो फिर आज्ञा दीजिए गुरुदेव मैं चाहता हूं कि तुम में से कोई जाकर महाराज द्रुपद को युद्ध में हराए और बंदी बनाकर मेरे सामने लाए मैं अभी जाकर उसका वध कर देता हूं गुरुदेव मैंने वद की आज्ञा नहीं दी क्षमा चाहता हूं गुरुदेव आज्ञा पालक को सुसंस्कृत होना चाहिए आज्ञा के आगे निकल जाना भी आज्ञा का उल्लंघन है तो फिर हमें आज्ञा दीजिए गुरुदेव मैं इसी समय कुछ करना चाहता हूं जाओ मैं पांचाल नरेश द्रुपद के हाथ बांध कर खींचता य लाऊंगा और गुरु चरणों में डाल दूंगा मुझे आज्ञा दीजिए गुरुदेव जाओ व अर्जुन क्या समस्या है कुछ कुछ नहीं गुरुदेव कुछ नहीं क्या गुरु से रूट गए हो क्या एक भक्त को भगवान से और शिष्य को गुरु से लटने का अधिकार नहीं है गुरुदेव इन्हीं दोनों को रूठने का अधिकार है वत्स जितना बड़ा भक्त और जितना प्रिय शिष्य होगा उसके रूठने का उतना ही अधिक अधिकार होगा परंतु अर्जुन तुम्हारे रूठने का कारण आपने हमें क्यों नहीं आज्ञा दी गुरुदेव तुम सबकी शिक्षा समाप्त हो चुकी है परंतु दुर्योधन की शिक्षा का एक अध्याय रह गया है वह कौन सा अध्याय है गुरुवर वह अध्याय है मान अभिमान का अभिमान वीर पुरुष का सबसे बड़ा शत्रु है परंतु यह सीखने में गांधारी नंदन दुर्योधन को ना जाने कितने दिन लग जाएंगे कितने वर्ष लग जाएंगे [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] ज [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] ग [संगीत] भ [संगीत] मैंने तो सुना था लोग पंचाल नरेश को खींचते हुए यहां लाकर गुरु चरणों में डालने वाले हैं अनुज भीम अपने भाई पर वैंक के वान मत चलाओ युद्ध में किसी ना किसी को तो हारना ही पड़ता है मैं गुरु दक्षिणा देने में असफल रहा गुरुदेव मुझे क्षमा करें नहीं महत्व प्रयत्न का है सफलता या असफलता का नहीं तुमने अपने प्रयत्न की गुरु दक्षिणा दे दी है और मैंने गुरु दक्षिणा स्वीकार भी कर ली है अब हमारे लिए क्या आदेश है गुरुदेव तुम पांचों भाइयों से भी वही गुरु दक्षिणा मांग रहा हूं यदि ला सको तो द्रुपद को बंदी बनाकर ले आओ जो आज्ञा गुरुदेव किस ध्वज की छाया में जाओगे हस्तिनापुर का धवज तो हम ले जा नहीं सकते गुरुदेव कारण क्योंकि हसनापुर का ध्वज इस युद्ध में जा नहीं सकता गुरुदेव का कारण कारण यह है गुरुदेव कि आपने हस्तिनापुर से गुरु दक्षिणा नहीं मांगी है इसीलिए इस युद्ध में हस्तिनापुर का ध्वज ले जाने का हम में से किसी को अधिकार ही नहीं है परंतु मुझे अधिकार था और तुमने उस धवज का बड़ा मान रखा भीमसेन क्षमा चाहता हूं गुरुदेव मुझे मन में बात रखना नहीं आता तब तो अच्छा ही हुआ कि तुम ज्येष्ठ कौरव पुत्र नहीं हो परंतु युधिष्ठिर ने ठीक ही कहा है दुर्योधन कि हस्तिनापुर के ध्वज पर ना तुम्हारा अधिकार है और ना ही युधिष्ठिर का और युधिष्ठिर ने यह भी ठीक कहा है कि मैंने हस्तिनापुर से गुरु दक्षिणा नहीं मांगी है इसलिए हस्तिनापुर का ध्वज क्यों जाए आपको तो इन्हीं लोगों की हर बात ठीक लगती है गुरुदेव परंतु चाहे य जिस धवज की छाया में जाए जो युद्ध मैं ना जीत पाया वो युद्ध ये भी कभी नहीं जीत सकते दुर्योधन तुम काल नहीं हो तुम केवल एक राजकुमार हो इसलिए भविष्य के बारे में कुछ नहीं जानते और ना ही तुम आकाश हो कि तुम्हारी वाणी आकाशवाणी मानी जाए युद्ध में कौन जीतेगा कौन हारेगा इसका निर्णय रणभूमि में ही हो सकता है विजय [संगीत] हो [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] केवल पांच [प्रशंसा] म [प्रशंसा] अ [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] सावधान द्रुपद [संगीत] मैं आपको आचार्य द्रोण के नाम पर बंदी बनाता हूं [संगीत] क्या आज मैं तुम्हें अपना मित्र कह सक परंतु तुम तो मेरे इन शिष्यों के बराबर भी नहीं निकले फिर मेरे और तुम्हारे बीच में मित्रता कैसी मैं तो आज भी वही ब्राह्मण हूं फिर भी तुम मेरे मित्र [संगीत] हो दिए बिना गुरु दक्षिणा विद्या धन नि सार जो औरों की संपदा औरों का अधिकार औरों का [संगीत] अधिकार भारत महाभारत महाभारत म महाभारत
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