[संगीत] ओम श्री हरि नारायण ओम श्री हरि नारायण राजा इंद्रद्युम्न और उनकी पत्नी गुंडी चा के लिए तो जैसे समय रुक सा गया था सृष्टि के नियमानुसार वह वृद्धावस्था को प्राप्त नहीं हुए थे तो जब महाराज ब्रह्मलोक पर थे तब महारानी ध्यान समाधि में लीन थी और ललिता और विद्यापति महारानी गुंडी चा का ध्यान रखने में सदैव व्यस्त [संगीत] है शीघ्र ही ललिता और विद्यापति को एक पुत्र की प्राप्ति हुई महारानी गुंडी चा और महाराज इंद्रद्युम्न को इस बात का आभास भले ही नहीं था किंतु उनके निकट सब कुछ बदल रहा था और ऐसा कुछ दिन और माह नहीं अप तो दशकों तक चलता रहा देखते ही देखते उनका पुत्र युवक बना उसका विवाह हुआ और वह भी देवी गुंडी का ध्यान रखने में अपने माता-पिता का हाथ बटा लगा जो सब कुछ भूलकर प्रभु की साधना में लीन रही और महाराज इंद्रद्युम्न को अभी ब्रह्मलोक पहुंचने में समय था किंतु कुछ वर्षों बाद जब विद्यापति और ललिता की मृत्यु का समय निकट था तो उसने अपने सारे कर्तव्य अपने पुत्र और पुत्र वधु को सौंप दिए हमारा समय अब निकट है पुत्र अब तुम्ह ही भाभी मां की देखभाल करनी है और तुम्हारे बाद यह कर्तव्य तुम्हारी संतान करेगी यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहना चाहिए जब तक हमारे जेष्ठ महाराज इंद्र दमन ब्रह्मलोक से इस धरती पर वापस नहीं आ जाते हैं हम आपको वचन देते हैं पिताजी और उनके इसी वचन के अनुसार उनकी आने वाली सभी पीढ़ियां देवी गुंडी का ध्यान रखती रही और फिर वो दिन आ ही गया जब महाराज इंद्र दम देवर्ष नारद के साथ ब्रह्मलोक पहुंच गए ब्रह्मलोक ब्रह्मलोक तक आ चुके हम राजन ब्रह्मलोक तक लाने का कार्य मेरा था राजन इसीलिए मैं आगे था अब कार्य आपको संपन्न करना है तो आपको आगे जाना होगा प्रस्थान कीजिए राजन [संगीत] प्रभु ब्रह्मदेव [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्रणाम [संगीत] जदव अति सुंदर कृष्ण स्तुति का गान किया है आपने राज हे प्रभु सृष्टि के रच ता मुझे क्षमा करें मुझे आभास ही नहीं हुआ आपके समक्ष अनायास ही मेरे मुख से श्री कृष्ण की स्तुति निकल गई किंतु विवश प्रभु जब भी मेरे मन में भक्ति भाव आता है तो अपने प्रभु श्री जगन्नाथ का नाम ही लेता हूं इसलिए जब आपको देखकर मेरे मन में भक्ति भाव उमड़ा तो प्रभु श्री कृष्ण की स्तुति ही जीवा पर आ गई क्षमा कीजिए ब्रह्मदेव मुझे नहीं राजन को भक्त अपना आराध्य का नाम जपे बिना कहां रह पाता है बहुत लंबी यात्रा की है इन्होंने पूरी यात्रा सिर्फ हरि नाम ही जपते रहे तो आपके समक्ष आने के पश्चात भी हरि नाम हरि नाम रुकिए देवशी विचलित मत होइए भक्त की भक्ति सर्वोपरि है वो भगवान की किसी भी रूप की क्यों ना हो मैं तो इनकी सरल भक्ति से बहुत प्रभावित ह हे प्रभु यदि यह सत्य है और आप मुझसे प्रसन्न है तो कृपया मेरे आपका निमंत्रण मुझे स्वीकार है राजन आप यहां क्यों आए हैं इसका कारण मुझे ज्ञात है मैं भी आपके द्वारा बनाए गए जगन्नाथ मंदिर की स्थापना के लिए अति उत्साहित [संगीत] हूं इस प्रकार प्रभु देव जी ने महाराज इंद्रद्युम्न की सरल भक्ति से प्रभावित होकर उनका निमंत्रण स्वीकार किया तब तो उनके लौटते ही प्रभु की प्रतिमा की स्थापना मंदिर में हो गई होगी नहीं कार्य इतना सरल अभी भी नहीं था क्योंकि जैसा देवर्षि नारद ने कहा था उनके ब्रह्म लोक से लौटने पर सब कुछ बदल चुका था और अब यह क्षेत्र राजा गालू माधव के अधीन था इतने वर्षों के बीतने के कारण प्रभु जगन्नाथ जी का मंदिर रेत के अंबार में दब गया था किंतु उस समय के राजा गालू माधव का ध्यान इस पर गया लगता है यहां रेत के नीचे एक मंदिर दबा हुआ है जितने श्रमिक मिले उतने लेकर आओ और मंदिर को रेत से बाहर निकलवाने के लिए सभी से यहां श्रम करवाओ मेरे नाम से यह महान धर्म कार्य शीघ्र होना चाहिए मुझे आशा है कि आपको भी यह ज्ञात होगा आप जब जगन्नाथ पुरी वापस लौटेंगे तो वहां सब कुछ बदल चुका होगा आपके सभी परिजन सहयोगी जिन्हे आप अपने जीवन में जानते थे वो सब मृत्यु पर्यंत मृत्यु लोक को छोड़कर जा चुके होंगे आपके राज्य पर भी किसी और राजा का शासन होगा मंदिर की देखरेख भी किसी और के हाथ में होगी [संगीत] प्रभु जब मैं वहां से निकला था तभी अपने सभी मोह बंधन को तोड़कर निकला था मेरे सामने एक ही धय है प्रभु के मंदिर की स्थापना और पूरी का अलौकिक धाम लौकिक धाम बने जहां उनके सभी भक्त प्रभु के दर्शन प्राप्त कर सके इससे अधिक मेरी कोई इच्छा नहीं है प्रभु ना मुझे राज्य चाहिए ना ही मंदिर के देखरेख का उत्तरदायित्व इस मंदिर को धरती के गर्भ से ढूंढकर बाहर निकालना ही मेरी सबसे बड़ी और महान उपलब्धि होगी और सदा मुझे इसके लिए स्मरण किया जाएगा और मेरा नाम भी इस मंदिर के साथ अमर हो जाएगा [संगीत] [संगीत] हे पूरी के दिव्य पावन स्थल मैं आपको नमन करता हूं हे पूरी के दिव्य पावन स्थल मैं आपको नमन करता [संगीत] हूं और जैसे ही महाराज इंद्र दमन ने देवर्षि और ब्रह्मदेव के साथ पूरी की पावन धरती पर अपने पांव रखे देवी गुंडी भी ध्यान समाधि से बाहर आ गई उन्हें अपने पति के लौटने का आभास हो [संगीत] गया पुत्र तुम अवश्य विद्यापति और ललिता के पुत्र हो ग नहीं माता वह तो हमारे परम पूर्वज थे पृथ्वी से उनको प्रस्थान किए सदियों बीत चुके हैं हमारे माता-पिता ने हमें आपका ध्यान रखने का आदेश दिया है बताइए माता हम आपकी क्या सेवा [संगीत] करें पुत्री मुझे जगन्नाथ पूरी ले चलो मुझे आभास हो रहा है मेरे स्वामी लौट आए हैं रुको यहां किसी का भी प्रवेश निषेध है मुझे रोकना उचित नहीं है सैनिक उचित अनुचित का निर्णय तुम नहीं हमारे महाराज करते हैं महाराज का आदेश है यहां किसी भी बाहरी के प्रवेश की अनुमति नहीं है कौन है तुम्हारे महाराज अपना संपूर्ण बल एकत्र करो और खोल दो इस द्वार को और जोर लगाओ लगाओ और बलपूर्वक अरे खोलो मुझे अपने महाराज के पास जाने दो मुझे उनसे बात करनी है तुम्हे बात करनी है तो क्या उन्हें तो नहीं करनी मैं तुम्हारे महाराज की सहायता कर सकता हूं मुझे ज्ञात है कि इस मंदिर का कपाट कैसे खुलेंगे प्रभु की कृपा से इस मंदिर का निर्माण मेरे द्वारा ही हुआ है इसलिए मुझे आगे जाने दो कौन है यह जो इस मंदिर के निर्माण का श्रेय ले रहा [संगीत] है प्रणाम महाराज इस मंदिर को रेत के सागर से निकालने वाला मैं हूं और तुम इस पर अपना दावा कर रहे हो मैं जो कह रहा हूं वो सत है महाराज सहस्त्र वर्ष पहले मैं इंद्र दूम यहां का राजा था प्रभु नील माधव का आशीर्वाद और राम भक्त महाबली हनुमान जी की सहायता से मैंने प्रभु जगन्नाथ जी के इस मंदिर का निर्माण किया था सहस्त्र वर्ष पहले यही कहा ना तुमने और यह भी ना कि स्वयं भगवान आए थे तुम्हारे सहायक बनने तुम जो भी हो तुम्हारा यह झूठ सुनने वाला यहां कोई भी नहीं है प्रभु के इस मंदिर में अपना नाम अंकित करने की लालसा है तुम्हें मैं कोई अबोध बालक नहीं हूं जो तुम्हारी इन झूठी कथाओं से प्रभावित हो जाऊंगा तुम्हारे लिए यही अच्छा होगा तुम जहां से आए हो वहीं पर लौट जाओ अन्यथा मेरी यह तलवार झूठ बोलने वालों पर तनिक भी दया नहीं करती [संगीत] जाओ ब्रह्मदेव अब आप ही कुछ कीजिए रजा इंद्र दुम नि शस्त्र संकट में सहसा वि न क्रिया विवेक परमा पदा पदम विम का स्वमे संपदा जो सोच विचार के भक्ति भाव से कार्य करते हैं उनके साथ सदा भगवान होते हैं और जिसके सां प्रभु जगनाथ जी का आशीर्वाद उसे भला कैसा भ सुना नहीं मैंने क्या कहा उल्टे पाव यहां से लौट जाओ मेरा विश्वास कीजिए मैंने जो भी कहा है उसका एक एक शब्द सत्य है प्रभु जगन्नाथ जी की कृपा से मैंने इस मंदिर का निर्माण किया है और उनकी कृपा से ही आज प्रभु की प्रतिमा की स्थापना होगी जय श्री जगन्नाथ जय श्री जगन्नाथ जय श्री जगन्नाथ रुक जा मैंने कहा रुक जाओ आगे मत बढ़ो जय जगन्नाथ जय श्री जगन्नाथ जय श्री [संगीत] जगन्नाथ [संगीत] [संगीत] ये क चित्र शक्ति थी जिसने मेरा वार रोक दिया तो क्या यह मंदिर का द्वार भी खोल [संगीत] सकेगा [संगीत] [संगीत] विश्वास नहीं होता इसके एक स्पर्श मात्र से यह द्वार खुल [संगीत] [प्रशंसा] गया [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मैं लौट आया प्रभु मैं लौट आया कौन हो तुम मैंने जो परिचय दिया था वोह उचित नहीं था मेरा वास्तविक परिचय बस इतना है मैं प्रभु का मात्र एक भक्त हूं और प्रभु कार्य के लिए ब्रह्मलोक की यात्रा से लौटकर आया हं परिहास कर रहे हो ब्रह्मलोक तक कोई नहीं पहुंच सकता और ना ही वहां से कोई लौट सकता [संगीत] है [प्रशंसा] [संगीत] भूल हो गई मैंने आप पर अविश्वास किया मैं तो एक साधारण राजा हूं इतने गुण रहस्यों को जानना मेरे लिए कहां संभव है मुझे क्षमा कर दीजिए प्रभु के मंदिर में क्षमा प्रभु से मांगनी चाहिए उनका आशीर्वाद रहेगा तो आपके सभी दोष दूर हो जाएंगे [प्रशंसा] प्रणाम ब्रह्मदेव प्रणाम देवर्ष मेरे अहो भाग्य आपके दर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला मनुष्य का एक पुण्य कर्म भी उसके अनेक दोषों से क्षमा दिलवा देता है नहीं प्रभु मैंने तो पाप किया है प्रभु के इन महान भक्त को उनके मंदिर में आने से रोकने का पा आपने उनके मंदिर को रेत के सागर से निकलवाने का कार्य किया था ना राजन इसलिए मैं आपको आशीर्वाद देता हूं कि कालांतर तक जब तक प्रभु जगन्नाथ जी का मंदिर इस पृथ्वी पर स्थित रहेगा तुम और तुम्हारे बाद आने वाले यहां के सभी राजा भगवान पर सच्ची श्रद्धा रखने के कारण मंदिर के धर्म कर्म से लाभान्वित होंगे और प्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद उन पर सदा बना [संगीत] रहेगा इतने सशस्त्र सैनिक स्वयं महाराज गालू माधव अपने खड़क के साथ खड़े किंतु फिर भी फिर भी कोई महाराज इंद्र देव को स्पर्श भी नहीं कर सकता अर्थात जो प्रभु श्री जगन्नाथ जी पर पूर्ण विश्वास रखता है प्रभु उसका हाथ सदैव था में रखते हैं भगवान श्री जगन्नाथ की शरण में जो कोई भी जाता है प्रभु उसका साथ कभी नहीं छोड़ते अंततः महाराज इंद्र दमन के जीवन का उद्देश्य पूर्ण होने वाला [संगीत] था आपके आदेशानुसार मैं 100 कोपों का जल ले आया हूं आपकी आज्ञा हो तो प्रतिमा की स्थापना आरंभ कर सकते हैं प्रभु आपका शांत होना मुझे चिंतित कर रहा है मुझसे ऐसी क्या भूल हो गई है क्या है जो छूट रहा है वस तुम्हारे द्वारा पूजा स्थापना के लिए तुम्हारे साथ अर्धांगिनी का होना अनिवार्य है विवाहित दंपति जब एक साथ यज्ञ में बैठते हैं तभी उसे पूर्ण माना जाता है जब तक मेरी स्वास चलेगी मैं निरंतर तपस्या करूंगी कि आपके ब्रह्मलोक की यात्रा सफल [संगीत] हो प्रभु पृथ्वी के सहस्त्र वर्ष पहले मेरा यहां से प्रस्थान हुआ था तब मेरी अर्धांगिनी के साथ क्या हुआ मुझे कुछ भी ज्ञात नहीं इस सृष्टि का नियम तो आपने ही निर्धारित किया है जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु भी होती है तो अब वह जीवित कहां [संगीत] होगी किंतु इतना अवश्य है उसने मुझसे कहा था वह मेरी प्रतीक्षा करेगी मैंने जो वचन दिया था उसे पूर्ण भी किया है स्वामी मैं तो तब से ही आपकी प्रतीक्षा में [संगीत] हूं प्रणाम ब्रह्मदेव प्रणाम [संगीत] देवशी [संगीत] अर्थात इस अवधि तक आप समाधि थ प्रिय हां स्वामी देवर जी और ललिता के वंशजों ने मेरी देखरेख [संगीत] की जब आप दोनों यहां उपस्थित हैं तो हमें स्थापना यज्ञ संपन्न कर लेना चाहिए प्रभु यज्ञ का आरंभ प्राण प्रतिष्ठा से करने वाले हैं वो तो आप पहले ही कर चुके हैं प्रभु नील माधव के विग्रह का प्रभु की प्रतिमा में समा जाना ही उनकी प्राण प्रतिष्ठा [संगीत] थी अब तो बस अभिषेक और स्थापना यज्ञ शेष है रमय सुशोभन दिव्यम सर्व सौकर शुभम आश्रम च मया दत्तम गृहण परमेश्वरा अब आप अभिषेक आरंभ [संगीत] कीजिए [संगीत] गंगा सरस्वती रेवा पयो सनी नर्मदा जल है स्ना पितो असी मया देव तथा शांति कुष में मंदा आस्त य सर्व पापम शुभम तम कल्पम देव स्नानाम प्रति कहता आसन ग्रहण [संगीत] कीजिए [संगीत] [संगीत] [संगीत] इस शुभना से तो प्रत्येक लोग आनंदित होगा क्योंकि अब अंत पुरी का अलौकिक धाम लौकिक हो गया है प्रभु प्रतिमाओं की स्थापना को इंगित करने के लिए मैं प्रभु धज को मंदिर के ऊपर [संगीत] ऊंगा [संगीत] नारायण नारायण वायु विरुद्ध फहराने वाला यह प्रभु ध्वज इस बात को सूचित करता है कि परिस्थिति कितनी भी विपरीत क्यों ना संपूर्ण संसार में प्रभु भक्त के विरोधी कितने भी क्यों ना हो किंतु प्रभु हमेशा अच्छे और बुरे समय में अपने भक्तों का साथ अवश्य देते नारायण नारायण [संगीत] नारायण शब सब मेरे विपरीत पिताजी छोड़ गए मां छोड़ ग भैया प्रस्थान कर गए मेरी अर्धांगिनी भी मुझसे विलग ई तब भी तब भी प्रभु जगन्नाथ सदा मेरे साथ ही रहे मेरा मार्ग दर्शन करते रहे आओ मैं तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा हूं मैं अपने धाम में तुम्हारी प्रतीक्षा करूंगा इस प्रकार प्रभु जगन्नाथ जी के मंदिर की स्थापना हुई किंतु अभी महाराज इंद्रम और उनकी पत्नी गुंडीज को उनकी अटूट भक्ति का फल मिलना शेष था प्रभु आपका कोटि कोटि धन्यवाद आपके आशीर्वाद से ही हम अपने जीवन का उद्देश्य पूरा कर सके आप कृपा कर हमें साक्षात दर्शन देकर मोक्ष प्रदान करें [संगीत] प्रभु [संगीत] [संगीत] व्यक्ति यदि दृढ़ संकल्प और पूर्णता के साथ कार्य करता है तो सफलता अवश्य मिलती है
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