अभी कुछ समय पश्चात भ्राता ध्यान से बाहर आएंगे तब उन्होंने भाभी मां को देख लिया तो वह क्रोधित भी हो सकते हैं और पूजा से उनका ध्यान विचलित भी हो सकता है एक ही मार्ग है प्रभु भाभी मां का ध्यान हमें किसी और दिशा में बाटना होगा सुझाव तो उचित है किंतु किंतु कैसे हमें उन्हें किसी और कार्य में व्यस्त करना होगा किंतु कैसा कार्य गणेश जी चतुर चतुर चतुर चतुर ज्ञानी हो च चतुर च अद्भुत अद्भुत पुत्री मात्र एक ही दिवस तुमने यहां की काया बदल दी तुम अवश्य थक गई होगी थोड़ा विश्राम कर लो पिताश्री मैंने वही किया जो आवश्यक था अभी तो मुझे इनकी और भी सेवा करनी है देवसेना के सेवा भाव और भक्ति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे देव सेनापति कुमार कार्तिक स्वामी की वह सबसे बड़ी भक्त है और ऐसे भक्त कभी थका नहीं करते और ना ही उन्हें संतुष्टि मिलती है मैं तो सदेव यही चाहती हूं कि मुझे कुछ और सेवा का अवसर प्राप्त हो इस अवसर को व्यर्थ ना जाने दे इसका लाभ उठाए पुत्री तुम्हारे होने वाले पति तुम्हारे परमेश्वर ने अपने आराध्य महादेव के लिए मौन व्रत धारण किया है और वह इस व्रत को अगले पांच दिवस तक रखेंगे इस अंतराल में यदि तुम चाहो तो तुम भी अपने आराध्य की पूजा कर सकती हो और उनके लिए व्रत भी रख सकती हो ये तो बहुत ही महान सुझाव है पिताश्री मैं अवश्य करूंगी ये व्रत कल्याण हो गणेश जी हमारा कार्य संपन्न हुआ हम सफल हुए हां अब या तो वह मां की पूजा करेंगी या प्रभु महादेव की अब कदाचित हमें चिंता का कोई कारण [संगीत] नहीं अवश्य प्रभु महादेव की प्रतिमा का निर्माण कर रही है मेरी पुत्री देवसेना नहीं देवराज आप पिता है उनके किंतु उनका मन मैं आपसे कहीं अधिक समझता हूं मेरे विचार से तो भाभी मां के मन में माता पार्वती का अधिक प्रभाव है उनकी ही प्रतिमा का निर्माण कर रही है वह गणेश जी इस विषय में मैं आपसे सहमत नहीं हूं हां सदैव मैं आपसे सहमत रहता हूं किंतु इस बार नहीं देवराज सदा के समान आज भी मैं सत्य ही कह रहा हूं मां [संगीत] [संगीत] है आप ही बताइए मशक जी कौन है वह किसकी मूर्ति है जिसका निर्माण भाभी मां कर रही है प्रभु कार्तिके [संगीत] है आपने सत्य कहा मोशक जी सत्य तो ये है प्रभु के समाधान पाने के स्थान पर समस्या और उलझ गई है प्रभु कार्तिकेय की पूजा करेंगी वो तो कहीं उनके मौन व्रत से उनका ध्यान ना भटक जाए सत्य सत्य कहा आपने मोशक जी यह तो वास्तव में विकट स्थिति है आज तो मेरी बुद्धि ही कार्य नहीं कर रही है मैं करूं तो क्या करूं इन दोनों समस्याओं का क्या हल निकालूं दोनों समस्याए कौन सी दोनों समस्याएं गणेश जी यहां भाभी मां का आगमन जिससे भ्राता के मौन व्रत में बाधा आने की संभावना है और उधर वीर बाहू जो एक अत्यंत असुरक्षित मार्ग से महेंद्रपुरी जा रहे हैं कहीं उनके मार्ग में कोई कठिनाई आई तो इनसे मैं कैसे मुक्त हो सुब्रम करते स्वामी रक्षा हैरी रक्षा कीजिए प्रभु रक्षा कीजिए [संगीत] [प्रशंसा] मा मुझे सब पता है अभी तक उस जयंत ने तुम्हें भगवान स्वीकार नहीं किया है और उसका साहस भी नहीं टूटा है अभी तो एक ही दिन हुआ है थोड़ी और प्रतीक्षा करना तो बनता है और वैसे भी चिंता की क्या बात या तो वह हमारा भक्त बनेगा और या तो उन भूखे क्रूर राक्षसों का भोजन मां आप और आपकी माया प कोई संदेह नहीं है मुझे किंतु मेरी चिंता कुछ और है जो भीरो जैंत मेरे एक स्वर से कप कपा उठता था उसे पालक कार्तिके ने एक सबल भक्त बना दिया है तो कहीं कोई और जैन तो मेरे साम्राज्य में उत्पन्न नहीं कर दिया कहीं असुर सम्राट सुरा पद्मन के राज्य में विद्रोह का बीच तो नहीं बो दिया इससे पहले कि कोई और असुर राज्य हमारे अधिकार से मुक्त हो हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारे सारे असुर योद्धा उस कार्तिके के साथ युद्ध करने के लिए तत्पर रहे तरक भी संकोच ना करें भक्ति करें तो उस मायावी की नहीं मेरी [संगीत] [संगीत] करे माया की माया से सब कुछ संभव है भेज दो संदेश अपने 1000 आठ असुर सम्राटों [संगीत] को [संगीत] वो बालक कार्तिके जिसने तुम्हें तुम्हारी सत्ता और तुम्हारी प्रभुता को चुनौती देने का दु साहस किया है अब उसका उपाय करने में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए संपूर्ण असुर शक्ति संयुक्त हो इसका आदेश दो और अवसर दो उन सभी असुर राजाओं को तुम्हारे प्रति अपनी निष्ठा दिखाने का यही समय [संगीत] है भ्राता के विश्राम का समय अब होने ही वाला [संगीत] है एक र तो भ्राता कभी भी उठ सकते हैं और दूसरी ओर मैं तो प्रतिक्षण इसी प्रतीक्षा में हूं प्रभु कि आप कब ध्यान से उठेंगे और कब अपने इस भक्त को देखेंगे कब मुझ पर आपकी दृष्टि पड़ेगी कब हम आमने सामने होंगे कब हमारी बात [संगीत] होगी यदि भाभी मां इसी निष्ठा से भ्राता की प्रतिमा का निर्माण करती रही तो भ्राता के नेत्र खुलने पर सर्वप्रथम उनका ध्यान भाभी मां पर ही जाएगा सत्य है यह सर्वता सत्य है गणेश जी सत्य नहीं संकट मय है बहुत संकट मय है य हां मेरा सारा श्रम व्यर्थ हो जाएगा भाभी मां उनसे बात करना चाहती है मेरी तो शवास यह सोचकर ही रुकी जा रही है कि अपना परिचय देते हुए भाभी मां के मुख से विवाह की बात सुनकर भ्राता रुष्ट ना हो जाए मेरा प्रणाम स्वीकार करें प्रभु आपकी प्रतिमा पूर्ण हुई स्वामी मेरा प्रणाम स्वीकार करें भूषण आ ही गया जिसका हमें [संगीत] पहता [संगीत] प्रभु अब क्या [संगीत] होगा तुम कौन हो जो वहां इतनी निष्ठा और समर्पण के साथ मेरी प्रतिमा रचकर उसके सामने इतने समर्पण भाव से बैठी मैं मेरा अस्तित्व तो आपसे ही है प्रभु अन्यथा मैं कौन हूं क्या हूं कुछ भी तो नहीं तुम्हारी भ अनूठी है अद्भुत है प्रभु आपकी महिमा अद्भुत आपकी भक्ति के सिवाय और कुछ नहीं बाता है मुझे मैं जो दृश्य देख रहा था और अब जो दृश्य मुझे दिखाई दे रहे हैं उन सब में क्या संबंध है संबंध है प्रभु दिव्य पावन संबंध आपका और मेरा मेरे पूर्व जन्म से किंतु यह तो जन्म जन्मांतर का संबंध है हमारा प्रभु मैं तो मन ही मन आपको अपना ईश्वर अपना स्वामी अपना पति मान चुकी हूं अपना पति मान चुकी हूं अपना पति मान चुकी [संगीत] हूं ओहो वही हुआ जिसकी चिंता थी मुझे यह क्या कह दिया भाभी मां ने पति शब्द का प्रयोग कर दिया क्या क्या प्रभु अब क्या होगा प्रभु भता अर्थात जो मैंने देखा वह संभव हो सकता है भले अभी तक हुआ नहीं है मैं तो इसी प्रतीक्षा में हूं कि कब आप मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे गणेश [संगीत] [संगीत] जी यह परिस्थिति तो टल गई तु जो भी हो जो मेरे प्रति इतनी निष्ठा रखती हो मुझे क्षमा करना मैं अभी अपना ध्यान भंग नहीं होने दे सकता अभी मुझे अपना कर्तव्य पूर्ण करना है मेरा कर्तव्य मेरे लिए सर्वोपरि है किंतु आप चिंता मत कीजिए स्वामी मैं आपके कर्तव्य में कभी बाधा ना बन सकती थी ना बनूंगी मैं तो प्रतीक्षा करूंगी और इस अंतराल में अपना कर्तव्य निभाती रहूंगी [संगीत] [संगीत] अभी तो संकट टल गया किंतु हमें बहुत सावधान रहना होगा भ्राता का यह व्रत सीधे उनके कर्तव्य से संबंधित है भ्राता अपना पाशुपतास्त्र प्राप्त करने पर ही आगे असुरों से युद्ध करने के लिए बढ़ सकेंगे [संगीत] [संगीत] [संगीत] असुर सम्राट भगवान सुरा पद्मन का संदेश वाह उलका मुख सभी राजाओं के लिए आपातकालीन निमंत्रण है शीघ्रता शीघ्र महेंद्रपुरी पहुंचने का आदेश है मुझे असुर सम्राट सुरा पद्मन को यह सुनिश्चित करना है कि आप सब युद्ध के लिए तैयार रहे आप सबको अपनी निष्ठा प्रमाणित करनी है और यह भी सुनिश्चित करना है कि तुम सब मेरे भक्त हो ना कि उस मायावी कार्तिके [संगीत] के व्यर्थ की चिंता नहीं क्योंकि लंका नगरी में हम सभी असुर सम्राट की ही प्रजा हैं और यहां बाहर का पंछी पर भी नहीं मार सकता क्या सोचा तुमने लंका में प्रवेश करना इतना सरल है नहीं यह नगरी हम मुद्रा राक्षसों द्वारा सुरक्षित है नहीं ये तुम बहुत बड़ी बोल की है इन्होंने जो बाधा उत्पन्न की है इसे कैसे भेद य कैसा वि उत्पन्न हो जाए मेरे मार्ग में एक बार तो यह विघ्न टल गया प्रभु के शिवलिंग ने हमारी रक्षा कर ली किंतु अब उनके आमने सामने आने के पूर्व हमें कुछ करना होगा परंतु क्या करें हम गणेश जी आपकी चतुराई के आगे मैं तो नतमस्तक हूं अब आप ही कोई उपाय सुझाए प्रभु भोग ग्रहण करें आपकी संध्या अरती कर मन प्रसन्न हो जाता [संगीत] [संगीत] है आप दोनों ने ध्यान से सुन लिया ना समझ गए ना क्या करना है हा [संगीत] गणेश प्रणाम हे महानतम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी मेरे प्रिय अग्रज जय हो जय हो सुब्रमण्यम कार्तिकेय स्वामी की जय हो चतुर चतुर चतुर चतु संयम रखिए भ्राता संयम स्मरण कीजिए पिता श्री प्रभु महादेव ने संयम खोने से ही मना किया है आपको आपके लक्ष्य के लिए कर्तव्य के [संगीत] लिए संयम तो रखना ही होगा ऐसे नहीं भ्राता मेरा प्रणाम स्वीकार कर पूर्ण संयम से क्योंकि आपका मौन व्रत है ना भ्राता आज तो आप कुछ नहीं कह सकते कोई उलाहना नहीं दे सकते मुझे नहीं नहीं भ्राता आज तो मेरा कहा सुनना ही होगा आप सदा अपने आदेशों की वर्षा करते रहते हैं अग्रज है मानता हूं किंतु मैं भी तो आपका अनुज ही हूं तो मेरा भी तो कुछ अधिकार है अब यदि मैं आपसे कुछ छिपा कर रखना ही चाहता हूं तो क्या बुरा करता हूं भ्राता हूं आपका तो आपके लिए जो भी विचार करूंगा उचित ही करूंगा इस पर आपको भला विश्वास क्यों नहीं है एक बार तो आप भी मेरी बात मान सकते हैं ना कभी तो आप भी मुझे अपना अनुज होने का अधिकार दे सकते हैं इसके सिवाय भी कुछ कह सकते हैं यहां मत जाओ वहां मत जाओ यह मत करो वो मत करो सुन रहे हैं ना भ्राता आप बताइए मैं आपके साथ क्यों नहीं आ सकता जब आपकी सेवा कर्तव्य है मेरा गणेश जी ने देव सेनापति कुमार कार्तिके को अपनी बातों में भली बात उलझा लिया [प्रशंसा] है गणेश जी के सुझाव के अनुसार व्रत का प्रथम दिन पूर्ण हो चुका है इसलिए देव सेना को देव सेनापति कुमार कार्तिके को प्रणाम करने और उन्हें बधाई देने या उपस्थित होना होगा गणेश जी के सुझाव के अनुसार मुझे भाभी मां को पूजा में व्यस्त रखना है अद्भुत अद्भुत कितनी सुंदर प्रतिमा बनाई है भाभी मां आपने ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे स्वयं प्रभु यहां सजीव होकर बैठे हैं माता उधर नहीं उधर नहीं इधर देखिए इधर हां इनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करनी चाहिए हां मुझ जैसे अज्ञानी को यदि पूजा की विधि का ज्ञान दे देती तो मैं सब कुछ त्याग कर प्रभु की पूजा में जुट जाता विचित्र बात है ये बुद्धि और ज्ञान के देवता प्रथम पूज्य गणेश जी के वाहन है आप तब भी कह रहे हैं आप कि आपको पूजा विधि नहीं [संगीत] ज्ञात माता देवी विचित्र बात कैसे एक मशिक ही तो हूं मैं ओ उतना ही अधिकार क्षेत्र है मेरा और उतनी ही योग्यता है मैं मोड़ मती उनके समान बुद्धिमान थोड़ ही [संगीत] हूं भ्राता आज यह अनुज आपसे अधिकार मांग रहा है आपकी सेवा का आपके इस व्रत के पूर्ण होने में आपका सहायक बनने का मुझे ज्ञात है आपको लगता है मैं आपसे कुछ छिपा रहा हूं किंतु आपको अपने प्रति मेरे सम र्पण पर पूर्ण विश्वास करना ही होगा मानना ही होगा मैं आपके कर्तव्य की पूर्ति के लिए ही तो सब कुछ कर रहा [संगीत] हूं कुछ पूजा विधि तो मुझे आती है माता परंतु प्रभु कार्तिकेय की पूजा में कोई भूल जो नहीं करना चाहता इसीलिए पूछ रहा था यदि आप बता देंगी तो कृतार्थ हो जाऊंगा वाह वाह क्या अद्भुत अभिनय है मेरा भाभी मां का हृदय भी पिघल रहा है राता कुछ तो संकेत [संगीत] करें अर्थात मुझे आपकी आज्ञा है धन्यवाद धन्यवाद भ्राता मैं अभी जाकर आपके लिए प्रसाद भोज की व्यवस्था करता हूं [संगीत] [प्रशंसा] मूषक जी प्रभु को पूजा विधि से अधिक भक्ति में रुचि किंतु मैं फिर भी आपको सबसे सरल पूजा विधि का ज्ञान देती [संगीत] हूं [संगीत] कुमार कार्तिके को देव सेना को देख पाने से रोकने के लिए मैं य समस्त सेना के साथ आ तो गया किंतु अब मैं उन्ह कह क्या मुझे ज्ञात था माता आप इस मुश को दूर नहीं हटाएंगे अभी तो पूजा विधि समझाने की कृपा करेंगी अवश्य मशक जी किंतु सर्वप्रथम मुझे जल अभिषेक के लिए की आवश्यकता है वो तो लाने दीजिए नहीं माता माता आप क्यों कष्ट करेंगी जल मैं ले आता हूं जल तो वो ले आएंगे किंतु पुष्प वो तो कि माता नहीं माता मुझे सेवा का अवसर प्रदान कीजिए मैं ले आता हूं [संगीत] पुष्प यह तो मुझे कुछ करने ही नहीं दे रही हैं किंतु प्रसाद तो मुझे ही लाना होगा प्रसाद चढ़ाना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है प्रभु गणेश जीय किस कार्य में उलझा दिया आपने मुझे य गणेश जी ने कहां उलझा दिया मुझे असत्य मैं बोल नहीं सकता और यदि मैंने सत्य बोला तो सब कुछ बिखर जाएगा माता क्या कर क्या कर प्रभु प्रभु क्या कर देव सेनापति वो महान देव सेनापति को महा व्रती मेरे अग्रज कुमार कार्तिकेय को जिन्होंने व्रत का प्रथम दिवस सफलता पूर्वक पूर्ण किया है यह सभी उन्हें प्रणाम करने और बधाई देने आए हैं [प्रशंसा] हां हां देव सेनापति सत्य कह रहे हैं गणेश जी भाभी मां रुक जा माता प्रभु जेष्ठ प्रसाद भोज तैयार है आइए अब माता जब मैं यहां हूं तो आपको जाने की क्या आवश्यकता मैं जाता हूं और प्रसाद लेकर आता हूं इसी कारण आपकी सेवा का भी अवसर मिल जाएगा मुझे वैसे भी आप पूजा संपन्न किए बिना प्रभु की प्रतिमा को अकेले कैसे छोड़ सकती है आप यही रुकिए मैं फल लेकर आता हूं मुझे तीव्रता से भी तीव्र गति से लौटना होगा ये लीजिए माता जल ये लीजिए [संगीत] माता ये लीजिए माता कुछ और भी लाना है तो आप हमें कह दीजिए हम है तो आपको कष्ट करने की क्या आवश्यकता है माता [संगीत] [प्रशंसा] हा [संगीत] [प्रशंसा] ब मैं आपको ही साक्षी मानकर संकल्प लेता हूं दिन में एक ही बार भोजन करूंगा और भोजन की मात्रा भी उतनी ही होगी प्रभु जितनी आपके प्रसाद से एक बार में मेरी मुट्ठी में आ जाए य लीजिए प्रभु प्रसाद ग्रहण [संगीत] कीजिए [संगीत] क्या हुआ भ्राता चिंता मत कीजिए देव सेनापति मैं आपका यह शेष प्रसाद सभी भक्तों में बटवा [संगीत] दूंगा और जो यहां आ वो लट कहां पाएगा हम नष्ट कर देंगे उसे अब तुम्हारा अंत होगा अंत होगा विनाश करेंगे नाश मारेंगे हम तुम्हारा सर्वनाम सर्वनाम सर्वनाम स्वामी [संगीत] [संगीत] आश्चर्य है मैंने इतनी शक्ति का प्रयोग किया किंतु इन्हें तो जैसे कुछ हुआ ही नहीं यह तो पुन उठ खड़े हुए हटो मेरे मार्ग से दूर हटो मेरे वार इन पर सार्थक नहीं होते यह मेरे मार्ग से नहीं हटते हे प्रभु अब मैं इनका क्या [संगीत] करू [संगीत] यह वि तो टलने का नाम ही नहीं ले रहा है मेरी अनुमति तुम्ह है सेनापति र किंतु इस कार्य के पूर्व गणेश का आशीष लेना मत भूलना देव सेनापति कुमार कार्तिके ने कहा आगे बढ़ने के पूर्व आपको प्रथम पूज्य गणेश जी से आशीष प्राप्त करनी होगी कदाचित विकट विघ्न तो अघन हर्ता गणेश जी ही दूर कर सकते हैं [संगीत] इनके अंत का एक ही उपाय है इनके शीश को इनके शरीर से विलक कर दो [संगीत] धन्यवाद [संगीत] प्रभु किसका कार्य है यह आपके इतने सारे भक्त है यहां तो उन्हीं में से किसी एक का कार्य होगा ना ये हां देव सेनापति ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओम कार्तिक सुब्रमण्य स्वामी जयंत की यह व्यवस्था मुझसे देखी नहीं जा रही ओम कार्तिके सुब्रमण्यम स्वामी जयंत इतने दिनों से निद्रा से वंचित रहा है इसी कारण प्रभु ने इसका ध्यान भंग हो रहा है और य असूर से विश्राम नहीं करने दे रहे हैं उसे किसी भी प्रकार निद्रा से कुछ तो विश्राम मिलेगा तभी सदा के समान वो प्रभु के ध्यान में एकाग्र चित रहकर इस भय पर नियंत्रण पा सकेगा हे प्रभु कार्तिकेय स्वामी मेरी प्रार्थना आपसे यह है कि कुछ ऐसा हो जाए कि जयंत अपने नेत्र मल करर निद्रा में लीन हो सके विश्राम कर सके ति [संगीत] [संगीत] हित श वही होते हैं जो आपके उद्देश्य की पूर्ति के लिए हर प्रकार से आपकी सहायता करते हैं
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