महाभारत सहदेव जी भ्राता श्री देखो तो भैया कौन आ रहा है जो आज्ञ भ्राता [संगीत] श्री भता श्री यह तो सैकड़ों रथों के आने की गड़गड़ाहट है कदाचित हमारे वनवास से दुर्योधन का जी नहीं भरा आप हमें अपने बचाव के लिए शस्त्र उठाने की तो आज्ञा देंगे ना भता श्री तुम मामा श्री शकुनी को नहीं जानते प्रिय अर्जुन उन्हें क्या पड़ी हम पर आक्रमण करने की वह तो 13 बरस के अज्ञात वस पर आंखें लगाए बैठे होंगे कि वह हमें खोज निकाले और हमें एक बार फिर 12 बरस का बनवास और 13 बरस का अज्ञात वास मिल जाए वह अनुज दुर्योधन को कभी चौकी में नहीं पड़ने देंगे और यदि यह सेना किसी आक्रमण के लिए आई होती तो उसके रथ क्यों थम गए होते यह अवश्य किसी मित्र की सेना है क्या अब भी हमारा कोई मित्र बाकी है भ्राता श्री तो फिर और कौन इतनी बड़ी सेना लेकर आ सकता है बड़े भैया सेनाएं मित्र या शत्रु नहीं होती प्रिय नकुल मित्र या शत्रु तो होता है [संगीत] सेनापति प्रणाम प्रणाम युवराज सौभाग्यवती भव विराजी युवराज हमारे पिता श्री ने बैठने की आज्ञा नहीं दी महाराज क्या महाराज ने बैठने की आज्ञा नहीं दी जी हां मेरे लिए आदेश है कि मैं यहां पहुंचते ही आप सबको सूचित कर दूं कि हमारी सेना हस्तिनापुर पर आक्रमण करने के लिए तैयार है यह युद्ध आपके धवज के नीचे होगा और एक विशेष आदेश यह भी है कि विजय के पश्चात ही अपना कवच और अपने शस्त्र उतारू यदि हम युद्ध चाहते युवराज तो हम पांचों भाई हस्तिनापुर की सेना के लिए बहुत थे परंतु मैं भरसक यु चाहता नहीं युद्ध चाहते नहीं क्या यह वाक्य महाराज भरत के उत्तराधिकारी चक्रवर्ती महाराज पांडु के जेष्ठ पुत्र सम्राट युधिष्ठिर के हैं युद्ध चाहते नहीं परंतु युद्ध मैं चाहता हूं राजन मैं चाहता हूं क्योंकि आप भले ये भूल गए हो कि उस ूथ क्रीड़ा भवन में जिस देवी का अपमान हुआ था वो कौन है परंतु मैं नहीं भूल सकता मैं ये कदापि नहीं भूल सकता कि वो देवी कौन है वो मेरी बहन है राजन मेरी बहन है अब अब आके दीजिए आपका क्रोध निराधार नहीं है युवराज इसलिए मैं आपको रोक नहीं सकता यदि पांचाली ये समझती हो कि उनका मान या अपमान हमारे मान या अपमान से अलग है और पांचाली यदि चाहती हो कि उनके इस व्यक्तिगत अपमान का प्रतिशोध आपका दायित्व है तो आप अवश्य हस्तिनापुर पर आक्रमण [संगीत] कीजिए पिता श्री से यह निवेदन है भई अब मेरा भाग्य दुर्भाग्य इन भाइयों के भाग्य दुर्भाग्य का एक भाग है लाठी मारने से पानी तो चाहे अलग भी हो जाए परंतु अपमान की कोई भी लाठी मेरे मानी अपमान को इनके मानी अपमान से अलग नहीं कर [संगीत] सकती आप कमप ले लौट जाइए क्या आप अपनी रणभूमि से भाग सकते भ्राता श्री मैं ज्वाला पुत्र धरती से बंधा हुआ पूछ तो सकता हूं परंतु भाग नहीं सकता परंतु तुमने प्रश्न किया क्यों हमारे पिता श्री तो पहले से जानते थे कि पांडवों की आस्ता ने युद्ध की आ नहीं देगी ठीक है पर आप जब भी युद्ध का निर्णय लेंगे तो आपको काम पिल्ले की की सेना अपने ध्वज के नीचे लड़ने के लिए सदैव तैयार मिलेगी इसका तो मुझे विश्वास है युवराज यदि आप आज्ञा द तो इन 13 वर्षों के लिए द्रोपति को काम पिले ले जाऊं मैंने आपसे यह प्रश्न इसीलिए किया था भ्राता श्री यदि आप रणभूमि छोड़कर भाग नहीं सकते तो आपकी बहन भला रणभूमि छोड़कर कैसे भाग सकती है रणभूमि [संगीत] हां यह वनवास मेरी रणभूमि है और ये खुले हुए केश मेरे शस्त्र भारत महाभारत महाभारत [संगीत] महाभारत महाभारत i
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