Sunday, 28 December 2025

द्रोणाचार्य की कहानी सुरेंद्र पाल को जन्मदिन की शुभकामनाएं Mahabharat Best Scene Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत [संगीत] [संगीत] पकड़ पकड़ पकड़ [प्रशंसा] [संगीत] ग तोए में गिर गई है कैसे निकाली जाए ग कैसे निकाली जाए हां हां कैसे निकाली जाए किसकी सहायता ली जाए विचार करो क्या बात है क्या हुआ बालकों क्या कोई बालक कुए में गिर गया है आयुष्मान भाव तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दिया हमारी गेंद गिर गई है जब तुम राजपुत्र से एक साधारण सी गेंद की रक्षा नहीं हो सकी तो इस भूमंडल की रक्षा कैसे करोगे गेंद और भूमंडल में बहुत बड़ा अंतर है भूदेव क्या आप हमारी गेंद कोए से निकालने में सहायता की कृपा करेंगे भूदेव अवश्य [संगीत] [संगीत] पितामह पितामह पितामह अर्जुन क्या आज तूने फिर भीम की कीर खा ली अच्छा पहले मेरी गोदी में बैठ अच्छा अब बता बस बात क्या है हम लोग गेंद खेल रहे थे हमारी गेंद कुए में गिर पड़ी अच्छा हमने बहुत प्रयत्न किए परंतु हम सफल नहीं हुए तो इस बात पर भीम और दुर्योधन में झगड़ा हो गया नहीं पितामह नहीं झगड़ा तो प्रतिदिन होता ही रहता है पूरी कथा तो सुनिए हा सुनाइए अब गेंद तो हमसे निकाली नहीं जा रही थी तो पीछे से किसी ने कहा क्या कोई बालक कुए में गिर पड़ा है अच्छा हमने पलट कर देखा श्वेत वस्त्र पहने हुए एक लंबे चौड़े ब्राह्मण खड़े हुए हैं अच्छा हमने कहा कि हमारी गेंद कुए में गिर पड़ी है तो वे बोले यदि तुम राजपूत्र से एक गेंद की रक्षा ना हो पाई तो तुम भूमंडल की रक्षा क्या कर पाओगे फिर पता है पितामह उन्होंने क्या किया मेरे व जब तक तुम बतलाओ नहीं तब तक मुझे कैसे पता चलेगा उन्होंने कहा सरकंडे ले आओ तो हम सरकंडे ले आए फिर उन्होंने एक के पश्चात एक सरकंडा कुए में फेंका तो सारे सरकंडे जुड़ गए और गेंद बाहर आ गई गेंद बाहर आ गई जी सर कंडों से जी हां और यह महापुरुष है कहां मैं तो उन्हें वही कुए के पास छोड़कर आपको यह बताने आ गया यह आप प्रणाम किसे कर रहे हैं पितामह गुरुवर द्रोणाचार्य को व आओ मेरे साथ आपके आने से हस्तिनापुर के भाग्य जाग उठे आचारी व केवल नरेश की ओर से गंगापुत्र क्या भार्गव शिष्य भीष्म को मेरा आना मेरा ये कर्तव्य था आचार्य कि पहले मैं अपने नरेश की ओर से आपका स्वागत कर और यदि वह यह कहते कि द्रोण को हस्तिनापुर ना आने दो तब आप क्या करते गंगापुत्र इस प्रश्न का उत्तर तो आप जानते हैं आचार्य ण के हृदय में आपका स्वागत है गंगापुत्र भीष्म कृपाचार्य कैसे हैं क्या आपकी उनसे भेंट नहीं हुई व आपको और कृपी को दोनों को लाने के लिए ही गए हुए हैं मुझे यहां लाने के लिए वह क्यों कुलगुरु होने के नाते उनके दायित्व बहुत बढ़ गए हैं और इसी कारण से वह बालकों की शिक्षा पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं उन्होंने यह प्रस्ताव रखा कि यदि इस कार्य के लिए आपको आमंत्रित किया जाए तो बहुत उचित होगा मुझे आशा है कि आप इन बालकों का गुरु बनना स्वीकार करके गुरुराज घराने का मान बढ़ा ओ [संगीत] ब आचार्य को गंधा कुमार शकुनी का प्रणाम यह एक तुच्छ भेंट स्वीकार कीजिए इसमें कुछ स्वर्ण मुद्राए हैं आचार्य गुरु दक्षिणा में शिक्षा की समाप्ति के पश्चात ही लूंगा गंधार कुमार क्षमा चाहता हूं आचार्य शिक्षा स्वर्ण मुद्राओं से नहीं तोली जाती राजकुमार शकुनी गुरु और श में तो भगवान और भक्त का संबंध होना [संगीत] चाहिए आचार्य वर की सेवा में अधिरथ का प्रणाम तुम तो महाराज के सारथी हुआ करते थे जी आचार्य व यह तुम्हारा पुत्र है जी आचार्य क्या नाम है तुम्हारा राधे राधे राधे है क्यों इसकी मां का नाम राधा है तुम्हारा नाम तुम्हारे मुख मंडल के तेज से मेल नहीं खाता है बस तुम्हारे मुखड़े पर तो सूर्य का तेज है तुम इसका नाम करण रखो जो आया अच्छा अब यह बताओ तुम्हारा आना कैसे हुआ यह शस्त्र विद्या सीखने की हट कर रहा है आचार्य व और शस्त्र विद्या के लिए कोई पिता अपने पुत्र को आपके सिवा और कहां ले जा सकता है मैं इसे विद्यादान देकर अति प्रसन्न होता अधिरथ क्षमा चाहता हूं आचार्य मैं दान नहीं लेता और विद्यादान में दे भी नहीं जा सकती आयुष्मान बाबा परंतु इस गुरुकुल में राजपुत्र क्षत्रियों के अतिरिक्त किसी और को शिक्षा नहीं दी जा सकती और तुम्हारा पुत्र कण इन दोनों कसयो पर खरा नहीं उतरता अधिरथ तुम्हें इसके लिए कोई और गुरु ढूंढना हो तो क्या शिक्षा द आचार्य क्या माता सरस्वती पहले पिता का नाम पूछती क संसार चाहे मुझे जिस नाम से पुकारे बाबा परंतु आप मुझे राधे कहा कीजिए आपके मुंह से कण सुनकर ऐसा लगता है जैसे कि मैं आपका कोई लगता ही नहीं क्या मैं एक प्रश्न कर सकता हूं अवश्य यह युवक कौन है यह मेरा पुत्र है अश्वथामा अर्थात ना तो यह राजपुत्र है और ना ही क्षत्रिय प्रणाम आचार्य व इसके लड़कपन पर से कर दीजिए गुरुवर [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] तुम्हारी आंखों में प्रतिवाद का रंग क्यों है पुत्र यदि मैं यह देखूं कि पुत्र तो मैं हूं पर आपका स्नेह अर्जुन को मिल रहा है तो मेरी आंखों में प्रतिवाद का रंग तो आएगा ही तुमने कहा था कि तुम मेरा शिष्य बनना चाहते हो तुम्हें मेरा पुत्र विधाता ने बनाया है परंतु तुम सबको अपना शिष्य मैंने स्वयं बनाया है यह गुरुकुल है मेरे घर का आंगन नहीं आंगन पर तुमसे अधिक अधिकार किसी का नहीं है परंतु गुरुकुल में उसका अधिकार अधिक होगा जो सबसे अच्छा शिष्य होगा अर्जुन तो वह नर है अश्वथामा जिसके कारण हमें नारायण के दर्शन होंगे परीक्षा लिए बिना ही गुरु ने यह निर्णय कैसे ले लिया कि अर्जुन ही उत्तम शिष्य है ठीक है तुम्हारे संतोष के लिए परीक्षा ले ही लेते हैं आओ राजकुमारों इस वृक्ष पर एक पक्षी रूपी यंत्र है जो तुम सबका लक्ष्य होगा युधिस्टर जी गुरुदेव लक्ष्य साधो क्या देख रहे हो आकाश पृथ्वी नहीं दुर्योधन जी गुरुदेव इस वृक्ष पर एक पक्षी है जी गुरुदेव लक्ष्य साध जो आ गया गुरुदेव [संगीत] क्या दिखाई दे रहा है पत्तियों में छुपा हुआ एक पक्षी गुरुदेव ठीक है बाण चलाऊ नहीं जी गुरुदेव अश्वथामा जी गुरुदेव लक्ष्य साधु जो आज्ञा गुरुदेव क्या दिखाई दे रहा है आपके चरण वृक्ष और पतियों में छिपा हुआ यंत्र ठीक है जाओ जो आज्ञा गुरुदेव अर्जुन जी गुरुदेव लक्ष्य साधु जो आ गया गुरुदेव [संगीत] क्या दिखाई दे रहा है मुझे तो केवल पक्षी का सिर दिखाई दे रहा है [संगीत] गुरुदेव और अब अब मुझे केवल उसकी एक आंख ही दिखाई दे रही है गुरुदेव ठीक है बस धनुर्धर को उसके लक्ष्य के अतिरिक्त और कुछ दिखाई नहीं देना चाहिए आपका यह शिष्य क्षमा चाहता है [संगीत] गुरुदेव तुम तो मेरा जीवन प्रकाश हो पुत्र परंतु ईषा करना अच्छी बात नहीं है क्योंकि ईषा मनुष्य के गुणों को दीमक की भाति चाट जाती है ण के उत्तराधिकारी तुम हो परंतु द्रोणाचार्य का सर्वश्रेष्ठ धनुर शिष्य यह कुंती पुत्र अर्जुन है आज तुम भी बालपन की सारी सीमाए पार कर चुके हो और मैं भी तुम्हारी समझ में सामाजिक जीवन का यह छोटा सा रहस्य भी नहीं आया कि मित्रता तो बराबर वालो में होती है कृपाचार्य आओ कृपाचार्य प्रणाम ऋषि पुत्र इतनी रात गए आने का कष्ट कैसे किया कृपाचार्य अपनी कृपी की र से प्रार्थना करने आया था ऋषि पुत्र अब तो घर चलिए अभी नहीं कृपाचार्य अभी नहीं परंतु क्यों ऋषि पुत्र क्यों मैं कृपी से यह कहकर घर से निकला था कि मैं उसके पुत्र के लिए गाय लेने जा रहा हूं बिना गाय लिए मैं घर कैसे जाऊं भगवान की दया से आज हमारे पास बहुत सी गाय हैं ऋषि पुत्र परंतु वह गाय नहीं है जिसे लेने के लिए मैं घर से निकला था तो क्या ध्रुपद के पास एक गाय नहीं थी उसके पास गाय भी थी और अपमान भी उसने गाय तो ना दी अपमान बहुत दिया अपमान हा वह दृश्य आज भी मेरे सामने है मैं अब भी देख रहा हूं द्रुपद मेरी ओर ऐसे देख रहा था जैसे वण छाती के आर पार हो जाता है बचपन की बातें भूल जाओ बचपन तो नासमझ होता है आज तुम भी बालपन की सारी सीमाए पार कर चुके हो और मैं भी तुम्हारी समझ में सामाजिक जीवन का यह छोटा सा रहस्य भी नहीं आया कि मित्रता तो बराबर वालो में होती है मित्रता का अधिकार जताए बिना तुम कुछ भी मांगो तुम एक ब्राह्मण हो मैं तुम्हें निराश नहीं करूंगा बचपन की बातें भूल [संगीत] जाओ पर आपने वही पर द्रुपद को उस का दंड क्यों नहीं देती ऋषि पुत्र यदि वह कोई शत्रु होता तो अवश्य दंड देता वो मित्र था और मित्र होते हुए भी उसने समानता की बात उठाई थी कृपाचार्य उसने कहा ब्राह्मण होने के नाते दान में जो चाहे मांग लो परंतु तुमने यह सोचा कैसे कि तुम मेरे मित्र भी हो सकते हो मित्रता बराबर वालों में होती है और यदि मैं उसे बराबर वाला समझता तो अवश्य दंड देता परंतु अब दंड देने की घड़ी आ गई है अब तुम जाओ कृपाचार्य मेरे शिष्य आते ही होंगे जोआ के ऋषि पुत्र [संगीत] घाव बड़ा अपमान का तड़पे निश दिन प्राण मन माना प्रतिशोध ही उसका करे निदान का करे निदान बैठो पुत बैठो पुत्र [संगीत] बैठो अब तुम राजा हो पुत राजा परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि तुम क्षत्रिय हो गए हो तुम आचार्य पुत्र हो और तुम्हारा कर्तव्य है जीवन भर सीखना और जो कुछ सीखा हो उसे योग्य लोगों में बांटना प्रधान शिक्षा नहीं प्रधान योग्यता है जिस प्रकार छोटे बर्तन में नदी नहीं उड़े ली जा सकती उसी प्रकार सागर में बूंद देने का भी कोई अर्थ नहीं क्या सोच रहे हो पुत्र बहुत दिनों से एक प्रश्न में उलझा हुआ हूं क्या जाने से पहले वह प्रश्न कर लूं प्रश्न है किससे पिता से या गुरु से गुरु से पूछो आपने एक लव्य से गुरु दक्षिणा में उसका अंगूठा क्यों लिया क्या इसलिए कि वह क्षत्रिय नहीं था क्षत्रिय तो तुम भी नहीं हो पुत्र परंतु मैं ब्राह्मण तो हूं पहले मनुष्य आया या जातियां केवल जन से कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता जिस दिन ब्राह्मण अपना कर्तव्य भूल जाएगा ब्राह्मण नहीं रह जाएगा एकलव्य से मैंने उसका अंगूठा इसलिए नहीं लिया था कि वह ऊंची जाति का नहीं था क्योंकि विद्या पर किसी जाति का अधिकार नहीं है और ना ही हम किसी पर विद्या का द्वार बंद कर सकते हैं एक लव से मैंने उसका अंगूठा इसलिए लिया था कि उसने विद्या ली नहीं उसने विद्या चुराई थी इसलिए उस विद्या पर उसका कोई अधिकार नहीं यदि वह कोई ब्राह्मण या क्षत्र रहा होता तब भी मैंने उसका अंगूठा मांग लिया [संगीत] होता दिए बिना गुरु दक्षिणा विद्या धन ने सार जो औरों की संपदा औरों का अधिकार औरों का अधिकार [संगीत] [संगीत] प्रणाम [संगीत] गुरुदेव मैं बिल्कुल अकेला रह गया दुन बिल्कुल अकेला अर्जुन जब गंगापुत्र के रोके नहीं रुका तो किसके रो के रुकेगा दुर्योधन किसके रो के गा उसे आप रोकेंगे गुरुदेव मैं तो आपसे केवल यह कहने आया हूं कि आज से कुरु सेना के प्रधान सेनापति आप है आप यह तो नहीं कहेंगे आचार्य कि यह राध आपके ध्वज तले भी युद्ध नहीं कर सकता यदि तुम युद्ध के लिए इतने उत्सुक हो अंगराज तो अवश्य युद्ध करो और आप भी पितामह की भाति यह तो नहीं कहेंगे कि मैं पांडवों का वध नहीं करूंगा मैं यह कहूंगा तो नहीं किंतु मैं यह वचन भी नहीं दे सकता हूं हो सकता है कि वे मेरे हाथों वीरगति को प्राप्त हो जाए किंतु यह भी हो सकता है कि मैं उनके हाथों वीर गति को प्राप्त हो जाओ यह रणभूमि है दुशासन यहां कुछ भी हो सकता है मैं कुरु वंशी नहीं हूं इसलिए मेरे निर्णय का क्षेत्र सीमित है मैं गंगापुत्र की भाति यह भी तो नहीं कह सकता हूं कि मैं किसका वध करूंगा और किसका नहीं करूंगा जब तक तुम्हारे पक्ष में हूं दुर्योधन तुम्हारे शत्रुओं से युद्ध करना मेरा कर्तव्य [संगीत] है कौरव सेना में तुम्हारा स्वागत है अंगराज कण स्वागत है प्रणाम आचार्य [संगीत] a [संगीत] [संगीत] दो [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] रथ रोको सारथी [संगीत] [संगीत] [संगीत] य [संगीत] स [संगीत] गुरु श्रेष्ठ मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं कि मैं आप पर विश्वास कर सकता हूं या नहीं मैं तुम्हारे विश्वास का दास नहीं [संगीत] दुर्योधन रणभूमि और क्रीड़ा भवन में अंतर करना सीखो युद्ध हमारे हाथ में है किंतु युद्ध का परिणाम हमारे हाथ में नहीं है यदि अर्जुन कुछ और दूर होता तो मैं युधिष्ठिर को बंदी बना चुका होता किंतु युद्ध भूमि में शब्द किंतु का बड़ा महत्व होता है अर्जुन को रणभूमि से हटा लो मैं युधिष्ठिर को बंदी बनाकर तुम्हें सौंप [संगीत] दूंगा कल मैं चक्रव्यू की रचना करूंगा जिसे अर्जुन के अतिरिक्त कोई तोड़ ही नहीं [संगीत] सकता हे ब्राह्मण तुम रण भूमि में क्या कर रहे हो तुम आश्रम में जाओ और राज पुत्रों को शिक्षा दो यही तुम्हारा धर्म है हे विराट नरेश यदि व कंधे पर तनीर और हाथ में वह धनुष केवल सज्जा के लिए नहीं है तो युद्ध करो तो अपने सार्थी से कहो कि व भी से सोचना प्रारंभ कर दे कि किस भागना सहज होगा तो वो तुम्हारे रथ को जिधर से निकाल ले जाने का यत्न करेगा मेरे बाण तुम्हारे भागने का व मार्ग बंद कर देंगे ब्राह्मण चलाओ अपना ब्रह्मास्त्र यह ब्रह्मास्त्र तुम्हारी छाती खाने योग्य नहीं है [संगीत] सावधान [संगीत] र विराट नरेश की ओ ले चलो [संगीत] सारथी विराट नरेश के वत पर मैं तुम्ह जीवित नहीं छोडूंगा विराट नरेश जैसे वीर हर वर्ष नहीं हर युग के भाग्य में नहीं होते तुमने वीरता के इस सूर्य का ब कियाम यदि तुम मेरे रथ के सामने से अपना रथ हटाकर ना ले गए मित्र तो मुझे वीरता के एक और सूर्य के अस्त का कारण बनना [संगीत] पड़ेगा हे मित्र यह हमारी अंतिम भेट है आओ एक दूसरे को प्रणाम कर तुम तो मेरे प्रणाम के योग्य भी नहीं हो [संगीत] द्र आगे बढ़ो [संगीत] हो आ [संगीत] [संगीत] [संगीत] धर्मराज युधिष्ठिर क्या आप भी धर्म का पक्ष नहीं लेंगे यदि धर्म की विजय का कोई और उपाय नहीं तो मैं यह पाप का पोच उठाऊंगा वासुदेव मैं ये पाप का पोच उठाऊंगा सागर मंथन के पश्चात केवल अमृत हाथ नहीं आता बड़े भैया विष भी हाथ आता है और जो उस विष को पी जाए वह शिव कहलाता है क्या बाली वध में मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने युद्ध के नियमों का पालन किया था उस गजराज का नाम आप जानते हैं मजल भैया इसका नाम अश्वथामा है [संगीत] वासुदेव मैंने अश्वथामा का व कर दिया मैंने अश्वथामा का व कर दिया मैंने सा लो मैंने अश्वथामा का व कर दिया मैंने संभले रहिएगा बड़े भैया हो सकता है कि आचार्य मजले भैया की बात ना माने और आपसे पूछने चले आए मैंने अ कर दिया गुरुदेव मैंने मैंने अश्वथामा का कर दिया मैंने अश्वथामा का व कर दिया गुरुदेव मैंने मैंने अश्वथामा का व किया गुरुदेव सारथी रथ युधिष्ठिर की ओर ले चलो [संगीत] [संगीत] मुझे तुम्हारा प्रणाम नहीं चाहिए धर्मराज युधिष्ठिर मुझे सत्य चाहिए क्या यह सत्य है कि मेरे पुत्र अश्वथामा का वध हो [संगीत] गया मेरे प्रश्न का उत्तर दो धर्मराज मेरे प्रश्न का उत्तर [संगीत] दो अश्वथामा हता रो [संगीत] ब्राह्मणों को शिक्षा देने का कार्य शोभा देता है गुरुदेव आप क्षत्रियों के क्षेत्र में कहां आ गए [संगीत] [संगीत] [संगीत] ये तुम्हारे गुरु के शस्त्र है कुंती नंदन कुचल डालो इन्ह अपने रत के पहिए से किंतु मुझे अब भी विश्वास नहीं होता कि मेरा पुत्र अश्वथामा तुमसे पराजित हो गया होगा पर धर्मराज युधिष्ठिर झूठ नहीं बोलता इसलिए मैं अपने शस्त्रों को को त्याग रहा [संगीत] हूं शिष्य भी पुत्र समान होता है और यदि तुम मेरे शिष्य ना रहे होते पुत्र भीम इस समय तुम मेरे सामने ना खड़े होते तुम्हारा श पड़ा होता [संगीत] हे [संगीत] [संगीत] छोड़ मुझे छोड़ तुम्हारी इस काता के लिए मैं तुम्ह क्षमा नहीं करूंगा मैं तु जीवन छूंगा नहीं इसने मेरे ने मेरे ने गुरु का किया है तुम तुम महा भारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]

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