Wednesday, 31 December 2025

मद्र नरेश ने कर्ण को भयभीत क्यों किया था Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत अपने धनुष को कस के पकड़े रखना अंगराज यह अर्जुन के भय के कारण हाथों से छूटकर भाग भी सकता है अर्जुन तो फिर अर्जुन ही है ना अंगराज उसका सामना तो स्वयं इंद्र भगवान भी नहीं कर सकते क्योंकि अब सारे दिव्यास्त्र तो अर्जुन के पास है ना महादेव की तो मैं नहीं कह सकता किंतु और तो कोई अर्जुन के सामने टिक नहीं सकता हे मद्र नरेश आप दुर्योधन के किए का दंड मुझे क्यों दे रहे हैं मैंने आपसे तो कभी कोई छल नहीं किया था मैंने तो आपसे एक प्रार्थना की थी और आपने अपनी स्वीकृति देकर मुझे सम्मानित किया था मैंने तब भी आपसे यही निवेदन किया था [संगीत] कि अर्जुन के सारथी वासुदेव होंगे तो मुझे भी वैसे ही सारथी चाहिए उस दिन तो आपने मुझसे यह नहीं कहा था नरेश कि अर्जुन से भला तुम क्या युद्ध कर पाओगे करण क्योंकि उसके सामने तो स्वयं देवेंद्र भी नहीं टिक सकते तो क्या आप इस दिन की प्रतीक्षा कर रहे थे कि जब मैं इस कौरव सेना का प्रधान सेनापति बन जाऊंगा तब आप मुझे यह सब बताएंगे हे नरेश मैं अर्जुन को आपसे कहीं अधिक जानता हूं किंतु मैं भी राधे हूं गंगापुत्र भीष्म और आचार्य द्रोण जैसे योद्धाओं का गुरु भाई मेरे गुरु ने मुझे भयभीत होना नहीं सिखाया है इसलिए आप कृपया रथ चलाए सारथी का यह भी कर्तव्य है अंगराज कि वह अपने रथी को उसके भले की समझाए अर्जुन के सारथी ने भी युद्ध के आरंभ में बीच रणभूमि में उसे समझाया था समझाया था कि नहीं कहना मेरा कर्तव्य है मानने या ना मानने का अधिकार तुम्हारा [संगीत] [संगीत] है महाभारत महाभारत मारत महाभारत महाभारत महाभारत

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