[संगीत] सत्य तो यह है वो अल्पा आयु है सत्यवान के पास केवल एक वर्ष की आयु ही शेष [संगीत] है तुम इस दुर्भाग्य के योग्य नहीं हो पुत्री पिता श्री व्यक्ति का भाग्य उसके कर्म निर्धारित करते हैं और आपने भी तो यह स्वीकार किया था कि हमें जीवन में जो कुछ भी प्राप्त होता है व हमारी योग्यता के आधार पर प्राप्त होता है तो फिर यदि मेरे कर्म मुझे इस दुर्भाग्य के नहीं सौभाग्य के योग्य बनाते हैं तो फिर मुझे सौभाग्य ही मिलेगा ना मैं उन्हें एक ही वर्ष में खोने पर विवश नहीं होंगी किंतु पुत्री पिताश्री मेरा यात्रा करना यात्रा पर उनसे भेट करना मेरे हृदय में उनका स्थान बनना यह सब मेरा भाग्य ही तो है या ईश्वर की कृपा तो मैं व्यर्थ चिंता क्यों करूं मैं तो बस अपना कर्म करूंगी और अपने कर्म से अपने भाग्य को अपने सौभाग्य में परिवर्तित करूंगी और पिताश्री यदि देवर्षी नारद यहां आकर आपको सत्यवान जी की अल्पा आयु के बारे में नहीं बताते तो क्या तब भी आप मेरे विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार करते पुत्री कर्म तभी सार्थक होता है जब उसे योग्य दिशा में किया जाए मरुस्थल में भूमि खोदने से जल की प्राप्ति नहीं होती पुत्री सामने खाई हो तो खाई में कुदा नहीं जाता बल्कि रुककर अपनी रक्षा की जाती है और मेरी पुत्री दुर्भाग्य के खाई में कूदने का निर्णय ले रही हो वो मैं उसे कैसे करने दूं पिताश्री [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] जिसकी रक्षा ईश्वर करते हैं वो खाई में कूद कर भी जीवित बाहर निकलते हैं भविष्य के पलों की चिंता में अपना वर्तमान व्यर्थ करने का क्या लाभ और फिर वैसे भी भविष्य में क्या है यह कौन जानता है संभव है उनके भाग्य में अल्पायु होना लिखा हो किंतु यह भी तो संभव है कि मेरे भाग में मेरे पति दीर्घ आयु है किंतु पुत्री पिताश्री आपने मुझे वचन दिया था कि आप मेरे निर्णय को स्वीकार करेंगे व स्वयं अपनी बुद्धि से अपने योग्य व ढूढ लेगी और वो जिसका भी चयन करेगी मैं वचन देता हूं ना नहीं [संगीत] कहूंगा परंतु पुत्री मां मां एक मां का हृदय कितना विशाल और कोमल होता है यह मैं भली भाति जानती हूं और आप एक मां होकर एक मां के हृदय को समझने में असमर्थ हो रही हैं मां मैं आपको माता गायत्री के वरदान से प्राप्त हुई हूं और आप उनकी ही कृपा पर संदेह कर रही है जैसे आप मां होकर मुझे दुखी नहीं देख स वैसे ही मुझे पूर्ण विश्वास है कि माता भी आपको दुखी नहीं होने देंगी इसीलिए मां मुझे सत्यवान जी से विवाह करने की अनुमति [संगीत] दीजिए नारायण नारायण पुत्री सावित्री का ये अटूट आत्मविश्वास अवश्य प्रभावित करने वाला है उसका यह अटूट आत्मविश्वास विपरीत संजोग को भी अनुकूल बना सकता है कदाचित यह विवाह नियति की ही योजना तो नहीं तो क्या महाराज अश्वपति ने अनुमति दे दी नारी के निश्चय की दृढ़ता के आगे कोई भी नतमस्तक हो जाता है माता सावित्री के आत्मविश्वास को देखकर महाराज को भी उनकी इच्छा के आगे झुकना पड़ा और शुभ मुहूर्त देखकर उन्होंने माता सावित्री और सत्यवान जी का विवाह संपन्न करवा [संगीत] दिया [संगीत] आ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] पुत्री पुत्र के रूप में मेरा कोई उत्तराधिकारी नहीं है यह राज पाठ इसकी लालसा इसका आकर्षण अब मुझ में नहीं रहा मेरी इच्छा है कि मैं यह सब कुछ तुम्हें और अपने जमाता सत्यवान को ही सौंप [संगीत] [प्रशंसा] द नहीं पिताश्री आपके मन के भाव में और मेरे स्वामी भली भाति समझते हैं किंतु आपसे यह भेट स्वीकार करना मेरे पति और उनके परिवार के लिए अपमान होगा मैंने उनकी वर्तमान आर्थिक स्थिति को जानकर ही उनसे यह विवाह किया है इसीलिए अब उसी में रहना उसे स्वीकार करना ही मेरा धर्म है पिताश्री आप बस मुझ मुझे अपना आशीर्वाद दीजिए हां महाराज अश्वपति पुत्री सावित्री ने सदा उचित ही कहा है जीवन के सभी धन से अमूल्य धन तो संतोष है और जो संतुष्ट है व जीवन के उतार चढ़ाव में भी प्रसन्न है उसे अभाव भी नहीं सता पाते और जो असंतोष से ग्रसित है उसके जीवन में ऐश्वर्य और धन होते हुए भी खालीपन है [संगीत] मुझे पुत्र वधु के रूप में पुत्री की प्राप्ति हुई है ऐसे संबंध में धन की कामना करना किसी को भी शोभा नहीं देता क्योंकि किसी भी संबंध में धन का लेनदेन उसे संबंध कहां रहने देता है वह तो एक व्यवसाय बन जाता है और यह हमारे पुत्र के प्रति हमारे स्नेह के प्रति कितना बड़ा अपमान होगा महाराज मैं आपको वचन देता हूं आपकी पुत्री को कोई भी कमी नहीं होने दूंगा और यदि इनके भाग्य में राज्य योग होगा तो इन्ह अवश्य मिलेगा किंतु पुत्र तुम्हारे पास कुछ भी अधिक करने का समय कहां है एक वर्ष का ही तो जीवन शेष है [संगीत] तुम्हारा माता सावित्री की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है जीवन अवधि कम होने पर भी उन्होंने सत्यवान जी से विवाह में तनिक भी संकोच नहीं किया और उनके अनुसार जीवन जीने का चुनाव कर लिया सत्य कहा पुत्र देवी सावित्री ने राजभवन के सुख त्याग कर कुटिया में साधारण जीवन ही नहीं अपनाया था अपितु अपने पति के जीवन के प्रत्येक पहलू को स्वीकार कर लिया था वह भी सत्यवान जी के माता-पिता की सेवा करने लगी और उनके पति ने भी उन्हें बहुत स्नेह दिया उन्हें कभी कोई कष्ट ना हो उसका ध्यान रखने [संगीत] [प्रशंसा] लगे किंतु शंका के जो विचार देवर्षि नारद ने उनके मन में बो दिए थे वह तो अब भी उनके मन में थे किंतु उन्होंने कभी उन विचारों को बाहर नहीं आने दिया दिन भर वह सभी के साथ रहकर सदैव मुस्कुराती रहती [संगीत] थी पुत्री तुम्हारे आगमन से तो यह कुटिया भी राज भवन के समान हो गई है अब तो राज पाठ की भी याद नहीं आती दुख तो लेश मात्र नहीं रहे अब तुमने तो पुत्री जैसे सारे दुखों को इस कुटिया से बाहर ही कर दिया है अब तो बस एक ही इच्छा है कि मृत्यु से पहले एक बार स्वयं तुम्हें अपनी नेत्रों अपनी दृष्टि से देख पाती मां आपने अपने हृदय में मेरी जो छवि बनाई है मान लीजिए मैं सर्वथा वैसी ही हूं उन्हें ज्ञात था कि उनके परिवार में सबके हृदय में क्या चल रहा था किंतु उनके मन का उथल-पुथल कदाचित किसी को ज्ञात नहीं था भोर होने पर सभी के उठने से पहले सबसे छिपाकर ब्रह्म मुहूर्त में ही वह वट वृक्ष की पूजन कर लेती थी जिससे परिवार में कभी किसी को कोई चिंता ना हो [संगीत] हे आयु प्रदान करने वाले दिव्य वटवृक्ष मेरे पति मेरे स्वामी को दीर्घ आयु प्रदान करने की कृपा कीजिए [संगीत] सावित्री सावित्री [संगीत] स्वामी जब रात्रि में सब निद्रा में खो जाते तो वो अपने स्वामी की दीर्घायु के लिए मा गायत्री की पूजा करती उन्हे सदा ध्यान रहता कि एक वर्ष में कितने दिन बीत चुके थे और कितने शेष [संगीत] थे हे मां मेरे स्वामी को दीर्घ आयु प्रदान करने की कृपा [संगीत] कीजिए [संगीत] और इसी प्रकार समय बीतता चला गया वह पूरी भक्ति और विश्वास से दिव्य वट वृक्ष और माता गायत्री की पूजा करती रही मां अब तो वर्ष समाप्त होने में चार ही दिवस शेष है मुझ पर कृपा कीजिए मेरे सुहाग की रक्षा कीजिए मेरे स्वामी को दीर्घ आयु प्रदान कीजिए [संगीत] मां [संगीत] [संगीत] [संगीत] सावित्री उठो [संगीत] पुत्री मां [संगीत] मां आप आ गई आपने मेरी बुखार सुन ली मां अपनी संतान की गुहार मां अवश्य सुनती है मुझे तुम्हारे कश का कारण ज्ञात है पुत्री तुम्हारे पति के जीवन के चार ही दिन शेष मां किंतु पुत्री एक पति धन पराय में नियती को बदलने की शक्ति हो कैसे मां बताई क्या करू मैं इस नियति को बदलने के लिए पुत्री अगले तीन दिन जेठ मां की तेरस चौदस और पूर्णिमा है अखंड व्रत के लिए सर्वोत्तम दिन है य यदि तुम वट वृक्ष के सामने अनजल त्याग कर तीन दिन का उपवास करो और चौथे दिन पारण करो यदि तुम अपने इस व्रत में सफल हु तो तुम अन्य पतिव्रता के समान सं एक अदभुत उदाहरण प्रस्तुत करोगी हा मा अवश्य य व्रत करूंगी अवश्य करूंगी य त मा पुत्री क्या हुआ पुत्री मा मा पुत्री क्या हुआ पुत्री सब कुशल तो है तो यह मात्र मेरा एक स्वप्न था [संगीत] क्या हुआ पुत्री कुछ नहीं मां सब कुशल है और सब कुशल ही रहेगा आइए [संगीत] म अब एक और देवी सावित्री अपने पति और अपने सास ससुर की अनुमति से तीन दिनों के निर्जला व्रत में लीन हो गई किंतु दूसरी ओर यमराज भी अपने कर्तव्य और दायित्व के प्रति सजग थे और माता के व्रत में विकन डालने वाले थे हे यमदेव मुझे आज्ञा दीजिए मैं आज ही जाकर सत्यवान का प्राण मूर्ख धर्मराज की सभा में धर्मो चित वचन ही शोभा देता है यहां पर अधर्म की कोई भी बात मान्य नहीं समय आने पर ही किसी के प्राण लिए जा सकते हैं अन्यथा नहीं और सत्यवान के जीवन के तो अभी भी तीन दिन शेष हैं किंतु प्रभु इन चार दिनों में उनके पतिव्रता पत्नी का वर्त संपन्न हो गया तो हम यह धर्म उचित कार्य नहीं कर सकेंगे पति धर्म परायण जब एक पति धर्म परायण साधवी के वचन के विरुद्ध सूर्यदेव उदित नहीं हो सके तो आप एक अन्य पति धर्म परायण साधवी द्वारा रचित सुरक्षा कवच को कैसे भेज सकते हैं पति धर्म परायण नारी के सामर्थ्य का ज्ञान तो मुझे पहले भी मिल चुका है जा इतनी कड़ी परीक्षा लो देवी सावित्री की कि उनका तीन दिनों का खंड व्रत पूर्ण ना हो पाए यही उनकी पति धर्म परायणता की परीक्षा है इस प्रकार जो व्रत देवी सावित्री ने आरंभ किया था उसी में वाधा डालने का निश्चय यमराज ने किया और देवी सावित्री के पास तो बस यही तीन दिन थे ओ [संगीत] मेरी गर्जना से कंपित हो जाएगी यह देवी भंग हो जाएगा इनका [संगीत] व्रत ओ कदाचित इतनी सरलता से नहीं होगा यह कार्य मुझे और शक्ति का प्रयोग करना [संगीत] होगा कौन है यहां किसकी गर्जना है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ये [संगीत] ओ पति का कर्तव्य है कि पत्नी की रक्षा हर क्षण और किसी भी अवस्था में करे इसलिए जब तक सावित्री अपना व्रत कर रही है तब तक मुझे यही खड़े रहकर उसकी रक्षा करनी चाहिए मेरी गर्जना से भयभीत नहीं हुई तो क्या हुआ बेसुरे संगीत से तो होगी आ [संगीत] [संगीत] गया निकल कवानी कहां से आ रही [संगीत] है [संगीत] धोनी है पर कोई दिखाई नहीं [संगीत] देता इधर सत्यवान जी यमदूत को ढूंढ रहे थे उधर यमदूत माता के चारों ओर घूमकर कर्कश ध्वनि उत्पन्न करते करते थक रहे थे किंतु माता का ध्यान तो स्थिर था उन पर इस पूरे क्रियाकलाप का इस ध्वनि का कोई प्रभाव नहीं पड़ा उनकी एकाग्रता भंग नहीं हुई अब और सेयो ध्वनि और फिर एक समय आया जब यह ध्वनि स्वयं यमदूत के लिए ही असहनीय हो गई ओ ओ [संगीत] ओ कदाचित ये मेरे बस में नहीं है यहां रहा तो मेरा ही अनिष्ट होगा मुझे यमदेव को जाके बताना [संगीत] होगा भयंकर ककवानी तो रुक गई क्या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपे संस्थिता नमस्तय नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम संपूर्ण ब्रहमांड हैमत अना धनि का संबंध सीधा परमात्मा से है ओ सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है इसमें त्रिदेव का वास है भूलोक लोक और स्वर्ग लोक इसके प्रतीक मात्र [संगीत] हैन तुमने ओ का उरण कर सब कुछ ठीक कर दिया सत्य है जिसके नक्ष स्वयं ईश्वर करते हो उसे मेरी रक्षा की क्या आवश्यकता तुमने एक दिन पूर्ण व्यर्थ कर दिया इसका दंड तो तुम्हें मिलना ही चाहिए क्षमा प्रभु क्षमा मैंने पूरा प्रयास किया किंतु उन देवी की अखंड व्रत की दृढ़ता के आगे मैं विवश हो गया अभी दो दिन और है व्यर्थ करने के लिए नहीं नहीं मेरा अर्थ है अभी दो दिन और है और प्रयास करने के लिए आपके आदेश का पालन अवश्य करूंगा इस बार मेरे पास और भी उत्तम युक्ति है कल ऐसा दुर्गंध फैला दूंगा वहां कि कोई टिक नहीं सकेगा देवी सावित्री को वहां से जाना ही [संगीत] होगा [संगीत] जो दुर्गंध मुझसे नहीं सही जा रही है उससे भला यह कैसे सह सकेगी [संगीत] [संगीत] एक और उपाय है मेरे पास यदि तब भी उनका ध्यान भंग नहीं हुआ तो मैं मधुमक्खियां भेज दूंगा जब उनके शरीर को काटें तब उनकी पीड़ा से उन देवी की एकाग्रता अवश्य भंग होगी जाओ जाओ और अगली बार यहां आने से पूर्व अच्छी तरह से स्नान करके आना [संगीत] मेरी यह युक्ति विफल नहीं हो सकती यह क्या हुआ ये कैसा विपरीत आचरण है इन मधुमक्खियों का उन पर चढ़ने के स्थान पर ये तो जैसे उनका चरण स्पर्श कर लौट रही [संगीत] है यमदेव अभी एक ब्रह्मा युक्ति है मेरे पास वो संपूर्ण स्थान को ऐसे धूम से भ दूंगा कि शवास लेना भी कठिन हो जाएगा कुछ सफल हो या ना हो किंतु यह युक्ति असफल नहीं हो सकती क्योंकि स्वास के बिना जीवन नहीं और अपने जीवन की रक्षा तो हर कोई करता है उचित है [संगीत] जाओ थम ही धुमर होगा चारों ओर [संगीत] दिखाई भी नहीं दे रही है कदाचित धूम से प्रभावित होकर वो यहां से चली [संगीत] गई इन्हें तो अभी भी कुछ नहीं हुआ और यह घूमर मुझे ही प्रभावित कर रहा है [संगीत] यमदेव के दूत हो तुम और एक छोटा सा कार्य नहीं कर पाए तुमने दूसरा दिन भी व्यर्थ कर दिया और अपनी दुर्दशा कर दुर्गंध लेकर मेरे सामने आ गए आज जो नहीं हुआ यमदेव वो कल होगा मेरा विश्वास कीजिए कल मैं अचूक उपाय का प्रयोग करूंगा मेरा विश्वास कीजिए नहीं कल तुम नहीं मैं स्वयं [संगीत] जाऊंगा [संगीत] ओ [संगीत] ओ ओ [संगीत] क्षमा कीजिए देवी धर्म कर्तव्य कठोर होता है वह किसी भावना के अधीन नहीं होता आपका व्रत धर्मराज के धर्म की बाधा बन रहा है इसे तो भंग करना ही [संगीत] पड़ेगा अब देवी सावित्री कदापि स्थिर नहीं रह सकेंगी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आश्चर्य देवी सावित्री में स्वयं माता गायत्री के दर्शन हो रहे हैं हरे हरि देवस्य धीमही योयो [संगीत] च प्रभु यमदेव कुछ कीजिए प्रभु दिन बीता जा रहा है अरे आप मेरी बात क्यों नहीं सुन रहे हैं प्रभु प्रभु यमदेव अपनी तंद्रा भंग कीजिए और इनका मृत [संगीत] नहीं सूर्यास्त होने ही वाला है तब तक इनका मृत भन नहीं हुआ तो अपने व्रत में सफल हो जाएंगे और हम इनके पति के प्राण नहीं ले सकेंगे हे धर्मराज आप अपना धर्म निभाने में असमर्थ हो [संगीत] जाएंगे यह कैसा भ्रम हुआ था मुझे किंतु अब तो आप अपने भ्रम से जाग गए सोच विचार मत कीजिए धर्मराज कुछ कीजिए देखिए सुर्यास्त होने को [संगीत] है [संगीत] ये तो अब भी सुरक्षित है विश्वास नहीं होता मेरा यह प्रयास विफल कैसे हो गया [संगीत] ओ अटूट आत्मविश्वास और धर्म निष्ठ आचरण विपरीत संयोग को भी अनुकूल बनाने का सामर्थ्य रखते हैं
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