[संगीत] महाभारत क्या प्रिय युधिष्ठिर और पुत्र दुर्योधन आ गए सब लोग आ चुके हैं महाराज और आप ही की आज्ञा की प्रतीक्षा कर रहे हैं द्युत क्रीड़ा आरंभ हो [संगीत] द्यूत क्रीड़ा आरंभ हो जेष्ठ भ्राता श्री पहले नियम तो बना लो पुत्र भाइयों के बीच में नियम कैसे मामाश्री क्रीड़ा तो कड़ा ही होती है जेष्ठ भता श्री इसलिए खेल के शुभारंभ से पहले नियम तो बना ही लेने चाहिए ताकि खेल के उपरांत कोई आरोप ना लगा सके मेरी ओर से तो कोई विशेष नियम नहीं है अनुज तुम बताओ मैं तो केवल यह कहना चाहता हूं भ्राता श्री कि दाव तो मैं ही लगाऊंगा परंतु पासे मेरी ओर से पूज्य मामाश्री ही फेंकें [संगीत] वो क्यों यदि आपको पासे फेंकना नहीं आता भ्राता दुर्योधन तो फिर हमें दूत के लिए आमंत्रित क्यों किया क्या इंद्र प्रस्त नरेश मामाश्री से खेलते घबराते हैं घबराने ना घबराने का तो प्रश्न ही नहीं उठता है सूत पुत्र अंगराज प्रश्न तो यह है भता दुर्योधन कि युद्ध और दत में प्रति पुरुष को नहीं किया जाता अर्जुन ठीक कहते हैं महाराज आपके लिए तो सदैव अर्जुन ही ठीक कहते हैं काका श्री यदि मेरे जेष्ठ भ्राता श्री नहीं खेलना चाहते तो ना खेले परंतु यदि द्यूत क्रीड़ा होगी तो पा से मेरी ओर से मेरे पूज्य मामा श्री ही फेंकें क्रीड़ा में हारना अपमान नहीं होता पुत्र मैं मान अपमान की बात नहीं कर पिता परंतु मेरी ओर से पा से मेरे मामा श्री ही फेंकें नहीं तो यह द्यूत कड़ा नहीं होगी परंतु पुत्र कोई एक कारण तो बताओ कि ऐसा क्यों होगा ऐसा इसलिए होगा पिता श्री क्योंकि ऐसा होने के लिए मैं कह रहा हूं यदि जे भ्राता श्री को यह स्वीकार नहीं तो उठा लो चौसर मैं जा रहा हूं अनुज दुर्योधन यदि तुम यह चाहते हो कि तुम्हारे पासे मामाश्री फेंके तो यही होगा तुम बैठ जाओ इतनी क्रोधित ना हो बैठो भांजे बैठो [संगीत] मैं यह अनमोल माला दाव पर लगाता हूं [संगीत] यह मेरी ओर से चलिए मामा श्री अवश्य सम्राट रिए सैन को शस्त्र राजा देता है गंधार नरेश और आप इस समय दुर्योधन के सैनिक हैं इसलिए आप दुर्योधन के पासों से ही खेले यह भी ठीक है पुत्र दुर्योधन के पासों से ही खेल लेते हैं हस्तिनापुर का तो दोष ही यही है कि वह किसी के ऊपर भरोसा करना ही भूल गया है लाओ भांजे पासे दो [संगीत] लाओ यह देखिए विदुर जी अब तो संतुष्ट है ना आप नहीं मामा श्री आप अपने पासों से खेलिए इंद्र प्रस में भी तो आप अपने पासों से खेले थे नहीं युधिष्ठिर अब तो मैं पुत्र दुर्योधन के ही पासों से खेलूंगा तुम आरंभ करो नहीं मामा श्री आप दुर्योधन की ओर से खेल रहे हैं और दुर्योधन मेरा प्रिय अनुज है तो क्रीड़ा भी उसी की ओर से आरंभ होगी जो आपकी आज्ञा सम्राट क्यों बा मामा श्री छह अवश्य तुम्हारा कहना तो मैं टाल ही नहीं सकता भांजे अब देखो आजा मेरे छय छ छ चलो गोटी भांजे अब देखना चमतकार आट आट मामा श्री प बारा अभी लो भांजे पारा पा चलो गोटी भांजे अब मांगो भांजे आठ आठ आठ आठ भी आ गया [संगीत] [हंसी] पुत्र दुर्योधन द भी आ [हंसी] गया प्रिय युधिष्ठिर तुम तो तरस जाओगे पा से फेंकने के लिए मामा श्री मुझे न की आवश्यकता [संगीत] है यह हार तो तुम पहन ही लो युवराज दुर्योधन आजा नो नो प्रिय अर्जुन यह हार तो हमें दो दे दो पुत्र अर्जुन सम्राट युधिष्ठिर का न लखा ता श्री अब तो यह अनमोल हार हमारा हुआ नौ लखा हार भांजे दुर्योधन ये तुम्हारी पहली जीत है मेरा सुझाव है महाराज कि दुर्योधन का हट पूरा हो गया है उसके निमंत्रण का मान रख लिया गया है युधिष्ठिर हार गए हैं दुर्योधन जीत गए हैं तो अब इस द्यूत को यही समाप्त कर देना चाहिए पितामह यह कैसे हो सकता है क्या सारा संसार हमारी हंसी नहीं उड़ाए कि युवराज दुर्योधन ने सम्राट युधिष्ठिर को जीतने का अवसर ही नहीं दिया क्या इससे हस्तिनापुर का अपमान नहीं होगा पितामह यह तो दुर्योधन ठीक कह रहा है ता श्री [संगीत] बड़े भैया पितामह की बात सुनिए मैं दाव से उठकर हसनापुर और इंद्र प्रेस दोनों का ही अपमान नहीं कर सकता भीम अब क्या लगाओगे प्रिय युधिष्ठिर अब मैं 11000 स्वर्ण मुद्राए और अक्षय धन भंडार दाव पर लगाता हूं तो मैं इन 11000 स्वर्ण मुद्राओं और अक्षय धन भंडार को जीते लेता हूं प्रिय युधिष्ठिर मामा श्री परा पारा पारा ये है हमारी आज्ञा करी सेना भांजे पांडवों के धन को नहीं पांडवों के मन को जीतने का प्रयत्न करो युवराज दुर्योधन काका श्री तो आप इंद्र प्रस्थ नरेश दिग विजय मेरे जेष्ठ भ्राता श्री से कहिए कि यदि वे द्यूत में हारने से डरते हो तो उठ जाए मैंने उन्ह द्युत के लिए आमंत्रित किया है काका श्री और मैं ही जीतने के उपरांत द्युत समाप्त करके उनका अपमान नहीं कर सकता इस बार मैं अपना रथ दाव पर लगाता हूं युवराज यदि आज्ञा हो तो महाराज का रथ जीत लू आज्ञा है एक दो तीन चार पाच छ सात आठ मामा श्री बोलो भांजे मुझे आठ की आवश्यकता है अवश अभी [हंसी] लो दाता श्री अब तो आपको पैदल चलना पड़ेगा प्रिय युधिष्ठिर रथ भी [प्रशंसा] गया रथ भी [प्रशंसा] गया अब क्या लगाएंगे सम्राट युधिष्ठिर बोलिए बोलो कुंती पुत्र अब मैं अब मैं अपनी एक लाख दासिया उनके स्वर्ण अलंकारों सहित दव लगाता हूं युवराज दुर्योधन के पास दसियों की तो कमी नहीं है फिर भी यदि आप उन्हे हारना ही चाहते हैं तो यही सही एक लाख दासिया अपने स्वर्ण अलंकारों सहित इस बार मेरी सेना मुझे य की आवश्यकता है य जय जय जय दुधन बोलो सम्राट युधिष्ठिर अब क्या लगाओगे सोने के हदे वाले 1000 आधी बाजे सोने के अहदे वाले एकज आधी चलिए मामा श्री मुझे सात की आवश्यकता है सात अवश का भांजे साथ सा ये हज हाथी भी हमारे हुए घबराइए नहीं भ्राता श्री लगाइए कुछ और है लगाने के लिए भ्राता श्री मेरे पास आयुत प्रयुत पदम अरबत र्व शंख निरख महा मदम कोटि मध्यम और परार्थ बल्कि इससे भी अधिक धन है वह सब मैं दाव पर लगाता हूं तुमने लगाया सम्राट पुत्र तो यह लो मैंने जीत लिया अब क्या चाहिए भांजे हमें आठ की आवश्यकता है मामा श्री आठ आना ही चाहिए [हंसी] [संगीत] भांजे ये लो भांजे यह भी तुम्हारा हुआ अ शंख महातम कोट धन तुम्हारा क्या अब भी कुछ रह गया है भ्राता श्री बोलिए सम्राट सोचिए सम्राट सोचिए बोलो प्रिय युधिष्ठिर नुज ब्राह्मणों और उनकी संपत्ति को छोड़कर नगर देश भूमि प्रजा और उसका धन दाव पर लगाता हूं भूमि प्रजा धन इंद्रप्रस्थ सब ताव पे भांजे मेरी सेना बस इसी घड़ी की तो प्रतीक्षा दी इस बार तुम्हें जीतना है प बारा भांजे राज [संगीत] [हंसी] [संगीत] [संगीत] राता श्री इंद्र प्रस्त मेरा हुआ आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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