[संगीत] महाभारत गंगापुत्र प्रणाम आचार्य व आयुष्मान भव राजिए स्थान ग्रहण कीजिए आचार्य व मुझे अब हस्तिनापुर के स्थानों से भय लगने लगा है गंगापुत्र क्या इन स्थानों से मुक्त होने का कोई मार्ग नहीं है यह जीवन है गंगापुत्र या पिछले जन्म के किसी अपराध का दंड और यदि य दंड नहीं है तो फिर दूत कीड़ा ग्रह में द्रौपदी और द्रौपदी के साथ समूची नारी जाति का अपमान देखकर चुप कैसे रह गए और यदि चुप रह गए तो अब और क्या देखने के लिए जीवित [संगीत] है मैं इन प्रश्नों से भाग कर आपके पास आया हूं गंगापुत्र आप जैसे लोग भागना क्या जाने यदि भाग ना जानते होते तो आत्महत्या ना कर लेते विराज आचार्य वर विराज क्या इस प्रकार के प्रश्न आपको घायल नहीं करते हैं गंगापुत्र मेरे घाव की ना पूछिए आचार्य व मेरे घाव की ना पूछिए मैंने तो लगता है कि घायल होने ही के लिए जन्म लिया है और जो घाव लगता है वो पिछले सभी घाव से अधिक गहरा होता है द्रौपदी ने भरी सभा में मुझसे यह प्रश्न किया था आचारी व कि यदि वह मेरी पुत्री रही होती तब भी क्या मैंने चुपचाप उसका यह अपमान सहन कर लिया होता उसी क्षय से मैं इस प्रश्न में उलझा हुआ हूं आचार्य व उलझा हुआ हूं [संगीत] कान लगाकर सुनिए आचार्य एक बहुत प्राचीन घर की दीवारों की सरकने की आवाजें आ रही हैं हमारे पूर्वजों ने जिस समाज का निर्माण किया था हमने कड़ भवन में उसी समाज के वस्त्र हरण का दृश्य देखा हम सबसे अच्छे तो महात्मा विदुर निकले जिन्होंने अपने मन की बात तो कह ली गंगापुत्र मन का विष तो नहीं पिया और परिणाम क्या हुआ क्या हुआ परिणाम क्या धृतराष्ट्र ने कुछ सुना क्या दुर्योधन एक क्षण के लिए भी कुछ सोचने के लिए रुका हस्तिनापुर के मुख पर जो यह कलिक लगी है ना अचार व इसके लिए हम सभी उत्तरदाई है सभी और इस कालिक को पहुचने के लिए हम सभी को अपना लहू देना होगा लहू हम पर हस्तिनापुर का एक ऋण है आचार्य और यह ऋण इसी जन्म उतर जाए तो अच्छा है इसलिए हस्तिनापुर को त्यागने का विचार मत कीजिए आचार्य व भविष्य के द्वार पर हमारी बलि देने का अधिकार केवल हस्तिनापुर को ही है किंतु आप ऐसी बातें क्यों कह रहे हैं गंगापुत्र महाराज ने चाहे देश से हस्तक्षेप किया किंतु हस्तक्षेप तो उन्होंने किया क्या आप यह सोच रहे हैं कि पांडव अपने अपमान के प्रतिशोध के लिए हस्तिनापुर पर आक्रमण करेंगे यदि वासुदेव उनके साथ ना होते तो कदाचित वह आक्रमण कर भी देते परंतु श्री कृष्ण उन्हें केवल प्रतिशोध के लिए आक्रमण करने नहीं देंगे युद्ध तो अभी क्षितिज के उस पार है परंतु युद्ध तो है यु तो ही गंगापुत्र क्योंकि गंधार नरेश शकुनी का तुनीर अभी रिक्त तो नहीं हुआ होगा यह शकुनी हस्तिनापुर के लिए एक शाप है आचार्य शाप और हमारी व्यवस्था देखो कि हम सब उसका खेल जानते हैं पर कुछ नहीं कर सकते कुछ नहीं कर सकते महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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