Monday, 29 December 2025

नारायण की कृपा से साधु व्यापारी का उद्धार हुआ HitanshuJinsi Vighnaharta Ganesh Ep 781 PenBhakti

प्रभु मुझसे भूल हुई है उसे सुधारना होगा शीर सुधारना होगा मंत्री जी महामंत्री [संगीत] जी जी महाराज महामंत्री जी पता कीजिए जिस दिन हमारे राज भवन में चोरी हुई थी क्या साधु नाम का व्यापारी हमारे राज्य में था क्या उसने किसी के साथ व्यापार किया था शीघ्र पता कीजिए जो आ गया महाराज [संगीत] ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है जैसे वे दोनों बहुत भूखे [संगीत] हो यहां का भोजन स्वादिष्ट नहीं है [संगीत] क्या महाराज प्रणाम महाराज महाराज चंद्रकेतु हे न्याय के देवता समान महान महाराज चंद्र केत यह प्रश्न आप अपने इन दो सैनिकों से ही क्यों नहीं पूछ लेते महाराज क्योंकि जो व्यक्ति भोजन ग्रहण करता है उसका स्वाद तो वही बता सकता है उस दिन जब हम दोनों आपके सामने थे तब आपने हमारी एक नहीं सुनी अब हमारा नाम जानकर क्या लाभ होगा तुम्हारे सैनिकों ने जब साधु व्यापारी और उसके जमाई को दोषी ठहराया था तो क्या तुमने खुले मन से दोनों पक्षों की बात सुनी थी महाराज यह सत्य है साधु नाम का एक व्यापारी अपने जमाई के साथ उस दिन हमारे राज्य में आया था [संगीत] अदभुत विचित्र है यहां का राज्य और विचित्र है यहां का न्याय पहले दंड दिया और अब उसकी जांच कर रहे हैं महाराज इन्हे मुक्त किया जाए मुझे क्षमा कीजिए भूल हुई है मुझसे आप तो क्षमा मांग लेंगे महाराज किंतु उससे हमारा क्या भला होगा ना तो कष्ट में बीता हमारा समय और ना ही व्यापार में खोया हमारा धन मुझे खेद है मैं उसकी भरपाई करूंगा जितना भी लाभ आपने कमाया था मैं उसका दोगना दूंगा उसका दोना [संगीत] [संगीत] दू [संगीत] [संगीत] महामंत्री जी जी महाराज य एक नौका में आए थे इनके लिए दो नौका तैयार कीजिए इतने समय से य भोजन नहीं कर सके इन्ह राजसी भोज कराइए और फिर पूरे सम्मान के साथ यहां से विदा कीजिए जो आज्ञा महाराज बहुत बहुत धन्यवाद [संगीत] महाराज [संगीत] [संगीत] [संगीत] आइए आइए महाराज के आदेशा अनुसार सारी व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी है दोनों नौका तैयार [प्रशंसा] [संगीत] है व्यापारी साधु जी अब आप हमें आज्ञा दीजिए और हमारे राज्य में पुनः अवश्य पधारे अब आपको कोई कठिनाई नहीं होगी उचित है मंत्री महोदय उचित है आपका यह सत्कार देखकर तो मन अति प्रसन्न हो गया अब आप प्रस्थान करें [संगीत] पिताजी अब हमें भी प्रस्थान करना चाहिए मां और कलावती पता नहीं किस स्थिति में होंगी रे रुको रुको पुत्र इतनी भी क्या शीघ्रता है एक बार बाकी के संदूक भी तो देख ले कि उनमें क्या दिया है राजा ने ऐसा तो नहीं कि बाकी के संदूक में घास पूस भर के भेज रहे हैं हमें यहां से देखो देखो [संगीत] [संगीत] धन ही धन साधु व्यापारी पुन धनवान हो गया भाग्य खुल गए मेरे भाग्य खुल गए [संगीत] मेरे और इस प्रकार प्रभु श्री सत्यनारायण की कृपा से मैं मुक्त भी हुआ जितना धन मैंने अर्जित किया था उससे दुगना प्राप्त किए और उसके पश्चात हम घर जाने के लिए तैयार थे साधु व्यापारी की कथा यहां समाप्त नहीं होती किंतु अनेक सीखों के साथ श्री स नारायण की कथा का तीसरा अध्याय यहां समाप्त होता है अब बुद्धि विधाता प्रथम पूज्य गणेश जी हमें विस्तार से बताएंगे सीख तीसरे अध्याय से संकल्प पूजा का हो या किसी अन्य कार्य का वो वचन होता है और जो अपना वचन तोड़ता है वो न की देवी का अपमान कर उनके दंड का भागी बनता है इसलिए संकल्प लेना बड़ी बात नहीं है उसे पूर्ण करना बड़ी बात है इस अध्याय से दूसरी सीख यह मिलती है कि कठिन समय में भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि ईश्वर ही वह परम सत्य है जो सदा स्थिर रहते हैं बवंडर कैसा भी हो उसमें से नैया पार ईश्वर ही करवाते हैं ति श्री रेवा खंडे श्री सत्यनारायण व्रत कथा नाम तृतीय अध्याय समाप्त बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की [संगीत] जय [संगीत] [संगीत] [संगीत] बोलिए श्री सत्यनारायण भगवान की [संगीत] जय प्रभु श्री सत्यनारायण कथा का एक और अध्याय समाप्त हो गया और कैलाश में किसी ने भी मेरे बारे में सोचा तक नहीं मेरे साथ ये अन्याय [संगीत] [संगीत] क्यों अब श्री सत्यनारायण कथा के चौथे अध्याय का आरंभ होगा जिसमें व्यापारी साधु की शेष कथा कही जाएगी किंतु अब कथा में कुछ शेष कहां रहा है प्रभु पत्नियों के व्रत के प्रभाव से साधु और उसके जमाई कारागार से मुक्त हो गए और फिर धनवान हो गए तो कथा तो समाप्त हो गई क्योंकि अभी ना तो देवी लीलावती और उनकी पुत्री कलावती का व्रत संपन्न हुआ था और ना ही साधु और उनके जमाई घर पहुंच सके थे कथा के इस भाग का सार है प्रभु की कृपा और उनके प्रसाद की [संगीत] महिमा जो भूल मैंने पहले की थी उसके कारण मैं कारागार में पहुंच गया और अब मेरी पत्नी और पुत्री द्वारा उनका व्रत समाप्त करने के पूर्व ही दुर्भाग्यवश मुझसे एक और भूल हो गई आप कहां खोए हुए हैं अब हमें चलना चाहिए कुछ समय तो रुको पुत्र मेरे नेत्र इतने समय के पश्चात इतना धन देख रहे हैं इन्ह पूर्णतः संतुष्ट तो हो जाने [संगीत] दो लालच का कैसा प्रकोप है इस पर इसका पूरा परिवार इतने समय इतना कष्ट भुगता रहा किंतु अब जब इससे मुक्ति मिलने का समय है तो इसे चिंता अपनी पत्नी या पुत्री की नहीं धन की है जो इसे उनकी पूजा के परिणाम स्वरूप प्राप्त हुआ है उचित कहा देवी आपने जो सीख उसे अपने जीवन से लेनी चाहिए थी उसने अब भी नहीं ली है क्तु भक्त को उचित प लाना भी तो हमारा ही कर्तव्य है ना [संगीत] प्रिय सार्थक हुआ कारागार में हमारा रहना सार्थक हुआ कल्पना से अधिक धन प्राप्त हुआ है पुत्र अब चलो हरि ओम हरि ओम नारायण नारायण हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम नारायण नारायण हरि ओम हरि ओम नारायण [संगीत] नारायण [संगीत] [संगीत] हे महात्मा जी हमें अपना परिचय देने की कृपा करें हम सब में प्रभु समाय हैं यह तन य तन तो मात्र एक चोला है भीतर का तत्व तो सभी का एक है तो तुम मुझे अपने और इनके प्रभु का स्वरूप ही [संगीत] समझो यदि नाम देना ही चाहते हो तो मुझे डंडी स्वामी बुला लो प्रणाम दंडी स्वामी जी प्रणाम दंडी स्वामी [संगीत] जी महात्मा भी धन की ओर आकर्षित होते कहीं इन्होंने इतना धन देकर मुझसे धन मांग लिया तो नहीं नहीं यह संदूक मुझे बंद करने होंगे ंडी स्वामी महाराज हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं सेवा उचित कहा पुत्र स्वामी जी सेवा तो हम आपकी अवश्य करते किंतु क्या करें अभी हम बहुत शीघ्रता में है ना पिछले दो माह से यहां है स्वामी महाराज और मेरी धर्म पत्नी और पुत्री हम दोनों की प्रतीक्षा कर रहे होंगे इसलिए हमें शीघ्र अति शीघ्र यहां से प्रस्थान करना [संगीत] होगा आपका समय मूल्यवान है यह ज्ञात है मुझे आप जैसे धनी व्यापारी मुझे थोड़ा सा धन दे देते तो मेरा बहुत भला होगा हां हां पुत्र है रे क्षमा कीजिए स्वामी जी हम धनी व्यापारी थे किंतु रहे नहीं अभी अभी तो हम राघ से मुक्त हुए हैं जहां हमें अकारण ही बंदी बना लिया गया था अब आप ही बताइए भला धन हमारे पास कहां से आएगा और यह जो संदूक आप देख रहे हैं महाराज वो इनमें तो मात्र घास पूस भरा है इसके अन्यथा और कुछ नहीं उचित है आपने जो कहा वो सत्य ही होगा [संगीत] हरि ओम नारायण हरि ओम हरि ओम पुत्र अरे इस प्रकार चकित मत हो हम व्यापारी हैं कौन है व्यापारी ऐसे ही कैसे बांट दे इतनी मेहनत से अर्जित किया हुआ [संगीत] नय क्या ये क्या हो गया कैसे हो गया हमारा धन खास पूस बन गया लक्षमी कांम कमल नयनम जोरन गम्यम वंदे विष्णु भव भय हरम सर्व लोक नाथम इन सभी में घास फूस भरा हुआ है ये ये कैसे हो सकता है सारा धन सारा धन घ फूल हो गया पिताजी पिताजी पिताजी पिताजी पिताजी उठिए ससुर जी उठ ससुर जी यह भगवान बारबार हमारे साथ ऐसा अन्याय क्यों कर रहे हैं पहले अ कारागार में डाल दिया हम जो धन प्राप्त हुआ उसे घास पू में बदल [संगीत] दिया बंदूक आप देख रहे हैं महाराज वो इनमें तो मात्र घास पूस भरा है इसके अन्यथा और कुछ नहीं आपने जो कहा वो सत्य ही [संगीत] होगा पिताजी ये अकारण नहीं कारण है इसके पीछे और वो है आपका झूठ आपके झूठ को सत्य में परिवर्तित करने वाले और कोई नहीं दंडी स्वामी है वह अवश्य कोई दिव्य आत्मा है मुझे स्वयं उनमें नारायण का आभास हो रहा है [संगीत] नारायण मैंने संकल्प लिया कि मैं प्रभु श्री सत्य नारायण जी की पूजा भी करूंगा और उनका व्रत भी संतान के रूप में हमें पुत्री दी है अब आप अपना संकल्प पूर्ण कीजिए प्रभु श्री सत्यनारायण जी की पूजा कीजिए प्रिय हमारी पुत्र के नामकरण के पश्चात हम सत्यनारायण की पूजा एवं उनका व्रत अवश्य करेंगे अब तो नामकरण भी हो गया है हमारे पुत्री कलावती का तो अब इस एकादशी पर आप प्रभु सत्यनारायण व्रत अवश्य कीजिए हमारी पुत्री कलावती के विवाह उपरांत हम भगवान श्री सत्यनारायण की पूजा एवं व्रत करेंगे आप तो आज श्री सत्यनारायण जी का व्रत करने वाले हैं और मैंने तो सारी तैयारी भी कर दी है एक व्यापारी की धर्म पत्नी होकर आप ऐसे विचार ला रहे हैं मन में [संगीत] नारायण श श रायण [संगीत] प्रभु नारायण का दोषी हूं मैं मेरे लालच ने मेरे ही विवेक को हर लिया था व्यापार और धन के लोभ में मैंने सबसे बड़े धन को खो दिया धर्म का धन संकल्प पूर्ति का धन पुण्य अर्जित करने का धन है पुन पुन ऐसी भूल करता रहा समय रहते यदि हम अपनी भूल स्वीकार कर ले तो सारे कष्ट मिट जाते हैं पिताजी [संगीत] अभी भी अधिक समय नहीं बीता है दंडी स्वामी यहां से अधिक दूर नहीं गए होंगे हमें उनके पास जाकर क्षमा याचना करनी चाहिए [संगीत] वो रहे ंडी [संगीत] स्वामी नारायण नारायण स्वामी स्वामी स्वामी हे दंडी स्वामी जी मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई मुझे क्षमा कर दीजिए मुझे क्षमा कर [प्रशंसा] दीजिए मुझे क्षमा कर दीजिए [संगीत] प्रभु मुझे क्षमा कर दीजिए प्रभु [संगीत] [संगीत] साधु भूल करना तो तुम्हारा स्वभाव बन गया है तुम्हें लोग समाज परिवार की ही नहीं स्वयं की चिंता भी नहीं है ना तुम्हें अपने व्यापार का मान है ना ही अपने संकल्प का झूठ को ही तुमने अपना साधन मान लिया है और जो झूठ के अधीन हो वो सम्मान का अधिकारी कैसे हो सकता है तुम्हारे झूठे संकल्प ने तुम्हें कारागार तक पहुंचा दिया इतने से भी संतोष नहीं हुआ और फिर तुमने झूठ कहा आज तुम मुक्त हुए हो क्योंकि तुम्हारे स्थान पर तुम्हारी पत्नी और तुम्हारी पुत्री अनेकों कष्ट सहकर तुम्हारे झूठे संकल्प को सत्य ही नहीं पूर्ण भी कर रही है [संगीत] अपने कर्मों से मनुष्य जीवन में जो भी बोता है वैसा ही परिणाम पाता है तुम्हें वही ज्ञात है जो तुम्हारे साथ हुआ किंतु सत्य तो यह है कि तुम्हारे कर्मों का दंड तुम्हारी पत्नी और तुम्हारी पुत्री को भी भुगतना पड़ा [संगीत] [संगीत] [संगीत] बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की जय बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की जय श्री सत्यनारायण जी की पूजा संपन्न हुई आप सभी कृपा कर प्रसाद ग्रहण करें [संगीत] तुम यदि उदार होते अपने लाभ दन का कुछ अंश दूसरों के साथ बांटते तो तुम्हारे परिवार को भी उसका लाभ होता उन्हें इतने कष्ट नहीं उठाने पड़ते व्यापार उसके नियमों से करो और धर्म और सदाचार के नियमों का भी पालन करो हे स्वामी आप तो सर्व ज्ञाता है अवश्य आप ही प्रभु श्री सत्यनारायण [संगीत] है [संगीत] मुझे क्षमा कर दीजिए प्रभु मुझे क्षमा कर दीजिए आपने आपने आशीर्वाद देकर मेरे ज्ञान चक्षु खोल दिए प्रभु अब मैं पुन ऐसी भूल कभी नहीं करूंगा कभी नहीं प्रभु कभी नहीं [संगीत] [प्रशंसा] हे प्रभु आपके शब्दों ने मेरे मन में लालच के अंधकार को मिटा दिया है अब मुझे इस स्वर्ण की चमक नहीं धर्म का प्रकाश चाहिए आज के बाद मेरे जीवन में मेरे लिए आपके आशीर्वाद के समक्ष सब तुच्छ है सबतु है प्रभु सदा स्मरण रहे जब भगवान किसी को सामर्थ्य वान बनाते हैं तो उसका अर्थ यह है कि ईश्वर उसे लोग का समाज का सहायक बनने का अवसर देते हैं इसी से समाज संतुलन बना रहता है जब व कम देते हैं तब व सिखाते हैं कि मन में कभी भी स्वयं को छोटा समझने का भाव नहीं आना चाहिए और ना ही ईर्षा द्वेष का क्योंकि तुम जिसके योग्य हो व तुम्हें प्राप्त हो गया है और तुम जिसके योग्य बनोगे भविष्य में उसे प्राप्त करने से तुम्हें कोई नहीं रोक सकता प्रभु आपको शत शत [संगीत] [संगीत] [संगीत] नमन रे पास अधिक आभूषण है मुझे उन्हें बांटना चाहिए जीवन में ईष एवन द्वेष का कोई स्थान नहीं बहन बल्ली मुझे क्षमा करना यदि मेरे पास तुमसे अधिक आभूषण होने के कारण तुम्हे बुरा लगा हो तो दीदी देखना आपके अधिक आभूषणों के कारण मैंने अपने मन में यशा का भाव आने दिया उसके लिए मुझे क्षमा कीजिएगा बहन जो कुछ भी मेरा है उस पर तुम्हारा भी तो अधिकार है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अद्भुत है प्रभु श्री सत्यनारायण पूजा और उसका प्रभाव दोनों अपने मनोभाव पर नि पा रही है एक दूसरे के प्रति स्नेह उत्पन्न हो रहा है इनकी मन में मैं दो बार भूल कर चुका था किंतु प्रभु श्री सत्यनारायण की महिमा तो देखिए प्रभु की कृपा अब भी मुझ पर थी प्रभु ने मेरा सारा धन लौटा दिया और प्रभु श्री सत्यनारायण की कथा करने का संकल्प लेकर हम अपने घर की ओर लौटे किंतु हम पहुंचते उसके पूर्व ही हमारे पहुंचने की सूचना हमारी पत्नियों को मिल चुकी थी और तब उन दोनों से भी एक बड़ी भूल हो [संगीत] गई भूल करना प्रवृत्ति हो सकती है किंतु उसे स्वीकार कर सुधार करने में ही प्रगति है

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