महाभारत अपने धनुष को कस के पकड़े रखना अंगराज यह अर्जुन के भय के कारण हाथों से छूटकर भाग भी सकता है अर्जुन तो फिर अर्जुन ही है ना अंगराज उसका सामना तो स्वयं इंद्र भगवान भी नहीं कर सकते क्योंकि अब सारे दिव्यास्त्र तो अर्जुन के पास है ना महादेव की तो मैं नहीं कह सकता किंतु और तो कोई अर्जुन के सामने टिक नहीं सकता हे मद्र नरेश आप दुर्योधन के किए का दंड मुझे क्यों दे रहे हैं मैंने आपसे तो कभी कोई छल नहीं किया था मैंने तो आपसे एक प्रार्थना की थी और आपने अपनी स्वीकृति देकर मुझे सम्मानित किया था मैंने तब भी आपसे यही निवेदन किया था [संगीत] कि अर्जुन के सारथी वासुदेव होंगे तो मुझे भी वैसे ही सारथी चाहिए उस दिन तो आपने मुझसे यह नहीं कहा था नरेश कि अर्जुन से भला तुम क्या युद्ध कर पाओगे करण क्योंकि उसके सामने तो स्वयं देवेंद्र भी नहीं टिक सकते तो क्या आप इस दिन की प्रतीक्षा कर रहे थे कि जब मैं इस कौरव सेना का प्रधान सेनापति बन जाऊंगा तब आप मुझे यह सब बताएंगे हे नरेश मैं अर्जुन को आपसे कहीं अधिक जानता हूं किंतु मैं भी राधे हूं गंगापुत्र भीष्म और आचार्य द्रोण जैसे योद्धाओं का गुरु भाई मेरे गुरु ने मुझे भयभीत होना नहीं सिखाया है इसलिए आप कृपया रथ चलाए सारथी का यह भी कर्तव्य है अंगराज कि वह अपने रथी को उसके भले की समझाए अर्जुन के सारथी ने भी युद्ध के आरंभ में बीच रणभूमि में उसे समझाया था समझाया था कि नहीं कहना मेरा कर्तव्य है मानने या ना मानने का अधिकार तुम्हारा [संगीत] [संगीत] है महाभारत महाभारत मारत महाभारत महाभारत महाभारत
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