Sunday, 28 December 2025

देवों के देव महादेव ने हलाहल विष पिया Amit Mehra Sankat Mochan Mahabali Hanuman 339 Pen Bhakti

[संगीत] हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायणम नारायण हरि हरि नारायण ह ह हरि ओम नारायण हरि ह हरि ओम रायण हरि हरि ओम ह नारायण ह हरि [संगीत] यह क्या है जो मेरी स्वास रुक रही है मैं भी अचेत हो रहा हूं इस विषैले द्रव्य और उससे चलित वाष्प के प्रवाह को रोकने के लिए हमें समुद्र मं रोकना होगा रुक जाओ क्या है ये भयंकर द्रव्य जो नागराज वासु की के इससे भी अधिक विषैला है हलाहल हलाहल है ये अत्यंत विनाशकारी संसार का सबसे घातक विष है ये जिस तीव्र गति से इस प्राण घातक विष का संचार हो रहा है उससे तो प्रतीत होता है शीघ्र ही यह संपूर्ण पृथ्वी को लील कर सृष्टि के सभी जीवों का प्रणात कर देगा [संगीत] यह विष हमारे साथ साथ समस्त सृष्टि को नष्ट कर दे इसके पूर्व ही हमें इसके विस्तार को रोकने के लिए कोई उपाय करना होगा इतना विषैला और प्राण घाती विष था हलाहल हला ह हल की विनाशकारी क्षमता कि कोई था ही नहीं है वह तो समूचे संसार को सर्वनाश कर सकता था उस पर वश पाने की सामर्थ्य भी देवताओं में कहां थी फिर क्या हुआ माता हलाहल से सृष्टि की रक्षा कैसे हुई लाचार होकर देवताओं ने पुनः प्रभु विष्णु जी को पुकारा परंतु दुष्ट असुर ऐसी स्थिति में भी देवताओं पर दोषारोपण कर रहे थे यही है उन सुनहरे स्वप्नों का काला अनिष्ट कारी परिणाम जिन्ह हमारे साथ बांटने का ण लिया था तुम देवताओ ने समुद्र मंथन से बहुमूल्य निधिया निकलेंगी अमृत की प्राप्ति होगी अमृत्व की प्राप्ति होगी हमें यही वजन था ना तुम देवताओं का किंतु यह तो मृत्यु रूपी हलाहल उत्पन्न हुआ है ये यही अमृत है तुम देवताओं का बोलो यही अमृत है क्या हे प्रभु नारायण संसार पर विनाशकारी घोर अंधकार छा रहा है अब आप ही आसरा है अन्यथा यह संसार नष्ट हो जाएगा अमृत की लालसा में हम संसार से कलंकित नहीं हो सकते प्रभु ऐसे घोर अनर्थ का कारण बनने से हम देवताओ का बचाव कीजिए प्रभु बचा बचा कीजिए बचाव कीजिए ब कीजिए हमारा प्रभु प्रभु हमारा बचाव कीजिए इस समूचे ब्रह्मांड में एक मात्र महादेव शिव ही इस प्राण घातक हलाहल को निष्प्रभावी करने का सामर्थ्य रखते हैं हे महादेव हे भोले बाबा हम पर कृपा कीजिए प्रभु इस महा संकट से मुक्ति दिलाए [संगीत] प्रभु महादेव महादेव हमा की रक्षा की रक्षा कीजिए महादेव महादेव रक्षा कीजिए हम पर कृपा कीजिए [संगीत] प्रभु हम दुखिया के दुख ह भोले बाबा हम दुखिया के दुख ह भोले बाबा हमारी रक्षा कीजिए महादेव हम बचाए प्रभु प्रान प्राणियों की रक्षा कीज इसका अर्थ है हलाहल के प्रकोप से समस्त संसार पर ऐसा संकट आ गया था जिसका निवारण मात्र भोले बाबा ही कर सकते थे हनुमान को ज्ञात है फिर क्या हुआ होगा जग के संकट हरने के लिए सदैव भोले बाबा तत्पर रहते हैं भोले बाबा बिना विचार किए तत्काल जगत की रक्षा के कार्य में जट गए होंगे बताइए ना माता ऐसा ही हुआ था ना भोले बाबा शीघ्र ही अपने ध्यान से बाहर आ गए थे ना प्रभु बस आप ही का आसरा हैकर हमारे प्रा रक्ष की प्रभ हमारी रक्षा कीजिए रे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ना [संगीत] स्वामी य आप क्या करने जा रहे हैं प्रभु वही जो जगत के हित का एकमात्र और सर्वश्रेष्ठ उपाय है संसार में व्याप्त इस समूचे हला का पान करना होगा मुझे हला हल का पान नहीं नाथ इस हला हल से तो आपके जीवन का राज भी संभव है मैं ऐसा करने की अनुमति नहीं दूंगी प्रभु प्रभु मैं किसी भी अवस्था में आपको हलाहल का पान नहीं करने दूंगी नाथ परंतु देवी जगत पिता हूं मैं इस हलाहल रूपी विनाशकारी संकट से द्रवित संसार की रक्षा करना मेरा परम कर्तव्य है तो मैं करूंगी उस हलाहल का [संगीत] पान परंतु अपने नेत्रों के सामने अपने सुहाग परा कदा नहीं आने दूंगी देवी मेरे प्रति अपार प्रेम के कारण आप यह भूल रही है कि मेरा अनिष्ट असंभव है आपका प्रेम ही मेरी सुरक्षा है सुहागन धर्म की मर्यादा के अनुरूप आपका आचरण है मेरा जीवन कवच अपनी मांग को सिंदूर से सुशोभित कर आप मेरी दीर्घ आयु सुनि ित करती है पुनर्जन्म में आपका विश्वास वेद वाणी में आपकी आस्था प्रमाणित करता है सुहागन का गौरव अर्थात न छिद्र में आभूषण धारण करती है आप पुष्पों से अलंकित आपके बंधे केश मुझे प्रसन्नता देते हैं मंगल सूत्र और उसके काले मोती के अनिष्ट से मेरी रक्षा करते हैं लाल वस्त्र धारण कर आप मेरी स्मृद्धि का कारण बनती है लाल वस्त्र पति के सौभाग्य का प्रतीक है जो जगदंबा के रूप में आप धारण करती हैं आपकी पावों की पायल मुझे सकारात्मकता से परिपूर्ण करती है और बिछिया धारण कर मन स्मृद्धि में आपरी भागनी बनती है जिसकी पत्नी इतनी सुमंगली हो उसका कोई अमंगल कैसे संभव है जब आपकी अनंत शक्ति मेरे साथ है तो मुझे तु हलाहल से कोई हानि कैसे पहुंच सकती है देवी आप तो स्वयं जगदंबा है समस्त चर अचर जीवों की माता है आप फिर भी आप मुझे उनकी रक्षा करने से रोक रही है देवी किसी भी अनर्थ का संदेह अपने हृदय से निकाल दीजिए मैं तो अजन्मा हूं तो फिर मेरी मृत्यु कैसे हो सकती है विनती करती हूं स्वामी मृत्यु जैसे अशु वचन अपने मुख से मत [संगीत] [प्रशंसा] निकालिए [संगीत] तो देवी आप भी व्यर्थ की चिंता त्याग दीजिए भयंकर अनर्थ हो उसके पूर्व ही हमें हमें अपनी संतानों और संसार के सभी जीवों की रक्षा करनी चाहिए [संगीत] [संगीत] महादेव [प्रशंसा] दे [संगीत] [संगीत] विपदा मंथन काले आयो सर्व जगत संताप सताओ जीव डरे जीवन घबराए भोल बाबा करिए सहाय हाथ लियो तब गरल भयंकर पान हलाहल करले शंकर संकट से सृष्टि को बचाई नीलकंठ शिव नाम धराई रुकिए [संगीत] स्वामी माता पार्वती ने भोले बाबा को फिर से क्यों रोक दिया माता माता पार्वती ने भोले बाबा को फिर से क्यों रोक दिया माता सृष्टि की रक्षा के लिए पुत्र जो ब्रह्मांड हमें दिखाई देता है वह महादेव के उदर में ही स्थित है इसीलिए हम कहते हैं कि सृष्टि के कण कण में शिव है यदि हलाहल भगवान शिव के कंठ से नीचे उतरकर उनके उदर तक पहुंच जाता तो जगत का संघार हो जाता पुत्र इसका अर्थ है हलाहल अभी तक भोले बाबा के कंठ में है हां पुत्र जगत कल्याण के लिए अनंत काल तक अपने कंठ में हलाहल को समाहित रख की इस अद्भुत लीला के कारण ही महादेव को नीलकंठ भी कहा जाता [संगीत] है जग में हला हल लायो विनाशा तब बस भोलेनाथ ही आशा जय जय जय शिव शंभु देवा विष पियो नील कंठ [संगीत] कहेवाय हरि भी जय महादेवा तुम करुणानिधि दया के सागर जय हो तुम्हारी जय जय [संगीत] महेश्वर हे प्रभु हे [संगीत] प्रभु आपकी महिमा अपरम पार है महादेव अत्यंत विषैले हलाहल को अपने कंठ में समाकर आपने समुझ सृष्टि का उद्धार किया है हे नीलकंठ महादेव आपकी जय हो हां महादेव आपकी जय हो जय हो महादेव हो महादेव महादेव जय हो महादेव आपकी जय हो महादेव आप की जय [संगीत] हो मेरी माता ने मुझे बताया था सारा जगत ईश्वर की ही संतान है ईश्वर सदैव अपने पुत्र का कष्ट हरने के लिए दुख सहन करते हैं जैसे जगत पालक विष्णु जी ने अपने पृष्ठ पर पर्वत रखकर उसके मथने का कष्ट सहन किया था जगत के पिता भोले बाबा ने हलाहल जैसे विष को अपने कंठ में धारण करके भयानक विष अग्नि की पीड़ा सहन की थी मात्र जगत के कल्याण के लिए हां पुत्र देव दानव मानव समस्त चराचर प्राणी ईश्वर की ही संतान है अपनी संतान का पालन करना और उनकी रक्षा करने का कार्य ईश्वर को ही करना होता है हनुमान तुम यह बताओ भगवान शिव के नीलकंठ की लीला से तुम्हें क्या शिक्षा मिली यदि कोई वस्तु जो जगत के लिए हानिकारक हो जैसे वह हलाहल विष उसे किसी एक स्थान पर सीमित करके रख देना चाहिए माता हां हनुमान इसीलिए भगवान भोलेना नाथ ने महा विनाशक हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया माता भोलेनाथ ने हलाहल की समस्या का तो हल कर दिया किंतु उसके पश्चात अवश्य ही अमृत निकला होगा समुद्र मंथन से नहीं हनुमान अमृत निकलने से पूर्व कई बहुमूल्य वस्तुएं निकली समुद्र के गर्भ से सबसे पहले कुछ बहुमूल्य रत्न एवं मणियाकली जिसे देवताओं और असुरों ने आपस में ही बांट लिया और तब समुद्र के गर्भ से उत्सर्जन हुआ सबकी इच्छा अनुसार वस्तुएं प्रदान करने वाली दिव्य काम धनु गौ माता का इच्छा पूर्ति दिव्य कामधेनु गौ माता ऋषियों को प्रदान कर दी गई जिससे ऋषियों को यज्ञ आदि कार्यों के लिए दुग्ध एवं गृत आदि प्राप्त हो [संगीत] सके हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि तत्पश्चात बहुमूल्य कौस्तुभ मणि का प्रकटन हुआ चूंकि प्रभु श्री नारायण के कुर्म अवतार की सहायता से समुद्र मंथन संभव हो रहा था अतः समस्त देवता कौस्तुभ मणि को प्रभु श्री नारायण को भेंट करना चाह रहे थे किंतु कुछ असुरों ने इसका विरोध किया यतु मण विष्णु देव को नहीं हम मसूर को मिलनी चाहिए हा क्योंकि इससे पूर्व कामधेनु गा इच्छा पूर्ति देवताओं के हितेश ऋषियों को प्रदान हुई थी अत अब यह मणि हमें ही मिलनी चाहिए नहीं असरो यदि प्रभु श्री नारायण इस समुद्र मंथन में हमारी सहायता नहीं करते तो यह मण तो क्या तो हमें कुछ भी प्राप्त नहीं होता अतः यह मणि नारायण को भेट करना ही सर्वथा उचित [संगीत] होगा माता रत्न एवं माणिक मोती जैसी बहुमूल्य वस्तुएं तो सर्वप्रथम आसुरी वृति वाले को ही आकर्षित करती है फिर क्यों दैत्य राज बली ने सारे असुरों को कौस्तुभ मणि जैसे रत्न को लेने से रोक दिया अवश्य ही उनके मन में कोई गुप्त योजना होगी तुम्हारा अनुमान सत्य है हनुमान बली के मन में योजनाएं थी जिसे उसने अपने साथी असुरों के समक्ष तब उद्घाटित किया जब वारुणी सुरा का कलश लेकर प्रकट [संगीत] हुई कार्य के मध्य किसी भी अवांछित परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...