हरता श्री गणेशा श्री गणेशा श्री माता आपने ही मधु और कटप को उत्पन्न किया तो माता जब उनका अंत ही होना था तो आपने उन्हें जीवन दिया ही क्यों [प्रशंसा] [हंसी] [संगीत] माता श्री महाकाली का ठास तो भत करने वाला है तेरे इस प्रश्न का तो एक ही उत्तर है रे मैं जो भी करती हूं उसका एक बड़ा कारण होता है मधु और कटप का अंत इसीलिए होना था क्योंकि उनके से एक नवीन आरंभ होना था नवीन आरंभ कैसा नवीन [संगीत] [संगीत] आरंभ हारे नवीन आरम क्योंकि मधु और कटप के खंडित शरीरों की मोदनीसा आने से जल पर चलायमान के अंश को कठोरता प्राप्त हुई और यह था आरंभ पृथ्वी [संगीत] का [संगीत] प्रणाम आपका कोटि कोटि धन्यवाद नारायण आपके ही कारण मधु और कटप के शरीर की मेदनी से मेरी सता कठोर हुई है अब इस पर सृष्टि संभव हो सकेगी देवी पृथ्वी धन्यवाद मेरा नहीं देवी महाकाली का कीजिए जिनकी लीला से मधु और कैट उत्पन्न हुए और मैंने उनका अंत किया मैं तो मात्र उनकी लीला में सहायक था सृष्टि का पुनः निर्माण उन्हीं की लीला का परिणाम [संगीत] है ज जय श्री महाकाली हम कृतार्थ हुए माता आपकी अद्भुत लीला की और आपकी लीला के परिणाम स्वरूप सृष्टि के पुनर्निर्माण की कथा सुनकर हां मां हम धन्य हुए आपकी लीला की कथा सुनने का अवसर जो प्राप्त हुआ हमें और उससे भी बड़ा सौभाग्य तो यह था कि यह कथा हमें साक्षात आपके श्रीमुख से सुनने का अवसर प्राप्त हुआ अपनी ही लीला की कथा सुनाकर आपने हमें कृतार्थ कर दिया माता किंतु हमें यह भी बताइए माता कि आपके देवी श्री महाकाली रूप की कृपा से हम भक्तों को कैसा सुफल प्राप्त होता है मैं जब श्री महाकाली रूप में अवतरित होती हूं तो उस समय महादेव महाकाल रूप में मेरे साथ होते हैं मेरे इस रूप की आराधना से मेरे भक्तों को जीवन के सभी सुख और भोग के सभी साधन प्राप्त होते हैं और उनकी समस्त धर्मो चित मनोकामनाएं पूर्ण होती है और उनके जीवन के उपरांत उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है मां प्रणाम मां श्री महाकाली मशान कालिका काली भद्रकाली कपाली हि काली महाकाली उरुकुल्ला विरोध कालिका कालरात्रि महाकाली नितम बिनी कालर कुवत प्रकाशिनी काम कामिनी कन्या कमनीय स्वरूप कस्तूरी रस तांग कुंजम कका सर्वांगी कामिनी काम सुंदरी कामता काम रूपाच काम कलाव कांता काम स्वरूपा कामाया कुल कामिनी दुर्ग मेरी प्रथम महाविद्या काली के रूप की कथा अनंत है इसीलिए अब मैं उसे विराम देती और अपनी द्वितीय महाविद्या के विषय में बताती [संगीत] हूं द्वितीय महाविद्या [प्रशंसा] माता गणेश अपने प्रश्न पर थोड़ा नियंत्रण रखो कदाचित माता क्रोधित हो रही है माता श्री महाकाली का प्रचंड क्रोध जागृत हुआ तो कदाचित हम सभी उसमें भस्म हो जाएंगे एक और प्रश्न पूछना चाहता है रे तो पूछ कि तू तुझसे यही अपेक्षा भी है क्योंकि जब तक तू मेरा रहस्य जान नहीं जाता तेरी जिज्ञासा कहां शांत हो हो रे पूछ तेरे मन में क्या प्रश्न है माता आप तो अंतर्यामी है सर्व ज्ञाता है तो मेरा प्रश्न भी आपसे छिपा कहां है माता ज्ञात है मुझे तेरा प्रश्न मुझे अवश्य ज्ञात है किंतु यहां उपस्थित और किसी को नहीं इसीलिए पूछ रे पूछ जो आज्ञा माता माता मैं यह समझने में असमर्थ हूं कि जब संसार में श्री महाकाली का आविर्भाव हो चुका था और उनकी कृपा से पृथ्वी का निर्माण भी आरंभ हो चुका था तो आपकी द्वितीय महाविद्या रूप की आवश्यकता क्यों हुई इसमें समझने का जो भी है मैं पूर्व में ही कह चुकी हूं गणेश महादेव के साथ मिलकर संसार के निर्माण पालन और संहार का कार्य है मेरा और अपने इन सब सभी कार्यों के संपादन के लिए मैं अपने 10 महाविद्या रूप प्रकट करती हूं मैंने अपने महाकाली रूप में मधु और केटब के शरीर से पृथ्वी के कठोर धरातल का निर्माण करवाया कि उससे सृष्टि का सृजन पूर्ण नहीं हुआ था क्योंकि जल और थल तो अब थे किंतु और कुछ नहीं था इसीलिए सृष्टि अभी भी अपूर्ण [संगीत] थी जल और थल के बाद प्राण ऊर्जा प्रदान करने के लिए सूर्य की आवश्यकता थी जिनकी उत्पत्ति के लिए मैंने अपना देवी तारा स्वरूप धारण किया और महादेव के अक्ष स्वरूप का प्राकट्य हुआ मातारा और श्री अक्षोभाया ओ नमः शिवाय [संगीत] या देवी सर्व भूते आदित्य सूर्य के बिना पृथ्वी हिमाद हल्प पिंड मात्र थी जिस पर जीवन संभव नहीं था इसीलिए देवी तारा का उद्भव हुआ जिनसे आदित्य सूर्य को उत्पन्न होकर पृथ्वी पर उष्णता और प्रकाश का संचार करना था बदवी तारा मेरी द्वितीय महाविद्या सर्वथा असाधारण स्वरूप है [संगीत] [संगीत] मेरा [संगीत] क्योंकि देवी तारा ही मेरा वह महाविद्या स्वरूप है जिनम ऊर्जा उष्णता प्रकाश उत्पन्न करने का सामर्थ्य है और जब उस ऊर्जा का संयोग प्रभु अक्षोभाया [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] जब देवी तारा और प्रभु अक्षोभाया फिर देवी तारा ने अपनी श्वास वायु से एक प्रचंड वायु प्रवाह उत्पन्न किया जिसके टकराव से और ऊर्जा पिंडों की संख्या में और वृद्धि के साथ उनका जुड़ाव आरंभ हुआ और तब जल के भीतर निरंतर बढ़ती ऊर्जा के केल आदित्य सूर्य का आकार दिखाई देने लगा और फिर प्रभु अक्ष और देवी तारा की ऊर्जा से आदित्य सूर्य प्रस्तुत [संगीत] [संगीत] हुए रे रे रे मां प्रभु अक्षवृत्त हुआ मुझे उत्पन्न करने के लिए आपका कोटि कोटि धन्यवाद मैंने पृथ्वी पर जीवन का संचार करने के लिए आपको जन्म दिया है अब आप अपने स्थान पर रहकर सृष्टि को उष्णता प्रकाश और जीवन दयनी ऊर्जा प्रदान करें दिवस और रात्रि उत्पन्न करेंगे पृथ्वी पर ऋतुओं का चक्र स्थापित करेंगे अब आप प्रस्थान कीजिए और सभी को जीवन देने का अपना दायित्व संभालिए उचित है मां [संगीत] [संगीत] मां सूर्यदेव से ही संसार में प्राण शक्ति उत्पन्न हुई जिससे प्राणियों का जीवन आरंभ हुआ और यह सभी आपकी ही लीला से संभव हो सका है [संगीत] मां उत्तम अति उत्तम यह प्रथम बार है गणेश जब तूने प्रश्न नहीं पूछा स्वयम उत्तर दिया है रे किंतु मां मेरे प्रश्न अभी समाप्त नहीं हुए ज्ञात है मुझे ज्ञात है पूछ पूछ रे माता हमें बताइए ना आपकी द्वितीय महाविद्या स्वरूप नी देवी श्री तारा के नाम का क्या अर्थ है क्या रहस्य है इसके पीछे [प्रशंसा] मां तारा अर्थात जगत को तारने वाली मुझे अपने उस रूप में तारा इसीलिए कहा जाता है क्योंकि मैंने अपने उसी रूप में सूर्य को उत्पन्न कर जगत को तारने का कार्य किया था और आज भी मैं देवी कुशमांडा के रूप में सूर्य के केंद्र में रहती हूं उनकी अधिष्ठात्री हूं ऐसा क्यों माता आदिती सूर्य को उत्पन्न करने और उन्हें उनका दायित्व समझाने के बाद आपको उनके केंद्र में स्थित रहने की क्या आवश्यकता है आदिती सूर्य को उत्पन्न करने और उन्हें उनका दायित्व समझाने के बाद आपको उनके केंद्र में स्थित रहने की क्या आवश्यकता है क्योंकि सूर्य की शक्ति का स्रोत मैं ही हू रे मेरे बिना उनकी ऊर्जा उनका प्रकाश मन पर शांत पड़ जाता है सूर्य सृष्टि को जीवन प्रदान करते हैं कि द उसका कारण भी मैं ही हूं रे मेरी ही शक्ति उन्ह इसम समर्थ बनाती है और अपने कुष्मांडा रूप में मैं यही करती हूं रे माता आपने हमें अपने इस नाम का अर्थ तो बता दिया किंतु अब यह भी बताइए कि मैं जानती हूं तू क्या पूछना चाहता है रे यही ना कि महादेव को अो क्यों कहा जाता है हां [संगीत] मां अो अर्थात जो प्रत्येक अवस्था में शोभ रहित रहे और महादेव तो सदा अो ही रहते हैं हलाहल विष का पान करने के बाद भी व्यथित नहीं हुए वो सदा शांत रहते हैं वो और ऐसा इसीलिए संभव हुआ क्योंकि कष्टों को तारने वाली देवी तारा के रूप में मैं उनके साथ रहती हूं मैं समझ गया मां आप जिनके निकट रहती हैं उनको कोई शोभ नहीं होता वह सदा अ शोभ रहते हैं तो मां क्या इसी कारण सूर्यदेव भी प्रशांत बने रहते हैं तब स्वय समझ गया तू वास्तव में तू बुद्धि का देवता है रे उचित कहा तूने सूर्य सबको जीवन प्रदान न करने के लिए सदा तपते रहते हैं और स्थिर भी रहते हैं और अपनी स्थिरता से सब को प्राण शक्ति भी प्रदान करते हैं माता मेरी भी एक जिज्ञासा शांत करने की कृपा कीजिए यदि सभी माता से इसी प्रकार प्रश्न पूछते रहे तो अवश्य ही माता कुपित होकर हम सभी को एक साथ दंडित करें [प्रशंसा] बछ तू भी बछ क्या है तेरी जिज्ञासा रे माता देवी तारा के रूप में आपकी पूजा से हम भक्तों को कौन से सुफल प्राप्त होते हैं और मां तारा के रूप में हमें दर्शन भी प्रदान करें मां मात तील सरस्वती प्रणता सौभाग्य संपत प्रदे प्र त्याली सवय स्मेरा नाम बुदे फवर लोचने त्रिनय कत्र कपाल पले खड़ गं चाती त्वमेव शरणम मेरी पूजा करने वाले भक्तों के शत्रुओं का नाश होता है उन्हें अद्भुत वाग शक्ति का वरदान प्राप्त होता है और मेरे इस रूप के भक्तों को भी देवी काली के भक्तों के समान सुख भोग के साथ साथ मोक्ष की भी प्राप्ति होती है माता यह तो मेरा सौभाग्य है कि आपने अपनी कथा सुनाकर और अपने भव्य और दिव्य दर्शन देकर मुझे कृतार्थ कर दिया [संगीत] माता मात तील सरस्वती प्रणता सौभाग्य संप प्रदे प्रत्यास्थ सवय स्मेरा नाम बारुद फूवर लोचने त्रिनय कत्र कपाल पले खड़ गं चाती त्वमेव शरणम स्वामी शवरी मा श्रय तारा च तारि देवी नाग मुंड विभूषित लवा नील वर्गा ब्रम रूप था नागा चित देवी नीलाम दरारा नाम नामा मिम स्तोत्रम पते सुया तस सर्वार्थ सिद्धि सत्यम सत्यम [संगीत] महेश्वरी माता आपने देवी श्री महाकाली रूप में पृथ्वी का निर्माण किया फिर मातारा के रूप में सूर्यदेव को उत्पन्न किया जब पृथ्वी और जीवन के स्रोत सूर्य दोनों की रचना हो चुकी थी तो आपकी तृतीय महाविद्या की क्या आवश्यकता थी पृथ्वी सूर्य यह पर्याप्त है क्या मैं मैं कुछ समझा नहीं माता तृतीय महाविद्या इसीलिए आवश्यक थी क्योंकि सृष्टि अभी भी अपूर्ण थी मां की तो प्रत्येक महाविद्या बहुत ही अद्भुत है तृतीय महाविद्या में मां ने कौन सा नया रूप लिया और सृष्टि को क्या प्रदान किया पूर्ण को अपूर्ण बनाने का दायित्व भी ईश्वर पर ही होता है इसलिए बार-बार उन्हें विभिन्न रूप में आना पड़ता है
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