महा अमरूद खाओगे ना कुल इच्छा नहीं है बड़े मीठे हैं इच्छा नहीं है भैया तुम खाओगे पार्थ बड़े भैया के प्रश्न का उत्तर दीजिए केशव पितामह से युद्ध कर ने के लिए नारी कहां से लाई जाए क्या यहां पर मैं किसी को दिखाई नहीं दे रही हूं कल मैं पिता मा का सामना करूंगी लो पार्थ तुम्हारी समस्या का समाधान तो मिल गया कल्याणी गंगापुत्र का सामना करेगी किंतु क्या ऐसा करने से क्षत्रिय मर्यादा का उल्लंघन नहीं हो जाएगा वासुदेव पुरुषों के होते हुए यदि नारी को रणभूमि में आना पड़े तो यह पुरुषों के लिए मरने की बात है हम बात तो बड़े भैया भी ठीक ही कर रहे हैं पांचाली पुरुषों के होते भला नारी रणभूमि में क्यों जाए मुझसे पुरुषों की बात ना कीजिए वासुदेव कुछ पुरुषों को मैं भी जानती हूं यह पांच महापुरुष चाहते यही है कि कोई भी ऐसा माग निकल आए कि यह गांधारी पुत्र का वध करने से बच जाए वे तो इन महापुरुषों के सगे हैं मैं तो पराई हूं यदि मेरा अपमान भी हो गया तो कौन सा आकाश फट पड़ा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा अब यह तो तुम इनके साथ खुला अन्याय कर रही हो कल्याणी यह महापुरुष हैं जभी तो साधारण व्यक्तियों की भांति प्रत्यागमन नहीं करते तुम भी एक असाधारण नारी हो द्रौपदी और एक असाधारण नारी की भांति प्रत्यागमन करना सीखो क्या तुम यह चाहोगी कि कल इतिहास यह कहे कि तुम्हारे इन खुले हुए केशों के लिए लाखों लोग कट गए क्या तुम्हारे अपमानित केश रणभूमि में पड़े लाखों शवों का बोझ उठा सकेंगे तुम केवल एक नारी नहीं हो कल्याणी तुम समस्त नारी जाति के स्वाभिमान का प्रतीक हो इसलिए जहां मूल प्रश्नों पर वाद विवाद चल रहा हो वहां अपने अपमानित खुले हुए केश ना दिखलाया करो [संगीत] आपका कहना उचित है बड़े भैया आपके होते कल्याणी रणभूमि में नहीं जा सकती किंतु भ्राता शिखंडी को तो कोई मर्यादा रोक नहीं सकती भ्राता शिखंडी [संगीत] महारथ अवश्य है केशव किंतु वे पितामह का सामना नहीं कर सकते और फिर पितामह ने नारी की बात की थी वे अर्ध पुरुष ही सही किंतु है तो पुरुष ही ना वे तुम्हारे लिए अर्ध पुरुष होंगे पार्थ परंतु पितामह उन्हें देखते ही धनुष रख देंगे ऐसा क्यों वासुदेव ऐसा इसलिए प्रिय सहदेव कि गंगापुत्र के लिए महारथी शिखंडी नारी ही है गंगापुत्र उनमें काशी की राजकुमारी अंबा को अवश्य पहचान लेंगे यह ठीक है कि गंगापुत्र ने काशी राजकुमारी अंबा का जाने या अनजाने में तनिक भर भी अपमान नहीं किया था किंतु अपमान के नर्क में जलने वाली अंबा यह देख नहीं पाई थी और उसने हस्तिनापुर राजसभा में प्रतिज्ञा की थी कि चाहे उसे जन्म पर जन्म लेने पड़े किंतु वही गंगापुत्र भीष्म की मृत्यु का कारण बनेगी तो उसने जन्म पर जन्म लिया सहदेव और आज शिखंडी बनकर कुरुक्षेत्र में उपस्थित है किंतु क्या पितामह उन्हें पहचान लेंगे वासुदेव यदि वे गंगापुत्र भीष्म ना होते तो कदाचित ना पहचान पाते किंतु वे गंगापुत्र भीष्म हैं और इसीलिए शिखंडी के रूप में सामने खड़ी अंबा को अवश्य पहचानेंगे महाभारत महा भारत महाभारत महाभारत हो महाभारत
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