[संगीत] महाभारत आंखें झुकाना इस समस्या का समाधान नहीं है पिता मा मैं आपके कुल द्रौपदी एक वस् में लिपटी हुई ऋतु स्नान किए बिना इस भरी कु सभा में आपको प्रणाम करती हूं और यह जानना चाहती हूं कि आप मुझे आज क्या आशीर्वाद देंगे आप तो जेष्ठ गुरु है महावीर है श्रेष्ठ विद्वान है बताइए क्या आपने केवल गुरु सिंहासन की रक्षा का वचन लिया था क्या गुरु मर्यादा का कोई महत्व नहीं है आप जैसे महापुरुष शूरवीर को से मु चिपाना शोभा नहीं देता मा मेरी ओर देखिए देखिए मेरी ओर मैं गुरु मर्यादा के आगे लगा हुआ एक प्रश्न चिन्ह हूं देखिए मेरी ओर देखिए कि आपकी कुलवधू किस दशा में खींच कर यहां लाई गई है और मुझसे कहिए कि भारतवंशियों की क्या यही परंपरा है के मुझसे ये सुनकर मैं छुप हो जाऊंगी छुप हो जाऊंगी मैं मैं जिस वंश के हो उस वंश की परंपरा कुछ और है उस वंश में लोग अपनी कुल वद के मान सम्मान की रक्षा करने के लिए मर मिरते हैं परंतु हर परिवार की अपनी परंपरा होती है कृपया मुझे भरत भों की परंपरा बताइए मेरी और देखिए पिता मा जब मैंने पहली बार आपके चरण छुए थे तो आपने मुझे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दिया था अपने उस आशीर्वाद की दशा देखिए देखिए पिता मां अपने उस आशीर्वाद की दशा देखिए आपके सामने य अधर्म हुआ और आपने इसे सहन किया तो क्या इसका नहीं है क्या आपने इस कपट इस अन्याय इस अधर्म को स्वीकार किया क्या आप भी मेरे अपमान की भागीदार नहीं है यदि नहीं है तो उठ अपने ष और छेद दीजिए उस जीव को जिसने आपकी कुल द्रौपदी को दासी कहने का अपराध किया है पाप की वृक्ष के छय में बैठे है पिता मा उठ जाइए उठ जाइए आपको तो शास्त्रों का ज्ञान है पि मुझे बताइए जो व्यक्ति स्वयं अपने को जुए में हार चुका है वह कौन होता है किसी और की स्वतंत्रता किसी और के आत्म सम्मान को दाव पर लगाने [संगीत] वाला मैं अपने प्रश्न का उत्तर मांग रही हू पिता मा और आपका य लज्जित मोन मेरे इस प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता क्योंकि यह प्रश्न केवल द्रौपदी नहीं कर रही है य प्रश्न ही है नारी जाति यह प्रश्न कर रही है पृथ्वी जो हर प्राणी की मां है यह प्रश्न कर रहा है इस देश का भविष्य जिसे आपके पूर्वज चक्रवर्ती महाराज भरत से अपना नाम मिला है मुझे मार्ग दर्शन कराइए गंगा पुत्र भीष्म पिता मा पुत्री नहीं मैं आपसे नातो की बात नहीं कर रही हूं पता मा उस अपमान की बात कर रही हूं जो पिघल कर आंसू बन के मेरे आंखों से बह रहा है यदि पत्नी पति की संपत्ति होती है तो जब मेरे पति अपने को हारे उसके साथ मुझे भी हार गए तो फिर पर कैसे लगी और यदि पत्नी पति की संपत्ति नहीं तो मेरे पति मेरी आज्ञा लिए बिना मुझे दा पर कैसे लगा सकते हैं इस वंश की मर्यादा इस विषय में क्या कहती है और कृपया मुझे पुत्र से संबोधित ना कीजिए यदि मैं भरत बं की पुत्र नहीं होती तो आपने मेरा ये अपमान इस प्रकार चुपचाप कभी ना सहन किया होता मुझे कुल वधु कहिए क्योंकि मैं देखना चाहती हूं इस सभा में खड़ी इस द्रौपदी को कुल वधु कहते हुए आपकी जीम लड़खड़ा है या नहीं पांचाली के प्रश्नों का उत्तर दीजिए पितामह उत्तर [संगीत] दीजिए पितामह क्या उत्तर देंगे ये तो स्वयं एक प्रश्न है आपके प्रिय अनुज पांडु के पुत्र वधु द्रौपदी आपको प्रणाम करती है ज्येष्ठ पिता श्री आप बड़े भाग्यवान है जो नेत्र हीन जन् में नहीं तो आज अपनी सभा में अपनी पुत्रों की दुर्दशा देखकर अवश्य ही नेत्रीन हो गए होते मुझसे कुछ ना कहो पुत्री कुछ ना कहो युधिष्ठिर ने मुझसे तुम्हें हारने की आज्ञा ली थी और ना ही दुर्योधन ने जीतने से पहले तुम्हे जीतने की अपना यह प्रश्न लेकर युधिष्ठिर के पास जाओ जिसने तुम्हें दांव पर लगाकर भरत वंश की मर्यादा को भंग किया है जो आज्ञ ज्येष्ठ पिता श्री परंतु उनके पास अपना प्रश्न ले जाने से पहले मैं अपने पिता के मित्र द्रोणाचार्य को प्रणाम करना चाहती हूं जिनके लिए भी मेरे पास एक प्रश्न है आपने काका शि विद्युत द्वारा यही संदेश भेजा था ना कि ध्रुपद पुत्री होने के नाते मैं आपकी पुत्री हूं और पांडवों की पत्नी होने के नाते आपकी पुत्र मधु तो आज इस सभा में पुत्री के नाते आपका चरण स्पर्श करो या पुत्र वधु के नाते [संगीत] आपने भी अपने होठों पर मोहन का ताला लगा [संगीत] लिया कुल गुरु कृपाचार्य [संगीत] काका श्री महात्मा विदुर की नीति इस विषय में क्या कहती है आप तो करवे सच बोलने के लिए प्रसिद्ध है आप तो चुप रही है क्या किसी पति को अधिकार है वो अपनी पत्नी को जुए में हार जाए क्या किसी दास को अधिकार है कि वो किसी और की स्वाधीनता को दाव पर लगा दे भाभी श्री ठीक कह रही है जो बोलता है उसे बोल लेने दो भांजे जो होना था सो तो हो ही गया प्रिय युधिष्ठिर तो द्रौपदी को हार ही चुके हैं यह होते कौन है मुझे हारने वाले यदि इन्ह अपने पत्नी को हारने का अधिकार हो भी तो मैं केवल इनकी पत्नी तो नहीं हूं मैं पांचों पांड पुत्रों की पत्नी हूं और मुझ पर केवल का अधिकार नहीं है क्या उन्होने दाव पर लगाने से पहले तुमसे यह पूछा था कि यह तुम्हारी पत्नी को दाव पर लगा सकते है या नहीं क्या तुम नेनी आज्ञा दी [संगीत] थी सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर मीन बधन करके मेरे स्वयं जीतने वाले शूर तुम बोलो क्या तुमने मेरा स्वयंवर इसलिए जीता था कि जेष्ठ कुं पुत एक दिन मुझे दा पर लगा दे संसार में इनसे पहले भी जवारी हो चुके हैं पर किसी ने कभी अपने राकेल को भी दाप लगाया था और तुम लोग तुम लोग अपने बहाता का द लग जाना देखते रह गए िकार है तुम लोगों की वीरता पर िकार है अब पंचाली के प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं देते भ्राता श्री आप तो स्वयं धरती पर धर्म का चिन्ह है महादेव की सौगं यदि आप आप ना रहे होते तो मैं पांचाली को दाव पर लगाने वाले हाथों को वृक्ष की भाती जट के देता आज जाके मेरी अभिलाषा पूरी हुई भांजे के पांडवों में फूट पड़ ही गई जैसे दमक बड़े बड़े वृक्षों को चर जाती है जैसे रोग शरीर को खा जाता है भाभी श्री के अपमान का य रोग विम की भाती भरत वंश के वृक्ष को नष्ट कर देगा और हम लोग जिस करीमा की छाव में जी रहे हैं ये रोग उस करमा को भी नष्ट कर देगा पितामह पिताश्री काका श्री गुरुवर द्रोण कुल गुरु कृपाचार्य अंगराज कन भाभी श्री के प्रश्न का उत्तर दीजिए क्योंकि आपका दिया हुआ उत्तर आगे चलकर हस्तिनापुर के भाग्य या दुर्भाग्य के द्वार खोलेगा और मेरे इस प्रश्न का भी उत्तर दीजिए क्या एक पत्नी को इसका अधिकार है कि वह अपनी पत्नी को जुए में हार जाए और यदि आज भी आप लोगों ने मेरे इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया तो यह प्रश्न किसी भी जन्म में आप लोगों का पीछा नहीं छोड़ेगा और मेरे इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए आपको बार बार जन्म लेना होगा बार बार जन्म लेना होगा यर ने द्रौपदी को दाव पर लगाकर अच्छा नहीं किया परंतु पत्नी पर पति का अधिकार तो सिद्ध है अधिकार अधिकार की परिभाषा क्या है क्या भी सच नहीं है पता मा कि पत्नी के आत्म सम्मान की रक्षा करना पति का परम कर्तव्य है यह पांच तो तुम्हारी रक्षा नहीं कर पाए इसलिए आकर मेरे मित्र दुर्योधन की गोद में बैठ जाओ पांच पतियों वाली तो तुम पहले ही से हो तो छठे का हाथ पकड़ लेने में हानि क्या है एक दिन मैं तुम्हें इस अपमान का दंड अवश्य दूंगा कर्ण अवश्य दुका महाभारत महा भारत महाभारत महाभारत हो महा भार [संगीत]
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