[संगीत] हम कौन है हमारा अस्तित्व क्या है हम क्या है और क्या बन सकते हैं यह बड़ा विचित्र प्रश्न है परंतु उतना ही महत्त्वपूर्ण मनुष्य सदा अपने वर्तमान प्रारब्ध के लिए अपने अतीत को उत्तरदाई ठहरा है अपने जन्म को अपने परिवार को उत्तरदाई ठहरा है परंतु तनिक सोचिए एक कमल जो कीचड़ में खिलता है वही कमल भगवान की मूरत पर शोभित होता है एक कोयला जिसे कोई भी शीघ्र नहीं छूना चाहता परंतु वही कोयला धरा का ताप और दबाव सहकर हीरे में परिवर्तित हो जाता है और वही हीरा मस्तक पर सुशोभित होता है तो इन उदाहरणों का निष्कर्ष क्या है इन उदाहरणों का यह निष्कर्ष कि उससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि आपने जन्म कहां लिया आपके कर्म आपका स्तर निर्धारित करते हैं हमने कहां जन्म लिया यह हमारे नियंत्रण में नहीं था हम कब और कहां अपने जीवन की अंतिम स्वास लेंगे यह अवश्य हमारे नियंत्रण में होता है तो कर्म कीजिए अपने जन्म की उलाहना मत दीजिए य कवच मेरा कौशल मेरी प्रतिभा नहीं ये कवच छने के पश्चात अब ये द्वंद समान है परंतु तुम सावधान [संगीत] रहना क्योंकि इस अस्त्र का प्रयोग मैं तुम पर ही करूंगा मैं उस द्वंद की प्रतीक्षा करूंगा आपका मत चित था माथा आज मैंने भी सी लिया कि कण से बड़ा दानवीर कोई [संगीत] नहीं [संगीत] [संगीत] निश्चिंत नहीं सूर आपका पुत्र बेड़ा में [संगीत] नहीं करते क्या [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] क क क ठहर राजमाता प्रता दूर रहिए मेरे पिताश्री से अभी इनका पुत्र जीवित है इन्हे संभालने के लिए मैंने सदा अपने पिता से दूरी बनाए रखी इन्होंने मेरी माता और मेरे साथ जो व्यवहार किया उसके लिए मैं इन्ह कभी क्षमा नहीं कर पाया परंतु आज भान हुआ कि जितने कष्ट आपने मेरे पिता को दिए उसके सामने उसके सामने हमारा कष्ट तो कुछ भी नहीं था मुझे इन्ह चिकित्सा के लिए शिविर ले जाना इनकी चिकित्सा अवश्यक [संगीत] है पिताश्री मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा मैं वचन देता हूं आपका पुत्र आपके साथ [संगीत] है उतरी कुंती इतनी व्यथित होकर कहां जा क्या कारण होगा मिट ये ये क्या हुआ इसे लिटा हो इसे ओ [संगीत] ग ये य क्या क्या हुआ मेरे मित्र को विन मेरे मित्र की यह दशा किसने की मैं प्राण ले लूंगा उसके मैं कुछ पूछ रहा हूं क्या हुआ क्या क्या हुआ मैं आपको सब कुछ बताता [प्रशंसा] माता प्रणिपात माता आप आप अचानक यहां पे सदेव शीघ्र में साथ चल परंतु कहां माता यह सिद्ध करने के लिए केवल तुम मुझे माता कहते हो हृदय से भी मानते हो परंतु हुआ क्या है माता श्री कहां ले जा रही है आप हमें तुम दोनों को च कण का उपचार करना है [संगीत] अर्जुन यह जल उस अर्जुन ने किया है वो वो कर्ण को जमात कर देना चाहता था अब उस सरजम के साथ-साथ उन पांडवों को भी समाप्त कर दूंगा मैं पांडव पुत्रों मैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं रुक जाइए आपका वहां जाना उचित नहीं मैं वहां जाऊंगा आवाश से जाऊंगा ो मुझे रुक जा मित्र जो तुम सोच रहे हो वो भूल के भी मत [संगीत] करना परंतु उन्होने उन्होंने तुम्हारे साथ में छल किया मित्र मेरा मित्र मेरे जीवन की सबसे बड़ी शक्ति छीनना चाहा उन्होंने और उने लगता है कि वो हमारा नाश कर देंगे कसे मित्र मेरा कवच लिया गया है पर मेरी निष्ठा और मेरा विश्वास नहीं मेरे कुंडल ले लिए पर मेरा कौशल [संगीत] नहीं य अंत नहीं प्रारंभ है प्रारंभ है मेरे विजय का ये क्या कह रहे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] हो यदि तुमने मुझे मन से अपना मित्र माना है तो तुम नहीं [संगीत] जाओगे मैं जाकर चिकित्सक को ले आता [संगीत] [संगीत] हूं ता श्री ये आप क्या कह रही है माता कण हमारा शत्रु है और हमारे भ्राता अर्जुन के प्राणों का प्यासा है वह और आप चाहते हैं हम उसका उपचार करें और वैसे भी बड़ा शूरवीर बनता है हम भला उसकी सहायता क्यों करें क्योंकि कान [संगीत] में क्या हुआ माते क्या कुछ ऐसा है जो आप हमसे छिपा रही हैं बताइए व क वह मेरा सबसे योग्य शत्रु है [संगीत] जेष्ठ उसे अधिकार है युद्ध क्षेत्र में स्वस्थ होकर अपना कौशल दिखाए ताकि मैं मैं भी उस पर अपना कौशल सिद्ध कर सकूं इंद्रदेव ने कर्ण के साथ जो छल किया वो किया परंतु मैं चाहता हूं कि युद्ध भूमि में कर्ण अपने पूरे बल के साथ मेरे समक्ष प्रस्तुत [संगीत] हो ताकि ना ही उसे और ना ही संसार को यह कहने का अवसर मिले कि अर्जुन ने एक दुर्बल का वद किया [संगीत] क्षमा करें युवराज क्योंकि अंगराज के शरीर पर घाव अधिक गहरे हैं इसलिए मैं उनकी रक्षा नहीं कर सकता कदाचित ईश्वर की यही इच्छा [संगीत] है य ईश्वर की नहीं मेरी मेरी इच्छा चलती है और मेरा मन यह कहता है कि यदि मेरे मित्र को कुछ भी हुआ तो उससे पहले ईश्वर के दर्शन तुम करोगे अब समझने का प्रयास कीजिए युवराज अंगराज के शरीर पर कवच और कुंडल दिव्य थे जो उनके शरीर से जुड़े थे यूं मान लीजिए उनके शरीर का अंग ही छीन लिया [संगीत] गया इसलिए मैं उनकी सहायता नहीं कर सकता मेरा उपचार उनके लिए असंभव है युवराज परंतु हमारे लिए संभव है तो जो कार्य अर्जुन के पिता पूर्ण नहीं कर पाए वो पूर्ण करने आए हो पा पुत्र इतना साहस साहस कैसे हुआ इस शहर में आने का कैसे यह मेरे आदेश से यहां है पुत्र दुर्योधन की इस दशा का जितना तु दुख उससे कई अधिक हमें खेद इसलिए मैंर सेव को य लाई का उपचार करने के लिए धन्यवाद परंतु मुझे आपकी सहायता की आवश्यकता नहीं है आप जा सकते हैं मैं मैं संसार के सबसे अच्छे वैद को बुलाऊंगा अपने अपने मित्र के उपचार के लिए सबसे अच्छे व वेद ने जो कहा है व तुम सुन चुके हो यह दिव्य कवच निकालने का घाव है मनुष्य के उपचार से नहीं [संगीत] भरेंगे और सदेव अपने पिता अश्विनी कुमार की विद्या ज्ञात शीघ्र कण को ठीक कर [संगीत] देंगे क को कुछ भी हो गया तो उसका उत्तरदायित्व कौन लेगा इसका उत्तरदायित्व मैं लेता हूं दुर्योधन मुझे नकुल सहदेव की योग्यता पर पूर्ण [संगीत] विश्वास हम अधिक समय व्यर्थ नहीं कर सकते ण के पास समय शेष नहीं मैं अपने अपने मित्र के प्राण अपने शत्रु के हाथ में नहीं दे सकता परंतु एक पुत्र का दत एक माता को तो दे सकते हो ना रतन पुत्र करने सदा [संगीत] मुझे आ के सम्मान का आदर किया है मैं भी सदा उसकी हित रही [संगीत] हूं एक अवसर दो नकुल और सदेव [संगीत] को [संगीत] एक अवसर तो नकुल और सदेव को ठीक उपचार आरंभ [संगीत] करो [संगीत] ओम अश्विनी कुमारा नमः ओम अश्विनी कुमारा [संगीत] नमः [संगीत] क्षमा क्मो सेयम शचम इंद्रिय निग्रह मोय शचम इंद्रिय निग्रह र् विद्या सत्यम प्रतो दकम धर्म लक्षणं र् सत्यम क्रोध दकम धर्म रक्षणम शकम धर्म लक्षणं धर्म [संगीत] लक्षण तुम दोनों ने जो किया व प्रशंसा के योग्य [संगीत] है अ प्रस्थान कर [संगीत] हम प्रस्थान करें अर्थात आप हमारे साथ नहीं आ रही है माते नहीं पु मेरा धर्म मुझे अपना ससुराल छोड़ने की आज्ञा नहीं [संगीत] देता मुझे यही गौरव शिर में रहना होगा हम युद्ध की चौकट पर खड़े हैं माता श्री हम आपको शत्रु शिवर में नहीं रहने दे सकते मेरी रक्षा का द तुम पर [संगीत] छोड़ [संगीत] धम अब मित्र को विश्राम करने देना चाहिए चलिए [संगीत] [संगीत]
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